Global Ravidassia Welfare Foundation Europe

Global Ravidassia Welfare Foundation Europe GLOBAL RAVIDASSIA ORGANIZATION for the WELFARE of Ravidassias in India
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GLOBAL RAVIDASSIA ORGANIZATION for the WELFARE of Ravidassias in India (GROW) as well as in the World.

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01/05/2026

🔥 ਜਲਦੀ ਖੁਲ੍ਹ ਰਿਹਾ ਹੈ 🔥

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ਹਵੇਲੀ ਮੁੜ ਆ ਗਈ ਹੈ – ਤਿਆਰ ਰਹੋ ਇੱਕ ਨਵੇਂ

22/02/2026

✍️ **भारत में रविदासिया पुत्र लाया अमेरिकन बहू – सामाजिक समरसता और वैश्विक एकता का प्रतीक**

वैश्वीकरण के इस युग में जब दुनिया सीमाओं से परे जाकर एक परिवार के रूप में जुड़ रही है, तब समाज के लिए ऐसे उदाहरण प्रेरणास्रोत बनते हैं, जो सांस्कृतिक समन्वय और मानवता के संदेश को मजबूत करते हैं। इसी कड़ी में **ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप के अंतरराष्ट्रीय चेयरमैन माननीय केशव कुमार ढांडा जी** के नेतृत्व में समाज निरंतर प्रगति और वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर हो रहा है।

हाल ही में एक प्रेरणादायक घटना सामने आई, जहां एक रविदासिया परिवार के पुत्र ने विदेश में रहकर भारतीय संस्कारों और संत गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं को अपनाते हुए अमेरिकी जीवनसाथी को अपने परिवार और संस्कृति से जोड़ने का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। जब यह अमेरिकन बहू भारत की धरती पर पहुंची, तो उसने भारतीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और गुरु रविदास महाराज जी के उपदेशों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की। यह दृश्य न केवल परिवार के लिए गर्व का विषय बना बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया।

संत गुरु रविदास महाराज जी ने सदैव मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध विचार **"मन चंगा तो कठौती में गंगा"** आज भी विश्वभर में मानवता को जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए विभिन्न देशों के लोग भारतीय संस्कृति और रविदासिया विचारधारा से प्रभावित हो रहे हैं।

माननीय केशव कुमार ढांडा जी ने इस अवसर पर कहा कि आज का समय सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक भाईचारे का समय है। जब विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोग एक परिवार बनते हैं, तो यह संत गुरु रविदास महाराज जी की उस सोच को साकार करता है जिसमें पूरी मानवता को एक समान माना गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप का उद्देश्य विश्वभर में रविदासिया समाज को एकजुट करना और संत गुरु रविदास महाराज जी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।

अमेरिकन बहू द्वारा भारतीय संस्कृति और रविदासिया परंपराओं को अपनाना यह दर्शाता है कि गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाएं केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे विश्व को मानवता, समानता और प्रेम का मार्ग दिखा रही हैं। यह घटना समाज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए विश्व स्तर पर नई पहचान बना सकते हैं।

यह सामाजिक समरसता और वैश्विक एकता का प्रतीक हमें यह सिखाता है कि जब संस्कृतियां मिलती हैं तो मानवता और मजबूत होती है। संत गुरु रविदास महाराज जी का संदेश आज भी विश्व को जोड़ने का कार्य कर रहा है और आने वाली पीढ़ियों को समानता, प्रेम और भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

**जय गुरुदेव
धन गुरुदेव जी**

✍️ **भारत में रविदासिया पुत्र लाया अमेरिकन बहू – सामाजिक समरसता और वैश्विक एकता का प्रतीक**वैश्वीकरण के इस युग में जब दु...
22/02/2026

✍️ **भारत में रविदासिया पुत्र लाया अमेरिकन बहू – सामाजिक समरसता और वैश्विक एकता का प्रतीक**

वैश्वीकरण के इस युग में जब दुनिया सीमाओं से परे जाकर एक परिवार के रूप में जुड़ रही है, तब समाज के लिए ऐसे उदाहरण प्रेरणास्रोत बनते हैं, जो सांस्कृतिक समन्वय और मानवता के संदेश को मजबूत करते हैं। इसी कड़ी में **ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप के अंतरराष्ट्रीय चेयरमैन माननीय केशव कुमार ढांडा जी** के नेतृत्व में समाज निरंतर प्रगति और वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर हो रहा है।

हाल ही में एक प्रेरणादायक घटना सामने आई, जहां एक रविदासिया परिवार के पुत्र ने विदेश में रहकर भारतीय संस्कारों और संत गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं को अपनाते हुए अमेरिकी जीवनसाथी को अपने परिवार और संस्कृति से जोड़ने का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। जब यह अमेरिकन बहू भारत की धरती पर पहुंची, तो उसने भारतीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और गुरु रविदास महाराज जी के उपदेशों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की। यह दृश्य न केवल परिवार के लिए गर्व का विषय बना बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया।

संत गुरु रविदास महाराज जी ने सदैव मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध विचार **"मन चंगा तो कठौती में गंगा"** आज भी विश्वभर में मानवता को जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए विभिन्न देशों के लोग भारतीय संस्कृति और रविदासिया विचारधारा से प्रभावित हो रहे हैं।

माननीय केशव कुमार ढांडा जी ने इस अवसर पर कहा कि आज का समय सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक भाईचारे का समय है। जब विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोग एक परिवार बनते हैं, तो यह संत गुरु रविदास महाराज जी की उस सोच को साकार करता है जिसमें पूरी मानवता को एक समान माना गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप का उद्देश्य विश्वभर में रविदासिया समाज को एकजुट करना और संत गुरु रविदास महाराज जी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।

अमेरिकन बहू द्वारा भारतीय संस्कृति और रविदासिया परंपराओं को अपनाना यह दर्शाता है कि गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाएं केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे विश्व को मानवता, समानता और प्रेम का मार्ग दिखा रही हैं। यह घटना समाज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए विश्व स्तर पर नई पहचान बना सकते हैं।

यह सामाजिक समरसता और वैश्विक एकता का प्रतीक हमें यह सिखाता है कि जब संस्कृतियां मिलती हैं तो मानवता और मजबूत होती है। संत गुरु रविदास महाराज जी का संदेश आज भी विश्व को जोड़ने का कार्य कर रहा है और आने वाली पीढ़ियों को समानता, प्रेम और भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

**जय गुरुदेव
धन गुरुदेव जी**

✍️ **संत गुरदीप गिरी महाराज जी के जन्मदिवस पर श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक जागरूकता का भव्य संदेश**सिकंदरपुर, जम्मू एवं कश...
08/02/2026

✍️ **संत गुरदीप गिरी महाराज जी के जन्मदिवस पर श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक जागरूकता का भव्य संदेश**

सिकंदरपुर, जम्मू एवं कश्मीर की पावन धरती पर परम पूज्य **संत गुरदीप गिरी महाराज जी** के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर एक भव्य और आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर **माननीय केशव कुमार ढांडा जी**, अंतराष्ट्रीय चेयरमैन, *ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप* विशेष रूप से उपस्थित हुए और अपनी ओजस्वी व प्रेरणादायक वाणी से संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में **NSDC (नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन)** सहित विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में शिक्षा, कौशल विकास, आध्यात्मिकता और सामाजिक उत्थान का संदेश देना रहा।

अपने संबोधन में माननीय केशव कुमार ढांडा जी ने कहा कि संत गुरदीप गिरी महाराज जी ने सदैव मानवता, समानता और सेवा का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि संत महापुरुष समाज के लिए प्रकाश स्तंभ होते हैं, जिनके बताए मार्ग पर चलकर समाज प्रगति और आत्मसम्मान की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि आज के युग में शिक्षा और कौशल विकास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है और NSDC जैसी संस्थाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

ढांडा जी ने अपने संबोधन में संत गुरदीप गिरी महाराज जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए समाज को आपसी भाईचारे, एकता और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप पूरे विश्व में सतगुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं को फैलाने और समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने समाज के युवाओं को संगठित होकर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान संगत ने संत गुरदीप गिरी महाराज जी के जीवन और शिक्षाओं को याद करते हुए भक्ति, श्रद्धा और सेवा भावना का प्रदर्शन किया। धार्मिक कीर्तन, सत्संग और सामाजिक संदेशों के माध्यम से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया।

अंत में माननीय केशव कुमार ढांडा जी ने संत गुरदीप गिरी महाराज जी के चरणों में नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया और समाज के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

**जय गुरुदेव
धन गुरुदेव जी**

Global Ravidassia welfare Foundation Europe REG.......india  Tame Punjab
20/01/2026

Global Ravidassia welfare Foundation Europe REG.......india Tame Punjab

16/01/2026

✊ न्याय का उद्घोष: बांग्लादेश में रविदासिया समाज पर अत्याचार के विरुद्ध UNO के समक्ष ऐतिहासिक प्रदर्शन

मानवाधिकार, सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु आज अंतरराष्ट्रीय मंच संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) पर एक बुलंद और जागरूक आवाज़ गूँजी। बांग्लादेश में रविदासिया समाज के विरुद्ध हो रहे उत्पीड़न और हिंसा के खिलाफ ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप के तत्वावधान में एक शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रभावशाली प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक पहल का नेतृत्व संगठन के अंतर्राष्ट्रीय चेयरमैन केशव कुमार ढांडा ने किया।

कठोर ठंड और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में समाजसेवी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक इस आंदोलन में सहभागी बने। हाथों में तख्तियाँ और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने “मानवता की रक्षा करो”, “अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दो”, “न्याय ही सच्चा धर्म है” जैसे नारों के माध्यम से विश्व समुदाय का ध्यान इस गंभीर मानवीय संकट की ओर आकर्षित किया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि किसी भी समुदाय पर होने वाला अन्याय केवल उस समाज का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता का अपमान है। रविदासिया परंपरा सदैव समानता, प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश देती आई है। सतगुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाएँ हमें यह प्रेरणा देती हैं कि मनुष्य की असली पहचान उसके कर्म, चरित्र और मानवता से होती है, न कि जाति, वर्ग या संप्रदाय से।

प्रदर्शन के माध्यम से UNO से यह मांग की गई कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जाँच कराई जाए तथा पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय मिले। साथ ही वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार संरक्षण की निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की भी अपील की गई।

यह आंदोलन केवल एक संगठन की आवाज़ नहीं, बल्कि न्याय, मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों की सामूहिक पुकार है। यह संदेश स्पष्ट है कि अन्याय के विरुद्ध चुप रहना अपराध है और सत्य के पक्ष में खड़ा होना प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। ऐसे प्रयास समाज में चेतना जगाते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक न्यायपूर्ण भविष्य की नींव रखते हैं। 🌍✊

📞 संपर्क: +4369912101968
केशव कुमार ढांडा
अंतर्राष्ट्रीय चेयरमैन
ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन यूरोप

14/01/2026

**उत्पल वंश और चमार वंश : दबाए गए इतिहास की पुनर्पहचान**

भारतीय इतिहास का अधिकांश भाग शासक वर्गों द्वारा लिखा गया, जिसमें **श्रमजीवी, कारीगर और चर्मकार समुदायों** की भूमिका को या तो छुपाया गया या विकृत कर दिया गया। कश्मीर का **उत्पल वंश** भी इसी ब्राह्मणवादी इतिहास लेखन का शिकार रहा है।

**उत्पल वंश : केवल राजवंश नहीं, श्रम-संस्कृति का प्रतिनिधि**

उत्पल वंश के संस्थापक **राजा अवंतीवर्मन** का शासन (9वीं शताब्दी) कृषि, सिंचाई और लोक-कल्याण पर आधारित था।
यह मॉडल उसी सामाजिक दृष्टि से मेल खाता है, जिसे हम **चमार/रविदासिया परंपरा** में देखते हैं—

* भूमि सुधार
* श्रम का सम्मान
* उत्पादन आधारित समाज
* पाखंड-विरोधी चेतना

ब्राह्मणवादी इतिहासकारों ने उत्पल वंश को “क्षत्रिय” कहकर उसकी **मूल श्रम-संस्कृति** को ढक दिया, जबकि वास्तविकता यह है कि यह वंश **उत्पादन से जुड़े समुदायों** के सहयोग और नेतृत्व पर खड़ा था।

**चमार वंश और उत्पल वंश : वैचारिक और सामाजिक संबंध**

चमार समुदाय केवल “चर्मकार” नहीं, बल्कि—

* कृषि व्यवस्था का अभिन्न अंग
* पशुपालन, चमड़ा, औजार और सैन्य रसद का आधार
* नगरों और राज्यों की आर्थिक रीढ़

कश्मीर जैसे क्षेत्र में, जहाँ सिंचाई, कृषि और पशुपालन एक साथ चलते थे, वहाँ **चमार/श्रमजीवी समुदायों के बिना कोई राज्य चल ही नहीं सकता था**।

👉 यही कारण है कि **उत्पल वंश की शक्ति का वास्तविक आधार वही समुदाय थे**, जिन्हें बाद में इतिहास से मिटा दिया गया।

**सतगुरू रविदास की विचारधारा और उत्पल वंश**

सतगुरू रविदास की “बेगमपुरा” की कल्पना—

* कर-मुक्त समाज
* श्रम की गरिमा
* जाति-विहीन व्यवस्था

अवंतीवर्मन के शासन मॉडल से वैचारिक रूप से जुड़ती है।
यह कोई संयोग नहीं, बल्कि **श्रम-संस्कृति की निरंतर परंपरा** है।

**केशव कुमार ढांडा : दबे हुए इतिहास की आधुनिक आवाज**

आज जब **केशव कुमार ढांडा**,
**अंतर्राष्ट्रीय चेयरमैन – ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (यूरोप)**
उत्पल वंश, राजा अवंतीवर्मन और बहुजन इतिहास को सामने लाने का कार्य कर रहे हैं, तो यह केवल इतिहास लेखन नहीं, बल्कि—

* **सांस्कृतिक पुनःदावा (Cultural Reclaiming)**
* **चमार/रविदासिया अस्मिता का पुनर्निर्माण**
* **ब्राह्मणवादी इतिहास का वैचारिक प्रतिरोध**

है।

**राजनीतिक निष्कर्ष**

> “जिस इतिहास में चमार नहीं,
> वह इतिहास अधूरा है।”

उत्पल वंश को चमार वंश से जोड़ना कोई मिथक गढ़ना नहीं, बल्कि **छुपाए गए श्रम–इतिहास को वापस लाना** है।
यह वही कार्य है जिसे आज **ग्लोबल रविदासिया वैलफेयर ऑर्गेनाइजेशन – यूरोप**
के नेतृत्व में **केशव कुमार ढांडा** आगे बढ़ा रहे हैं।

**समापन**

उत्पल वंश को यदि सही अर्थों में समझना है, तो उसे—

* केवल राजाओं के नाम से नहीं
* बल्कि **चमार–श्रमजीवी समाज की भूमिका** से पढ़ना होगा

यही **बहुजन इतिहास की सच्ची शुरुआत** है।

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10/01/2026

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