19/03/2025
19March ,2025 तृतीय दिवस के प्रातःकालीन आनन्दमय तेजोमय सौन्दर्य की पराकाष्ठा:
जगन्नियन्ता ,सर्वतंत्र स्वतन्त्र प्रभु श्रीरंगनाथ अपने सर्वाभीष्ट,कैन्कर्य परायण पार्षद, शरणागति समाश्रित विभूति श्रीगरुड़ वाहन पर अधिष्ठित होकर भागवत वृन्द के आनन्द की अकल्पनीय वृद्धि करते हुए ईश्वरीय सत्ता का ऐश्वर्य प्रसारित करते अपने गन्तव्य उद्यान यात्रा की ओर अग्रसर हो रहे हैं। प्रातःकाल मन्दिर के अन्तर्प्राङ्गण से 6बजे यात्रा प्रारम्भ होकर मन्दिर के मुख्य द्वार से निकल कर , एक घन्टे के विश्राम के बाद 7 बजे उद्यान की तरफ प्रस्थान कर रही है। प्रायः दक्षिण के सभी श्री वैष्णव मन्दिरों में इस तरह का विश्राम दिया जाता है। कथा ,एक अत्यन्त भक्ति परायण भगवद्भक्त श्री दोड्डाचार्य के जीवन से संलग्न है, प्रतिवर्ष वे अपने गांव शौलिगंर से काञ्चीपुरं के श्री वरदराज भगवान के ब्रह्मोत्सव में गरुड़ सेवा के दिन दर्शन करने जाते थे, धीरे धीरे वृद्धावस्था में जब दर्शन हेतु जाना कष्टमय हो गया तब अपने गांव के सरोवर में स्नान करते हुए अश्रु पूरित नयनों से अपनी दैन्य दशा तथा साक्षात् दर्शन की विवशता से अत्यन्त दुःखी होकर प्रभु श्री गरुड़वाहनाधिष्ठित वरदराज से अकिञ्चन होकर अपने स्थल पर ही साक्षात् दर्शन की प्रार्थना की। कहा जाता है कि भक्त दोड्डाचार्य की असीम आर्त भक्ति से विचलित होकर भक्तप्रिय भगवान कुछ क्षण के लिये काञ्चीपुरं के इस उत्सव के दिन अन्तर्ध्यान हो गये ,भक्त को साक्षात् दर्शन देने के लिये। इस कथा को मूर्तिमन्त करने के लिये आज भी इस उत्सव के दिन सवारी में कुछ समय तक पर्दा डालकर गरुड़वाहनाधिष्ठित वरदराज भगवान को तिरोहित किया जाता है, परम्परा की इस भावमयी कथा को दाक्षिणात्य श्री वैष्णव मन्दिरों में गरुड़ वाहन के दिन स्मरण किया जाता है, आज श्री रंगमन्दिर में भी सवारी को एक घन्टे का विश्राम दिया गया जो गत 173 वर्षों से चला आ रहा है।
Regarding Garuda the name "Garutman" is mentioned in Rigveda, who is depicted as celestial Deva with wings. Garuda is generally described as the king of birds, a protector with power to swiftly move anywhere. Watchful and enemy of serpents. He is considered as a giant bird with open wings. In Yajurveda texts he is mentioned as the personification of courage.
He is a metaphor in Vedic literature for Rik, ( rhythms), Sam(sounds), yajan and Atman ( self). Lord Krishna ,Himself declares Garuda" as His exalted form in Vibhuti yoga of Bhagvadgita. " वैनतेयश्च पक्षीणाम्"!,
One of the popular story of Garuda describes his stealing the divine nectar of immortality, "Amrit" from heaven to release his mother "Vinata" from his wicked step mother "Kadru". Hailing him in this verse the poet wishes good for "Rama."
" यन्मंगलं सुपर्णस्य विनताऽकल्पयत् पुरा , अमृतं प्रार्थ्यमानस्य तत् ते भवतु मंगलम्।"
Now Vishnu has noticed his honesty in that, he had not once touched the nectar that he was carrying so long, therefore He asked him to become His vehicle to which Garuda agreed ,but put forth two conditions:
That he should be placed higher than Vishnu and secondly he become immortal without drinking nectar.Vishnu granted both the wishes.
Since than Vishnu placed Garuda atop His flagstaff to fulfil his wish of being placed higher than Vishnu.
Thus was born the concept of " Garudadhwaj", Every Vishnu temple has such " Garudadwaja" or
"Garuda stambha" in front of the Sanctum. Garuda is described as the most merciful servant of Lord Vishnu. He is so powerful and massive that he can block out the Sun.
Garud deva is the personification of Service and Bhakti.
He is regarded as the great devotee of Lord Vishnu and due to this he is present in each and every temple.
विशाल, अति सुन्दर , अवर्णनीय पुष्प वन माला से अलंकृत प्रभु का दिव्य मंगल विग्रह धूम धाम से अत्यंत भक्ति परतन्त्र भक्तों को अपनी लीला विभूति से आनन्दित करते हुए विशाल उद्यान की तरफ प्रस्थान कर रहे हैं, उद्यान का विशाल प्रदेश असंख्य पुष्पों से सुवासित, विशाल फौव्वारों की जलधारा से शीतल,तथा असंख्य भक्तगण समुदायों के प्रवचन से मुखरित, श्री गरुड़वाहनाधिष्ठित प्रभु श्री रंगनाथ भगवान का विशाल भावपूर्ण हृदय से प्रतीक्षा कर रहे हैं, यह मनोरंजिनी मधुराधिपति की मधुर यात्रा समस्त लोकहितैषिणी बनी रहे, सप्रेम प्रार्थना सह-
जय श्रीमन्नारायण।
Courtsey: Dr Kanta Varadarajan