Kabirchauramath Varanasi

Kabirchauramath Varanasi Kabirchauramath,Varanasi is the place where Kabir saheb spent his whole life of 120 years.

15/08/2026

Ashtavakra Gita | Chapter 1 | Shloka 1 — The Quest for Knowledge, Liberation & Renunciation

“Teach me, O Lord. How can knowledge be attained? How can liberation be achieved? And how can renunciation be attained?”
To watch the full video link is given here- https://youtu.be/-MtiTiSrCB8?si=rxRMk0Z180aj1d-X

13/08/2026

आज से अष्टावक्र गीता पर एक नई वीडियो-सीरीज़ की शुरुआत कर रहा हूँ।
आप सभी जानते हैं कि मैं Zoom पर लगातार अष्टावक्र गीता की कक्षाएँ ले रहा हूँ। अब इसी यात्रा को वीडियो के माध्यम से कबीर पाठशाला के YouTube, Instagram और Facebook पर आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास है।

पहला वीडियो लगभग 10–12 मिनट का है, जिसमें हमने जाना है—अष्टावक्र गीता क्या है, अष्टावक्र कौन थे और उनका जीवन कैसा रहा।
आपसे अनुरोध है कि YouTube पर जाकर पूरा वीडियो देखें, अपने प्रश्न और अनुभव कमेंट में लिखें, और चाहें तो आगे हमारी Zoom कक्षा में भी जुड़ें।
आइए, अष्टावक्र के माध्यम से स्वयं को देखने की इस यात्रा पर साथ चलें। YouTube link is here : https://youtu.be/T-g4r2Jdzc0?si=-YZ7Gz0ht0FWCtBv
#अष्टावक्रगीता #कबीरपाठशाला #उमेशकबीर अद्वैत

07/08/2026

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आइये, अपका स्वागत है इस यात्रा में ….Please follow on Instagram & Facebook.Subscribe on YouTube “Kabirpathshala”
06/08/2026

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कुछ मुलाकातें नियोजित नहीं होतीं—वे घटित होती हैं।आज प्रातः कबीरचौरामठ, वाराणसी, जो मेरी साधनास्थली भी है, वहाँ एक अत्यं...
18/07/2026

कुछ मुलाकातें नियोजित नहीं होतीं—वे घटित होती हैं।

आज प्रातः कबीरचौरामठ, वाराणसी, जो मेरी साधनास्थली भी है, वहाँ एक अत्यंत सुखद संयोग बना। आदरणीय प्रह्लाद सिंह टीपाणिया जी, उनके पुत्र अजय जी, उनके सुपुत्र तथा उनके साथ आए सभी कलाकारों का स्नेहिल आगमन हुआ। वर्षों से ये सभी अपनी स्वर-साधना के माध्यम से कबीर साहब और अन्य संतों की वाणी को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं।
इस आत्मीय मिलन की विशेषता यह भी रही कि कबीरचौरा मठ के आचार्य पूज्य विवेकदास जी भी इस चर्चा में सम्मिलित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने इस संवाद को और भी सार्थक और आत्मीय बना दिया।
प्रह्लाद जी से मिलना हर बार एक नई ताजगी दे जाता है। उनका सरल और विनम्र स्वभाव, कबीर की वाणी के प्रति उनकी गहरी साधना, और उसे जीने का सहज भाव—सब कुछ यह अनुभव कराता है कि आप किसी कलाकार से नहीं, बल्कि एक सच्चे साधक से संवाद कर रहे हैं।
कबीर, साधना, जीवन और अनुभवों पर हुई यह आत्मीय चर्चा लंबे समय तक स्मृति में बनी रहेगी। उन्होंने स्नेहपूर्वक मुझे लोनिया खेड़ी आने का निमंत्रण भी दिया, जिसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूँ।

जीवन की सबसे सुंदर घटनाएँ अक्सर बिना किसी पूर्व योजना के घटित होती हैं। शायद यही अस्तित्व की अपनी शैली है—जहाँ मिलने वाले लोग, संवाद और क्षण, सब अपने समय पर स्वयं घटित हो जाते हैं।
ऐसी आकस्मिक मुलाकातें केवल स्मृतियाँ नहीं बनातीं, वे साधना की यात्रा को और भी समृद्ध कर जाती हैं। 🙏

30/06/2026

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