Gupt Kashi Yatra

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काशी के मंदिरों में दर्शन / रुद्राभिषेक और काशी में होने वाली आध्यात्मिक यात्रा एवम् किसी भी पूजा पाठ कर्मकाण्ड के लिए संपर्क कर सकते है ! 🌸🔱
DM 💌 for Any Darshan In Kashi / Rudrabhishek Or Any Puja Path or Spiritual Yatra In KASHI 🔱 स्कंद पुराण काशी खंडोक्त मंदिरों का महात्म एवं काशी में स्थित समस्त तीर्थो की विस्तृत जानकारी एवम सत्य सनातन धर्म से जुड़ी धार्मिक कहानियां जानने के लिए हमसे जुड़

सकते है।
काशी में किसी भी प्रकार के पूजा पाठ के लिए संपर्क कर सकते हैं..! gmail~ [email protected]
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हरि💚💛हर महादेव 🔱
काशी ही विश्वनाथ है
विश्वनाथ ही काशी है..!
जय श्री काशी विश्वनाथ 🔱🙏🕉️

30/04/2026

काशी महादेव जी की राजधानी है ❤️🙌🕉️

📍 Omkareshwar Mahadev, Kashi 🔱

27/04/2026

हर हर गंगे ❤️🙌🕉️

True 💯
24/04/2026

True 💯

23/04/2026

चक्रपुष्करिणी_तीर्थ_मणिकर्णिका_काशी ❤️🚩🕉️

अनादि तीर्थ चक्रपुष्करीणी मणिकर्णिका कुंड का अक्षय तृतीया के दिन वार्षिक श्रृंगार जिसमें मां मणिकर्णिका के विग्रह स्वरुप को वर्ष में सिर्फ अक्षय तृतीया के दिन काशी में प्राचीन मणिकर्णिका घाट स्थित कुंड में आमजन के दर्शन के लिए स्थापित किया जाता है।

मरणं_मंगलं_यत्र_सफलं_यत्र_जीवनम्।
स्वर्ग्त्रिरणायते_यत्र_सैषा_श्री_मणिकर्णिका।।
स्कंद पु का खंड 34-36

जहां पर मृत्यु मंगलकारी हो, जीवित रहना सफल हो और स्वर्ग सुख तिनके के समान हो। वह श्री मणिकर्णिका स्थली है

न विश्वानाथस्य समं हि लिङ्गं न तिर्थमन्यमणिकर्निकातः।
तपोवन कुत्रचिदस्ति नान्यच्छुभं ममाःनन्दवनेन तुल्यं ।।
विश्वेशे परमान्नं यो दद्याद्दपर्णं चारुचामरं ।
त्रयलोकयं तर्पितम् तेन सदेवपृतमानवं ।।
यस्तु विश्वेश्वरं दृष्ट्वा ह्यन्यत्राःपि विपद्यते।
तस्य जन्मान्तरे मोक्षो भवत्येव न संशय।। काशीखण्ड्

विश्वनाथ के समान लिंग और मणिकर्णिका के तुल्य तीर्थ और मेरे शुभमय आनंदवन काशी के सदृश तपोवन दूसरा कही भी नही है।

जो कोई विश्वनाथ लिंग के ऊपर घृत और शक्कर के सहित उत्तम पकवान चढ़ता है , वह देवता , पितर , और मनुष्य के सहित त्रयलोक्य भर को तृप्त करदेता है (त्रयलोक्य भर के तीर्थ तृप्त होजाते है)।

जो कोई विश्वनाथ जी की दर्शन करने के उपरांत कही अन्यस्थान में भी जा कर मरता है तो, विश्वनाथ जी की कृपा से अगले जन्म में निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त होता है।

~ #इसीलिए_तोह_कहते_है_कि ~

विश्व्नाथ सम लिंग नहीं , नगर न काशी समान ।
मणिकर्णिका सो तीर्थ नहीं , जग में कतहूँ महान ।।
मानुष तन वह धन्य है , विश्वनाथ को जो देख ।
जन्म लिए कर विश्व मे , एक यही फल लेख ।।

‌ एक बार की बात है कि अगस्त जी भगवान कार्तिकेय जी से मिलने श्रीशैल स्थित लोहित नामक पर्वत पर गए वहां पर कार्तिकेय जी ने अगस्त मुनि का आदर सत्कार किया एवं काशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भुलोक, भुवर्लोक तथा स्वर्लोक अथवा पाताल मे या महर्लोक आदि ऊपर के लोको मे भी मैंने वैसा {काशी जैसा} उत्तम क्षेत्र नही देखा है। हे मुने! मै अकेला ही सर्वत्र घुमता हुँ तब भी काशीक्षेत्र की प्राप्ति के लिये यहाँ तपस्या करता हुँ। किंतु आजतक मेरा मनोरथ सफल नही हुआ । पुण्य,दान ,जप तप तथा अनेक प्रकार के यज्ञों द्वारा भी काशीक्षेत्र नही मिलता । उसकी प्राप्ति तो केवल काशी विश्वनाथ के अनुग्रह से होती है, काशीपुरी मे निवास का सौभाग्य केवल श्रीमहादेव के कृपा से ही सम्भव है । मनुष्य धर्म के कार्यों को कर के तो स्वर्ग तो आसानी से प्राप्त कर लेगा परंतु काशीपुरी में रहने का सौभाग्य उससे भी दुर्लभ है ।हे मुने! मैं तो काशी से आने वाली वायु का भी स्पर्श चाहता हुँ तुम तो काशी में रहकर आये हो । जो जितेंद्रिय होकर तीन रात भी काशी में रहकर आये हो उनकी चरणधुलि का स्पर्श सभी को पवित्रकर देता है । आप तो वहाँ के निवासी थे , आप के लिये कहना ही क्या है ।

ऐसा कहकर कार्तिकेय जी ने अगस्त मुनि के समस्त अंगों का स्पर्श किया और ऐसा करके उन्होने अमृत के सरोवर मे स्नान का सुख पाया। उसके बाद जय विश्वनाथ एसा कहकर शंकरजी का ध्यान किय।उसके बाद काशी मे निवास कि विधि के बारे मे बताया तब श्री अगस्त मुनि ने कार्तिकेय जी से काशी के उत्पत्ति एवं महात्म्य के बारे में जानने की विस्तृत इच्छा व्यक्त की तब कार्तिकेय जी ने कहा कि काशी के महात्म्य को बताने का समर्थ्य तो सहस्त्र मुख वाले शेषनाग को भी नही है फिर मै 6 मुखों से किस प्रकार से वर्णन करुंगा।

परंतु जिस प्रकार आप मुझसे पूछ रहे हैं इसी प्रकार एक बार माता पार्वती ने भी पिता श्री महादेव जी से भी प्रश्न किया था तब जो महादेव जी ने माता पार्वती जी से कहा था वह मैं आपको बताता हूं। महादेव जी बोले जब पूरे संसार में महाप्रलय आ गया समस्त चराचर प्राणी नष्ट हो गये थे । सर्वत्र अंधकार व्याप्त था सुर्य, चंद्र,ग्रह, नक्षत्र,दिन,रात आदि कुछ भी नही था ।

केवल मै{ब्रह्म} ही था तब मैं सृष्टि करने की इच्छा से तुम्हारी (पार्वती) उत्पत्ति की एवं तुम्हारे साथ रहने की इच्छा से 5 कोस परिमाण का काशी क्षेत्र बनाया प्रलय काल में बनाने की वजह से उसका विनाश प्रलय में भी नहीं होगा ऐसा वरदान दिया और इस क्षेत्र को कभी भी शिव एवं पार्वती नहीं त्यागेंगे इसीलिए इसे अविमुक्त नाम दिया भगवान शिव को यह आनंद प्रदान करने वाला क्षेत्र था इसीलिए इसका नाम आनंदवन रखा उसी समय भगवान शिव ने अपने बाएं अंग से भगवान विष्णु को उत्पन्न किया उनका अंग बड़ा सुशोभित था और वह दिव्य पीताम्बर धारण किये हुए थे जो परमशांत ,सत्वगुणसे पुर्ण समुद्र से भी अधिक गम्भीर और क्षमावान था । वह एक ही सब पुरुषों से उत्तम था , इसीलिए भगवान शिव ने उन्हें पुरुषोत्तम नाम दिया और बोले की हे अच्युत तुम्हारे शरीर से वेदों का उत्पत्ति होगी और तुम्हारा नाम विष्णु हो और ऐसा कहते हुए वह काशी नगरी में प्रवेश कर गए भगवान विष्णु तुरंत ही ध्यान में तत्पर हुए और उसी जगह पर अपने चक्र से एक कुंड का निर्माण किया और अपने पसीने के जल से भर दिया फिर उसी के किनारे घोर तपस्या की तब शिव जी पार्वती जी के साथ वहां प्रकट हुए और बोले की वर मांगो तब विष्णु जी बोले देवेश्वर यदि आप मुझपर पसंद है तो आप सदा सर्वदा भवानी सहित यहां मुझे दर्शन दे तब शिवजी बोलेंगे हे, जनार्दन एसा ही होगा । मेरी मणि जटित कुंडल यहां पर गिर गया है इसीलिए इसका नाम मणिकर्णिका होगा । यह मुक्ति का प्रधान क्षेत्र होगा ब्रहमा से लेकर छोटे से कीट किसी भी जीव कि यहां पर यदि मृत्यु होगी तो उसको मोक्ष प्राप्त होगा एवम यदि कोई मनुष्य कितने भी योजन दूर से भी श्रद्धा पूर्वक काशी का नाम भी लेता है तो उसके पाप क्षय होंगें और मृत्यु पर मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी ऐसा वरदान दिया ।

सैकड़ों वर्ष पूर्व राजगुरु प्रधान तीर्थ पुरोहित परिवार को इसी कुण्ड से मां मणिकर्णिका की प्रतिमा मिली थी। तब से इस परिवार की आठ पीढ़ियों द्वारा कुण्ड पर वर्ष में केवल अक्षय तृतीया पर ही मां मणिकर्णिका का श्रृंगार व पूजन होता रहा है
कुण्ड_पर_शिवलिंग_व_विष्णु_की_पादुका भी मणिकर्णिका कुण्ड पर करीब दो दर्जन शिवलिंग, भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की प्रतिमा लगी है। जबकि यहां मां मणिकर्णिका की अष्टधातु की प्रतिमा का श्रृंगार व दर्शन सिर्फ अक्षय तृतीया को ही होता है। यह प्रतिमा कुण्ड पुरोहित परिवार के ब्रह्मनाल स्थित आवास पर ही रहती है।

काशी में ही मेरा वृंदावन…कान्हा के पैरों में ❤️🙌🕉️
23/04/2026

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📍Sankat Mochan Mandir 🚩🛕, Kashi 🕉️
18/04/2026

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