Sankadik radhe

Sankadik radhe श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर भुजेला

श्रीमद्भगवद्गीता और विभिन्न पुराणों के अनुसार, भगवान के चरणों की प्राप्ति (मोक्ष या भगवद-भक्ति) के मुख्य रूप से चार मार्...
21/03/2026

श्रीमद्भगवद्गीता और विभिन्न पुराणों के अनुसार, भगवान के चरणों की प्राप्ति (मोक्ष या भगवद-भक्ति) के मुख्य रूप से चार मार्ग बताए गए हैं। साधक अपनी प्रकृति के अनुसार इनमें से किसी भी मार्ग को चुन सकता है:
​1. भक्ति योग (सर्वाधिक सुगम मार्ग)
​कलियुग में भक्ति को सबसे सरल और उत्तम साधन माना गया है। इसमें केवल प्रेम और समर्पण की प्रधानता होती है।
​श्रवण और कीर्तन: भगवान की कथाओं को सुनना और उनके नाम का जाप करना।
​शरणागति: "तमेव शरणं गच्छ" - पूर्ण रूप से स्वयं को ईश्वर की इच्छा पर छोड़ देना।
​निस्वार्थ प्रेम: बिना किसी सांसारिक इच्छा के केवल भगवान को चाहना।
​2. निष्काम कर्म योग
​अपने नियत कर्तव्यों का पालन करना, लेकिन उनके फल की इच्छा का त्याग करना।
​जो भी कार्य करें, उसे ईश्वर को समर्पित कर दें।
​सफलता और विफलता में समान भाव (समत्व) रखना ही योग है।
​3. ज्ञान योग
​विवेक के माध्यम से सत्य और असत्य के अंतर को समझना।
​यह जानना कि आत्मा अजर-अमर है और परमात्मा का ही अंश है।
​अज्ञान और माया के पर्दे को हटाकर ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का अनुभव करना।
​4. ध्यान और साधना
​मन को एकाग्र करके अंतर्यामी परमात्मा का चिंतन करना।
​नियमित अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना।
​हृदय के भीतर स्थित ईश्वर की ज्योति का दर्शन करना।

गुरु कृपा जीवन एक यात्रा है और गुरु उस दिशा-सूचक यंत्र  की तरह हैं जो हमें भटकने नहीं देते। जब हम उलझन में होते हैं, तो ...
16/03/2026

गुरु कृपा
जीवन एक यात्रा है और गुरु उस दिशा-सूचक यंत्र की तरह हैं जो हमें भटकने नहीं देते। जब हम उलझन में होते हैं, तो गुरु की कृपा हमें वह दृष्टि देती है जिससे हम सही और गलत का भेद कर पाते हैं।
​अध्यात्म में सबसे बड़ी बाधा 'मैं' यानी अहंकार है। कहा जाता है कि गुरु कृपा ही वह शक्ति है जो साधक के भीतर के अहंकार को धीरे-धीरे पिघला देती है, जिससे परमात्मा के साथ मिलन का मार्ग प्रशस्त होता है।
​जिस प्रकार एक अनुभवी पर्वतारोही कठिन पहाड़ों पर चढ़ने का रास्ता आसान बना देता है, उसी तरह गुरु अपनी साधना और अनुभव से शिष्य के आध्यात्मिक मार्ग की बाधाओं को कम कर देते हैं। उनके आशीर्वाद से असंभव लगने वाले कार्य भी सहज हो जाते हैं। राधे राधे

कलयुग में सबसे सरल साधन प्रभु नाम के जाप​शास्त्रों में कहा गया है:​"कलौ संकीर्त्य केशवम्"अर्थात, कलयुग में भगवान की प्रा...
15/03/2026

कलयुग में सबसे सरल साधन प्रभु नाम के जाप
​शास्त्रों में कहा गया है:
​"कलौ संकीर्त्य केशवम्"
अर्थात, कलयुग में भगवान की प्राप्ति के लिए कठिन तपस्या या यज्ञ के बजाय केवल नाम संकीर्तन या जप ही सबसे सुलभ और प्रभावी मार्ग है। इसके लिए किसी विशेष स्थान, समय या कठिन क्रियाकांड की आवश्यकता नहीं होती; इसे चलते-फिरते, काम करते हुए या सोते-जागते कभी भी किया जा सकता है।

शालिग्राम जी का अभिषेक करते समय जब जल या पंचामृत की धारा उन पर गिरती है, तो वह भक्त के अंतर्मन के विकारों को धोने का प्र...
14/03/2026

शालिग्राम जी का अभिषेक करते समय जब जल या पंचामृत की धारा उन पर गिरती है, तो वह भक्त के अंतर्मन के विकारों को धोने का प्रतीक है। यह क्रिया हमें सिखाती है कि जैसे शालिग्राम जी शीतल जल से प्रसन्न होते हैं, वैसे ही शांत और निर्मल हृदय में ही भगवान का वास होता है।

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28/01/2026

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23/01/2026

वसंत पंचमी

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