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जयगुरुदेव : गुरु महाराज ने - परमार्थी बचन संग्रह में बताया:  **शब्द की महिमा :**1) शब्द हर भाव से सफाई और सच्चाई चाहता ह...
15/08/2026

जयगुरुदेव : गुरु महाराज ने - परमार्थी बचन संग्रह में बताया: **शब्द की महिमा :**
1) शब्द हर भाव से सफाई और सच्चाई चाहता है |
2) शब्द को बनावट पसंद नहीं है | जिसमे बनावट आई की शब्द सुनाई देगा ही नहीं |
3) शब्द की ताकत तमाम ही ब्रह्माण्ड को अपने अधीन होकर चला रही है |
4) शब्द का ही विस्तार सारे जहां में है | जिस वक्त शब्द खींच जावेगा रचना का तमाम खात्मा हो जावेगा |

**सुरत का उतार और फ़साव :**
1) सुरत इसी शब्द के द्वारा उतरती हुई सत्तलोक से आई है और रास्ते में इसने अपना आपा धारण किया है | अब आँखों के पीछे आकर जड़ मिलौनी में फसी है और आँखों के ऊपर भाग में अंधकार आ गया है |
2) जब सुरत को अंतर में कुछ दिखाई नहीं देता है | इसमें अज्ञान है और अपने सच्चे सत्तलोक के रास्ते को भूल गई |

**मार्ग पाने की कठिनाई :**
1) यदि कोई मनुष्य दुनिया के रास्ते को भूल जाता है तो उस वक्त उसे हजारों आदमियों से पूछना पड़ता है तब जाकर सही रास्ता मिलता है |
2) मालिक से मिलने का रास्ता तो ऐसा है कि जिससे पूछो वह भी नहीं जानता है | बताओ तुम्हे कैसे परमात्मा का रास्ता मिले और कैसे प्रभु के पास पहुंचोगे ?
|| जयगुरुदेव ||
परम संत जयगुरुदेव जी महाराज

🙏🏻जयगुरुदेव नाम प्रभु का🙏🏻💥कलयुग जा रहा है। सतयुग आ रहा है।🧘🏻🔴 आवश्यक संदेश 🔴👏समस्त गुरु प्रेमियों से श्रद्धापूर्ण विनम्...
10/08/2026

🙏🏻जयगुरुदेव नाम प्रभु का🙏🏻
💥कलयुग जा रहा है। सतयुग आ रहा है।🧘🏻
🔴 आवश्यक संदेश 🔴
👏समस्त गुरु प्रेमियों से श्रद्धापूर्ण विनम्र सेवा निवेदन।👏

परम पूज्य सतगुरु दयाल की असीम कृपा एवं आशीर्वाद से जयगुरुदेव आध्यात्मिक श्रद्धा सेवा आश्रम में आश्रम निर्माण कार्य एवं पूजन स्थल का निर्माण कार्य चल रहा है।।

यह पावन निर्माण कार्य केवल ईंट-पत्थरों का निर्माण नहीं, बल्कि सतगुरु की सेवा, संगत की सुविधा एवं आने वाली पीढ़ियों के आध्यात्मिक कल्याण का पवित्र कार्य है।

अतः समस्त गुरु प्रेमी भाई-बहनों से विनम्र निवेदन है कि अपनी श्रद्धा अनुसार तन-मन-धन से सेवा कर इस पावन निर्माण कार्य में सहभागी बनें।
सेवा का यह पावन अवसर बार-बार नहीं मिलता। आइए, अपनी श्रद्धा का अंश अर्पित कर इस पुण्य कार्य में अपना परमार्थी भाग बढ़ाएँ और श्रद्धा सेवा आश्रम के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दें।।

दिनांक – 10 अगस्त 2026
आदेशानुसार – परम पूज्य स्वामी जी महाराज।
श्रद्धा सेवा आश्रम।
संपर्क सूत्र – 7562802022, 87895 07714
जयगुरुदेव आवाज़

• आज सेवा का अवसर है, कल यही परमार्थ की निशानी होगी,
श्रद्धा सेवा आश्रम की हर ईंट में गुरु-प्रेम की कहानी होगी।
• श्रद्धा की एक ईंट, सेवा का एक प्रयास करें,
आइए मिलकर श्रद्धा सेवा आश्रम का निर्माण करें।

नैमिष में चलकर मसीहे से मिल लो
भरम सारा दिल का अपने निकालो
सतगुरु की महिमा सबों ने बखाने
मगर कोई बिरला ही जाने.....

चलो चले – श्रद्धा सेवा आश्रम नैमिषारण्य।
पवित्र श्रावण मास में आयोजित जयगुरुदेव आध्यात्मिक साधना शिविर में सभी साधक गुरु प्रेमी अवश्य पधारें।

2 अगस्त से लगातार चल रहा है।
प्रातः 6 बजे से 8 बजे तक प्रभु नाम की कमाई
8 बजे से 10 बजे तक सत्संग एवं दर्शन
10 बजे से परमार्थी श्रमदान आश्रम निर्माण कार्य सेवा।

स्थान - जयगुरुदेव श्रद्धा सेवा आश्रम नया बस अड्डा,रुद्रावर्त मार्ग अरबापुर नैमिषारण्य जिला सीतापुर उत्तर प्रदेश भारत।

जयगुरुदेव नाम प्रभु का
29/07/2026

जयगुरुदेव नाम प्रभु का

युवाओं को नौकरी नहीं, व्यवस्था दो -◾बाबाजी जब सन् 1980 में भविष्यवाणियां करते थे तब देश के विभिन्न पीड़ित वर्ग उनके पास ...
24/07/2026

युवाओं को नौकरी नहीं, व्यवस्था दो -

◾बाबाजी जब सन् 1980 में भविष्यवाणियां करते थे तब देश के विभिन्न पीड़ित वर्ग उनके पास आते थे एवं अपनी समस्याओं को उनके पास रखते थे।

◾बाबाजी के पास नौजवान भी आते थे। नौजवानों का दर्द देखकर बाबाजी ने 24 मार्च 1980 को दूरदर्शी को जन्म दिया था। उन्होंने कहा कि जब तुम्हें कोई रोजगार की व्यवस्था नहीं देगा, देश के जिम्मेवार लोग जब तुम्हारी सुनने मानने को तैयार न हों, तब हमारी दूरदर्शी की तरफ नजर डाल लेना।

◾हमारी दूरदर्शी व्यवस्था जब आएगी तो वो हर बच्चे को काम देगी। पढ़ाई पूरी करने के एक महीने के अन्दर उस बच्चे की योग्यता देखकर उसको काम दे दिया जाएगा। ज्वाइनिंग लेटर उसके घर आ जाएगा। सारे बच्चों को योग्यता के अनुसार काम मिलेगा।

◾लेकिन बाबाजी के इस दूरदर्शी भूमिका को नौजवानों ने मखौल में ले लिया। महात्माओं से मखौल नहीं करना चाहिए, क्योंकि संतों की भूमिका व्यवस्था की अवज्ञा करने वाले को कुदरत कभी क्षमा नहीं करती है। आज कुदरत की नाराजगी का दृश्य सबके सामने है।

📌सन्त अवज्ञा का फल ऐसा, जले नगर अनाथ कर जैसा।

◾आज आपकी कोई सुनने वाला नहीं है, क्योंकि आपने समय से संत महात्माओं की बात नहीं सुनी, नहीं मानी। आपको विश्वास था कि मतदान के द्वारा जिन जिम्मेवार लोगों को कुर्सी पर बैठाएंगे वो आपको रोजगार दे देंगे।

◾लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। रोजगार तो दूर आज नौकरी मिलना मुश्किल हो गया है। और ये सन् 1979 से सरकार नौकरी देना बंद कर दी है। सरकार इतनी नौकरी दे भी नहीं सकती। लेकिन कम से कम रोजगार की व्यवस्था बनाकर दे देनी चाहिए। देश का नौजवान स्वतः नौकरियों की भरमार लगा देगा।

◾आज चहुं ओर नजर उठाकर देखिए। देश की युवा शक्ति का कितना दुरुपयोग किया जा रहा है। अरे ये इनके काम करने की उम्र है, इनको आप काम दे दीजिए । खाली बैठा नौजवान विकास नहीं अपितु विनाश के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। इसलिए प्रजा को अपने राजा से रोजगार की व्यवस्था ले लेनी चाहिए।

◾क्योंकि प्रजा के द्वारा ही राजा चुना गया है। प्रजा ने ही राजा को अपनी सेवा के लिए बैठाला है। चुनाव तो हो गया लेकिन जनता का अभी एक भी काम नहीं चुना गया। देश में आपातकाल का कारण प्रजा स्वयं है क्योंकि प्रजा ने ही राजा को बैठाया है।

◾इसलिए प्रजा को चाहिए कि संतों के पास आइए, संतों के मार्गदर्शन में जो काम होता है वो सबके हित में होता है। राजा भी परेशान है। उसको भी चाहिए कि संत महापुरुषों के पास पहुंचकर देश को विनाश से बचाएं। अर्जी हमारी, मर्जी आपकी 🙏

जयगुरुदेव नाम प्रभु का 🙏

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आंदोलनों से कुछ नहीं होगा -✍️◾परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज जब भविष्यवाणियां करते थे तब आगे भविष्य के खराब समय का स...
24/07/2026

आंदोलनों से कुछ नहीं होगा -

✍️
◾परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज जब भविष्यवाणियां करते थे तब आगे भविष्य के खराब समय का संकेत करते थे। कि आगे कितना खराब समय देश पर आ जायेगा।

◾उसी परिप्रेक्ष्य में बाबाजी ने कहा कि -
📌होगी जन जन में क्रांति, हम तुम्हें दिखा देंगे।
📌सब धर्म लड़ेंगे आपस में, हम तुम्हें दिखा देंगे।
📌राजा रैयत लड़ जाएंगी, हिन्दू मुस्लिम लड़ जाएंगे।
📌पिता पुत्र लड़ जाएंगे, गुरु शिष्य लड़ जाएंगे।
📌सब पार्टियां लड़कर खत्म हो जाएंगी, हम तुम्हें दिखा देंगे।

◾तब बाबाजी की बातों को सुनकर सब हंसते थे। आज जहां नज़र डालिए वहीं बाबाजी की वाणी सिद्ध होती नजर आ रही है। महात्मा कभी किसी का अहित नहीं चाहते हैं । वे समस्या भी बताते हैं और निदान भी बताते हैं। और जब उनकी कोई बात नहीं मानता तो वो नगर देश प्रांत वीरान हो जाता है।

◾"साधु अवज्ञा का फल ऐसा, जले नगर अनाथ कर जैसा।" आज पूरा विश्व जल रहा है, भारत जैसा धार्मिक देश जल रहा है। किससे? भ्रष्टाचार से, अनाचार व्यभिचार कुविचार से, मांसाहार से, काम क्रोध लोभ मोह अहंकार से, हिंसा कत्ल बलात्कार भ्रूण हत्या से, बेरोजगारी, बीमारी, महामारी, महंगाई, गरीबी से, लूट तंत्र से, ऐसी दावानल देश में धधक रही है जिसको कोई नहीं बुझा पा रहा है।

◾भारत के लोगों ने अपने संतों महात्माओं फकीरों ईश्वर परमात्मा प्रभु की कोई बात नहीं मानी, बाबाजी की कोई बात नहीं सुनी तो आज उनकी कौन सुन लेगा?

◾महात्माओं के सिवा आपकी फरियाद को कोई नहीं सुन सकता है। क्योंकि इस देश का अब कोई जिम्मेवार नहीं रहा जो इस देश की कोई जिम्मेवारी ले सके। इस देश का अब कोई रखवाला नहीं रहा, कोई मालिक नहीं रहा। प्रजातंत्र ही नहीं रहा। कौन आपकी सुनेगा?

◾ऐसे रोते रोते सब विनाश के मुख में चले जा रहे हैं। रोज लाखों लोग मर रहे हैं। पर बचने के रास्ते पर कोई नहीं जाता। जहां कोई नहीं सुनने वाला, वहां फरियाद करते हो, यही आपके अज्ञानता का परिचय है।

◾याद करो, जब 23 जनवरी 1975 को फूलबाग कानपुर में बाबाजी ने 45 मिनट संदेश दिया। आप सबने उनका विरोध किया। किसलिए? क्योंकि उन्होंने बच्चों के लिए, नवजवानों के लिए आवाज लगाई थी। क्या कहा था -
ऐ देश के कर्णधारों! जिम्मेवारों!
📌राशन दो तब भाषण दो, नहीं तो अपना आसन दो
📌अगर बाबाजी की मौज हो गई तो इन बच्चों को सिंहासन दो।
📌सुख धर्म कर्म यदि लाना है, तो हिजड़ों का राज्य हटाना है।

◾बाबाजी तो भारत की गद्दी पर नौजवानों को बैठाना चाहते हैं। क्योंकि इनकी काम करने की उम्र है। इतिहास उठाकर देख लीजिए कि परिवर्तन सदैव गुरु के द्वारा हुआ, और उन्होंने छोटे छोटे बच्चों से परिवर्तन करके दिखा दिया।

◾सतयुग में भक्त प्रहलाद और ध्रुव का राज्य रहा, वे बच्चे ही तो थे। त्रेतायुग में राम लक्ष्मण के द्वारा गुरु ने परिवर्तन कराया। वे 24 साल के बच्चे ऐसी भक्ति करके दिखाए जिनकी आज भी पूजा हो रही है।

◾द्वापर युग का कृष्ण भी बालक ही था, जिसके द्वारा गुरु सांदीपनि ने परिवर्तन करके दिखाया। अभी इसी कलियुग में गुरुओं का इतिहास देख लीजिए। गुरु रामदास ने वीर शिवाजी से परिवर्तन कराया, गुरु गोविंद ने अपने चारों बच्चों से परिवर्तन कराया, नेता सुभाष, भगत सिंह इन सबने गुरुभक्ति की, तब जाकर कुछ परिवर्तन हुआ।

◾लेकिन आज का नौजवान गुरु वुरु कुछ नहीं मानता है। वो अपने आप को ही गुरु समझता है। उसे लगता है वो जो कुछ कर रहा है, वो ही सही है। परिवर्तन ऐसे नहीं होता है। बिना गुरु के आप सब हार का मुख देखते ही रहेंगे।

◾अगर आप देश समाज परिवार में, अपने आंतरिक भाव विचारों में, अपने कर्मों में परिवर्तन करना चाहते हैं तो समय के पूरे गुरु की तलाश कीजिए। यदि वो मिल गए तो आपका सारा काम कर देंगे।

◾इतिहास गवाह रहा है कि इस भारत भूमि पर ऋषियों मुनियों ने, त्यागी तपस्वी शाकाहारी सदाचारी ब्रह्मचारियों ने राज्य किया, अवतारी शक्तियों ने राज्य किया, वे सब बच्चे ही थे बालक ही थे। क्योंकि उनका कोई गुरु था, उनका कोई पिता था, उनका कोई रक्षक था, उनका कोई मालिक था, उनका कोई मार्गदर्शक था। आपका मार्गदर्शक कौन है? आपका लीडर कौन है? विचार कीजिए।

◾बाबाजी ने कहा है वो सब सामने हो रहा है। और जो कुछ बचा है वो होने वाला है। उनके वाणी के सिवा किसी का कुछ नहीं होगा।

◾बाबाजी ने कहा कि आगे सरकार नाम नहीं रहेगी। सारी पार्टियां लड़कर आपस में खत्म हो जाएंगी। सारी धर्म जातियां खत्म होकर हिंदू धर्म - मानव धर्म - सनातन धर्म में विलीन हो जायेंगी। सारे गुरु, समय के सतगुरु में विलीन हो जाएंगे। सारे राजनीतिक संगठन , दूरदर्शी में विलीन हो जाएंगे।

◾आगे संतों का राज्य होगा। संतों का कानून होगा। देश की पतवार बालकों के हाथ में चली जाएगी। वे बच्चे बड़े सख्त होंगे, न्याय के तख्त पर बैठकर वे सगे मां बाप को भी माफ नहीं करेंगे। वे बच्चे सच्चे ईमानदार त्यागी तपस्वी शाकाहारी सदाचारी ब्रह्मचारी चरित्रवान होंगे। वे सतगुरु के आदेश पर कुर्बान होंगे।

◾संत जब उन बच्चों का आवाहन करेंगे तब जाकर वे चुटकियों में परिवर्तन करके दिखा देंगे। इसलिए प्रेमियों को घबराना नहीं चाहिए, अपने समय का इंतजार करना चाहिए। जिन लोगों ने गंदगी फैलाई है वे लोग अपना अपना उठा रहे हैं। हमको आदेश है केवल भजन करने का, और गुरु के अग्रिम आदेश का इंतजार करने का।

◾गुरु पूर्णिमा 2026, 27 जुलाई से 31 जुलाई तक सतगुरु धाम नैमिषारण्य जरूर आइए। वहां आपकी सारी शंका का समाधान हो जाएगा। "अरे मन ये दो दिन का मेला रहेगा, गुरु के बिना तू अकेला रहेगा।"

अर्जी हमारी, मर्जी आपकी 🙏

जयगुरुदेव नाम प्रभु का 🙏

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जय गुरुदेव नाम प्रभु का,, इन जीवो के कल्याण के लिए गुरु महराज ने कितनी यातना कष्ट को झेला,,
08/07/2026

जय गुरुदेव नाम प्रभु का,, इन जीवो के कल्याण के लिए गुरु महराज ने कितनी यातना कष्ट को झेला,,

खितौरा जन्मभूमि है या श्मशान भूमि है?✍️◾उत्तराधिकारी वही होता है जो उत्तर देने का अधिकारी हो। जिसकी संगत अगर भ्रमित हो ग...
04/07/2026

खितौरा जन्मभूमि है या श्मशान भूमि है?

✍️
◾उत्तराधिकारी वही होता है जो उत्तर देने का अधिकारी हो। जिसकी संगत अगर भ्रमित हो गई है, शंका व्याप्त हो गया है तो उत्तराधिकारी का कर्तव्य है कि मंच से उन शंकाओं का समाधान करें।

◾इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर मथुरा के वर्तमान गद्दीनशीं पंकज जी एवं उनके सहयोगी बाबूराम जी तथा सतीश जी से उत्तर मांगा जा रहा है। कृपया अपने मंच से इसका उत्तर दें।

◾भारतीय हिंदू संस्कृति में ये आदिकाल से विधान रहा है कि गृहस्थ के मरने पर उसे श्मशान भूमि में जलाया जाता है। और ब्रह्मचारी के देह त्याग पर उसे समाधि दी जाती है, जलाई नहीं जाती है।

◾संतमत में ये नियम तो और पवित्र है कि यदि कोई सत्संगी साधना करके पूरा हो गया है। यानी गृहस्थ संत हो गया है तो उसकी भी समाधि बनाई जाती है। जहां शरीर जलाई जाती है वहीं समाधि बन जाती है। किंतु जो बाल ब्रह्मचारी होते हैं उनको जलाया नहीं जाता, उन्होंने जो जगह पहले से बताई हो वहीं पर समाधि दी जाती है। ये संतमत का नियम है।

◾तो पंकज जी तो अब प्रेमियों के अनुसार अनामी महाप्रभु हो गए हैं, हुजूर हो गए हैं, बाबाजी ही अब पंकज में प्रवेश हो गए हैं। काली दाढ़ी में आ गए हैं। यानि पंकज जी में और बाबाजी में कोई अंतर नहीं तो हम सब प्रेमी पंकज जी में प्रविष्ट बाबा जयगुरुदेव से ये प्रश्न करते हैं कि आपने ऐसा क्यों किया? आपकी बनाई संतमत की मर्यादा कहां गई?

◾बाबाजी ने कभी नहीं कहा कि खितौरा में मेरा जन्मभूमि है। बाबाजी ने केवल मंदिर निर्माण के बहाने परमार्थी सेवा करवाई थी, जिसको वर्तमान में जन्मभूमि कहकर उच्चारा जा रहा है। यदि खितौरा मंदिर बाबाजी की पवित्रता का प्रतीक है तो 18.04.2021 को पंकज के पिता का दाह संस्कार मंदिर प्रांगण में क्यों किया गया?

◾क्या पंकज के पिता चरण सिंह गृहस्थ संत थे? या बाल ब्रह्मचारी संत थे? क्या वो कोई महापुरुष थे? या परमात्मा को प्राप्त कर चुके थे।

◾गृहस्थ होते चरित्रवान होते तो कभी दूसरी शादी नहीं करते। उन्होंने दूसरी शादी क्यों की 2009 में, जिसकी भनक कई वर्षों तक किसी को नहीं थी। ऐसे भोगी और व्यसनी मनुष्य के मरने पर उसका दाह संस्कार बाबा जयगुरुदेव के तथाकथित जन्मभूमि मंदिर प्रांगण में हुआ। क्या ये संगत से पूछकर किया गया था?

◾मंदिर तो प्रेमियों ने बनाया, अपने गुरु की याद में। क्या चरण सिंह को गुरु के समान माना जाए? क्योंकि इनकी सारी हरकतें यही कहती हैं कि बाबा जयगुरुदेव में और पंकज में और चरण सिंह में कोई अंतर नहीं है।

◾चिता ही जलानी थी तो कहीं और किनारे जला देते आप। मंदिर प्रांगण में क्यों जलाया, इससे बाबाजी का कितना बड़ा अपमान हुआ है। समाधि स्थल ही बनवानी थी तो कहीं और बनवा लेते , मंदिर के मुख पर क्यों बनवाया? बाबाजी से पहले तो चरण सिंह को ही प्रणाम करना पड़ता है। एक व्यसनी आदमी परमात्मा की बराबरी कैसे कर सकता है?

◾यही काम मथुरा में 2012 में हुआ। जब आपने कह दिया कि बाबाजी शरीर छोड़ दिए। तो बाबाजी तो बाल ब्रह्मचारी थे, उनके शरीर की समाधि देनी चाहिए थी, जलाया क्यों?

◾यदि समाधि स्थल ही बनवानी थी तो मथुरा मंदिर के पवित्र स्थल के बगल में क्यों समाधि बनवाई। क्या बाबाजी आपके कान में कह गए कि मेरे मरने के बाद इसी जगह में मेरी समाधि बनवा देना जैसे कि तिवारी जी कहते हैं कि गुरु महाराज हमको कान में कहे कि तुम ही आगे नामदान दोगे?

🔶 बाबाजी ने तो ये बार बार कहा कि इस जयगुरुदेव मंदिर में मेरा कोई चिन्ह मत रखना, यहां तक कि मेरा कोई बाल भी मत रखना। ये हमारे गुरु महाराज का स्थान है। तुमको जहां बनवाना होगा पूरा देश खाली है, कहीं बनवा लेना।

◾फिर भी आदेश के खिलाफ जानबूझकर मंदिर के पीछे समाधि क्यों बनवाई? खितौरा में आप अपने पिता की समाधि तो मंदिर के आगे बनवाए हैं? और मथुरा में बाबाजी की समाधि मंदिर के पास पीछे बना दिया। बाबाजी पीछे हो गए, चरण सिंह आगे हो गए। क्या यही संतमत है?

◾और हिंदुस्तान में ऐसा कौन है जो समाधि स्थल के ऊपर चढ़कर सत्संग सुनाता है? नामदान सुनाता है? आप दिन रात जयगुरुदेव प्रभु को अपमानित करके भी चैन की नींद कैसे सोते हैं?

◾क्या आपने ये सब काम करने के लिए कभी संगत से सलाह ली। इसमें सबसे बड़े दोषी हैं संस्था के उपाध्यक्ष रामप्रताप। इन्होंने अधर्म रोकने में कोई प्रयत्न नहीं किया।

◾हिंदुस्तान में जिसका पति मर जाता है वो स्त्री विधवा हो जाती है। वो अपना सारा श्रृंगार त्याग कर सादे वस्त्र में आ जाती है। लेकिन यहां तो सादगी दिखती ही नहीं है।

◾संतमत तो सादगी का ही मत है। आश्रम प्रांगण में रंग बिरंगे कपड़े पहनना, गृहस्थियों का श्रृंगार अपनाना अनुचित है। फिर भी आप श्रृंगार कर रही हैं, क्या आप संतमत को अपमानित नहीं करती हैं? आप ये क्यों नहीं सोचती कि आपको पूरा विश्व देख रहा है, आप उन विधवाओं को क्या आदर्श दिखाना चाहती हैं। आप भी विचार कीजिएगा।

◾अंततः खितौरा में जो चरण सिंह का समाधि स्थल बना हुआ है बाबाजी के मंदिर के सामने । उससे ये सिद्ध होता है कि बाबाजी की जन्मभूमि खितौरा नहीं है। अगर होती तो वर्तमान अनामी महाप्रभु उसके मर्यादा को बचा कर रखते। जितना संतमत का अपमान पिछले 15 सालों में हुआ है उतना 800 सालों में भी कभी नहीं हुआ था।

📌उत्तराधिकारी जी! आपके उत्तर की हमें प्रतीक्षा रहेगी। कृपया संगत की शंकाओं का निदान करें।

जयगुरुदेव नाम प्रभु का
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दयाल प्रभु के दयाल बाग
23/06/2026

दयाल प्रभु के दयाल बाग

बच्चा!शंका मत करना....
23/06/2026

बच्चा!शंका मत करना....

॥ जयगुरुदेव नाम प्रभु का ॥कलयुग जा रहा है सतयुग आ रहा है।आवश्यक सूचनादेश के सभी संगतों को सूचित किया जा रहा है कि जीवन र...
18/06/2026

॥ जयगुरुदेव नाम प्रभु का ॥
कलयुग जा रहा है सतयुग आ रहा है।
आवश्यक सूचना

देश के सभी संगतों को सूचित किया जा रहा है कि जीवन रक्षक गुरु पूजा महान पावन पर्व (27 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक) जयगुरुदेव आध्यात्मिक आश्रम गुरुद्वारा सतगुरु धाम नैमिषारण्य मिश्रिख तीर्थ जिला सीतापुर उत्तर प्रदेश की पावन तपोभूमि पर होगा।

अतः इस गुरु पूर्णिमा पर्व पर निम्न सेवाओं में अपना योगदान अवश्य करें:

१) दो किलो गेहूं और पांच किलो धान या 3 किलो चावल 25 रुपए प्रति व्यक्ति |
३) भंडारे से संबंधित जैसे तिलहन, दलहन एवं अन्य वस्तुएं दे सकते है।
४) भंडारा सेवा हेतु प्रत्येक जिले से 2 ट्राली लकड़ी सेवा का आदेश।

नोट:- यदि आप गेहूं, धान अथवा लकड़ी नहीं पहुंचा सकते है तो इसके बदले में आप रुपए बनाकर सेवा में योगदान कर सकते हैं।
आदेशानुसार :- परम पूज्य स्वामीजी महाराज
आदेश दिनांक :- 18 जून 2026 , श्रद्धा सेवा आश्रम।
संपर्क सूत्र:- 7562802022, 87895 07714 जयगुरुदेव_आवाज़ TM

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