Jai Shree Ganesh

Jai Shree Ganesh �� शिव ही गुरु है ��

जब श्रीकृष्ण और उनके भ्राता बलराम मथुरा की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उनके साथ उनके परम भक्त अक्रूर भी थे। मार्ग में यमुन...
16/04/2026

जब श्रीकृष्ण और उनके भ्राता बलराम मथुरा की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उनके साथ उनके परम भक्त अक्रूर भी थे। मार्ग में यमुना तट पर पहुँचकर अक्रूर जी के हृदय में स्नान करने की इच्छा जागृत हुई।

उन्होंने विनम्र भाव से श्रीकृष्ण से आज्ञा ली और यमुना के निर्मल जल में प्रवेश किया। जैसे ही वे जल में डूबे, उनके चित्त में एक अद्भुत परिवर्तन हुआ—मानो बाह्य संसार लुप्त हो गया और एक दिव्य दृश्य प्रकट होने लगा।

अक्रूर जी ने देखा कि उसी यमुना जल के भीतर अनंत शेषनाग पर विराजमान साक्षात् भगवान विष्णु विराजित हैं, जिनके चारों ओर दिव्य प्रकाश फैल रहा है। उनके समीप माता लक्ष्मी सेवा में लीन हैं, और देवगण स्तुति कर रहे हैं। यह दृश्य इतना अलौकिक था कि अक्रूर जी विस्मित और भाव-विभोर हो उठे।

वे तुरंत जल से बाहर आए और देखा कि श्रीकृष्ण और बलराम तो रथ पर ही बैठे हैं। यह देखकर उनके मन में आश्चर्य और बढ़ गया। वे पुनः जल में उतरे—और वही दिव्य विष्णु रूप पुनः प्रकट हुआ।

अब अक्रूर जी समझ गए कि यह कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि स्वयं परम ब्रह्म, नारायण का अवतार हैं। वे जल से बाहर आकर श्रीकृष्ण के चरणों में गिर पड़े, उनकी आँखों से भक्ति के आँसू बहने लगे और वे स्तुति करने लगे—

“हे प्रभु! आप ही सृष्टि के कर्ता, पालक और संहारक हैं। आपने मुझे अपने साक्षात् स्वरूप का दर्शन देकर धन्य कर दिया।”

श्रीकृष्ण ने मधुर मुस्कान के साथ अपने भक्त को उठाया और करुणा भरी दृष्टि से उन्हें आशीर्वाद दिया।

इस प्रकार यह लीला दर्शाती है कि सच्चे भक्त को प्रभु स्वयं अपने वास्तविक स्वरूप का बोध कराते हैं, और भक्ति ही वह मार्ग है जो परम सत्य तक पहुँचाता है।

कंस-वध के उपरांत मथुरा नगरी में एक अद्भुत शांति का उदय हुआ। भय और अत्याचार के बादल छँट चुके थे, और धर्म का सूर्य पुनः उद...
16/04/2026

कंस-वध के उपरांत मथुरा नगरी में एक अद्भुत शांति का उदय हुआ। भय और अत्याचार के बादल छँट चुके थे, और धर्म का सूर्य पुनः उदित हो रहा था। उसी समय श्रीकृष्ण के हृदय में एक मधुर किंतु करुण भाव जागृत हुआ—अपने वास्तविक माता-पिता से मिलन का।

वे अपने भ्राता बलराम के साथ उस कारागार की ओर बढ़े, जहाँ वर्षों से देवकी और वासुदेव कंस के अत्याचार सहते हुए बंधन में थे। जैसे ही कारागार के द्वार खुले, लोहे की जंजीरें मानो स्वयं ही ढीली पड़ गईं, और अंधकार में एक दिव्य प्रकाश फैल गया।

देवकी और वासुदेव ने जब अपने समक्ष उस तेजोमय रूप को देखा, तो पहले तो वे विस्मित रह गए। यह कोई साधारण पुत्र नहीं, स्वयं परमात्मा का अवतार था। किन्तु अगले ही क्षण मातृ-पितृ स्नेह उमड़ पड़ा—आँखों से अश्रुधारा बहने लगी, और वे दोनों श्रीकृष्ण को अपने हृदय से लगा लेने को आतुर हो उठे।

श्रीकृष्ण ने विनम्र भाव से उनके चरणों में प्रणाम किया और मधुर वाणी में कहा—“माता, पिता! आपके इस पुत्र ने विलंब अवश्य किया, पर आज आपके समस्त दुःखों का अंत हो गया।” यह सुनते ही कारागार का वातावरण करुणा और आनंद के संगम से भर उठा।

तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने मथुरा के योग्य और धर्मनिष्ठ वृद्ध राजा उग्रसेन को पुनः सिंहासन पर आसीन किया। समस्त नगर में हर्षोल्लास छा गया—धर्म की पुनः स्थापना हुई और न्याय का राज्य प्रारंभ हुआ।

इस प्रकार यह लीला केवल माता-पिता के मिलन की नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और प्रेम की विजय का दिव्य प्रतीक बन गई।

11/04/2026
जब त्रिकूट पर्वत की शिखाओं पर बसी स्वर्णमयी लंका नगरी अपने वैभव के गर्व में डूबी थी, तब उसी समय आकाश मार्ग से वेगपूर्वक ...
01/04/2026

जब त्रिकूट पर्वत की शिखाओं पर बसी स्वर्णमयी लंका नगरी अपने वैभव के गर्व में डूबी थी, तब उसी समय आकाश मार्ग से वेगपूर्वक आते हुए पवनसुत, अंजनीनंदन, रामदूत महाबली हनुमान उस नगरी के द्वार पर उतरे।

वह रात्रि का गहन अंधकार था, परंतु हनुमान जी के तेज से दिशाएँ आलोकित हो उठीं। जैसे ही वे लंका में प्रवेश करने को अग्रसर हुए, उसी क्षण द्वार की रक्षक, भयानक रूपधारी राक्षसी लंकनी प्रकट हुई।

उसका रूप विकराल था—नेत्र अग्नि के समान लाल, दाँत वज्र के समान कठोर, और स्वर ऐसा मानो काल स्वयं गरज रहा हो।

लंकनी ने गर्जना की— “हे वानर! यह लंका राक्षसराज रावण की नगरी है। यहाँ बिना अनुमति कोई प्रवेश नहीं कर सकता। जो भी यहाँ आया, वह जीवित वापस नहीं गया!”

हनुमान जी ने अत्यंत विनम्र भाव से उत्तर दिया— “मैं केवल एक दूत हूँ, प्रभु श्रीराम का कार्य पूर्ण करने आया हूँ। मार्ग दो, अन्यथा मुझे बल का प्रयोग करना पड़ेगा।”

परंतु अहंकार में अंधी लंकनी ने उनका उपहास किया और उन पर आक्रमण कर दिया।

तब पवनपुत्र ने सोचा—
“अब समय आ गया है कि धर्म के मार्ग में आने वाली बाधा का अंत किया जाए।”

और अगले ही क्षण, हनुमान जी ने अपने वज्र-समान मुष्टि (मुक्का) से ऐसा प्रहार किया कि वह राक्षसी पृथ्वी पर गिर पड़ी। वह एक ही प्रहार था—परंतु उसमें धर्म की शक्ति, रामभक्ति का तेज और सत्य का बल समाहित था।

भूमि पर गिरते ही लंकनी का अहंकार चूर-चूर हो गया। उसका रूप बदल गया और वह विनीत होकर बोली—

“हे रामदूत! आज मेरा उद्धार हुआ। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि जब कोई वानर मुझे पराजित करेगा, तभी लंका का विनाश निश्चित होगा। तुम वही दिव्य शक्ति हो!”

उसने folded हाथों से प्रणाम किया और कहा— “जाओ, हे पवनसुत! तुम्हारा मार्ग अब निष्कंटक है। तुम अवश्य अपने प्रभु का कार्य पूर्ण करोगे।”

हनुमान जी ने उसे आशीर्वाद दिया और मन ही मन श्रीराम का स्मरण करते हुए लंका नगरी में प्रवेश किया।

✨ कथा का संदेश ✨

धर्म और भक्ति के मार्ग में चाहे कितनी ही बाधाएँ क्यों न आएँ, सच्ची श्रद्धा और साहस से वे एक क्षण में समाप्त हो जाती हैं।
हनुमान जी का एक ही प्रहार यह दर्शाता है कि सत्य और भगवान के कार्य में लगी शक्ति को कोई रोक नहीं सकता। 🚩

💐🙏🏻 जय जय श्री राधे श्याम जी बधाई हो बधाई हो राधारानी जन्म लियो है आप सभी भगतजन को राधा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें हर...
11/09/2024

💐🙏🏻 जय जय श्री राधे श्याम जी बधाई हो बधाई हो राधारानी जन्म लियो है आप सभी भगतजन को राधा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें हरि बोल 🦚 राधे राधे 🙏🏻💐

💐🙏🏻 Bholenath Sab k Saath 🙏🏻💐     🙏
12/03/2023

💐🙏🏻 Bholenath Sab k Saath 🙏🏻💐 🙏

💐🙏🏻 Jai Shri Amarnath G 1920 Yatra pics 🙏🏻💐
09/09/2022

💐🙏🏻 Jai Shri Amarnath G 1920 Yatra pics 🙏🏻💐

महादेव की गुफा का विहंगम दृश्य...पवित्र   श्री अमरनाथ जी की गुफा...प्रकृति का अद्भुत चमत्कार...पत्थर U चंद्राकार  में मु...
04/09/2022

महादेव की गुफा का विहंगम दृश्य...पवित्र श्री अमरनाथ जी की गुफा...प्रकृति का अद्भुत चमत्कार...पत्थर U चंद्राकार में मुड़े हुए हैं..मध्य में एक पतला glacier...शिव की जटाओं की तरह है...सबसे अद्भुत है गुफा की छत....औऱ गुफा का आकार....पता ही नहीं चल रहा है कि पवित्र शिव लिंग के निर्माण के लिए गुफा के अंदर जल कहाँ से आता है...और कैसे वो दिव्य लिंग आकार लेता है...शिव और शक्ति का अद्भुत चमत्कार है श्री अमरनाथ जी की यह पवित्र गुफा....हर हर महादेव
🙏🌹जय बाबा बर्फ़ानी 🌹🙏
भूखे को अन्न दे प्यासे को पानी 🙏🏻💐

Shiv Khori or the cave of Lord Shiva is a holy shrine lying on a hillock, in Ransoo village, about 140 km from Jammu. A ...
03/09/2022

Shiv Khori or the cave of Lord Shiva is a holy shrine lying on a hillock, in Ransoo village, about 140 km from Jammu. A naturally formed four-foot-tall lingam is worshipped in the cave and is believed to be swayambhu or self-manifested. According to legend, the cave is dedicated to the unborn and invisible form of Lord Shiva.
📷 :- Kumar Chandugade
🏔

Address

Tawi - Jammu

Telephone

+918716850001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Jai Shree Ganesh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Jai Shree Ganesh:

Share