Acharybrijesh ji maharaj shri vrindavan dham

Acharybrijesh ji maharaj shri vrindavan dham hamro dan radha shri radha radha

शौक़ की कीमत और, जीद्द के अंज़ाम देखें नहीं जाते !!radhe Radhe
06/04/2025

शौक़ की कीमत और, जीद्द के अंज़ाम देखें नहीं जाते !!radhe Radhe

हारने के बाद कहानी खत्म नहीं होती, एक नया अध्याय शुरू होता है।💪🏽💫🌟🎉 जय श्री राम 🙏🙏🌈💥🔥🎊
06/04/2025

हारने के बाद कहानी खत्म नहीं होती, एक नया अध्याय शुरू होता है।💪🏽💫🌟🎉 जय श्री राम 🙏🙏🌈💥🔥🎊

26/01/2025
🙏🙏बैठेउ सभाँ खबरि असि पाई। सिंधु पार सेना सब आई।। बूझेसि सचिव उचित मत कहहू। ते सब हँसे मष्ट करि रहहू ।। 4 ।।ज्यों ही वह ...
12/10/2024

🙏🙏बैठेउ सभाँ खबरि असि पाई। सिंधु पार सेना सब आई।।

बूझेसि सचिव उचित मत कहहू। ते सब हँसे मष्ट करि रहहू ।। 4 ।।
ज्यों ही वह सभा मे जाकर बैठा, उसने ऐसी खबर पाई कि शत्रु की सारी सेना समुन्द्र के उस पार आ गई है, उसने मंत्रियो से पूछा कि उचित सलाह कहिए ( अब क्या करना चाहिए ? ) तब वे सब हँसे और बोले कि चुप किए रहिए ( इसमे सलाह की कौन सी बात है ? ) ।। 4 ।।

दशहरा की आप सभी को हार्दिक बधाई🙏🙏❤radhe Radhe

१.जन्मपत्री मृतक की है, या जीवित की...इस प्रश्न में जन्मलग्न, अष्टम स्थान की राशि और प्रश्नलग्न इन तीनों की संख्या को जो...
31/05/2023

१.जन्मपत्री मृतक की है, या जीवित की...

इस प्रश्न में जन्मलग्न, अष्टम स्थान की राशि और प्रश्नलग्न इन तीनों की संख्या को जोड़कर जन्मकुण्डली के अष्टमेश की राशिसंख्या से गुणा कर लग्नेश की राशि संख्या से भाग देने पर विषम अंक - १/३/५/७/९/११ शेष रहें तो जीवित की और सम अंक-२/४/६/८/१०/१२ शेष रहें तो मृतक की पत्रिका होती है।

♂♂उदाहरण- प्रश्नलग्न तुला जन्मलग्न मीन, अष्टमेश की राशि ९, लग्नेश की राशि ५ है।

७ + १२ + ७ = २६ × ९ = २३४ ÷ ५ = ४६ लब्ध, ४ शेष। अतएव मृतक की जन्मपत्रिका कहनी चाहिए।

२. जन्मलग्न, प्रश्नलग्न और जन्मकुण्डली के अष्टमेश की राशि; इन तीनों को जोड़ने से जो योगफल आये उसमें अष्टमेश की राशि से गुणा करना चाहिए और गुणनफल में प्रश्न-समय में सूर्य जिस नक्षत्र पर हो उसकी संख्या से भाग देना चाहिए। सम शेष में मृतक की जन्मपत्री और विषम शेष में जीवित की जन्मपत्री होती है।

♂♂ उदाहरण- जन्मलग्न १२ + प्रश्नलग्न ७ + अष्टमेश राशि ९ = १२+७+९ =२८ को अष्टमेश की राशि ९ से गुणा किया = २५२, प्रश्नसमय में सूर्य ५ राशि का है अतः ५ से भाग दिया तो २५२ ÷५= ५० लब्ध, २ शेष सम शेष रहने से जन्मपत्री समझनी चाहिए।

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।कारुण्यरूपं करुणाकरंतं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये।।आप सभी को पावन पर्व रा...
30/03/2023

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरंतं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये।।

आप सभी को पावन पर्व रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

मैं प्रार्थना करता हूँ कि यह उत्सव सभी के लिए सौभाग्य व समृद्धि लेकर आए। प्रभु श्रीराम की कृपा सभी पर बनी रहे।

जय श्री राम!

नव संवत्सर 2080 की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।यह वर्ष आप सभी के जीवन को हर्ष, उल्लास और उत्साह से परिपूर्ण कर...
22/03/2023

नव संवत्सर 2080 की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

यह वर्ष आप सभी के जीवन को हर्ष, उल्लास और उत्साह से परिपूर्ण करे, यही ईश्वर से कामना है।

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान ।तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।
21/03/2023

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।

ॐ महालक्ष्मी नमो नमः 🙏दीप मालिका महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीप महोत्सव लक्ष्मी पूजा के लिए श्रेष्ठ समय दिनांक 24 अक्...
24/10/2022

ॐ महालक्ष्मी नमो नमः 🙏
दीप मालिका महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं
दीप महोत्सव लक्ष्मी पूजा के लिए श्रेष्ठ समय दिनांक 24 अक्टूबर 2022 सोमवार प्रदोष काल साईं काल 5:45 से रात्रि 8:21 तक रहेगा जिसमें वृष लग्न एवं प्रदोष काल दोनों सामान स्थिर लग्न में स्थित रहेंगे वृष लग्न रात्रि 7:03 से रात्रि 9:00 तक सिंह लग्न मध्य रात्रि 1:33 से 3:39 तक रहेगा चर का चौघड़िया सायंकाल काल 5:47 से 7:23 तक रहेगा लाभ का चौघड़िया रात्रि 10:35 से 12: 11 तक तक रहेगा अमृत पूर्वार्ध का चौघड़िया मध्य रात्रि 1:27 से अंत रात्रि 4:15 तक रहेगा
पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय रात्रि 7:15 से 7:28 जिसमें प्रदोष काल स्थिर वृष लग्न एवं कुंभ का स्थिर नवांश भी रहेगा

पूज्यपाद अनंतश्री विभूषित जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का बैकुंठलोक गमन ! पूज्यपाद जगतगुरु शंक...
11/09/2022

पूज्यपाद अनंतश्री विभूषित जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का बैकुंठलोक गमन !
पूज्यपाद जगतगुरु शंकराचार्य जी के श्रीचरणों में कोटि कोटि नमन ।

भावपूर्ण श्रद्धांजलि ।

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