21/03/2026
श्रीमद्भगवद्गीता और विभिन्न पुराणों के अनुसार, भगवान के चरणों की प्राप्ति (मोक्ष या भगवद-भक्ति) के मुख्य रूप से चार मार्ग बताए गए हैं। साधक अपनी प्रकृति के अनुसार इनमें से किसी भी मार्ग को चुन सकता है:
1. भक्ति योग (सर्वाधिक सुगम मार्ग)
कलियुग में भक्ति को सबसे सरल और उत्तम साधन माना गया है। इसमें केवल प्रेम और समर्पण की प्रधानता होती है।
श्रवण और कीर्तन: भगवान की कथाओं को सुनना और उनके नाम का जाप करना।
शरणागति: "तमेव शरणं गच्छ" - पूर्ण रूप से स्वयं को ईश्वर की इच्छा पर छोड़ देना।
निस्वार्थ प्रेम: बिना किसी सांसारिक इच्छा के केवल भगवान को चाहना।
2. निष्काम कर्म योग
अपने नियत कर्तव्यों का पालन करना, लेकिन उनके फल की इच्छा का त्याग करना।
जो भी कार्य करें, उसे ईश्वर को समर्पित कर दें।
सफलता और विफलता में समान भाव (समत्व) रखना ही योग है।
3. ज्ञान योग
विवेक के माध्यम से सत्य और असत्य के अंतर को समझना।
यह जानना कि आत्मा अजर-अमर है और परमात्मा का ही अंश है।
अज्ञान और माया के पर्दे को हटाकर ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का अनुभव करना।
4. ध्यान और साधना
मन को एकाग्र करके अंतर्यामी परमात्मा का चिंतन करना।
नियमित अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना।
हृदय के भीतर स्थित ईश्वर की ज्योति का दर्शन करना।