30/01/2026
सत्संग सुनना -
▪️सत्संग तो कोई भी सुन सकता है, जैसे पेड़ पौधे पशु पक्षी भी सतगुरु का सत्संग सुनते हैं लेकिन वो सत्संग पर विचार करके कुछ जीवन में अपना नहीं सकते, सुनने का लाभ तो है ही। जैसे तपता पत्थर, सत्संग रूपी जल में डाल दिया जाए तो जब तक जल में रहेगा, जल की शीतलता के कारण वो भी शीतल रहेगा किंतु ज्योंहि उसे जल से दूर कर दिया जाए तो वो पुनः तपने लगेगा।
▪️इसी प्रकार हम सब सत्संग रूपी सरिता में स्नान करके ठंडक तो महसूस करते हैं किंतु ज्योंहि सत्संग से घर गृहस्थ को आते हैं वो ठंडक कुछ समय बाद गायब हो जाती है। फिर हम दुनिया के काम क्रोध लोभ मोह की गर्मी से तपने लगते हैं। ऐसा क्यों होता है?
▪️क्योंकि हमने केवल सतगुरु का सत्संग सुना था। किया नहीं, करने का मतलब जो वचन हमारे लिए सरल मालूम पड़े उस पर गहनता से विचार करके उस वचन को जब जीवन में अपनाएंगे तब हम सदा के लिए अमुक गर्मी से छुट्टी पा जाएंगे। फिर हम संसार में रहे या कहीं भी, वो गर्मी हमको नहीं सताएगी। इसलिए वचनों पर विचार करना बहुत आवश्यक है।
▪️जीवों का अपना अपना सामर्थ्य होता है, जिसके पास जैसी क्षमता होती है उसको उतना ही वचनों की सेवा करनी चाहिए। दूसरे के देखा देखी अगर ज्यादा भार उठा लिए तो खुद चल भी नहीं पाएंगे और सत्संग वचनों से कुभाव भी पैदा हो जाएगा। इसलिए जो जैसे वचनों की सेवा कर सकता है, करे। खुद विचार करें और जीवन में हम सब उतारें ।
▪️कुछ ऐसे भी जीव हैं जो वचनों को रट लेते हैं, किसलिए? दूसरों को सुनाने के लिए। अपने जीवन में उतारने के लिए नहीं। सुनाने से क्या मिलेगा? मान सम्मान सामान। कि ये तो स्वामीजी के बहुत बड़े भक्त हैं, साधक हैं, मालिक के वचनों को याद कराते हैं, इनसे अच्छा कौन है। ऐसे जीवों से सावधान रहना चाहिए, ये हमको कभी भी परमार्थ से हटा सकते हैं।
▪️73 साल सत्संग सुनें हम, लेकिन वचन कोई याद नहीं है। क्यों? क्योंकि वचनों पर विचार करके जीवन में उतारा नहीं। जो सुनेंगे वो भूल जाएंगे, जो करेंगे वो सदैव याद रहेगा और अंत तक साथ देगा। हम सबको इस पर विचार करना चाहिए।
जयगुरुदेव नाम प्रभु का 🙏
Sahara Satguru Ka
Jaigurudev Mathuragurudwara
फार्मासिस्ट विवेक हिन्दुस्तानी
Prabhu jaigurudev
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