ManglaDham, Bajpatti

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मंगलाधाम बिहार के सीतामढ़ी ज़िले के बाजपट्टी प्रखंड में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल माना जाता है। यह स्थान श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र है और यहाँ समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रम, पूजा-पाठ एवं सामुदायिक आयोजन आयोजित किए जाते हैं।

मंगलाधाम परिसर में तृतीय सोमवार का दिव्य रुद्राभिषेक — नीलकंठ महादेव की महिमाॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव।मंगलाधाम परिसर मे...
17/08/2026

मंगलाधाम परिसर में तृतीय सोमवार का दिव्य रुद्राभिषेक — नीलकंठ महादेव की महिमा

ॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव।

मंगलाधाम परिसर में पवित्र तृतीय सोमवार के अवसर पर भगवान नीलकंठ महादेव का भव्य एवं दिव्य रुद्राभिषेक श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर भक्तों ने भगवान शिव का जल, दूध, दही, घृत, मधु, गंगाजल, बेलपत्र, पुष्प एवं अन्य पूजन सामग्रियों से विधिवत अभिषेक कर सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की।

🔱 नीलकंठ महादेव का विशेष महत्व

भगवान शिव का नीलकंठ स्वरूप त्याग, करुणा, धैर्य और लोककल्याण का अद्भुत प्रतीक है। समुद्र मंथन के समय जब भयंकर विष निकला और उसके प्रभाव से समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई, तब भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर संसार की रक्षा की। विष को कंठ में धारण करने के कारण ही भगवान शिव ‘नीलकंठ’ कहलाए।

नीलकंठ महादेव हमें यह संदेश देते हैं कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों और नकारात्मकताओं को धैर्य एवं संयम के साथ सहन करते हुए भी समाज और संसार के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।

🌿 रुद्राभिषेक का आध्यात्मिक महत्व

भगवान शिव के रुद्राभिषेक को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। शिवलिंग पर जल और पवित्र द्रव्यों से अभिषेक करते समय भक्त का मन भी शुद्धि और शांति की ओर अग्रसर होता है।

जल शीतलता और शांति का प्रतीक है।
दूध पवित्रता एवं सात्त्विकता का प्रतीक है।
दही समृद्धि एवं शुभता का प्रतीक माना जाता है।
मधु मधुरता और प्रेम का प्रतीक है।
घृत ऊर्जा एवं सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
गंगाजल पवित्रता और आत्मशुद्धि का प्रतीक है।
और बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है तथा श्रद्धा से अर्पित किया जाता है।

रुद्राभिषेक के समय उच्चारित होने वाले मंत्रों की आध्यात्मिक परंपरा भक्तों के मन में शांति, श्रद्धा और सकारात्मक भाव उत्पन्न करती है।

🕉️ मंगलाधाम में नीलकंठ महादेव की विशेषता

मंगलाधाम परिसर में विराजमान नीलकंठ महादेव केवल एक पूजास्थल नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आस्था, आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का पवित्र केंद्र हैं। माँ मंगलाकाली की पावन उपस्थिति वाले इस परिसर में नीलकंठ महादेव का विराजमान होना भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

मंगलाधाम में माँ की शक्ति और भगवान शिव का शिवत्व एक साथ भक्तों को भक्ति, शक्ति, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु माँ मंगलाकाली और नीलकंठ महादेव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर मन की शांति एवं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्रार्थना करता है।

तृतीय सोमवार का यह रुद्राभिषेक इसी पवित्र परंपरा को आगे बढ़ाने वाला एक दिव्य अवसर रहा, जिसमें वातावरण ‘ॐ नमः शिवाय’, ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।

🙏 प्रार्थना

हे नीलकंठ महादेव!
जिस प्रकार आपने संसार के कल्याण के लिए विष को अपने कंठ में धारण किया, उसी प्रकार हमें भी जीवन की कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संयम और सेवा का मार्ग अपनाने की शक्ति प्रदान करें।

मंगलाधाम में विराजमान हे भोलेनाथ,
सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य, समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करें।
माँ मंगलाकाली की कृपा और नीलकंठ महादेव का आशीर्वाद सदैव सभी पर बना रहे।

हर हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय!
जय माँ मंगलाकाली!

माँ मंगलाधाम परिसर में भारत माता का ८०वाँ स्वतंत्रता दिवस पूजन“भारत माता केवल हमारी भूमि नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी ...
15/08/2026

माँ मंगलाधाम परिसर में भारत माता का ८०वाँ स्वतंत्रता दिवस पूजन

“भारत माता केवल हमारी भूमि नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी संस्कृति, हमारी अस्मिता और हमारे गौरव का जीवंत स्वरूप हैं।”

आज मंगलाधाम परिसर में भारत माता के ८०वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर श्रद्धा एवं भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की गई। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपनी श्रद्धा, सम्मान और कर्तव्य को स्मरण करने का पवित्र अवसर है।

भारत माता हमारे लिए केवल मानचित्र पर दिखाई देने वाली धरती नहीं हैं। इस पावन भूमि की मिट्टी में हमारे पूर्वजों का त्याग, नदियों में हमारी सभ्यता, पर्वतों में हमारी शक्ति, खेतों में हमारे अन्नदाता का परिश्रम और हमारी संस्कृति में हजारों वर्षों की विरासत समाहित है।

भारत माता का वास्तविक मूल्य इस बात में है कि उन्होंने हमें केवल जन्मभूमि नहीं दी, बल्कि एक पहचान दी, संस्कार दिए, विविधता में एकता का संदेश दिया और विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना सिखाई।

आज हम जिस स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, वह असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। जिन्होंने अपने सुख, परिवार और जीवन तक को राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, उनके बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्रता का उत्सव मना पा रहे हैं।

भारत माता की पूजा का सबसे बड़ा अर्थ यही है कि हम केवल उनके चरणों में पुष्प अर्पित न करें, बल्कि अपने कर्मों से राष्ट्र को मजबूत बनाने का संकल्प लें। देश की उन्नति में अपना योगदान देना, समाज में भाईचारा बनाए रखना, प्रकृति की रक्षा करना, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना और आने वाली पीढ़ी को संस्कार एवं राष्ट्रप्रेम देना—यही भारत माता की सच्ची पूजा है।

मंगलाधाम परिसर में आज की यह पूजा हमें यही संदेश देती है कि—

«राष्ट्र सर्वोपरि है,
भारत माता का सम्मान हमारा परम कर्तव्य है,
और राष्ट्र की सेवा ही हमारी सच्ची साधना है।»

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम सभी भारत माता के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए संकल्प लें कि हम अपने भारत को शिक्षित, संस्कारित, स्वच्छ, समृद्ध, शक्तिशाली और एकजुट राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देंगे।

वन्दे मातरम्!
भारत माता की जय!
जय हिन्द!

रविवार, 02 अगस्त (मिथिला पंचांग अनुसार) माँ मंगलाकाली की विशेष पूजा-अर्चना एवं महत्त्व॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्...
02/08/2026

रविवार, 02 अगस्त (मिथिला पंचांग अनुसार) माँ मंगलाकाली की विशेष पूजा-अर्चना एवं महत्त्व

॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
॥ जय माँ मंगलाकाली ॥

आज रविवार, 02 अगस्त का पावन दिवस सूर्यदेव की उपासना के साथ-साथ आदिशक्ति माँ मंगलाकाली की आराधना के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मिथिला पंचांग की परंपरा में प्रत्येक दिन का अपना आध्यात्मिक महत्व है। रविवार का दिन तेज, ऊर्जा, आत्मबल, यश, आरोग्य और आत्मविश्वास का प्रतीक है। जब इस दिन माँ मंगलाकाली की उपासना की जाती है, तब साधक के जीवन में साहस, सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य संरक्षण का संचार होता है।

रविवार को माँ मंगलाकाली की पूजा का महत्त्व

माँ मंगलाकाली समस्त शक्तियों की अधिष्ठात्री हैं। वे अपने भक्तों के भय, रोग, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। रविवार के दिन सूर्य के तेज और माँ की शक्ति का संगम साधक के जीवन में नई ऊर्जा, आत्मबल और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास से की गई पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

रविवार को प्रिय रंग – केसरिया, लाल एवं स्वर्णिम

रविवार का संबंध सूर्यदेव से होने के कारण केसरिया, लाल तथा स्वर्णिम (पीला-स्वर्ण) रंग अत्यंत शुभ माने जाते हैं। यदि माँ मंगलाकाली को इन रंगों के वस्त्र, पुष्प अथवा चुनरी अर्पित की जाए तो यह तेज, पराक्रम, विजय और शुभ फल का प्रतीक माना जाता है।

पूजा-विधि

प्रातः स्नान कर स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। माँ मंगलाकाली के विग्रह अथवा चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। धूप, लाल अथवा केसरिया पुष्प, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, नारियल, मौसमी फल तथा यदि उपलब्ध हो तो गुड़ या मिश्री का भोग अर्पित करें।

इसके पश्चात श्रद्धापूर्वक माँ का ध्यान करें और प्रार्थना करें—

"हे माँ मंगलाकाली! हमारे जीवन से भय, रोग, संकट, आलस्य और अज्ञान का नाश कर धर्म, साहस, विवेक, सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।"

इसके बाद निम्न मंत्रों का जप करें—

॥ ॐ क्रीं कालिकायै नमः ॥ (108 बार या यथाशक्ति)

॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

जप के उपरांत माँ की आरती करें तथा प्रसाद सभी भक्तों में वितरित करें।

रविवार का विशेष संदेश

रविवार हमें यह प्रेरणा देता है कि जैसे सूर्य बिना किसी भेदभाव के सम्पूर्ण संसार को प्रकाश देता है, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में सत्य, सेवा, करुणा और धर्म का प्रकाश फैलाना चाहिए। माँ मंगलाकाली की कृपा से हमारा मन सदैव निर्भय, कर्म पवित्र और जीवन मंगलमय बने।

आइए, आज के इस पावन रविवार को पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ माँ मंगलाकाली की आराधना करें तथा उनके श्रीचरणों में अपने जीवन को समर्पित करें।

॥ जय माँ मंगलाकाली ॥
॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः ॥

॥ जय माँ मंगलाकाली ॥शनिवार को माँ मंगलाकाली की विशेष पूजा एवं काले वस्त्रों का दिव्य महत्वसनातन धर्म में शनिवार का दिन न...
01/08/2026

॥ जय माँ मंगलाकाली ॥

शनिवार को माँ मंगलाकाली की विशेष पूजा एवं काले वस्त्रों का दिव्य महत्व

सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय, कर्मफल, धैर्य, तप, संरक्षण और नकारात्मक शक्तियों के नाश का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन माँ मंगलाकाली की विशेष आराधना का अत्यंत महत्व बताया गया है। तांत्रिक परंपरा में शनिवार को माँ काली की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि यह दिन साधक के भय, बाधाओं और ग्रहजनित कष्टों के निवारण से भी जोड़ा जाता है।

माँ मंगलाकाली जब काले वस्त्रों से अलंकृत होती हैं, तब वह केवल एक रंग का श्रृंगार नहीं होता, बल्कि यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड की अनंत शक्ति का प्रतीक होता है। काला रंग उस असीम शून्य का प्रतीक है जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि समा जाती है। यह रंग अहंकार, भय, अज्ञान और नकारात्मकता का अंत कर आत्मबल, निर्भयता और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देता है।

शनिवार के अधिष्ठाता भगवान शनिदेव हैं, जो प्रत्येक जीव को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। माँ मंगलाकाली धर्म और न्याय की अधिष्ठात्री आदिशक्ति हैं। इसलिए जब शनिवार को माँ मंगलाकाली की उपासना की जाती है, तब भक्त न्याय, साहस, संयम और आत्मबल की प्राप्ति की कामना करता है। परंपरा में यह भी माना जाता है कि माँ की कृपा से शनि, राहु और केतु से संबंधित कष्टों की शांति के लिए भक्त प्रार्थना करते हैं।

माँ मंगलाकाली का काला स्वरूप यह संदेश देता है कि जो भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और समर्पण से उनकी शरण में आता है, उसके जीवन के भय, संकट और अंधकार का अंत होकर ज्ञान और प्रकाश का उदय होता है। वे केवल संहार की देवी नहीं, बल्कि करुणा, संरक्षण, साहस और धर्म की स्थापना करने वाली जगज्जननी हैं।

शनिवार की संध्या या रात्रि में माँ के समक्ष दीप प्रज्वलित कर, श्रद्धापूर्वक "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" मंत्र का जप करने तथा सच्चे मन से प्रार्थना करने का विशेष महत्व माना गया है। भक्त अपने भीतर के क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार का समर्पण माँ के चरणों में करता है और उनसे विवेक, निर्भयता तथा सद्मार्ग पर चलने की शक्ति प्राप्त करने की प्रार्थना करता है।

आइए, आज इस पावन शनिवार को हम सब माँ मंगलाकाली के श्रीचरणों में प्रणाम करें और प्रार्थना करें—

"हे जगदम्बा माँ मंगलाकाली! जैसे आपका श्याम स्वरूप समस्त ब्रह्मांड को अपनी करुणा से आच्छादित करता है, वैसे ही हमारे जीवन के समस्त अंधकार, भय, संकट और दुःख का भी अंत करें। हमें धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति, सत्य का पालन करने का साहस और सेवा, समर्पण तथा भक्ति का अमूल्य वरदान प्रदान करें। आपकी कृपा हम सभी पर सदैव बनी रहे।"

॥ जय माँ मंगलाकाली ॥

 # गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व एवं मंगलाधाम में सम्पन्न विशेष पूजा-अर्चना # # गुरु पूर्णिमा : भारतीय संस्कृति का म...
29/07/2026

# गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व एवं मंगलाधाम में सम्पन्न विशेष पूजा-अर्चना

# # गुरु पूर्णिमा : भारतीय संस्कृति का महान आध्यात्मिक पर्व

गुरु पूर्णिमा सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिवस महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना तथा अनेकों पुराणों का संकलन कर मानव समाज को अमूल्य ज्ञान प्रदान किया। इसलिए इस दिन को **व्यास पूर्णिमा** भी कहा जाता है।

सनातन परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही अपने ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से शिष्य के जीवन को प्रकाशित करते हैं। गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं और जीवन को सही दिशा देते हैं।

**शास्त्रों में कहा गया है—**

> **गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
> गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥**

अर्थात गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश हैं और गुरु ही साक्षात् परब्रह्म स्वरूप हैं। ऐसे सद्गुरु को बार-बार प्रणाम है।

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# गुरु पूर्णिमा का महत्व

* गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का सर्वोत्तम अवसर।
* आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का पावन दिवस।
* गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का दिन।
* जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, सदाचार और सेवा भावना विकसित करने की प्रेरणा।
* गुरु कृपा से ज्ञान, विवेक, शांति और आत्मबल की प्राप्ति का शुभ अवसर।

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# मंगलाधाम में गुरु पूर्णिमा का दिव्य आयोजन

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंगलाधाम में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। प्रातःकाल से ही भक्तों एवं साधकों ने गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इसके पश्चात् विधि-विधान से **विशेष पूजन**, **महाहवन**, **गुरु पूजन**, **आरती** तथा **भजन-कीर्तन** सम्पन्न हुए। यज्ञ की पवित्र अग्नि में आहुतियाँ अर्पित कर समस्त विश्व के कल्याण, सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की गई।

पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु के श्रीचरणों में नमन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म, सेवा, संस्कार और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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# हवन का आध्यात्मिक महत्व

वैदिक परंपरा में हवन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और वातावरण की पवित्रता का माध्यम माना गया है। हवन में दी जाने वाली प्रत्येक आहुति व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति का संचार करती है। यज्ञ की अग्नि में समर्पण का भाव यह सिखाता है कि जीवन में अहंकार, क्रोध और नकारात्मक विचारों का त्याग कर सद्गुणों को अपनाना चाहिए।

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# आरती का महत्व

आरती श्रद्धा, समर्पण और भक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। दीपक की ज्योति ज्ञान, सत्य और ईश्वर के प्रकाश का प्रतीक मानी जाती है। आरती के माध्यम से भक्त अपने जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर गुरु एवं ईश्वर की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

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# गुरु का संदेश

गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैं। उनका सान्निध्य व्यक्ति के भीतर संस्कार, अनुशासन, सेवा, करुणा और आत्मविश्वास का विकास करता है। गुरु का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक संपदा माना गया है।

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# उपसंहार

मंगलाधाम में आयोजित गुरु पूर्णिमा का यह दिव्य उत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम रहा। विशेष पूजा, महाहवन और आरती के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। गुरु कृपा से ही जीवन में ज्ञान, शांति, सद्बुद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश और सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है।

गुरु पूर्णिमा पर माँ मंगलाकाली की पूजा का महत्त्वजय माँ मंगलाकाली! जय गुरुमाता! 🌺🙏आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा का पावन दिवस गुरु...
29/07/2026

गुरु पूर्णिमा पर माँ मंगलाकाली की पूजा का महत्त्व

जय माँ मंगलाकाली! जय गुरुमाता! 🌺🙏

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा का पावन दिवस गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन केवल बाहरी गुरु के सम्मान का ही नहीं, बल्कि उस दिव्य शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी है जो हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है।

यदि कोई साधक माँ मंगलाकाली को ही अपना गुरु मानता है, तो गुरु पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में माँ केवल आराध्य देवी नहीं रहतीं, बल्कि वे गुरु, रक्षक, मार्गदर्शक और मोक्षदायिनी शक्ति के रूप में साधक का जीवन संवारती हैं।

गुरु रूप में माँ मंगलाकाली

माँ मंगलाकाली आदिशक्ति हैं। वे अपने भक्तों को केवल सांसारिक सुख ही नहीं देतीं, बल्कि विवेक, निर्भयता, आत्मबल और आत्मज्ञान भी प्रदान करती हैं। जिस प्रकार गुरु अपने शिष्य का हाथ पकड़कर उसे सत्य के मार्ग पर ले जाता है, उसी प्रकार माँ मंगलाकाली अपने भक्त का मार्गदर्शन करती हैं और उसके जीवन से भय, नकारात्मकता तथा अज्ञान का नाश करती हैं।

गुरु पूर्णिमा पर माँ के श्रीचरणों में श्रद्धा अर्पित करना, उनके उपदेशों और आदर्शों का पालन करने का संकल्प लेना तथा स्वयं को उनके चरणों में समर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा पर माँ मंगलाकाली की पूजा का विशेष फल

- माँ की कृपा से ज्ञान, विवेक और सही निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त होती है।
- जीवन के संकटों, भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- मन, बुद्धि और आत्मा में पवित्रता तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति और साधना में सफलता प्राप्त होती है।
- गुरु कृपा और माँ की करुणा से जीवन में मंगल, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

इस दिन क्या करें?

- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- माँ मंगलाकाली का ध्यान करें और दीपक तथा धूप अर्पित करें।
- लाल अथवा अपनी परंपरा के अनुसार पुष्प अर्पित करें।
- यथाशक्ति फल, मिष्ठान या भोग अर्पित करें।
- गुरु और माँ दोनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करें।
- गरीबों, जरूरतमंदों या गौसेवा जैसे पुण्य कार्य करें।
- दिन भर यथासंभव संयम, सत्य और सेवा का पालन करें।

यदि माँ मंगलाकाली ही आपकी गुरु हैं

यदि आपने अपने हृदय में माँ मंगलाकाली को ही गुरु रूप में स्वीकार किया है, तो गुरु पूर्णिमा आपके लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण का दिव्य अवसर है। इस दिन माँ के श्रीचरणों में यह प्रार्थना करें—

«"हे माँ मंगलाकाली! आप ही मेरी गुरु, आप ही मेरी माता और आप ही मेरी रक्षक हैं। मेरे जीवन से अज्ञान, अहंकार और भय का नाश करें। मुझे सत्य, धर्म, सेवा और करुणा के मार्ग पर चलने की शक्ति दें। आपके चरणों में मेरी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण सदैव अटूट बना रहे।"»

समापन

गुरु पूर्णिमा हमें यह स्मरण कराती है कि बिना गुरु के ज्ञान अधूरा है। और जब स्वयं माँ मंगलाकाली गुरु स्वरूप में हमारा मार्गदर्शन करती हैं, तब साधक का जीवन दिव्य प्रकाश से आलोकित हो जाता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम माँ मंगलाकाली के श्रीचरणों में अपना तन, मन और श्रद्धा समर्पित करें तथा उनके बताए धर्म, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।

जय गुरुमाता माँ मंगलाकाली!
जय माँ मंगलाकाली! 🌺🙏

 # **॥ मंगलवार विशेष ओजस्वी प्रवचन – माँ मंगलाकाली महिमा ॥****ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।****ॐ क्रीं कालिकायै नम...
28/07/2026

# **॥ मंगलवार विशेष ओजस्वी प्रवचन – माँ मंगलाकाली महिमा ॥**

**ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।**
**ॐ क्रीं कालिकायै नमः।**
**जय माँ मंगलाकाली! जय माँ मंगलाकाली!**

परम श्रद्धेय भक्तगण, मातृशक्ति के उपासकों एवं उपस्थित सभी धर्मप्रेमी सज्जनों, आप सभी को माँ मंगलाकाली की असीम कृपा प्राप्त हो।

आज का पावन **मंगलवार** केवल सप्ताह का एक दिन नहीं, बल्कि **शक्ति, साहस, पराक्रम, धर्म और विजय का पर्व** है। यह वह शुभ अवसर है जब हम माँ मंगलाकाली के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण अर्पित करते हैं।

माँ मंगलाकाली आदिशक्ति का वह दिव्य स्वरूप हैं, जो अपने भक्तों के जीवन से भय, संकट, दुःख, अन्याय और अज्ञान का नाश कर उन्हें आत्मबल, निर्भयता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब-तब माँ अपने उग्र स्वरूप से धर्म की रक्षा और भक्तों का कल्याण करती हैं।

आज माँ को **लाल रंग** अर्पित किया जाता है। लाल रंग केवल श्रृंगार का रंग नहीं है, बल्कि यह **शक्ति, उत्साह, साहस, पराक्रम, त्याग और विजय** का प्रतीक है। यह हमें स्मरण कराता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, यदि माँ मंगलाकाली का आशीर्वाद हमारे साथ है, तो कोई भी बाधा हमारी प्रगति को रोक नहीं सकती।

भक्तों, माँ केवल फूल, फल और भोग से ही प्रसन्न नहीं होतीं। माँ को सबसे अधिक प्रिय है **निर्मल मन, सच्ची श्रद्धा, निष्काम सेवा, सत्य का पालन, करुणा और धर्ममय आचरण।** यदि हमारे विचार पवित्र हैं, वाणी मधुर है और कर्म सदाचार से युक्त हैं, तभी हमारी पूजा पूर्ण मानी जाती है।

आइए, आज हम सब माँ मंगलाकाली से प्रार्थना करें—

**हे जगज्जननी माँ मंगलाकाली!**
हमारे जीवन से भय, रोग, शोक और संकटों का नाश करें।
हमारे मन में सत्य, साहस, धैर्य और सद्बुद्धि का प्रकाश करें।
हमारे परिवारों में सुख, शांति, समृद्धि और प्रेम का वास हो।
देश, समाज और समस्त मानवता पर अपनी करुणा और कृपा सदैव बनाए रखें।

अब आप सभी श्रद्धालु दोनों हाथ जोड़कर, पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ माँ का जयघोष करें—

**बोलिए प्रेम से…**
**॥ जय माँ मंगलाकाली ॥**

**एक बार फिर पूरे उत्साह से…**
**॥ जय माँ मंगलाकाली ॥**

**सारे भक्त मिलकर बोलें…**
**॥ जय माँ मंगलाकाली ॥**

**माँ मंगलाकाली की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।**

**॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥**

**🌺 जय माँ मंगलाकाली! 🙏****सोमवार का दिन माँ मंगलाकाली की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।** यह दिन ...
27/07/2026

**🌺 जय माँ मंगलाकाली! 🙏**

**सोमवार का दिन माँ मंगलाकाली की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।** यह दिन मन की शांति, आत्मबल, पवित्रता और शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। श्रद्धापूर्वक माँ मंगलाकाली का पूजन करने से जीवन के संकट दूर होते हैं, नकारात्मकता का नाश होता है तथा सुख, समृद्धि और साहस का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

**सोमवार को माँ मंगलाकाली को श्वेत (सफेद) रंग अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।** श्वेत रंग पवित्रता, शांति, सात्त्विकता और निर्मल चेतना का प्रतीक है। यह भगवान शिव के सोम स्वरूप से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। माँ को सफेद पुष्प, सफेद वस्त्र या सफेद मिठाई अर्पित कर भक्त अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं तथा मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं।

आज के पावन सोमवार पर माँ मंगलाकाली के श्रीचरणों में प्रार्थना करें कि वे हम सभी के जीवन से भय, दुःख और विघ्नों का नाश करें तथा सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।

**॥ जय माँ मंगलाकाली ॥** 🌺🙏

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