27/07/2020
जय जय श्री राम
सभी ज्ञानी, भक्तों, धर्मात्माओं और संतों को कोटि कोटि प्रणाम।🙏
जैसा की हम सभी जानते हैं की प्रभु श्री रामजी के मंदिर के शिलान्यास की तारीख ५ अगस्त रक्खी गयी है और इस बात पर बड़ा विवाद भी खड़ा हो गया है।
यहाँ शास्त्रों के धनि और भक्ति भाव में डूबे प्रियजनों में ठन गयी है. क्यों की ज्ञानी कह रहे हैं की उनके पास जितना अर्जित किया गया ज्ञान है उसमें शिलान्यास का महूर्त नहीं है, सूर्य दक्षिणायण हैं, शुभ ग्रह सो रहे हैं, भद्रा लग रही है, इत्यादि। में आपके ज्ञान का आदर करता हूँ और इससे चुनौती देना मेरा काम नहीं है और न ही यह मेरे बस में है। में बस इतना बताना चाहता हूँ , की अगर आप सच में शास्त्रों को जानते हो तोह मूल रूप से उनमें दिए हुए परिहार, उपचार और वह कहाँ लागु होते हैं कहाँ नहीं इसकी जानकारी भी आपको अवश्य होगी।
में यहाँ आपने मत रख रहा हूँ, और बिना कोई पक्षपाथ किये में कुछ बातें सामने रखूँगा, और आशा करूँगा की उसमें से निर्णय पढ़ने वाला खुद ही निकल ले।
शिलान्यास:
यह केवल औपचारिक शब्द हैं, क्यों की यहाँ कोई नया मंदिर नहीं बनने जा रहा है, यहाँ मंदिर का पुनर्निर्माण होने जा रहा है। तोह जो कोई भी अगर यहाँ इस बात में भेद न समझे तोह वह आपने को ज्ञानी की श्रेणी से बहार यही करले। यह कोई नया कार्य नहीं है इसलिए सभी महूर्त को लेकर तर्क फीके बढ़ जाते हैं।
प्रभु श्री रामचन्द्रजी:
पूरा भूमण्डल इनके आधीन हैं, यह मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, यह सत्य हैं, पर हम सभी आपने तार्किक ज्ञान को संतुष्ट करने के लिए प्रभु की और कितनी परीक्षा लेना चाहते हो?
प्रभु के जीवन काल में ११००० साल से भी ज्यादा बार सूर्य उत्तरायण और दक्षिणायन हुए तोह क्या प्रभु ने आधे समाये शुभ कार्य नहीं किये?
भाव:
यहाँ जो मुझे समझ आ रहा है, वह यह है, की अब भक्तों से प्रभु का और उपहास सेहेन नहीं हो रहा है और वे बस प्रभु को उनके उचित स्थान पर देखना चाहते हैं। यह कुछ इस तरह हैं। में केवल एक उद्धरण दे रहा हु, मान लो आपका अपना घर है और अचानक कोई आता है और आपको घर से बहार कर देता है और किसी परिस्तिथि के कारण आप आपने ही घर के बहार रह जाते हो, और फिर आपका तिरस्कार होता है, भोजन नहीं, आपनो से नहीं मिल सकते, दुनिया भर की अदालतों में भटकते हो और फिर कई वर्षों के बाद आपको आपका घर वापस मिल जाता है। आप अभी क्या करोगे? बहार ही रहोगे? महूरत देखोगे तब तक ऐसे ही रहोगे? तर्क देने वाले परिस्तिथि की घंभीरता नहीं समझते हैं। भक्ति भाव को इसलिए ही सभी से श्रेष्ठ कहा गया है क्यों की भक्त प्रभु से आपने आपको ऐसे जोड़ लेते हैं जिसमें की पीड़ा तक स्वयं महसूस कर सकते हैं। मेरा यह मानना है की वह अभी और विलम्भ नहीं चाहते हैं। में आप सभी भक्तको के भाव को प्रणाम करता हु और प्रार्थना करता हु की प्रभु आप सभी को थोड़ा और धैर्य प्रदान करें।
परिहार:
महूरत की तोह फ़िलहाल कोई भी आवश्यकता ही नहीं है क्यों की यह मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है, अगर कुछ नया है तोह वह बस श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट नया है, बाकि सब वही है। इसके अलावा भी जो महूर्त निकला है वह शास्त्रों में बताए हुए परिहार का ही हिसा है। यह अभिजीत महूर्त है, जो दिन का बिलकुल मध्य (सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समाये का मध्य), इस मध्य के २४ मिनट पहले से यह महूर्त शुरू होता है और २४ मिनट बाद तक रहता है। कुल मिला कर ४८ मिनट। अब संतो ने जो निर्णय लिया है वह कुछ ऐसा है, इस मध्य के १६ सेकंड पहले से लेकर १६ सेकंड बाद तक के ३२ सेकंड में औपचारिक शिलान्यास होगा। यह पुरे महूर्त का सभी से उत्तम और शक्तिशाली समय होगा।
इतना ही नहीं, २ दिन पहले पूरी वैदिक विधान से गौरी गणेश, नवग्रह, इत्यादि देवी देवताओ का आवाहन होगा और पूजा अर्चना होगी ताकि कोई भी अमंगल नहीं हो। और यह अनुष्ठान फिर लम्बे समय तक चलता रगेगा।
प्रार्थना :
मेरी विनम्र प्रार्थना है आप सभी विद्वानों, ज्ञानियों, भक्तों से की आपस में बिना बात तर्क में न उलझो इससे किसी का भी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। प्रभु श्रीरामजी ने बहोत धैर्य दिखाया है और अभी भी धीरज की कहीं कमी नहीं है, पर हमको यह याद रखना होगा की हम अगर मालिक को यह कह कर घर में घुसने से रोकदें की अभी नौकर घर में नहीं है आप भीतर नहीं जा सकते तोह यहाँ ज्ञानी केवल मुर्ख ही दिखाई पड़ेगा, प्रभु के मंदिर का पुनर्निर्माण होने दो और फिर सभी मिल कर अच्छा महूरत निकलना उनके ग्रह प्रवेश और राज तिलक का।
प्रभु हम सभी पर अपनी अनुकम्पा, स्नेह, प्रेम बनाये रक्खें 🙏
जय जय श्री राम