पंडित प्रितेश अत्रे - पितृकर्म कर्ता"

Appeler Itinéraire

पंडित प्रितेश अत्रे - पितृकर्म कर्ता" समस्त देवव पितृकर्म गरुड़पुराण आदि के ?

श्रीमद भागवत कथा गरुड़पुराण समस्त पूजनकार्य उद्यापन आदि व दशा एकादशा आदि म्रत्यु के पश्चात के कर्मो के लिए सम्पर्क करें 7869474702

20/09/2026
21/06/2026

योग दिवस की शुभकामनाएं

22/09/2024

💐*श्राद्ध पक्ष*💐
पितृके प्रति समर्पण आस्था और पितृकृपा प्राप्ति का समय*
पित्रो के ऋण को कुछ कम करने का समय
*पित्रो द्वारा प्राप्त इस शरीर से पित्रो के लिए कुछ करने का समय*
*आए मा नर्मदा के उत्तरतट पर ओम्कारेश्वर तीर्थ क्षेत्र में स्थित बड़वाह में मां नर्मदा के किनारे पित्रो को समर्पित सर्वपितृ अमावस्या पर और पित्रो के लिए तर्पण व त्रिपिंडी श्राद्ध श्राद्ध ,तीर्थ श्राद्ध, पितृ दोष शांति,आदि करे*

*पितृकृपा* और *माँ नर्मदा के आशीर्वाद* से
इस आयोजन का चतुर्थ वर्ष है
जो प्रतिदिन *तर्पण* नही कर पाए विधिवद *पितृधुप*; *ब्राह्मणभोजन* आदि नही करा पाए है
प्रतिदिन का *श्राद्ध* नही कर पाए है या किन्ही भी कारणों से *श्राद्धपक्ष* में पितरों के लिए जो कर्म करना चाहिए
वो नही कर पाए है
तो आए हमारे साथ *सर्वपितृ अमावश्या* पर
इस आयोजन में और तर्पण पिंडदान आदि कर्म को
कम से कम सेवा राशि मे विधिवद पूर्ण करे
*अधिक जानकारी व तर्पणश्राद्ध आदि के लिए सम्पर्क करे* *7869474702*
अमावस्या पर तर्पण के लिए अपना स्थान सुनिश्चित करे
स्थान सीमित यजमानों के लिए ही है शीघ्रता से सम्पर्क करें
*ऑनलाइन पूजन की भी वेवस्ता है सीमित लोगो के लिए*

*पण्डित प्रितेश अत्रे*
*पितृ कर्मकर्ता निमाड़ क्षेत्र*
*7869474702*

27/10/2023

खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण
दिनांक 29/10/23 को चन्द्र ग्रहण रात्रि में है जो कि भारत में भी होगा
ग्रहण की छाया 28 /10/23 रात्री 11 32 मिनिट से होगी
ग्रहण का स्पर्श 29 /10/23रात्री 1 बजकर 05 मि
ग्रहण का मध्य रात्री 1 बजकर 44 मिनिट पर
और मोक्ष रात्री 2 23 मिनिट पर होगा
ग्रहण की छाया की समाप्ति
रात्री 3 56 पर समाप्त होगी

ग्रहण भारत में होने के कारण ग्रहण का सूतक दिन में 4 भेज 5 मिनिट से प्रारंभ होगा
अतः ग्रहण काल मे भगवान के नामका भजन करे

18/09/2023

एक #पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक #फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जाप करने लगा कि..

"मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।"

पंडितजी के पूछने पर उस फकीर ने कहा कि...

जब आपके चढाये जल और भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा.

इस पर पंडितजी बहुत लज्जित हुए।"

यह मनगढंत कहानी सुनाकर एक इंजीनियर मित्र जोर से ठठाकर हँसने लगे और मुझसे बोले कि -

"सब पाखण्ड है जी..!"

शायद मैं कुछ ज्यादा ही असहिष्णु हूँ...

इसीलिए, लोग मुझसे ऐसी बकवास करने से पहले ज्यादा सोच समझकर ही बोलते हैं क्योंकि, पहले मैं सामने वाली की पूरी बात सुन लेता हूँ... उसके जबाब उसे जबाब देता हूँ.

खैर... मैने कुछ कहा नहीं ....

बस, सामने मेज पर से 'कैलकुलेटर' उठाकर एक नंबर डायल किया...
और, अपने कान से लगा लिया.

बात न हो सकी... तो, उस इंजीनियर साहब से शिकायत की.

इस पर वे इंजीनियर साहब भड़क गए.

और, बोले- " ये क्या मज़ाक है...??? 'कैलकुलेटर' में मोबाइल का फंक्शन भला कैसे काम करेगा..???"

तब मैंने कहा.... तुमने सही कहा...
वही तो मैं भी कह रहा हूँ कि.... स्थूल शरीर छोड़ चुके लोगों के लिए बनी व्यवस्था जीवित प्राणियों पर कैसे काम करेगी ???

इस पर इंजीनियर साहब अपनी झेंप मिटाते हुए कहने लगे-
"ये सब पाखण्ड है , अगर ये सच है... तो, इसे सिद्ध करके दिखाइए"

इस पर मैने कहा.... ये सब छोड़िए
और, ये बताइए कि न्युक्लीअर पर न्युट्रान के बम्बारमेण्ट करने से क्या ऊर्जा निकलती है ?

वो बोले - " बिल्कुल ! इट्स कॉल्ड एटॉमिक एनर्जी।"

फिर, मैने उन्हें एक चॉक और पेपरवेट देकर कहा, अब आपके हाथ में बहुत सारे न्युक्लीयर्स भी हैं और न्युट्रांस भी...!

अब आप इसमें से एनर्जी निकाल के दिखाइए...!!

साहब समझ गए और तनिक लजा भी गए एवं बोले-
"जी , एक काम याद आ गया; बाद में बात करते हैं "

कहने का मतलब है कि..... यदि, हम किसी विषय/तथ्य को प्रत्यक्षतः सिद्ध नहीं कर सकते तो इसका अर्थ है कि हमारे पास समुचित ज्ञान, संसाधन वा अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं है ,

इसका मतलब ये कतई नहीं कि वह तथ्य ही गलत है.

क्योंकि, सिद्धांत रूप से तो हवा में तो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों मौजूद है..
फिर , हवा से ही पानी क्यों नहीं बना लेते ???

अब आप हवा से पानी नहीं बना रहे हैं तो... इसका मतलब ये थोड़े ना घोषित कर दोगे कि हवा में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ही नहीं है.

हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म दान आदि आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं.

इसीलिए, व्यर्थ के कुतर्को मे फँसकर अपने धर्म व संस्कार के प्रति कुण्ठा न पालें...!

और हाँ...

जहाँ तक रह गई वैज्ञानिकता की बात तो....

क्या आपने किसी भी दिन पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं...या, किसी को लगाते हुए देखा है?
क्या फिर पीपल या बरगद के बीज मिलते हैं ?
इसका जवाब है नहीं....

ऐसा इसीलिए है क्योंकि... बरगद या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु वह नहीं लगेगी.

इसका कारण यह है कि प्रकृति ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है.

जब कौए इन दोनों वृक्षों के फल को खाते हैं तो उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं.

उसके पश्चात कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं.

और... किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं है कि पीपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन (O2) देता है और वहीं बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है.

साथ ही आप में से बहुत लोगों को यह मालूम ही होगा कि मादा कौआ भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है.

तो, इस नयी पीढ़ी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है...

शायद, इसलिए ऋषि मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी होगी.

जिससे कि कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये......

इसीलिए.... श्राघ्द का तर्पण करना न सिर्फ हमारी आस्था का विषय है बल्कि यह प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है.

साथ ही... जब आप पीपल के पेड़ को देखोगे तो अपने पूर्वज तो याद आएंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं.

अतः.... सनातन धर्म और उसकी परंपराओं पे उंगली उठाने वालों से इतना ही कहना है कि....
जब दुनिया में तुम्हारे ईसा-मूसा-भूसा आदि का नामोनिशान नहीं था...

उस समय भी हमारे ऋषि मुनियों को मालूम था कि धरती गोल है और हमारे सौरमंडल में 9 ग्रह हैं.

साथ ही... हमें ये भी पता था कि किस बीमारी का इलाज क्या है...
कौन सी चीज खाने लायक है और कौन सी नहीं...?

देश की आजादी के बाद 70 वर्षों में इन्हीं बातों को अंधविश्वास और पाखंड साबित करने का काम हुआ है। अब धीरे-धीरे सनातन संस्कृति पुनर्जीवित हो रही है ।
जय सनातन धर्म
🙏 मात श्री नर्मदे हर 🙏

,,,,,,,,,,तर्पण 2,,,,,,,,पिछली पोस्ट को  अवश्य पढ़ेंतर्पण के माध्यम से  देव तर्पण ऋषि तर्पण दिव्य मनुष्य तर्पण तत्पश्चात ...
18/09/2023

,,,,,,,,,,तर्पण 2,,,,,,,,
पिछली पोस्ट को अवश्य पढ़ें
तर्पण के माध्यम से
देव तर्पण ऋषि तर्पण दिव्य मनुष्य तर्पण तत्पश्चात चतुर्दस यम तर्पण इसके पश्चात पिता पितामह पर परपितामह
माता-पितामही परपितामही आदि को जलाअंजलि दी जाती है
*उसके पश्चात द्वितीय गोत्र नाना जी का*
नाना नानी परनाना परनानी आदि

उसके बाद हमारे बंधु बांधव, मामा ,मौसी ,गुरु ,मित्र ,ससुर सखा वह हमारे घर के नौकर को
जलाजलि दी जाती है
क्योंकि यह सभी लोग हमसे प्रेम रखते हैं
हमसे कुछ पाने की इच्छा आस रखते हैं

इसी प्रकार हमारे साथ कुल में सात जन्म में जो हमारे बंधु बांधव यहां वहां है उन्हीं सब को जला अंजलि भीष्म पितामह को जला अंजलि व सूर्य भगवान को अर्घ देकर के प्रतिदिन तर्पण किया जाता है

*शास्त्र के लेख के अनुशार*
कहा गया है कि पितृपक्ष में जिनके सगे सम्बधी द्वारा उनका तर्पण श्राद्ध नही होता तो
वहां से पितृ बिना श्राद्ध जल अन्न के लौटते है
तो पितृ सगे संबधियों का बाध्य हो कर रक्त चूसने लगते है

अतः तर्पण व श्राद्ध प्रतिदिन करना चाहिए आप लोगों से नहीं होता इसीलिए किसी ब्राह्मण से करवाना चाहिए
इसीलिए
मेरे द्वारा विगत कई वर्षों से एक पर्चा आप लोगों को वितरित किया जाता है उस पर आप मुझे आपने पितरों के नाम आदि लिख करके पहुंचा दें
मेरे द्वारा पूर्णिमा तिथि से अमावस्या तिथि तक आप सभी के पितरों के निमित्त नित्य तर्पण होता है
इस बीच किसी भी एक दिवस आप नर्मदा तट पर आकर मुझसे तर्पण करवा सकते हैं
प्रतिदिन तर्पण सेवा राशी 2100 रु

तर्पण करवाने से लाभ
पितरो की कृपा उनके होने का एहसास प्राप्त होता है
पितृ ऋण चुकता रहता है
तरक्की के मार्ग खुलते हैं
पितरों की कृपा बनी रहती है
ग्रह कलेश उपद्रव कम हो जाता है
पित्र दोष में शांति मिलती है
पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है
धन-धान्य में वृद्धि होती है
*अधिक जानकारी व पितृ तर्पण व अमावस्या तिथि पर नर्मदा तट पर त्रिपिंडी श्राद्ध पितृ तर्पण तीर्थ श्राद्ध आदि के लिए आप मुझसे संपर्क करें*

*पंडित प्रितेश अत्रे*
(पित्रकर्म कर्ता निमाड़ क्षेत्र)
*समस्त पित्रकर्मके लिए संपर्क करें 7869474702*

,,,,,,,,तर्पण,,,,,,*श्राद्ध पक्ष में होने वाला विशेष कर्म है तर्पण * *नित्य तर्पण* यूं तो प्रत्येक मनुष्य को पितरों के ल...
18/09/2023

,,,,,,,,तर्पण,,,,,,
*श्राद्ध पक्ष में होने वाला विशेष कर्म है तर्पण *

*नित्य तर्पण*
यूं तो प्रत्येक मनुष्य को पितरों के लिए प्रतिदिन
*तर्पण* करना चाहिए
परंतु समय अभाव में हम लोगो से भी नित्य *तर्पण* नहीं होता
तो आम लोगों की बात ही क्या
लेकिन यह *तर्पण क्या है*
*मेरी दृष्टि में हमारे मनके भावों को श्रद्धा और प्रेम से अर्पण करना ही तर्पण है*

प्रत्येक व्यक्ति से *श्राद्ध पक्ष* में में प्रतिदिन तर्पण नहीं हो पाता
*श्राद्ध पक्ष ही पूरे वर्ष में ऐसा पक्ष है* जहां किसी ना किसी पितृ का आगमन हमारे घर प्रतिदिन होता है!

*और श्राद्ध में दिए गए श्रद्धा से भाव से धूप अन्नदान व तर्पण के जल जव तिल शहद दूध आदी के माध्यम से पितृ भोजन ग्रहण कर हमे आशीर्वाद प्रदान करते है*

*श्राद्ध में तर्पण अवश्य होना चाहिए*
तर्पण का भाव मेरे अनुसार तिलांजलि के माध्यम से हमारे मन के भावों को पितरों को श्रद्धा पूर्वक अर्पण करना ही तर्पण है
*द्रव्य सामग्री आदी का अभाव हो कोई बात नही परन्तु हमारे मन के भाव का अभाव नही होना चाहिए*

*इसलिए विगत कई वर्षों से 16 दिनों के तर्पण का यह कार्य मेरे द्वारा किया जाता रहा है*

आगे की जानकारी अगली पोस्ट में पढ़े

अधिक जानकारी व तर्पण अमावश्या पर तीर्थ श्राद्ध के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध करवाने के लिए संपर्क करे
पण्डित प्रीतम अत्रे
7869474702
💐💐💐💐💐💐💐

Adresse

Omkareswar
Democratic Republic Of The
450554

Téléphone

+917869474702

Site Web

Notifications

Soyez le premier à savoir et laissez-nous vous envoyer un courriel lorsque पंडित प्रितेश अत्रे - पितृकर्म कर्ता" publie des nouvelles et des promotions. Votre adresse e-mail ne sera pas utilisée à d'autres fins, et vous pouvez vous désabonner à tout moment.

Raccourcis

Partager