09/09/2024
*मीलाद_किसको_मनाना_चाहिए*
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*मीलाद उस मज़दूर को मनाना चाहिए*
"जिसे उसका हक़ दिलाने के लिए प्यारे आक़ा व मौला ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:
"मज़दूर की मज़दूरी पसीना सूखने से पहले दे दो-"
(سنن ابن ماجہ، کتاب الرھون، جلد ۳، صفحہ ۱۶۲، حدیث ۲۴۴۳)
*मीलाद उस गरीब को मनाना चाहिए*
जिसे भेड़ बकरियों की तरह बेचा जाता था
ये तो आक़ा ए दो जहां ﷺ ही हैं जो इन बेकसों का सहारा बने और इरशाद फ़रमाया:
मेरी उम्मत के फुक़रा मालदार लोगों से पांच सौ साल पहले जन्नत में दाखिल हो जाएंगे
(جامع الترمذی، ابواب الزھد، صفحہ ۱۸۸۸، حدیث ۲۳۵۱)
*मीलाद उस यतीम और बेवा को मनाना चाहिए*
"जिनकी जानो माल की लोगों के नज़दीक कोई हुरमत ना थी-"
ये तो शहंशाहे मदीना ﷺ ही हैं जिन्होंने इरशाद फ़रमाया:
"जिसने किसी यतीम या बेवा की किफालत की अल्लाह उसे क़यामत के दिन अपने अर्श के साये में जगह अता फरमाएगा-"
*मीलाद उन बहनों,खालाओं,फूफियों,नानियों और दादियों को मनाना चाहिए*
जिनकी फज़ीलत में नबी ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: जिसने दो बेटियों या दो बहनों या दो खालाओं या दो फूफियों या नानी और दादी की किफालत की तो वो और मैं जन्नत में यूं होंगे फिर अपनी शहादतऔर उसकी साथ वाली उंगली को मिलाया
*मीलाद उस शौहर को मनाना चाहिए* जिसका मक़ामो मर्तबा उसकी बीवी को तालीम करते हुए महबूबे रब्बे अकबर ﷺ ने फ़रमाया:
"अगर मैं किसी को किसी के लिए सज्दे का हुक्म देता तो औरत को हुक्म देता कि वो अपने खाविंद को सज्दा करे-"
(سنن ابن ماجہ، کتاب النکاح، جلد ۴، صفحہ ۴۱۱، حدیث ۱۸۵۲)
*मीलाद उस बीवी को मनाना चाहिए*
"जिसे उसका शौहर च्यूंटी से भी कमतर समझता था-
ये तो सैय्यिदुल महबूबीनﷺ ही हैं जिन्होंने फ़रमाया:
"तुम में सबसे बेहतर वो है जो अपनी बीवी के हक़ में बेहतर हो-"
(جامع الترمذی، کتاب الرضاع، صفحہ ۱۷۶۵، حدیث ۱۱۶۲)
*मीलाद उस बेटी को मनाना चाहिए*
जिसे पैदा होते ही ज़िंदा दफन कर दिया जाता था
ये तो नबी ए करीम ﷺ ही हैं जिन्होंने फरमाया: जिसकी एक बच्ची हो और वो उसे ज़िंदा दफन ना करे, और ना ही उसे हक़ीर जाने, और ना अपने बेटे को उस पर तरजीह दे तो अल्लाह عزوجل उसे जन्नत में दाखिल फरमाएगा
*मीलाद उस बाप को मनाना चाहिए*
जिसको उसके बेटे डंडों से पीटते थे
ये तो हुज़ूर जाने आलम ﷺ ही हैं जिन्होंने इरशाद फ़रमाया: वालिद की रज़ा में अल्लाह की रज़ा है और अल्लाह عزوجل की नाराज़गी वालिद की नाराज़गी में है
(جامع الترمذی، کتا ب البر والصلۃ، جلد ۳، صفحہ ۳۶۰، حدیث ۱۹۰۷)
*मीलाद उस मां को मनाना चाहिए*
जिसका अपना बेटा उसके गले में रस्सी डालकर उसको बेच आता था-
ये तो रहमातुल्लिल आलमीनﷺ ही हैं जिन्होंने फरमा दिया: मां की खिदमत को अपने ऊपर लाज़िम कर लो क्यूंकि जन्नत उसके क़दमों के नीचे है
(سنن النسائی، کتاب الجھاد، جلد ۶، صفحہ ۱۱، حدیث ۳۱۰۴)