17/06/2026
घनन घनन घन घंटा वाजे चामुंडा के द्वार पर
घनन घनन घन घंटा वाजे चामुंडा के द्वार पर�रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर�घनन घनन घन घंटा वाजे...
निर्मल जल की धारा में पहले आकर इश्नान करो�ज्योत जलाकर मन मंदिर में अंबे माँ का ध्यान धरो�वरदानी से मांगों वर तुम दोनों हाथ पसार कर�रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर�घनन घनन घन घंटा वाजे...
शक्ति पीठ यही माँ चलका देव भूमि भी प्यारी है�क्रोध रूप जहां चामुंडा का खप्पर संग कटारी है�दुष्टों की ली बलि जहां पर भागे पापी हारकर�रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर�घनन घनन घन घंटा वाजे...
ब्रह्मा वेद सुनाएं इनको विष्णु शंख वजाते हैं�शंकर डमरू वजा वजा कर माँ की महिमा गाते हैं�जय माता की गूँज रही हैं नारद वीणा तार पर�रुकी जहां पर काल रात्रि चण्ड मुण्ड को मारकर�घनन घनन घन घंटा वाजे...