Himalayan Tribal Buddhist Welfare Society

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 #तिब्बती   #दर्पण  #प्रेस के  #संस्थापक  The Most  Tharchin Negi  ji #किन्नौर  #लिट्रेचर  #फेस्टिवलआज किन्नौर लिट्रेचर ...
11/06/2025

#तिब्बती #दर्पण #प्रेस के #संस्थापक
The Most Tharchin Negi ji
#किन्नौर #लिट्रेचर #फेस्टिवल

आज किन्नौर लिट्रेचर फेस्टिवल 2025 में उपस्थित रहा । परम पावन दलाई लामा जी ने इस फेस्टिवल के उपलक्ष्य में एक लिखित संदेश दिया था जिसे मंच पर पढा गया । इस संदेश में परम पावन ने बाबू थारचेन (टाशी थारचेन) का नाम किन्नौर के प्रखर बुद्धिजीवी के रुप में वर्णन किया था । उनका योगदान तिब्बत के लिए प्रशंसनीय रहा था । हमें इस संदेश व उनके नाम से अत्यधिक गर्व अनुभव हुआ ।

किन्नौर के इतिहास में उन्होंने पहला विद्यालय खोला 1912 में गांव पूह फुरंग में मोरावियन मिशिनरिस के बाद और उन्होंने पहला पाठ्य पुस्तक लिखा परन्तु एक वर्ष के भीतर ही उनके विद्यालय में तोड फोड हुआ और उनकी पुस्तकों को जला दिया गया । आश्चर्य की बात यह है कि उन्हे उनके परिवार ने ही स्वीकार नहीं किया जिस कारण उन्होंने सदा के लिए किन्नौर छोड दिया और दार्जिलिंग में बस गए । वे 13वें दलाई लामा जी के मित्र थे और वे ल्हासा में कुछ महीने राज मेहमान भी रहे । उन्होंने विश्व का पहला तिब्बती समाचार पत्र मेलोड॰ प्रकाशित व संपादित किया ।

दार्जिलिंग में ब्रिटिश सरकार के अनुरोध पर उन्होंने बच्चों के लिए प्राथमिक पाठ्य पुस्तक की रचना की । उनके समाचार पत्र से ही दुनिया के सरकारों को पता चला कि चीन तिब्बत में अतिक्रमण कर रहा है ।………

उनके समकालीन उर्ग्येन दोनडुब तिब्बत के गाह-देन विश्वविद्यालय में आचार्य रहे, वे पहले किन्नौरा थे जो तिब्बती व चीनी भाषा लिख व पढ सकते थे …
लेखकः-

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Village Themgrang
Sangla
172106

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