07/09/2026
Satnam sakhi 🙏
*🕉️!! ॐ श्री सत्नाम साक्षी !! 🕉️*
*7 सितम्बर सोमवार एकादशी पुण्य तिथि महानिर्वाण दिवस पर विशेष*
*आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज की गुरुगद्दी के चतुर्थ पीठाधीश्वर मर्यादामूर्ति सद्गुरु स्वामी हरिदासराम जी महाराज*
*संक्षिप्त जीवन परिचय*
सद्गुरु स्वामी हरिदासराम जी महाराज का जन्म - सिन्धी तारीख - 13 वैशाख - पूर्णिमा - 30 मार्च 1930 (रविवार) के दिन - सिन्ध के 'घुन्डन' गाँव में हुआ था । उनके पिताश्री का नाम 'श्री हीरानंद जी' और माता श्री का नाम 'मोतिलबाई' था ।
स्वामी जी ने नाम दान की दीक्षा *'सतगुरु स्वामी सर्वानन्द जी महाराज'* से प्राप्त की थी ।
स्वामी जी श्री प्रेम प्रकाश मण्डल के *चतुर्थ पीठाधीश्वर* थे । 'महाराज श्री' ने 1992 से 2000 तक (8 वर्ष) प्रेम प्रकाश मण्डल के सेवा कार्यों को निष्ठा पूर्वक संभाला और श्री गुरुदेव की यश कीर्ति को चहुँ ओर फैलाया ।
स्वामी जी ने अनेक ग्रंथों की रचना की । जिसमे मुख्य - श्री अमरापुर दर्शन, नित्य नियम प्रार्थना एवं सतगुरु स्वामी सर्वानन्द जी महाराज का जीवन चरितामृत । इसी प्रकार स्वामी जी ने अनेक ग्रन्थ व भजनों की भी रचना की ।
स्वामी जी की 'गुरु के प्रति' अगाध निष्ठा थी । वे 'महर्षि सतगुरु सर्वानन्द जी महाराज' की खूब तन-मन से सेवा किया करते थे । श्री अमरापुर दरबार में सतगुरु सर्वानन्द जी के कमरे के पास ही एक छोटा सा कमरा बना हुआ था। वहीं निवास किया करते थे ! जहाँ आज उनका *'चित्र प्रर्दशनी स्थल'* बना हुआ है !
स्वामी जी प्रातः ४ बजे से पहले उठ जाया करते थे । फिर 'सद्गुरु सर्वानन्द जी महाराज' की सेवा में दातुन, तोलिया, गर्म पानी आदि आवश्यक वस्तुएं पहले से ही तैयार करके रख देते थे ! सेवा कैसे करनी चाहिए... ? ये इन महापुरुषों से सीखना चाहिए । स्वामी जी सेवा में सदैव तत्पर रहते थे !
स्वामी जी आदर्श व मर्यादा की साक्षात मूर्ति थे । समय की पाबंदी का विशेष ध्यान रखते थे। उनका जीवन सरल व सादा था। वे सादे वस्त्र धारण करते व भोजन भी सादा ही खाते थे !
स्वामी जी सदैव *'आचार्य उपासना'* को विशेष महत्व देते थे ! कहते थे- जैसे एक पेड़ की *'जड' (मूल)* को पानी देने से सारी टहनियाँ हरी-भरी हो जाती है। वैसे ही 'आचार्य श्री' की भक्ति करने से सबकी पूजा हो जातीं हैं। ये ही सबसे बड़ी गुरु भक्ति हैं। अतः *"आचार्य श्री सद्गुरु टेऊँराम जी महाराज"* की ही भक्ति-उपासना सभी को करनी चाहिए ! उनका मंत्र सतनाम साक्षी का ही जाप करना चाहिए !
स्वामी जी आचार्य श्री का महामन्त्र सतनाम साक्षी जपने पर विशेष जोर देते थे। गुरु मंत्र ही