21/06/2026
ओ३म्
सादर सप्रेम नमस्ते जी
Arya Pratinidhi Sabha of Queensland Inc members held their Hawan Yajna Satsang program at Queensland Vedic Cultural Centre today Sunday 21.06.2026.
We express our deep gratitude, appreciation to everyone who contributed in any way and participated in the Samaj Satsang program.
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। योग स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक जीवन का आधार है। आइए, प्रतिदिन योग अपनाएँ और समाज को भी इसके प्रति जागरूक बनाने का संकल्प लें।
योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ, संतुलित एवं ऊर्जावान बनाता है।
आइए, हम सभी योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाकर स्वस्थ एवं सुखी जीवन की ओर अग्रसर हों।योग भारतीय ऋषियों द्वारा विश्व को दिया गया वह अमूल्य उपहार है, जो तन और मन के संतुलन के साथ आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
“करें योग, रहें निरोग”
महर्षि पतंजलि जी द्वारा वर्णित अष्टाङ्ग योग के आठ अङ्ग ब्रह्मरूपी सर्वोच्च शिखर पर चढ़ने के लिए आठ सीढ़ियाँ हैं। उनका मूल भी वेद ही है। उनके नाम हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि
१. यम (नैतिक संयम): यह सामाजिक अनुशासन है। इसके अंतर्गत ५ नियम आते हैं - अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (आवश्यकता से अधिक संचय न करना I
२. नियम (वैयक्तिक आचरण): यह व्यक्तिगत स्वच्छता और अनुशासन है। इसके ५ भाग हैं - शौच (पवित्रता), संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्राणिधान (ईश्वर को समर्पित होना)I
३. आसन (शारीरिक मुद्रा): स्थिर और सुखपूर्वक बैठने की शारीरिक मुद्रा, जिससे ध्यान में आसानी हो और शरीर स्वस्थ रहे I
४. प्राणायाम (श्वास नियंत्रण): श्वास और प्रश्वास (सांस लेने और छोड़ने) की गति को नियंत्रित करना, जिससे मन और प्राण स्थिर होते है I
५. प्रत्याहार (इंद्रिय निग्रह): बाहरी विषयों और विकारों से अपनी इंद्रियों को हटाकर मन में एकाग्र करना I
६. धारणा (एकाग्रता): मन को किसी एक निश्चित वस्तु, नासिका के अग्रभाग या ईश्वर पर टिकाए रखना I
७. ध्यान (गहन चिंतन): उसी एक बिंदु या विचार पर मन का निरंतर, बिना किसी रुकावट के प्रवाह I
८. समाधि (परम अवस्था): यह योग की सर्वोच्च अवस्था है, जिसमें साधक का चित्त पूरी तरह से ध्येय (ईश्वर) में लीन हो जाता है और आत्मा को परमात्मा का साक्षात्कार होता है I
आइए हम सब योग के सभी पहलुओं /अङ्ग को व्यवहार में लाने का भरसक प्रयास करें जी।
बहुत बहुत धन्यवाद जी
ईश्वर की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे I