श्री रामानुज संप्रदाय की वडकलै परंपरा के अहोबिल पीठ का अनुसरण करते हुए नर्मदा नदी के पावन तट पर तीर्थ भूमि चांदोद (वडोदरा) के चक्रपाणि घाट पर लगभग 325 वर्ष पूर्व धर्म चक्रोदय श्रीवत्स मठ की स्थापना हुई! श्रीवत्स पीठ के प्रथमाचार्य श्री श्रियाचार्य स्वामीजी द्वारा गुजरात में श्रीसंप्रदाय के विशिष्टाद्वैत सिद्धांत का संवर्धन किया गया! श्री श्रियाचार्य स्वामीजी के पश्चात् पंद्रह आचार्यों ने श्रीवत्स
पीठ को समलंकृत किया! श्रीवत्स पीठ की आचार्य परंपरा में कई आचार्य त्रिकालदर्शी, वचनसिद्ध, भक्ति परायण, ज्ञानी, वैराग्य निष्ठ, कैंकर्य्य परायण महात्मा हुए जिन्होंने लोक कल्याण एवं संस्कृति संरक्षण के लिए श्रीवत्स पीठ अन्तर्गत 52 भव्य मंदिरों- देवस्थानो का निर्माण कर पांचरात्र आगमानुसार भगवान के श्रीविग्रहो की प्राणप्रतिष्ठा की! संवत् 2006 (ई.स. 1950) में पूजनीय श्री अनिरुद्धाचार्य वेंकटाचार्य जी महाराज श्रीवत्स पीठ के पंद्रहवे आचार्य के रुप में श्रीवत्स पीठ पर विराजित हुए! आपने अपनी तपस्या एवं विद्वत्ता के प्रभाव से श्री रामानुज संप्रदाय एवं श्रीवत्स पीठ का वैभव वर्धन किया! संवत् 2053 ई. स. 1997) में परम पूज्य स्वामी श्री वेंकटेशाचार्य जी महाराज श्रीवत्स पीठ के सोलहवें आचार्य के रुप में अभिषिक्त हुए! आप बडे ही उर्जावान्, कर्मठ एवं रचनात्मक कार्यों से श्रीवत्स पीठ के वैभव को दिग्दिगंत तक प्रसारित कर रहें है!