Hindu Sikhs Jains Buddhists Genocide 800 Years by Islamists

Hindu Sikhs Jains Buddhists Genocide 800 Years by Islamists GENOCIDE OF HINDUS 800 YEARS HISTORY

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26/07/2025

प्राकृतिक नियमों की निरंतरता में अल्लाह की प्रासंगिकता पर एक दार्शनिक विमर्श

जब हम किसी दैवीय सत्ता के अस्तित्व को प्राकृतिक व्यवस्था के संदर्भ में परखते हैं, तो एक गहन प्रश्न उभरता है: अल्लाह की अवधारणा से पूर्व भी मानव जन्म ले रहे थे, सूर्योदय-सूर्यास्त का चक्र अपरिवर्तित था, और विश्व के नियम बिना किसी व्यतिक्रम के कार्य कर रहे थे।

यदि अल्लाह(अल्लाह) के आविर्भाव के पश्चात भी इन प्रक्रियाओं में कोई परिवर्तन या विशिष्ट प्रभाव दृष्टिगोचर नहीं हुआ, तो फिर इस दैवीय संकल्पना की आवश्यकता ही क्या रह जाती है?

एक सत्ता जिसके होने या न होने से प्रकृति के नियम, जीवन की उत्पत्ति, या ब्रह्मांड की गतिशीलता पर कोई प्रभाव न पड़े, वह तर्क और अनुभव के धरातल पर एक अनावश्यक अमूर्तना बनकर रह जाती है।

यदि अल्लाह का अस्तित्व वास्तविकता के किसी भी पहलू को न तो परिभाषित करता है, न नियंत्रित—तो फिर वह एक ऐसी धारणा मात्र है जिसका व्यावहारिक एवं दार्शनिक महत्त्व शून्य के समान है।

अतः, यथार्थ की अपरिवर्तनीय निरंतरता के समक्ष अल्लाह की भूमिका गौण और नगण्य ही प्रतीत होती है।

*गजब की भू-राजनीतिक चाल*"धर्म के नाम पर खेला गया एक शातिर जाल — और भारतीय मुसलमान उसकी सबसे बड़ी शिकार प्रजा बन चुके हैं...
25/07/2025

*गजब की भू-राजनीतिक चाल*

"धर्म के नाम पर खेला गया एक शातिर जाल — और भारतीय मुसलमान उसकी सबसे बड़ी शिकार प्रजा बन चुके हैं।"

भारत के मुसलमानों को सदियों से यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि इस्लामिक जगत की बाकी कौमें, विशेषकर अरब देश, उनके अपने हैं—भाई हैं—और हर संघर्ष में उनका साथ देंगे।

लेकिन यह एक भावनात्मक धोखा था, एक गहरी रणनीति थी, जिसे तेल से समृद्ध अरब देशों ने चुपचाप परोसा।

इन देशों ने कभी अपने देश में उग्र मजहबी प्रचार की इजाज़त नहीं दी, लेकिन भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में मदरसे और मस्जिदों के नाम पर अरबों डॉलर बहा दिए।

क्यों?क्या यह इस्लाम की सेवा थी?
नहीं। यह एक भू-राजनीतिक चाल थी — ताकि भारत जैसी शक्ति अपने ही आंतरिक मतभेदों में उलझी रहे।

"दूसरे देश में नफरत का बीज बोओ, ताकि वह कभी खड़ा न हो सके।"

भारत का मुसलमान आज भी यह नहीं समझ पा रहा कि अरब देशों में वह महज़ एक सस्ता मज़दूर है, न कि कोई "इस्लामिक भाई"।

वहीं अरबों के अपने बच्चे यूरोप और अमेरिका में पढ़ते हैं, विज्ञान सीखते हैं, टेक्नोलॉजी में हाथ आजमाते हैं, जबकि भारत का मुसलमान अब भी 'काफ़िर-हलाल-हराम' की बहसों में उलझा बैठा है।

मज़हब के नाम पर आए धन से न शिक्षा सुधरी, न उद्योग पनपे। बल्कि कट्टरता फैली, आत्मघाती मानसिकता उपजी, और पूरी एक पीढ़ी को सोचने-समझने की शक्ति से वंचित कर दिया गया।सोचिए:

जब अरब देश खुद अपने नागरिकों को मदरसों में नहीं भेजते, तो भारत में क्यों इतना ज़ोर लगाया जाता है?

जब वे खुद AI, Quantum Physics, Oil-Tech, और Defense Innovation पर अरबों डॉलर खर्च करते हैं, तो भारत के मुसलमान को क्यों सिर्फ़ तौहीद और जकात के नाम पर उलझा कर रखा जाता है?

इसका उत्तर सीधा है: आपको गुलाम बनाए रखना है। आपकी सोच को सीमित रखना है। ताकि आप कभी भी आर्थिक या बौद्धिक रूप से प्रतिस्पर्धी न बन पाएं।

और सबसे बड़ा धोखा: जब भारतीय मुसलमान खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं, उन्हें वहाँ बराबरी का दर्जा नहीं मिलता।
न वीज़ा का सम्मान, न नागरिकता, न सामाजिक समानता।
वे केवल 'सस्ते, आज्ञाकारी मज़दूर' माने जाते हैं।

अब समय है जागने का।
धर्म से प्रेम रखिए, लेकिन धर्म के नाम पर बिकना बंद करिए।
अपने बच्चों को मदरसे नहीं, विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग और उद्यमिता सिखाइए।

वरना अरबों के हाथ में आप बस एक 'इस्लामिक मोहरा' बनकर रह जाएंगे, जिसका इस्तेमाल वो अपने फायदे के लिए करते रहेंगे, और आप पिछड़ते रहेंगे।

अगर आप किसी परिवार को तबाह करना चाहते हैं, तो उसके एक बच्चे को नशे में धकेल दीजिए।
और अगर किसी राष्ट्र को बर्बाद करना हो, तो उसके भीतर ऐसे बीज बो दीजिए जो उसे अंदर से ही जलाकर राख कर दें।
भारत में ऐसा ही हुआ — मुस्लिम समाज को कुछ बाहरी ताकतों ने यह यकीन दिला दिया कि धर्म ही सब कुछ है, कि मस्जिदों और मदरसों में बैठकर नफ़रत पालना और अपने ही देश की तरक्की को रोकना कोई पवित्र काम है। अरब के पेट्रोडॉलर से पोषित ये फ़र्ज़ी मजहबी अभियान असल में धर्म नहीं, बल्कि भारत जैसे तेज़ी से उभरते देश को नीचे गिराने की एक सुनियोजित साज़िश है।

पर अफ़सोस ये है कि इस साज़िश का सबसे बड़ा शिकार खुद भारत का मुस्लिम युवक बनता है — जिसे अपनी मेहनत, अपनी बुद्धि, अपना भविष्य छोड़कर सिर्फ़ एक झूठी मजहबी पहचान में बाँध दिया गया है।

अपने ही घर को जलाने का जुनून, अपनों के ख़िलाफ़ नफरत — यही वो ज़हर है जो बाहर से दिया गया, और भीतर से पूरे समाज को खोखला कर गया।

समझो, अब भी वक़्त है। धर्म के नाम पर अपनी क़ौम को ग़ुलाम मत बनाओ।
ध्यान दो — जिन्हें तुम अपना समझते हो, वो तुम्हें सिर्फ़ इस्तेमाल कर रहे हैं।

*गजब की भू-राजनीतिक चाल*"धर्म के नाम पर खेला गया एक शातिर जाल — और भारतीय मुसलमान उसकी सबसे बड़ी शिकार प्रजा बन चुके हैं...
25/07/2025

*गजब की भू-राजनीतिक चाल*

"धर्म के नाम पर खेला गया एक शातिर जाल — और भारतीय मुसलमान उसकी सबसे बड़ी शिकार प्रजा बन चुके हैं।"

भारत के मुसलमानों को सदियों से यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि इस्लामिक जगत की बाकी कौमें, विशेषकर अरब देश, उनके अपने हैं—भाई हैं—और हर संघर्ष में उनका साथ देंगे।

लेकिन यह एक भावनात्मक धोखा था, एक गहरी रणनीति थी, जिसे तेल से समृद्ध अरब देशों ने चुपचाप परोसा।

इन देशों ने कभी अपने देश में उग्र मजहबी प्रचार की इजाज़त नहीं दी, लेकिन भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में मदरसे और मस्जिदों के नाम पर अरबों डॉलर बहा दिए।

क्यों?क्या यह इस्लाम की सेवा थी?
नहीं। यह एक भू-राजनीतिक चाल थी — ताकि भारत जैसी शक्ति अपने ही आंतरिक मतभेदों में उलझी रहे।

"दूसरे देश में नफरत का बीज बोओ, ताकि वह कभी खड़ा न हो सके।"

भारत का मुसलमान आज भी यह नहीं समझ पा रहा कि अरब देशों में वह महज़ एक सस्ता मज़दूर है, न कि कोई "इस्लामिक भाई"।

वहीं अरबों के अपने बच्चे यूरोप और अमेरिका में पढ़ते हैं, विज्ञान सीखते हैं, टेक्नोलॉजी में हाथ आजमाते हैं, जबकि भारत का मुसलमान अब भी 'काफ़िर-हलाल-हराम' की बहसों में उलझा बैठा है।

मज़हब के नाम पर आए धन से न शिक्षा सुधरी, न उद्योग पनपे। बल्कि कट्टरता फैली, आत्मघाती मानसिकता उपजी, और पूरी एक पीढ़ी को सोचने-समझने की शक्ति से वंचित कर दिया गया।सोचिए:

जब अरब देश खुद अपने नागरिकों को मदरसों में नहीं भेजते, तो भारत में क्यों इतना ज़ोर लगाया जाता है?

जब वे खुद AI, Quantum Physics, Oil-Tech, और Defense Innovation पर अरबों डॉलर खर्च करते हैं, तो भारत के मुसलमान को क्यों सिर्फ़ तौहीद और जकात के नाम पर उलझा कर रखा जाता है?

इसका उत्तर सीधा है: आपको गुलाम बनाए रखना है। आपकी सोच को सीमित रखना है। ताकि आप कभी भी आर्थिक या बौद्धिक रूप से प्रतिस्पर्धी न बन पाएं।

और सबसे बड़ा धोखा: जब भारतीय मुसलमान खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं, उन्हें वहाँ बराबरी का दर्जा नहीं मिलता।
न वीज़ा का सम्मान, न नागरिकता, न सामाजिक समानता।
वे केवल 'सस्ते, आज्ञाकारी मज़दूर' माने जाते हैं।

अब समय है जागने का।
धर्म से प्रेम रखिए, लेकिन धर्म के नाम पर बिकना बंद करिए।
अपने बच्चों को मदरसे नहीं, विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग और उद्यमिता सिखाइए।

वरना अरबों के हाथ में आप बस एक 'इस्लामिक मोहरा' बनकर रह जाएंगे, जिसका इस्तेमाल वो अपने फायदे के लिए करते रहेंगे, और आप पिछड़ते रहेंगे।

अगर आप किसी परिवार को तबाह करना चाहते हैं, तो उसके एक बच्चे को नशे में धकेल दीजिए।
और अगर किसी राष्ट्र को बर्बाद करना हो, तो उसके भीतर ऐसे बीज बो दीजिए जो उसे अंदर से ही जलाकर राख कर दें।
भारत में ऐसा ही हुआ — मुस्लिम समाज को कुछ बाहरी ताकतों ने यह यकीन दिला दिया कि धर्म ही सब कुछ है, कि मस्जिदों और मदरसों में बैठकर नफ़रत पालना और अपने ही देश की तरक्की को रोकना कोई पवित्र काम है।

अरब के पेट्रोडॉलर से पोषित ये फ़र्ज़ी मजहबी अभियान असल में धर्म नहीं, बल्कि भारत जैसे तेज़ी से उभरते देश को नीचे गिराने की एक सुनियोजित साज़िश है।

पर अफ़सोस ये है कि इस साज़िश का सबसे बड़ा शिकार खुद भारत का मुस्लिम युवक बनता है — जिसे अपनी मेहनत, अपनी बुद्धि, अपना भविष्य छोड़कर सिर्फ़ एक झूठी मजहबी पहचान में बाँध दिया गया है।

अपने ही घर को जलाने का जुनून, अपनों के ख़िलाफ़ नफरत — यही वो ज़हर है जो बाहर से दिया गया, और भीतर से पूरे समाज को खोखला कर गया।

समझो, अब भी वक़्त है। धर्म के नाम पर अपनी क़ौम को ग़ुलाम मत बनाओ।
ध्यान दो — जिन्हें तुम अपना समझते हो, वो तुम्हें सिर्फ़ इस्तेमाल कर रहे हैं।

Atrocities on Sikhs by Mughal Dynasty
25/01/2020

Atrocities on Sikhs by Mughal Dynasty

https://www.google.com/url?sa=t&source=web&rct=j&url=https://www.hindujagruti.org/newstags/atrocities-on-hindus&ved=2ahU...
21/01/2020

https://www.google.com/url?sa=t&source=web&rct=j&url=https://www.hindujagruti.org/newstags/atrocities-on-hindus&ved=2ahUKEwik0MTNwJXnAhUOkhQKHYdhBFoQFjADegQIAhAB&usg=AOvVaw3ZRmdm7ao2AvSD7Q7BGVay

Hindu house ransacked and Kali idols desecrated by jihadi mob in Faridpur (Bangladesh)January 20, 2020News from Bangladesh indicates that in two separate incidents, a house of the Hindu has been attacked and Goddess Kali idol has been broken by Jihadis. Idols of other Hindu gods were also vandalized...

21/01/2020

https://en.m.wikipedia.org/wiki/Martyrdom_in_Sikhism

Martyrdom is a fundamental institution of Sikhism. Sikh festivals are largely focused on the lives of the Sikh gurus and Sikh martyrs. Their martyrdoms are regarded as instructional ideals for Sikhs, and have greatly influenced Sikh culture and practices. The Fifth Guru, Guru Arjan Dev, is generally...

https://en.m.wikipedia.org/wiki/History_of_Sikhism
21/01/2020

https://en.m.wikipedia.org/wiki/History_of_Sikhism

The history of Sikhism started with Guru Nanak Dev Ji. He was the first Guru of the fifteenth century in the Punjab region in the northern part of the Indian subcontinent. The religious practices were formalised by Guru Gobind Singh Ji on 13 April 1699.[1] The latter baptised five persons from diffe...

https://www.rediff.com/news/2005/jan/19kanch.htm
21/01/2020

https://www.rediff.com/news/2005/jan/19kanch.htm

rinagar, January 4, 1990. Aftab, a local Urdu newspaper, publishes a press release issued by Hizb-ul Mujahideen, set up by the Jamaat-e-Islami in 1989 to wage jihad for Jammu and Kashmir's secession from India and accession to Pakistan, asking all Hindus to pack up and leave. Another local paper, Al...

https://en.wikipedia.org/wiki/Exodus_of_Kashmiri_Hindus
21/01/2020

https://en.wikipedia.org/wiki/Exodus_of_Kashmiri_Hindus

The Hindus of the Kashmir Valley, were forced to flee the Kashmir valley as a result of being targeted by JKLF and Islamist insurgents during late 1989 and early 1990.[4][5] Of the approximately 300,000 to 600,000 Hindus living in the Kashmir Valley in 1990 only 2,000–3,000 remain there in 2016.[6...

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