Shree Bhikhi MATA Mandir

Shree Bhikhi MATA Mandir Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Shree Bhikhi MATA Mandir, sree bhikhi mata mandir, Vapi.

03/10/2022
09/05/2020

कर्मों का फल तो झेलना पडे़गा।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

एक दृष्टान्त:-

💥 भीष्म पितामह रणभूमि में
शरशैया पर पड़े थे।
हल्का सा भी हिलते तो शरीर में घुसे बाण भारी वेदना के साथ रक्त की पिचकारी सी छोड़ देते।

💥 ऐसी दशा में उनसे मिलने सभी आ जा रहे थे। श्री कृष्ण भी दर्शनार्थ आये। उनको देखकर भीष्म जोर से हँसे और कहा.... आइये जगन्नाथ।.. आप तो सर्व ज्ञाता हैं। सब जानते हैं, बताइए मैंने ऐसा क्या पाप किया था जिसका दंड इतना भयावह मिला?

💥 कृष्ण: पितामह! आपके पास वह शक्ति है, जिससे आप अपने पूर्व जन्म देख सकते हैं। आप स्वयं ही देख लेते।

💥 भीष्म: देवकी नंदन! मैं यहाँ अकेला पड़ा और कर ही क्या रहा हूँ? मैंने सब देख लिया ...अभी तक 100 जन्म देख चुका हूँ। मैंने उन 100 जन्मो में एक भी कर्म ऐसा नहीं किया जिसका परिणाम ये हो कि मेरा पूरा शरीर बिंधा पड़ा है, हर आने वाला क्षण ...और पीड़ा लेकर आता है।

💥 कृष्ण: पितामह ! आप एक भव और पीछे जाएँ, आपको उत्तर मिल जायेगा।

💥 भीष्म ने ध्यान लगाया और देखा कि 101 भव पूर्व वो एक नगर के राजा थे। ...एक मार्ग से अपनी सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ कहीं जा रहे थे।
एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला "राजन! मार्ग में एक सर्प पड़ा है। यदि हमारी टुकड़ी उसके ऊपर से गुजरी तो वह मर जायेगा।"

💥 भीष्म ने कहा " एक काम करो। उसे किसी लकड़ी में लपेट कर झाड़ियों में फेंक दो।"

👉 सैनिक ने वैसा ही किया।...उस सांप को एक लकड़ी में लपेटकर झाड़ियों में फेंक दिया।

👉 दुर्भाग्य से झाडी कंटीली थी। सांप उनमें फंस गया। जितना प्रयास उनसे निकलने का करता और अधिक फंस जाता।... कांटे उसकी देह में गड गए। खून रिसने लगा। धीरे धीरे वह मृत्यु के मुंह में जाने लगा।... 5-6 दिन की तड़प के बाद उसके प्राण निकल पाए।

💥 भीष्म: हे त्रिलोकी नाथ। आप जानते हैं कि मैंने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया। अपितु मेरा उद्देश्य उस सर्प की रक्षा था। तब ये परिणाम क्यों?

💥 कृष्ण: तात श्री! हम जान बूझ कर क्रिया करें या अनजाने में ...किन्तु क्रिया तो हुई न। उसके प्राण तो गए ना।... ये विधि का विधान है कि जो क्रिया हम करते हैं उसका फल भोगना ही पड़ता है।.... आपका पुण्य इतना प्रबल था कि 101 भव उस पाप फल को उदित होने में लग गए। किन्तु अंततः वह हुआ।....

👉 जिस जीव को लोग जानबूझ कर मार रहे हैं... उसने जितनी पीड़ा सहन की.. वह उस जीव (आत्मा) को इसी जन्म अथवा अन्य किसी जन्म में अवश्य भोगनी होगी।

👉 ये बकरे, मुर्गे, भैंसे, गाय, ऊंट आदि वही जीव हैं जो ऐसा वीभत्स कार्य पूर्व जन्म में करके आये हैं।... और इसी कारण पशु बनकर, यातना झेल रहे हैं।

...🐩🐈🐃🐫🐂🐏🐑 ...

अतः हर दैनिक क्रिया सावधानी पूर्वक करें।.

10/11/2019
Shree Bhikhi mata mandir
01/10/2019

Shree Bhikhi mata mandir

09/09/2019

🌟🌟 रात्रि कहानी 🌟🌟
✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨

परम सिध्द सन्त रामदास जी जब प्रार्थना करते थे तो कभी उनके होंठ नही हिलते थे !

शिष्यों ने पूछा - हम प्रार्थना करते हैं, तो होंठ हिलते हैं।
आपके होंठ नहीं हिलते ? आप पत्थर की मूर्ति की तरह खडे़ हो जाते हैं। आप कहते क्या है अन्दर से ?

क्योंकि अगर आप अन्दर से भी कुछ कहेंगे, तो होंठो पर थोड़ा कंपन आ ही जाता है। चहेरे पर बोलने का भाव आ जाता है।लेकिन वह भाव भी नहीं आता !

सन्त रामदास जी ने कहा - मैं एक बार राजधानी से गुजरा और राजमहल के सामने द्वार पर मैंने सम्राट को खडे़ देखा, और एक भिखारी को भी खडे़ देखा !
वह भिखारी बस खड़ा था। फटे--चीथडे़ थे शरीर पर। जीर्ण - जर्जर देह थी, जैसे बहुत दिनो से भोजन न मिला हो !
शरीर सूख कर कांटा हो गया। बस आंखें ही दीयों की तरह जगमगा रही थी। बाकी जीवन जैसे सब तरफ से विलीन हो गया हो !
वह कैसे खड़ा था यह भी आश्चर्य था। लगता था अब गिरा -तब गिरा !

सम्राट उससे बोला - बोलो क्या चाहते हो ?

उस भिखारी ने कहा - अगर मेरे आपके द्वार पर खडे़ होने से, मेरी मांग का पता नहीं चलता, तो कहने की कोई जरूरत नहीं !
क्या कहना है और ? मै द्वार पर खड़ा हूं, मुझे देख लो। मेरा होना ही मेरी प्रार्थना है। "

सन्त रामदास जी ने कहा -उसी दिन से मैंने प्रार्थना बंद कर दी। मैं परमात्मा के द्वार पर खड़ा हूं। वह देख लेगें । मैं क्या कहूं ?

अगर मेरी स्थिति कुछ नहीं कह सकती, तो मेरे शब्द क्या कह सकेंगे ?
अगर वह मेरी स्थिति नहीं समझ सकते, तो मेरे शब्दों को क्या समझेंगे ?

अतः भाव व दृढ विश्वास ही सच्ची परमात्मा की याद के लक्षण है यहाँ कुछ मांगना शेष नही रहता ! आपका प्रार्थना में होना ही पर्याप्त है !!

23/08/2019

वीणा बजाते हुए नारदमुनि भगवान श्रीराम के द्वार पर पहुँचे।

🙏🌹 नारायण नारायण !! 🌹🙏

नारदजी ने देखा कि द्वार पर हनुमान जी पहरा दे रहे है।

🔹 हनुमान जी ने पूछा: नारद मुनि ! कहाँ जा रहे हो ?

🔻 नारदजी बोले," मैं प्रभु से मिलने आया हूँ।"
नारदजी ने हनुमानजी से पूछा, " प्रभु इस समय क्या कर रहे है?"

🔹 हनुमानजी बोले, "पता नहीं, पर कुछ बही खाते का काम कर रहे है ,प्रभु बही खाते में कुछ लिख रहे है।"

🔻 नारदजी, "अच्छा क्या लिखा पढ़ी कर रहे है ?"

🔹 हनुमानजी बोले," मुझे पता नही , मुनिवर आप खुद ही देख आना।"

🔻 नारद मुनि गए प्रभु के पास और देखा कि प्रभु कुछ लिख रहे है।

🔻 नारद जी बोले, "प्रभु आप बही खाते का काम कर रहे है ? ये काम तो किसी मुनीम को दे दीजिए।"

🔸 प्रभु बोले, "नही नारद , मेरा काम मुझे ही करना पड़ता है। ये काम मैं किसी और को नही सौंप सकता।"

🔻 नारद जी, "अच्छा प्रभु ! ऐसा क्या काम है ? ऐसा आप इस बही खाते में क्या लिख रहे हो? "

🔸 प्रभु बोले," तुम क्या करोगे देखकर , जाने दो।"

🔻 नारद जी बोले, "नही प्रभु बताईये, ऐसा आप इस बही खाते में क्या लिखते है?"

🔸 प्रभु बोले, " नारद इस बही खाते में उन भक्तों के नाम है जो मुझे हर पल भजते हैं। मैं उनकी नित्य हाजरी लगाता हूँ ।"

🔻 नारद जी, " अच्छा प्रभु जरा बताईये तो मेरा नाम कहाँ पर है ?"
नारदमुनि ने बही खाते को खोल कर देखा तो उनका नाम सबसे ऊपर था। नारद जी को गर्व हो गया कि देखो मुझे मेरे प्रभु सबसे ज्यादा भक्त मानते है।

पर नारद जी ने देखा कि हनुमान जी का नाम उस बही खाते में कहीं नही है?
नारद जी सोचने लगे कि हनुमान जी तो प्रभु श्रीराम जी के खास भक्त है फिर उनका नाम इस बही खाते में क्यों नही है? क्या प्रभु उनको भूल गए है?

🔻 नारद मुनि आये हनुमान जी के पास बोले, "हनुमान ! प्रभु के बही खाते में उन सब भक्तो के नाम है जो नित्य प्रभु को भजते है पर आप का नाम उस में कहीं नही है?"

🔹 हनुमानजी ने कहा," मुनिवर ! होगा, आप ने शायद ठीक से नही देखा होगा?"

🔻 नारदजी बोले, "नहीं, नहीं मैंने ध्यान से देखा पर आप का नाम कहीं नही था।"

🔹 हनुमानजी ने कहा, "अच्छा , कोई बात नही। शायद प्रभु ने मुझे इस लायक नही समझा होगा जो मेरा नाम उस बही खाते में लिखा जाये। पर नारद जी, प्रभु एक डायरी भी रखते है उस में भी वे नित्य कुछ लिखते है।"

🔻 नारदजी बोले, "अच्छा !"

🔹 हनुमानजी ने कहा, "हाँ !"

🔻 नारदमुनि फिर गये प्रभु श्रीराम के पास और बोले,
" प्रभु ! सुना है कि आप अपनी डायरी भी रखते है ! उसमे आप क्या लिखते है ?"

🔸 प्रभु श्रीराम बोले, "हाँ! पर वो तुम्हारे काम की नही है।"

🔻 नारदजी: ''प्रभु ! बताईये ना , मैं देखना चाहता हूँ कि आप उसमे क्या लिखते है।"

🔸 प्रभु मुस्कुराये और बोले, "मुनिवर, मैं इन में उन भक्तों के नाम लिखता हूँ जिन को मैं नित्य भजता हूँ।"

🔻 नारदजी ने डायरी खोल कर देखा तो उसमे सबसे ऊपर हनुमान जी का नाम था। ये देख कर नारदजी का अभिमान टूट गया।

कहने का तात्पर्य यह है कि जो भगवान को सिर्फ जीवा से भजते है, उनको प्रभु अपना भक्त मानते हैं और जो ह्रदय से भजते है । ऐसे भक्तो को प्रभु अपनी ह्रदय रूपी डायरी में रखते हैं...!!!"

🌹🌹🌹जय श्री राम 🌹🌹🌹

Address

Sree Bhikhi Mata Mandir
Vapi

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shree Bhikhi MATA Mandir posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share