JaI ShRee RaaM

  • Home
  • JaI ShRee RaaM

JaI ShRee RaaM यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।

'जिस कुल में स्त्रियों का आदर है वहाँ देवता प्रसन्न रहते हैं।'

18/06/2025

"बंदउँ गुरु पद कंज, कृपा सिंधु नर रूप हरि।
महामोह तम पुंज, जासु बचन रवि कर निकर॥"

16/06/2025

"मम गुन ग्राम नाम रत बानी। कहहिं सुनहिं संतत सुख सानी॥"

पुनि मन बचन कर्म रघुनायक। चरन कमल बंदउँ सब लायक॥राजीवनयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक॥भावार्थ:-फिर मैं मन, वचन ...
02/06/2025

पुनि मन बचन कर्म रघुनायक। चरन कमल बंदउँ सब लायक॥
राजीवनयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक॥
भावार्थ:-फिर मैं मन, वचन और कर्म से कमलनयन, धनुष-बाणधारी, भक्तों की विपत्ति का नाश करने और उन्हें सुख देने वाले भगवान्‌ श्री रघुनाथजी के सर्व समर्थ चरण कमलों की वन्दना करता हूँ॥
JaI ShRee RaaM

चौपाई :कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा॥बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए॥भावार्थ:-वानरों के राज...
01/06/2025

चौपाई :
कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा॥
बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए॥
भावार्थ:-वानरों के राजा सुग्रीवजी, रीछों के राजा जाम्बवानजी, राक्षसों के राजा विभीषणजी और अंगदजी आदि जितना वानरों का समाज है, सबके सुंदर चरणों की मैं वदना करता हूँ, जिन्होंने अधम (पशु और राक्षस आदि) शरीर में भी श्री रामचन्द्रजी को प्राप्त कर लिया॥
JaI ShRee RaaM

सेष सहस्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन॥सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिन्धु सौमित्रि गुनाकर॥भावार्थ:-जो हजार सिर वा...
23/05/2025

सेष सहस्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन॥
सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिन्धु सौमित्रि गुनाकर॥
भावार्थ:-जो हजार सिर वाले और जगत के कारण (हजार सिरों पर जगत को धारण कर रखने वाले) शेषजी हैं, जिन्होंने पृथ्वी का भय दूर करने के लिए अवतार लिया, वे गुणों की खान कृपासिन्धु सुमित्रानंदन श्री लक्ष्मणजी मुझ पर सदा प्रसन्न रहें॥
JaI ShRee RaaM

प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना॥राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू॥भावार्थ:-(भाइयों में)...
18/05/2025

प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना॥
राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू॥
भावार्थ:-(भाइयों में) सबसे पहले मैं श्री भरतजी के चरणों को प्रणाम करता हूँ, जिनका नियम और व्रत वर्णन नहीं किया जा सकता तथा जिनका मन श्री रामजी के चरणकमलों में भौंरे की तरह लुभाया हुआ है, कभी उनका पास नहीं छोड़ता॥

JaI ShRee RaaM JaI ShRee RaaM

प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू॥दसरथ राउ सहित सब रानी। सुकृत सुमंगल मूरति मानी॥करउँ प्रनाम करम मन ...
16/05/2025

प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू॥
दसरथ राउ सहित सब रानी। सुकृत सुमंगल मूरति मानी॥
करउँ प्रनाम करम मन बानी। करहु कृपा सुत सेवक जानी॥
जिन्हहि बिरचि बड़ भयउ बिधाता। महिमा अवधि राम पितु माता॥
भावार्थ:-जहाँ (कौशल्या रूपी पूर्व दिशा) से विश्व को सुख देने वाले और दुष्ट रूपी कमलों के लिए पाले के समान श्री रामचन्द्रजी रूपी सुंदर चंद्रमा प्रकट हुए। सब रानियों सहित राजा दशरथजी को पुण्य और सुंदर कल्याण की मूर्ति मानकर मैं मन, वचन और कर्म से प्रणाम करता हूँ। अपने पुत्र का सेवक जानकर वे मुझ पर कृपा करें, जिनको रचकर ब्रह्माजी ने भी बड़ाई पाई तथा जो श्री रामजी के माता और पिता होने के कारण महिमा की सीमा हैं॥

JaI ShRee RaaM

दोहा :सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ॥भावार्थ:-यदि मु्‌झ पर श्री शिवजी...
13/05/2025

दोहा :
सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।
तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ॥
भावार्थ:-यदि मु्‌झ पर श्री शिवजी और पार्वतीजी की स्वप्न में भी सचमुच प्रसन्नता हो, तो मैंने इस भाषा कविता का जो प्रभाव कहा है, वह सब सच हो॥

बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि॥भावार्थ:-देवता, ब्राह्मण, पंडित, ग्रह-...
06/05/2025

बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।
होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि॥
भावार्थ:-देवता, ब्राह्मण, पंडित, ग्रह- इन सबके चरणों की वंदना करके हाथ जोड़कर कहता हूँ कि आप प्रसन्न होकर मेरे सारे सुंदर मनोरथों को पूरा करें॥
JaI ShRee RaaM JaI ShRee RaaM

बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित॥भावार्थ:-मैं उन वाल्मीकि मुनि के चरण कमलों की ...
05/05/2025

बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।
सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित॥
भावार्थ:-मैं उन वाल्मीकि मुनि के चरण कमलों की वंदना करता हूँ, जिन्होंने रामायण की रचना की है, जो खर (राक्षस) सहित होने पर भी (खर (कठोर) से विपरीत) बड़ी कोमल और सुंदर है तथा जो दूषण (राक्षस) सहित होने पर भी दूषण अर्थात्‌ दोष से रहित है॥
JaI ShRee RaaM

Address

वाराणसी

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when JaI ShRee RaaM posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

  • Want your place of worship to be the top-listed Place Of Worship?

Share