16/03/2025
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https://harikatha.com/audios/3915/
*श्रीमन्महाप्रभु का वैशिष्ट्य एवं हम दुःख क्यों भोगते हैं?*
[श्रील भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज ने वृन्दावन [अज्ञात-तिथि] में यह हरिकथा कही थी। नीचे प्रतिलेख के कुछ अंश दिए गए हैं। कृपया सम्पूर्ण प्रतिलेख यहाँ पढ़ें: https://harikatha.com/audios/3915/ ]
..यदि जगत् में प्रेम हो जाये, तो सभी लोग सुखी [हो जायेंगे।] इस प्रेम को श्रीचैतन्य महाप्रभु के अतिरिक्त और कोई भी देने में समर्थ नहीं है। यदि आज के इस युग में चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं का अवलम्बन करके हम अपने चरित्र को सुधार सकें, तो यह आश्वासन (guarantee) के साथ में कहा जा सकता है कि जगत् के सभी जीव सुखी हो सकते हैं।...
..श्रीचैतन्य महाप्रभुजी ने उस नाम में प्रेम की डोरी दे करके सबके गले में पहना दी। पहले जो नाम था, उस नाम से मुक्ति होती थी और-और सब वस्तुएँ, वैभव इत्यादि की प्राप्ति होती थी या साधारण रूप में नारायण की प्राप्ति होती थी, किन्तु कृष्णप्रेम की प्राप्ति नहीं होती थी। चैतन्य महाप्रभु ने विशेष करके नाम में प्रेम की डोरी दे करके इसको गूँथ करके जीव को, सबको पहना दिया।...
..अन्य सब अवतारों में भगवान् ने, कृष्ण ने भी चक्र से सब असुरों का संहार किया और उन्हें मुक्ति दी। किन्तु विशेषता यह है कि कृष्ण ने या राम ने जिन असुरों को चक्र से मारा और उनको मुक्ति [प्रदान] कर दी, जिसको अद्वैतवादी लोग बड़े-बड़े कष्ट से उस परब्रह्म को पाते हैं, उसमें उनका सायुज्य होता है। भगवान् ने तो उन्हें मार करके वह गति दे दी, उनको अनायास ही मुक्ति दे दी, किन्तु चैतन्य महाप्रभुजी ने ऐसी कृपा [की जो पहले नहीं देखी गयी।]...
.. झारिखण्ड के पथ में चैतन्य महाप्रभुजी ने सिंह, भालू, साँप इत्यादि सबको प्रेम दे करके कृतार्थ कर दिया [और वे] सभी एक साथ में चैतन्य महाप्रभुजी के पीछे-पीछे चल रहे थे। किसी अवतार में ऐसा देखा? किसी अवतार में ऐसा हुआ कि ब्राह्मण और चाण्डाल दोनों मिल करके और पाश्चात्य देश के गौ-मांस खानेवाले, शराब पीनेवाले, लौकिक भोगों में प्रमत्त होनेवाले लोग आज चोटी रख करके, तिलक-माला ग्रहण करके, संन्यास इत्यादि ग्रहण करके कृष्णप्रेम में मत्त हो रहे हैं?...
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