30/01/2026
क्रान्ति करूं या शान्त रहूं -
वर्तमान मनुष्य दो भागों में पूर्णतया बंट चुका है। और जब दो पक्ष आमने सामने खड़े हो जाते हैं तो क्या होता है? महाभारत । इन दो पक्षों में एक अपने को सत्यवादी कहता है तो दूसरा अधर्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ता । तो जो सत्यवादी हैं उनमें क्रांति करने की फुर्ना पैदा हो रही है। कि अब सहन नहीं हो रहा, अब तो कुछ करना ही होगा बाकी जो होगा देखा जाएगा।
दूसरा पक्ष कहता है कि तुम मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते, मेरा ही राज्य हर जगह है। अब इन दो पक्षों में महायुद्ध प्रारंभ हो चुका है, देखने वाले देख रहे हैं। और युद्ध करने वाले युद्ध कर रहे हैं। जो शक्तियां जिस काम के लिए आईं हुईं हैं उनका जब समय आ जाएगा तो गुरु के प्रेरणा अनुसार स्वयं वे काम में लग जाएंगी। कितनी लग गई और कितनी लग जाएंगी। पूरे देश और विश्व में परिवर्तन का माहौल बाबाजी ने बना दिया है। अब देखना ये है कि कौन कौन परिवर्तन करने आया है।
तीसरा पक्ष है - शान्त पक्ष । उसको इन दोनों पक्ष से कोई मतलब नहीं, क्योंकि वो इस पराए देश के झगड़े को अपना झगड़ा नहीं मानता और समय के सतगुरु के वचनों पर विश्वास करने नाम योग की साधना करता है और अपने घर जाने की तैयारी करता है। चूंकि आग दुनिया में लगी ही हुई है तो साधकों पर भी आंच आएगी ही। तथापि उस साधक के मन में भी बार बार ये विचार पैदा हो रहा है कि मेरे पास भी शक्ति, भक्ति, ज्ञान और बल है । मेरे साथ भी अन्याय हो रहा है। मैं भी गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी झेल रहा हूं, मुझे भी सुधार के लिए कुछ न कुछ क्रांति में सहयोग करना चाहिए।
किंतु फिर उसे गुरु के वचन याद आते हैं जो इस प्रकार हैं -
▪️बच्चा! जिन लोगों ने गंदगी फैलाई है, मैं उन्हीं लोगों से उठवा लूंगा, तुम इस पचड़े में मत पड़ना। तुम भजन करो, तुम्हारा काम कुछ और है।
▪️जीवों को पार करने के लिए मैं हर प्रकार का खेल खेलूंगा, ये बनाऊंगा वो बनाऊंगा फिर सब खत्म कर दूंगा और केवल सत्संग सुनाऊंगा कराऊंगा। तुम मेरे किसी भी खेल को देखकर भ्रमित मत होना। और न बीच में आकर कूदना। मैं समय से अपने समस्त वादों को पूरा करूंगा और देश समाज की सारी व्यवस्था बन जाएगी तो अंतिम काम जीवात्मा का उद्धार वो भी कर दूंगा।
▪️युग परिवर्तन के लिए और जीवात्माओं को पार करने के लिए मुझे कोई खेल करना पड़े, मैं करूंगा लेकिन तुम शंका मत करना और भजन करते हुए मेरा इंतजार करना। परिवर्तन करने के लिए शंकराचार्य का भी कायाकल्प लीला करना पड़े तो मैं करूंगा। पर तुम कुछ बोलना नहीं। चुपचाप नाम योग की साधना करना।
इन वचनों को याद करके तीसरा पक्ष शांत हो जाता है और दुनिया की क्रांति से ध्यान हटाकर अपने सतगुरु में ध्यान लगाता है। क्योंकि उसको पता है कि - काल जाल से वही बचेगा, जो सतगुरु का ध्यान धरेगा।
अंततः परिणाम यही निकल के आता है कि जिन लोगों को अपने घर जाना है उनको नित्य सत्संग करते रहना चाहिए, गुरु दरबार में आते जाते रहना चाहिए ,वचनों को याद करके जीवन में उतारते रहना चाहिए और प्रेमियों को भी समय समय से वचनों से अवगत कराते रहना चाहिए। जयगुरुदेव नाम प्रभु का 🙏