01/05/2026
"न हि वेरेन वेरानि, सम्मन्तीध कुदाचनं।
अवेरेन च सम्मन्ति, एस धम्मो सनन्तनो॥"
महात्मा बुद्ध यहाँ स्पष्ट करते हैं कि घृणा को केवल करुणा और प्रेम से ही जीता जा सकता है। उनके अनुसार, सत्य, अहिंसा और प्रेम का मार्ग ही वास्तविक 'सनातन' मार्ग है जो आदि काल से चला आ रहा है और अनंत काल तक रहेगा।