13/03/2026
सत्यलोक यात्रा🚩
ऊँ श्री अमरा गुरु विजयते राम
ऊँ श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः
ऊँ श्री गणेशाम्बिकायै नमः
हरि ऊँ गुरूजी
संत मिलन को चालिये, तज मान मोह अभिमान।
ज्यों ज्यों पग आगे धरे, कोटि यज्ञ समान।।
यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
शीश दिए गुरु मिले,तो भी सस्ता जान।।
23 मई मंगलवार सवेरे श्री दादाजी महाराज शोभाराम जी रघुवंशी के घर पर विराजमान थे। श्री दादाजी महाराज ने शोभाराम जी रघुवंशी पर रखी अपनी गदा मंगवा कर 8:40 बजे यात्रा का श्रीगणेश किया, रघुवंशी जी के घर से श्री राधा पुरम में लाल बाबा के मंदिर पर श्री दादाजी महाराज पहुंचे, वहां गुरुदेव भगवान ने नारियल एवं हवन सामग्री धूनी में छुड़वायी, लालबाबा से गुरु महाराज ने मंदिर में रखा अपना लोटा मंगवाया तथा बड़ का झोंरा मंगवाया। मंदिर में आए दर्शनार्थी भक्तजनों को प्रसाद वितरित करवाया। इस प्रकार श्री राधा पुरम मंदिर से आगे बढ़े हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास पठा पटेल को आशीर्वाद देकर श्री दादाजी महाराज ने गांव के लिए विदा किया।
श्री दादाजी महाराज के रथ में श्री गुड्डा बाबा, श्री सुरेंद्र सिंह भाटी मालीबांया, कुलदीप भाटी सीगांव और दूसरी गाड़ी में श्री राजकुमार जी पाराशर बेगमगंज, श्री मोहन सिंह जी रघुवंशी शिक्षक बटेरा, श्री अभिषेक जी रघुवंशी सिंहपुर, श्री बृजेंश लोधी किरतपुर न्यू मार्केट से फल लेकर एलबीएस हॉस्पिटल के पास देवी जी के मंदिर पहुंचे। वहां अष्टावक्र जी गुरु जी ने श्री गुरुदेव भगवान का भाव भक्ति से परिपूर्ण सत्कार एवं पूजन किया। श्री गुरुदेव भगवान ने माता जी के हवन कुंड में नारियल तथा हवन सामग्री छुड़वायी, हनुमान जी तथा काली मैया जिस वृक्ष के नीचे विराजमान थे उस पर भक्तों से चुनरी चढ़ावायी । काली माता का त्रिशूल श्री दादाजी महाराज स्वयं ने धारण किया तथा अपना शस्त्र काली माता जी के त्रिशूल के स्थान पर विराजित करवाया। इसके बाद अष्टावक्र जी महाराज से विदाई लेकर लालघाटी में टीआई साहब को श्री दादाजी महाराज ने दर्शन दिए इसके पश्चात दुबे जी, पाठक जी एवं पंडित नितेश जी शर्मा श्री दादाजी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे।
पंडित नितेश शर्मा जी को लालघाटी से साथ लेकर श्री दादाजी महाराज भक्त जनों के साथ कुबेरेश्वर धाम सीहोर पंडित प्रदीप मिश्रा जी के वहां पहुंचे। वहां पर पुलिस वालों को लड्डू प्रसाद वितरित करवाया। इसके पश्चात पप्पू एंड पप्पू रेस्टोरेंट पर भक्तों के भगवान तथा भक्तों ने भोजन प्रसादी पायी। इसके पश्चात गुरुदेव भगवान श्री दादा नरखेड़ा हनुमान मंदिर पर पहुंचे ,पाँच लड्डू का भोग हनुमान जी महाराज को गुरुदेव भगवान ने लगवाया।
इसके पश्चात श्री संकटमोचन महादेव मंदिर विरल गुप्त नर्मदा जलधारा ग्राम देवझिरी जिला झाबुआ शाम को 6:44 बजे श्री दादाजी महाराज भक्त जनों को लेकर पहुंचे।
इस स्थान पर श्री सिंगाजी महाराज ने मां नर्मदा को अपनी भक्ति की शक्ति से बुला लिया। मां को भक्त की करुण पुकार सुनकर आना ही पड़ा। देवझिरी में संकट मोचन महादेव जी का भव्य मंदिर जिसमें श्री हनुमान जी महाराज विराजमान है पास में श्री सिंगाजी महाराज का पादुका मंदिर गोमुख से मां नर्मदा की जलधारा निकली है तथा कुंड बना है।
श्री दादाजी महाराज की कृपा से कुंड में नाग देवता के दर्शन हुए। यहां पर आश्रम में संत माताराम ने भक्तों को चाय प्रसादी पिलवायी। श्री दादाजी महाराज ने देवझिरी से मां नर्मदा का जल बोतलों में भरवा कर साथ लिया। 11:00 डाकोर जी से थोड़ी दूर पहले स्थित एक भोजनालय में सभी ने भोजन प्रसादी पायी, उसी भोजनालय में एक छोटे से कुत्ते को श्री दादाजी महाराज का स्नेह प्राप्त हुआ।
सब में आत्मा रूप स्थित परमात्मा के दर्शन करने वाले परमहंस श्री दादाजी महाराज की लीला उनकी कृपा के बिना नहीं जाने जा सकती विद्या विनय से संपन्न ब्राह्मण कुत्ते, हाथी, गौ और चांडाल को समभाव रुप से दर्शन की विधि जो श्रीमद्भागवत गीता में बताई है उसके प्रत्यक्ष दर्शन भक्तों को प्राप्त हुए।
इस प्रकार सभी भक्त जन श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में मंगलवार 23 मई रात्रि को 11:30 बजे श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर राम चौक डाकोर जी पहुंचे। वहां श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर के महंत श्री जयराम दास जी महाराज के साथ संतो ने श्री दादाजी महाराज की अगवानी की। श्री जयराम दास जी सरल प्रवृत्ति के सेवाधारी संत है सभी संतों का श्री दादाजी महाराज के प्रति अनुराग भक्ति भाव देखकर सिर श्रद्धा से उनके चरणों में झुक जाता है।
प्रातःकाल 24 मई बुधवार डाकोर जी के श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर महंत श्री जयराम दास जी को श्री दादाजी महाराज ने छिंद धाम से लाए हुए घंटे को दे कर श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर में लगवाया, श्री सत्यनारायण भगवान को 23 किलो आम, केले और खजूर का भोग लगवाया, श्री दादाजी महाराज की परमहंसी क्रिया में अस्त्र शस्त्र निर्माण हुआ। इसी बीच श्री दादाजी महाराज के परम भक्त भाई लक्ष्मण सिंह परमार पहुंचे,फूल माला से गुरु महाराज का भावमयी पूजन अभिनंदन किया, लक्ष्मण भाई गुरुदेव भगवान के 45 वर्षों से सेवक हैं , लक्ष्मण सिंह जी का संपूर्ण परिवार गुरुदेव भगवान का अनन्य भक्त हैं लक्ष्मण भाई श्री दादाजी महाराज को साक्षात ईश्वर बताते हुए कहते हैं कि मेरे पैर के दो टुकड़े हो गए थे उसके पश्चात ऑपरेशन हुए को तीन दिन हुए थे कि श्रीदादा जी महाराज उन्हें द्वारिका अपने साथ ले गए। लक्ष्मण सिंह जी आगे बताते हैं कि उनकी यात्रा में उन्हें बिल्कुल भी तकलीफ नहीं हुई दादा जी महाराज का चमत्कार देखकर आश्चर्य होता है।
इसके पश्चात श्री दादाजी महाराज ने सभी भक्तों को डाकोर जी के राजा रणछोड़ मंदिर दर्शन का आदेश देते हुए कहा कि गोमती घाट पर गौओं और मछलियों को आटा खिलाना। गोमती घाट के किनारे सुंदर मंदिर बने हुए हैं श्री दादाजी महाराज के आदेश अनुसार सभी भक्तों ने मछलियों तथा गौओं को आटा खिलाया। रणछोड़ भगवान के दर्शन के पश्चात सभी भक्तों ने बाल भोग पाया इसके बाद श्री बलराम जी मंदिर में दर्शन कर गौशाला देखी। इसके बाद सभी भक्त श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर में गुरुदेव के पास पहुंचे।
भोजन प्रसादी उपरांत श्री दादाजी महाराज ने गलतेश्वर महादेव मंदिर दर्शन के लिए आदेश दिया महादेव मंदिर डाकोर जी से 16 किलोमीटर दूर सोलंकी युग का एक शिव मंदिर है जो माही और गलता नदियों के संगम पर स्थित है प्राचीन काल में गालव ऋषि यहां रहते थे गलतेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने पर श्री दादाजी महाराज ने आश्रम में स्थित प्राचीन धूने के चारों और 23 घी के दीपक प्रज्वलित करवाएं , हवन सामग्री धूने में भक्तों द्वारा छुड़वाई तथा दर्शनार्थियों को लड्डू प्रसाद वितरित करवाया। गलतेश्वर महादेव मंदिर दर्शन के पश्चात श्री दादाजी महाराज भक्तों को लेकर श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर राम चौक डाकोर जी पहुंचे।
विश्राम उपरांत श्री दादाजी महाराज ने गोमती घाट रणछोड़ जी के मंदिर के सामने मुंडन करवाया। श्रीसत्यनारायण भगवान मंदिर की आरती के पश्चात भक्तों ने भोजन प्रसादी पाकर रात्रि विश्राम श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर डाकोर जी में किया।
प्रातःकाल 25 मई गुरुवार श्री शोभाराम जी रघुवंशी उनके दो पुत्र ,छोटे भाई तथा श्रीलाल बाबा भोपाल से डाकोर जी पहुंचे। गुरुदेव भगवान ने सभी भक्तों को एक एक मुट्ठी खिचड़ी दी जिसमें सिक्के भी थे सिक्कों में से पांच के सिक्के निकला कर और खिचड़ी सभी भक्तों से श्री दादाजी महाराज ने वापस ले ली । श्री दादाजी महाराज ने 7 किलो पेड़ा, तीन किलो सेब तथा 3 किलो संतरा का भोग श्री सत्यनारायण भगवान को लगवाया।गुरु पुष्य नक्षत्र गुरुवार श्री दादाजी महाराज ने श्री सत्यनारायण भगवान में सत्यनारायण भगवान की कथा 5 भक्तों को यजमान बनाकर करवाई। कथा आरंभ करवाकर श्री दादाजी महाराज गोमती घाट श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर में पहुंचे श्री दादाजी महाराज ने धूनी में हवन सामग्री तथा घी छुड़वाया। श्री हनुमान जी महाराज से बर्तन की अदला बदली की तथा पांच दीपक जलवाए। हनुमान जी महाराज को पेड़ा लड्डू और बर्फी का भोग लगवाया। मंदिर में कपड़ों से रस्सी बनाकर स्वयं के गले में श्री दादाजी महाराज ने धारण की। इसके पश्चात श्री दादाजी महाराज श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर कथा में पहुंचे एक अद्भुत बात थी कि श्री दादाजी महाराज आरती से थोड़े समय पूर्व पहुंचे।
आरती पश्चात संत भगवान और ब्राह्मण देवता पधारे। इसी बीच एक भजन गायिका भक्त गुरु महाराज के पास सरस्वती मैया का आशीर्वाद मांगने आई ।भजन गायिका के पास काली चुनरी थी, श्री दादाजी महाराज ने काली चुनरी लेकर लाल चुनरिया माता राम को आशीर्वाद स्वरुप दी। संतों का तिलक, फूल और दक्षिणा द्वारा श्री दादाजी महाराज ने अभिनंदन करवाया। उसके पश्चात श्री सत्यनारायण भगवान को भोग लगवाया ,भगवान के भोग के पश्चात भंडारा प्रारंभ हुआ ।भंडारे में देवझिरी से लाया गया मां नर्मदा का जल श्री गुरुदेव भगवान ने डलवाया, भंडारे में सब्जी, पूड़ी, आमरस, दाल और महाप्रसाद(चावल) था। भंडारे के साथ ही डाकोर जी की रीति के अनुसार ब्राह्मणों तथा संतो को दक्षिणा तथा गमछा दिया गया। संतो ब्राह्मणों तथा गुरु भगवान के भोजन के उपरांत सभी भक्तों ने भोजन प्रसादी पाई।
विश्राम उपरांत श्री दादाजी महाराज ने सभी भक्तों को बुलाया। दो गाड़ियों को वापस मध्य प्रदेश जाने की आज्ञा देखकर गुरु भगवान ने भगवान द्वारकाधीश की नगरी द्वारिका के लिए प्रस्थान किया । आगे की यात्रा के लिए श्री दादाजी महाराज की सेवा में पंडित नितेश जी शर्मा, सुरेंद्र सिंह भाटी, कुलदीप भाटी थे।
शाम 6:30 बजे के आसपास श्री दादाजी महाराज चामुंडा माताजी मंदिर चोटीला पहुंचे। माताजी मंदिर के पश्चात 7:45 बजे 52 हनुमान मंदिर नानी मोलड़ी श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज पहुंचे। श्री दादाजी महाराज ने एक दीपक हनुमान जी महाराज के मंदिर में तथा एक दीपक शंकर भगवान के मंदिर में प्रज्वलित करवाया, भक्तों को लड्डू बर्फी प्रसाद दिया तथा हनुमान जी के मंदिर से रोटी ली इसके पश्चात रात्रि में 22:32 बजे होटल तुलसी रेजीडेंसी बेड़गांव में गुरुदेव भगवान ने रात्रि विश्राम किया। भक्तों ने भोजन प्रसादी पाई तथा श्री दादाजी महाराज ने छाछ ली।बची हुई छाछ को तसले में रखवाया।
प्रातः काल 26 मई शुक्रवार को बेड़गांव से 6:52 बजे यात्रा का आरंभ श्री दादाजी महाराज ने किया।8:50 बजे श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज श्री फाफेड़ा हनुमानजी मंदिर (जामनगर जिला)पर पहुंचे। वहां पर श्री दादाजी महाराज ने गायों को डाकोर जी के हनुमान जी मंदिर से लाए हुए तसले में छाछ तथा बावन हनुमान जी मंदिर नानी मोलड़ी से लाई हुई रोटी ,लड्डू एवं बर्फी खिलवायी। फाफेड़ा हनुमान जी मंदिर में श्री दादाजी महाराज ने हवन कुंड में हवन सामग्री और नारियल छुड़वाए,श्री सत्यनारायण भगवान मंदिर डाकोर जी से लाए हुए घंटे को फाफेड़ा हनुमान जी मंदिर डाकोर जी के हनुमान मंदिर में बनी रस्सी से बंधवा कर लगवाया । यहां एक महात्मा जी रहते हैं उनके पास 5-6 गौ माता, एक कुत्ता तथा एक अश्व हैं। यहां गौ माता का मंदिर भी हैं ,महात्मा जी बता रहे थे कि श्री दादाजी महाराज समय-समय पर यहां आते रहते हैं महात्मा जी ने हम सभी को चाय प्रसादी दी,गुरू महाराज ने महात्मा जी को एक कुर्ता, गमछा तथा पंचा पहनाया, पेड़ा एवं बर्फी प्रसाद दिया। महात्मा जी की बिल्ली के साथ श्री दादाजी महाराज का स्नेह देखकर श्री रामचरितमानस की चौपाई सिया राम मय सब जग जानी चरितार्थ होती हुई दिखी। इसी समय श्री दादाजी महाराज की अमृतवाणी गुंजायमान हुई 🌸संत मिले अनुकूल तो बरसे फूल ही फूल, संत मिले प्रतिकूल तो शूल ही शूल। श्री दादाजी महाराज ने यहां से नक कटा हंसिया , लोहे का डंडा तथा झंडा लिया ।
9:14 बजे शंकर स्वरूप गुरु भगवान के साथ श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए यात्रा आरंभ हुई।9:52 बजे श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में भजन करते हुए भक्त नागेश्वर पहुंचे। नागेश्वर में श्री गुरुदेव भगवान की आज्ञा अनुसार अभिषेक करवाया ,नागेश्वर में भगवान शंकर और पार्वती की नाग नागिन रूप में पूजा होती हैं। अभिषेक के पश्चात भगवान शिव के अभिषेक की मालाएं शिव स्वरूप गुरु महाराज को अर्पित कर भक्तों ने जीवन लाभ लिया। स्मृति स्वरूप गुरुदेव भगवान के साथ फोटो खींच खिंचवायें और बाल भोग प्राप्त किया।
श्री दादाजी महाराज महादेव मंदिर गोपी तालाब पहुंचे , गोपी तालाब पर श्री दादाजी महाराज ने गायों को फाफड़ा खिलाया तथा बाल गोपालों को पेड़ा प्रसाद दिया गोपेश्वर महादेव के दर्शन के पश्चात गोपी चंदन लिया श्री दादाजी महाराज के भक्त के निवेदन पर सभी ने चाय प्रसादी ली। गोपी तालाब से श्री दादाजी महाराज भेंट द्वारिका पहुंचे। भेंट द्वारिका से चमत्कारी हनुमान जी मंदिर मीठापुर में दो आम का भोग श्री दादाजी महाराज ने लगवाया। इसके पश्चात रुकमणी मैया के मंदिर श्री दादाजी महाराज पहुंचे श्री दादाजी महाराज ने माला,आम की टोकरी ,पेड़ा और भक्तों से लिए पांच पांच के सिक्के रुकमणी मैया को अर्पित किया। रुकमणी मैया के मंदिर में पंडा जी ने श्री दादाजी महाराज को मंदिर का झंडा लाकर दिया श्री दादाजी महाराज ने पंडाजी को दक्षिणा दी।,पक्षियों को लड्डू बर्फी डलवायी इसके पश्चात श्री दादाजी महाराज भगवान द्वारकाधीश की नगरी द्वारका पहुंचे। समुद्र किनारे सीताराम आश्रम खाक चौक राम घाट संत श्री दामोदर दास जी महाराज के यहां पहुंचे। समुद्र किनारे रामघाट पर श्री दादाजी महाराज ने गायों को नागेश्वर से लाये हुए जलेबी और खमण खिलवाया। संत श्री दामोदर दास जी महाराज राजस्थान के कोटा जिले में ग्राम धोरी तहसील दीगोद में श्री राम कथा एवं नव दिवसीय पंचकुंडात्मक श्रीराम महायज्ञ करवाने गए हैं, आश्रम में उपस्थित सेवादार माताजी ने श्रीदादाजी महाराज को बताया। श्री दादाजी महाराज गाड़ी में ही विराजमान थे।श्री दादाजी महाराज और भक्तों ने भोजन प्रसादी पाई। आश्रम की सेवादार ममतामयी माताजी ने प्रेम पूर्वक भोजन पवाया तथा आश्रम के दर्शन करवाये । बड़ा सुंदर सीताराम आश्रम बना हुआ है आश्रम की दीवारों पर श्री रामचरितमानस की चौपाइयां लिखी हुई है जो कि हमारी यात्रा की प्रासंगिकता पर थी जो इस प्रकार थी
अब मोहि भा भरोस हनुमंता।
बिनु हरि कृपा मिलें नहीं संता।।
सनमुख होहिं जीव मोहि जबहिं।
जन्म कोटि अघ नासहिं तबहिं।।
सुनु भरत भावी प्रबल, बिलख कहे मुनि नाथ।
हानि लाभ, जीवन मरण ,जसु अपजसु विधि हाथ।।
तुम्ह कृपाल जा पर अनुकूला।
ताहि न ब्याप त्रिविध भवसूला।।
सीताराम राम चरन रति मोरें।
अनुदिन बढई अनुग्रह तोरें।।
राम कृपा दिखला दे तो संत कृपा हो जाती हैं संत कृपा दिखला दे तो भगवंत कृपा हो जाती है।
सीताराम आश्रम के पश्चात गुरुदेव भगवान ने समुंद्र किनारे द्वारका नगरी द्वारका रेलवे स्टेशन भीतरी द्वारका शहर के दर्शन करवायें । इसके पश्चात गुरुदेव भगवान ने समुंद्र किनारे एक होटल में विश्राम किया किया हम लोगों ने गोमती नदी में स्नान किया तथा गुरुदेव भगवान की आज्ञा अनुसार गाड़ी में रखी समस्त भोजन सामग्री गायों और कुत्तों को खिला दी। समुंद्र किनारे गोमती नदी पर विशाल घाट , भव्य पुल, विशाल एवं शिल्प कला से भरपूर भगवान श्री द्वारकाधीश का मंदिर अद्भुत दृश्य का निर्माण करता है।
गुरुदेव भगवान की आज्ञा ले कर भगवान द्वारकाधीश के दर्शन के लिए गए विशाल परकोटा एवं मुख्य द्वार से श्री द्वारकाधीश भगवान के मंदिर में प्रवेश किया उस समय प्रवेश थोड़ी देर के लिए बंद था क्योंकि द्वारकाधीश भगवान के भव्य मंदिर के झंडे को दिन में 5 बार बदला जाता है, झंडा लगवाने वाले भक्तों को ₹200000 देने पड़ते हैं 2 साल की एडवांस बुकिंग चल रही है। काफी देर लाइन में लगने के पश्चात भगवान द्वारकाधीश दर्शन प्राप्त हुए मानो जीवन लाभ आज ही प्राप्त हुआ है। भगवान द्वारकाधीश के दर्शन हमारी आंखों को ललचाते रहे लेकिन पुजारियों की समय की प्रतिबद्धता भी प्रणम्य थी हमारी यात्रा इसलिए भी अद्भुत थी भगवान ही हमें भगवान के दर्शन करवा रहे थे। भगवान के दर्शन के पश्चात दुर्वासा ऋषि मंदिर के दर्शन किए उनके पश्चात आदि गुरु शंकराचार्य जी की शारदा पीठ के दर्शन किए ।उसके पश्चात गुरुदेव भगवान के पास पहुंचे।
भगवान द्वारकाधीश की नगरी द्वारिका से शाम 7:23 बजे भगवान सोमनाथ की नगरी प्रभास पाटन के लिये श्री दादाजी महाराज की यात्रा आरंभ हुई। रात्रि 8:14 बजे हरसिद्धि माताजी श्री दादाजी महाराज पहुंचे। पुजारी जी ने बताया हरसिध्दि माताजी उज्जैन शक्तिपीठ है और हरसिद्धि माता जी का यह स्थान सिद्ध पीठ है। बवासीर के रोगियों के लिए यहां माताजी के मंदिर में एक ताबीज दिया जाता है जिसे चांदी के अंगूठी में मंगलवार या रविवार को धारण करने पर रोगी को आराम मिलता है। श्री गुरुदेव भगवान ने यहां होटल से नाश्ता एवं कढी मंगवाया। रात्रि 11:45 सोमनाथ पहुंचे। होटल में विश्राम किया। संत ,सती और सूरमा की धरती सौराष्ट्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं भगवान चंद्रमा ने दक्ष प्रजापति द्वारा दिए गए श्राप से बचने के लिए की थी। भगवान सोमनाथ मंदिर को 17 बार आक्रमणकारियों ने तोड़ा जिसकी रक्षार्थ भीमराज सोलंकी तथा हमीर सिंह जी गोहिल जैसे हजारों वीरों द्वारा आत्मोत्सर्ग किया गया लेकिन उन विदेशियों को क्या पता कि पाषाण के शिवलिंग को तोड़ सकते हो लेकिन हमारी आत्मा में स्थित आत्म ज्योतिर्लिंग को तो तोड़ना तो दूर तुम उसे देख भी नहीं सकते यही तो सनातन की शक्ति है लेकिन इतने बड़े भारत राष्ट्र की धार्मिक चेतना पर यह तांडव किस कारण से हुआ इसका मंथन हमें करना चाहिए तथा आगे कभी ऐसा ना हो इसके लिए हमारे राष्ट्र की सत्ता के सिंहासन पर किसे बैठाना है ताकि हमारी धर्म और संस्कृति सुरक्षित रहे इसका हमें ध्यान रखना हैं। 27 मई शनिवार सवेरे 8:00 बजे करीब श्री दादाजी महाराज सोमनाथ मंदिर पहुंचे वहां छोटी सी शक्ति स्वरूपा कन्या ने श्री दादाजी महाराज को तिलक चंदन किया, इसके पश्चात श्री गुरुदेव भगवान की आज्ञा से सोमनाथ भगवान के दर्शन के लिए हम गये। मंदिर की भव्यता, शिल्पकारिता ,स्वच्छता बहुत अच्छी थी भगवान सोमनाथ के दर्शन पश्चात समुद्र दर्शन किया। अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य, वास्तुशिल्प तथा ईश्वरी चेतना युक्त भगवान सोमनाथ मंदिर दर्शन कर आत्मिक संतुष्टि प्राप्त हुई । भगवान सोमनाथ दर्शन के पश्चात शंकर स्वरूप श्री गुरुदेव भगवान को फूल आक और पुष्पों की मालायें अर्पित कर मानसिक पूजन किया ।हम लोग गुरु महाराज के पास पहुंचे तब तक दीनदयाल गुरुदेव भगवान को याचक समुदाय ने घेर लिया था, गुरु महाराज ने याचकों को चीकू फल वितरित करवाये ।
भगवान सोमनाथ के मंदिर से श्री गुरुदेव भगवान गोलोक तीर्थ धाम पहुंचे , इस स्थान पर भगवान श्री कृष्ण भगवान का अंतिम संस्कार हुआ था। हिरण नदी के किनारे गोलोक धाम तीर्थ की नारियल वृक्षों से आच्छादित प्राकृतिक छटा अद्भुत है। यहां गीता मंदिर संगमरमर के पत्थर से बना है जिसके खम्भों पर श्रीमद्भगवद्गीता 18 अध्याय लिखे गए हैं भगवान श्री कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा में मूर्ति विराजित है , पास में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर है इसमें भगवान नारायण, लक्ष्मी जी तथा गरूड़ जी विराजमान है। लक्ष्मी नारायण भगवान के मंदिर के पास प्रसिद्ध कृष्ण भक्त हरिहर महाप्रभुजी की बैठक , बलदेवजी मंदिर,सोमनाथ महादेव जी मंदिर और शेष अवतार मंदिर है। इस स्थान के मध्य खुले प्रांगण में श्री कृष्ण भगवान का पादुका मंदिर है। यहां श्री गुरुदेव भगवान ने बिल्लियों को दुलारा तथा पक्षियों को दाना डलवाया।
इसके पश्चात कपिला ,हिरण और सरस्वती नदी के संगम पर श्री गुरुदेव भगवान पहुंचे ,गुरुदेव भगवान की आज्ञा अनुसार हमने मछलियों को आटा बिस्कुट तथा गायों को हरा चारा खिलाया और अल्पाहार किया ।श्री गुरुदेव भगवान ने जलेबी प्रसाद बुलवाया। इसके पश्चात श्री गुरुदेव भगवान भालका तीर्थ पहुंचे जहां जरा नामक शिकारी ने भगवान श्री कृष्ण के पैर में पद्य चिन्ह को हिरण की आंख समझकर तीर मारा था। यहां भगवान श्रीकृष्ण की अर्ध विश्राम में मूर्ति है जिसके सामने शिकारी जरा हाथ जोड़कर क्षमा मांगने की मुद्रा में खड़ा है पास में महादेव जी मंदिर है।यहां गुरुदेव भगवान ने जलेबी वितरित करवायी।जिस प्रकार रामेश्वर तीर्थ भगवान श्री राम और शंकर भगवान की लीला स्थली है उसी प्रकार सोमनाथ तीर्थ भगवान नटवर तथा नटराज का मिलन स्थल है।
10:30 बजे भालका तीर्थ से श्री गुरुदेव भगवान ने जूनागढ़ श्री दत्त भगवान की नगरी की ओर प्रस्थान किया रास्ते में आम, जामुन और बेर लिये।12:09 बजे जूनागढ पहुंचे , जूनागढ़ में श्री गुरुदेव भगवान ने दत्तात्रेय भगवान के मंदिर जाने वाली सीढ़ियों पर हनुमान जी महाराज को नारियल का भोग लगवाया फिर एक दुकान से एक गन्ना लिया जिसमें 23 गांठे थी ।7,8 और 9 गांठों की तीन लकड़ी ली की गांठों का जोड़ 24 था जो दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरुओं की प्रतीक थी। श्री दादाजी महाराज ने दत्त भगवान मंदिर के पास दुकान से कमंडल और अन्य सामग्री ली । दोपहर 1:42 बजे जूनागढ़ से डाकोर जी के लिए श्री दादाजी महाराज ने प्रस्थान किया। राजकोट के समीप सप्त हनुमान जी मंदिर में श्री दादाजी महाराज ने नारियल, 5 आम तथा जामुन का भोग लगवाया । शाम को डाकोर राजकोट मार्ग पर स्थित डोलिया ग्राम में श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में विश्व प्रसिद्ध गिर गौ माता के समूह के दर्शन हुए। बपरोला नामक स्थान पर श्री गुरुदेव भगवान के अनन्य भक्त सूरसिंह जी (शिक्षक )पालीताणा भावनगर से पहुंचे, भक्त और भगवान का आत्मिक मिलन वंदनीय है, भगत जी को श्री दादाजी महाराज ने जामुन और आम प्रसादी दी।
नाडियाद हो कर श्रीदादाजी महाराज 27 मई शनिवार को करीब 11:00 बजे डाकोर जी श्री सत्यनारायण मंदिर पहुंचे। श्री सत्यनारायण मंदिर में सुंदरकांड संपूर्ण हुआ था और श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज पहुंच गए। श्री गुरुदेव भगवान के पहुंचने पर महंतश्री जयराम दास जी स्वयं द्वार पर पहुंचकर स्वागत किया श्री दादाजी महाराज ने हनुमान जी महाराज को 5आम और जामुन का भोग लगवाया। महंत जी ने श्री दादाजी महाराज के लिए दूध एवं खिचड़ी मंगवाई रात्रि11:30 बजे संतो द्वारा श्री दादाजी महाराज के प्रति सेवा भाव वंदनीय है। प्रातःकाल 6:00 बजे 28 मई रविवार श्री दादाजी महाराज के दर्शन कर श्री सत्यनारायण भगवान की आरती में शामिल हुए श्री दादाजी महाराज ने कहा कि छत पर चीकू लेकर बंदरों को भोग लगाओ कि मैं थोड़े समय पूर्व ही ऊपर से आया था लेकिन मैं बंदरों को नहीं देख पाया अंतर्यामी श्री दादाजी महाराज की लीला अद्भुत है ऊपर बंदर थे।
श्री सत्यनारायण मंदिर में एक दंडी स्वामी जी रुके हुए थे सवेरे श्री दादाजी महाराज के अस्त्र शस्त्र निर्माण हो रहा था तब दर्शन को पधारे ,दंडी स्वामी जी और श्री दादा जी महाराज का सत्संग हुआ। दंडी स्वामी जी ने श्री दादाजी महाराज के दर्शन पाकर कहा कि संत भगवान के दर्शन हुए अब पूरे जीवन मंगल ही मंगल है। फिर दंडी स्वामी जी बोले भगवान सब में आत्मा रूप में रमा हुआ है किसी रूप में दर्शन देते हैं। दंडी स्वामी जी से नर्मदाखंडी श्री दादाजी महाराज ने कमंडल अदला बदली की और दक्षिणा दी।
इसके बाद श्री दादाजी महाराज श्री दादूराम महाराज जो एक उच्च कोटि के संत थे जिन्होंने शंकराचार्य जी के सामने गोमती घाट डाकोर जी के जल पर चलकर अपने योग बल का परिचय दिया था। उनके जन्म स्थल चलाली गांव में श्री दादूराम जी आश्रम पर महंतजी की चादर विधि कार्यक्रम में पहुंचे। साथ में डाकोर जी से श्री सत्यनारायण के महंत श्री जयराम दास जी ,लक्ष्मण सिंह जी और डाकोर जी के संत और महंत थे। कार्यक्रम स्थल श्री दादू राम जी चलाली गांव पहुंचने पर संतों महंतों ने श्री दादाजी महाराज का स्वागत किया ।कई संत भगवान श्वेत एवं भगवा वस्त्रों में अपने-अपने स्थान पर विराजमान थे यज्ञ का आयोजन हो रहा था ।श्री दादा जी महाराज के लिए श्री दादूराम जी मंदिर के ठीक सामने विशेष व्यवस्था की गई थी। मंत्रोचार के साथ यज्ञ नारायण की पूर्णाहुति के बाद आरती हुई। आरती पश्चात सद्गुरु श्री दादूराम जी आश्रम चलाली महंत के रूप में भगवानदास जी महाराज के नाम की उद्घोषणा हुई। श्री भगवानदास जी को संत सभा में गादी के पास बैठाया गया डाकोर रणछोड़ जी मंदिर के पुजारी परिवार के सदस्य ब्राह्मण देवता ने श्री भगवानदास जी का तिलक किया। इसके पश्चात सभी प्रमुख संतों ने हाथ पकड़कर श्री भगवान दास जी महाराज को गुरुगादी पर बैठाया , उसके पश्चात सर्वप्रथम नव महंत संत भगवान दास जी के गुरु श्री दयाराम जी(महंत श्री दादूराम जी आश्रम डाकोर मुख्य पीठ)ने शिष्य को तिलक लगाकर माला पहनाई तथा चादर ओढ़ायी । श्री दयाराम जी महाराज के पश्चात सभी संतो ने श्री भगवान दास जी महाराज को चादर ओढ़ायी। श्री दादाजी महाराज द्वारा श्री भगवानदास जी महाराज का अभिनंदन हुआ। संतो के पश्चात भक्तों द्वारा श्री भगवान दास जी महाराज का तिलक अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात संतों के प्रवचन हुए।
चादर विधि के पश्चात नव महंत श्री भगवान दास जी ने अपने गुरु श्री दयाराम जी को दण्डवत कर आशीर्वाद लिया, इसके बाद श्री दादूराम जी आश्रम के मंदिर में दंडवत कर आशीर्वाद लिया। मंदिर में दंडवत के पश्चात नव महंत श्री भगवान दास जी महाराज ने सद्गुरुदेव श्री दादाजी महाराज को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात श्री भगवानदास जी ने सभी संतो को दंडवत कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद आरती हुई
जय काना काला, प्रभु नटवर नंदलाला
मीठी मुरली वाला, जय काना काला
आरती पश्चात भोजन प्रसादी हुई। भोजन प्रसादी के बाद डाकोरजी श्री दादूराम आश्रम गुरु गादी के मुख्य महंत श्री दयाराम जी (जो आज नव महंत बने उनके गुरु) श्री दादाजी महाराज के पास आए तथा विनम्रता पूर्वक बोले कृपा दृष्टि बनाए रखना जब जब आओ तब एक रात यहां भी रुकना, फिर श्री दयाराम जी महाराज लक्ष्मण सिंह बापू की तरफ मुख करके बोले कि मैंने भावना करी थी कि श्री दादाजी महाराज चादर विधि कार्यक्रम में पधारे तो वो आ गए।
अद्भुत लीला गुरू सदैव अमर होते हैं यह सुना था लेकिन आज प्रत्यक्ष अनुभव किया सदगुरुदेव श्री दादूराम जी महाराज की फोटो देखी तो सदगुरुदेव परमहंस श्री टाटम्बरी गुरु महाराज अमराझिरी आश्रम ऊंचा खेड़ा स्वयं बैठे हैं। अमराझिरी वाले गुरु महाराज कहते थे कि गुरु नाम हरि, हरि नाम गुरू। जो अंधकार से प्रकाश में ला दे वह गुरु है इस बात का अनुभव किया।
मंडला में श्री दादाजी महाराज द्वारा श्रीजमदग्नि ऋषि के हवन कुंड यज्ञ कार्यक्रम में अखंड मंडलाकार गुरु सत्ता का अनुभव किया था आज उनकी कृपा से श्री दादूराम जी आश्रम चलाली में वही अनुभव पुनः प्राप्त किया।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके के लागू पाय।
बलिहारी गुरु आप की, गोविंद दियो दिखाय।।
वंदे गुरु परंपरा🙏
श्री दादूराम जी आश्रम चलाली से विदाई ले कर श्री दादाजी महाराज डाकोर जी सत्यनारायण भगवान मंदिर पहुंचे। डाकोर जी में विश्राम के पश्चात शाम 4:30 बजे डाकोर जी श्री दादाजी महाराज ने प्रस्थान किया।शाम 5:15 बजे सूर्यवंशी राठौड़ योद्धा भायथी जी महाराज के मंदिर फागवेल नामक स्थान पर पहुंचे, 700 साल पहले श्री भायथी जी राठौड़ मुगलों से गौ रक्षार्थ युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त हुए थे, मंदिर में श्री दादाजी महाराज ने माला तथा नारियल चढवाया ।यहां से श्री दादाजी महाराज ने 7 फूल मालाएं तथा 52 समोसा लिए।
शाम 6:00 बजे शाश्वत हनुमानजी मंदिर 61 चौकी पर श्री चैतन्य हनुमान जी महाराज ने जामुन ,2 आम का भोग लगवाया तथा माला अर्पित की। पुजारी जी को शाल भेंट की। इसके बाद श्री दादाजी महाराज रामकुंड दुआ टिमा पहुंचे जहां क्रमशः गर्म तथा ठंडे जल के 108 कुंड बने हुए हैं जिन में सफेद, नीला तथा हरा जल है। जहां विज्ञान थक जाता है अध्यात्म वहीं से शुरू होता है। रामकुंड के एक तरफ छोटे से टिले पर श्री राम जानकी मंदिर हैं दूसरी तरफ छोटे से टीले पर सोमनाथ महादेव मंदिर हैं स्थानीय लोग इस स्थल को भीम हिडिंबा विवाह स्थल भी बताते हैं पत्थर की भीम पादुका विराजमान है। इस प्रकार श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में सत्संग करते हुए रात्रि में बड़नगर के पास उन्हेल मार्ग पर बालोदा कोरन भाटी परिवार के निवास पर रात्रि 1:30 बजे बारिश के बीच पहुंचे । 29 मई सोमवार श्रीकृष्ण भक्त भाटी परिवार के यहां से श्री दादाजी महाराज ने सवेरे 6:00 बजे विदाई ली। प्रस्थान के समय परिवार के मंदिर में आरती हो रही थी मंदिर में श्री दादा जी महाराज द्वारा पुष्प माला अर्पित की गई, गुरुदेव भगवान ने तिलक चंदन किया।
उन्हेल मार्ग पर भेड़ बकरी चराने वाले एवं घुमंतु परिवार को श्री दादाजी महाराज ने समोसा वितरित करवाया। इसके पश्चात गौ माताओं को समोसा प्रसाद खिलाया । इसी बीच श्री दादाजी महाराज की अमृतवाणी गुंजायमान हुई दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। उन्हेल में बालभोग पाया। उन्हेल से उज्जैन मार्ग पर श्री दादाजी महाराज पंडित मृत्युंजय हीरेमठ जी द्वारा गाई गई शिव स्तुति का आनंद लेते हुए उज्जैन मंगलनाथ महादेव जी मंदिर पहुंचे। मंगलनाथ महादेव जी मंदिर में उपस्थित सभी ब्राह्मणों को श्री दादाजी महाराज ने ₹100 दक्षिणा नवीन संसद भवन के उद्घाटन के उपलक्ष में दी गई, ब्राह्मणों द्वारा श्री गुरुदेव भगवान की स्तुति की गई।
मंगल ग्रह भूमि और भवन का कारक हैं इसलिए दयालु गुरुदेव भगवान द्वारा नवीन संसद भवन के उद्घाटन उपलक्ष में मंगल ग्रह के जन्मस्थान मंगल नाथ महादेव मंदिर के पुजारी ब्राह्मणों को संतुष्ट कर नवीन संसद का मंगल कराया गया। परम पूज्य ब्रह्मलीन परमहंस सदगुरुदेव श्री टाटम्बरी गुरू महाराज अमराझिरी कहते थे कि भगवान की लीला और संतों की महिमा अपरम्पार है श्री दादाजी महाराज के सानिध्य में हमें यह प्रत्यक्ष देखने को प्राप्त हुआ श्री दादाजी महाराज की परमहंसी लीला को कौन जान सकता है लेकिन श्री दादाजी महाराज के चरणों का ध्यान कर के दास यह लिख रहा है। बालक की तोतली बोली पर माता-पिता प्रसन्न होते हैं वैसे ही दास की लेखनी की त्रुटी को श्री गुरुदेव भगवान क्षमा करें क्योंकि श्री गुरुदेव भगवान का जीवन चरित्र शब्दों में नहीं समा सकता।
मंगलनाथ महादेव मंदिर से श्री दादाजी महाराज भर्तहरी गुफा पहुंचे । भर्तहरी गौशाला में श्री दादाजी महाराज ने गायों को हरी घास खिलवायी । भर्तहरि मंदिर दर्शन कर गुरुदेव भगवान के पास पहुंचे। मंदिर में उनके गुरु गोरखना