21/05/2026
वृंदावन में टटिया स्थान के वर्तमान महाराज श्री राधाबिहारी दास जी प्राकट्योत्सव पर प्रणाम।
टटिया स्थान-निकुंज सुवासित भये, खिलीं प्रेम की कलियाँ ।
देखि मुख-चंद सुधाकर-सम, मिटि गई भव-गलियाँ ॥३॥
गुरुदेव जू सेवत श्री मोहिनी बिहारी जू, रस-मगन नित रहैं ।
नैनन भरि जुगल छवि निरखत, प्रेम-सुधा रस बहैं ॥४॥
करुणा-सागर, दया-निधान, रसिकन के आधार ।
श्री हरिदास प्रभु की रीति बढ़ावत, भव-तरन-उद्धार ॥५॥
श्री यमुना पुलिनन की महिमा, उर माँहि नित धारैं ।
कुँजबिहारी लाल-जुगल-छवि, लोचन भरि निहारैं ॥६॥
जाके चरण-कमल-रज लेतैं, मिटत भव-अंधियारा ।
नाम-प्रेम रस बरसावत नित, करैं जीव उजियारा ॥७॥
आज प्रकट्य-पंचमी महोत्सव, गावत सब मिलि गावैं ।
“कुँजबिहारी श्री हरिदास” की मधुरी धुनि सों, निकुंज-धाम जु गूँजैं ॥८॥
दीन दास अरजै कर जोरी, राखौ चरणन पास ।
जनम-जनम मोहि दीजौ सेवा, गुरुदेव राख्यो अपने ही पास ॥९॥
sukhdham