07/01/2024
*हमारे बचपन में कपड़े तीन टाइप के*
*ही होते थे •••*
*स्कूल का ••• घर का ••• और किसी*
*खास मौके का •••*
*अब तो ••• कैज़ुअल, फॉर्मल, नॉर्मल,*
*स्लीप वियर, स्पोर्ट वियर, पार्टी वियर,*
*स्विमिंग, जोगिंग, संगीत ड्रेस,*
*फलाना - ढिमका •••*
*जिंदगी आसान बनाने चले थे ••• पर*
*वह कपड़ों की तरह कॉम्प्लिकेटेड हो*
*गयी है •••🤔*
*बचपन में पैसा जरूर कम था*
*पर साला उस बचपन में दम था"*
*"पास में महंगे से मंहगा मोबाईल है*
*पर बचपन वाली गायब वो स्माईल है"**
*"न गैलेक्सी, न वाडीलाल, न नैचुरल था,*
*पर घर पर जमीं आईसक्रीम का मजा ही कुछ ओर था"*
*अपनी अपनी बाईक और कारों में घूम रहें हैं हम*
*पर किराये की उस साईकिल का मजा ही कुछ और था*
*"बचपन में पैसा जरूर कम था*
*पर यारो उस बचपन में दम था*
*कभी हम भी.. बहुत अमीर हुआ करते थे* *हमारे भी जहाज.. चला करते थे।*
*हवा में.. भी।*
*पानी में.. भी।*
*दो दुर्घटनाएं हुई।*
*सब कुछ.. ख़त्म हो गया।*
*पहली दुर्घटना*
*जब क्लास में.. हवाई जहाज उड़ाया।*
*टीचर के सिर से.. टकराया।*
*स्कूल से.. निकलने की नौबत आ गई।*
*बहुत फजीहत हुई।*
*कसम दिलाई गई।*
*औऱ जहाज बनाना और.. उडाना सब छूट गया।*
*दूसरी दुर्घटना*
*बारिश के मौसम में, मां ने.. अठन्नी दी।*
*चाय के लिए.. दूध लाना था।कोई मेहमान आया था।*
*हमने अठन्नी.. गली की नाली में तैरते.. अपने जहाज में.. बिठा दी।*
*तैरते जहाज के साथ.. हम शान से.. चल रहे थे।*
*ठसक के साथ।*
*खुशी खुशी।*
*अचानक..*
*तेज बहाब आया।*
*और..*
*जहाज.. डूब गया।*
*साथ में.. अठन्नी भी डूब गई।*
*ढूंढे से ना मिली।*
*मेहमान बिना चाय पीये चले गये।*
*फिर..*
*जमकर.. ठुकाई हुई।*
*घंटे भर.. मुर्गा बनाया गया।*
*औऱ हमारा.. पानी में जहाज तैराना भी.. बंद हो गया।*
*आज जब.. प्लेन औऱ क्रूज के सफर की बातें चलती हैं , तो.. उन दिनों की याद दिलाती हैं।*
*वो भी क्या जमाना था !*
*और..*
*आज के जमाने में..*
*मेरे बच्चों ने...*
*पंद्रह हजार का मोबाईल गुमाया तो..*
*मां बोली ~ कोई बात नहीं ! पापा..*
*दूसरा दिला देंगे।*
*हमें अठन्नी पर.. मिली सजा याद आ गई।*
*फिर भी आलम यह है कि.. आज भी.. हमारे सर.. मां-बाप के चरणों में.. श्रद्धा से झुकते हैं।*
*औऱ हमारे बच्चे.. 'यार पापा ! यार मम्मी !*
*कहकर.. बात करते हैं।*
*हम प्रगतिशील से.. प्रगतिवान.. हो गये हैं।*
*बचपन मे पैसा जरूर कम था*
*पर साला उस बचपन में दम था''*