21/06/2026
वृंदावन के महान संत स्वामी शरणानंद जी महाराज का जीवन अपने आप में एक अद्भुत गाथा है। वे दृष्टिहीन थे, लेकिन उनकी आस्था की दृष्टि इतनी प्रखर थी कि कठिन से कठिन समय में भी उन्हें प्रभु का साथ मिला। एक बार जब वे नदी के किनारे चल रहे थे, तो अनजाने में उनका पैर मिट्टी के कटाव पर पड़ गया और वे सीधे गहरी नदी में जा गिरे। आँखों से देख न पाने के कारण उन्हें दिशा का कोई ज्ञान नहीं था, चारों तरफ केवल मौत का साया मंडरा रहा था। उस अंतिम क्षण में उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से प्रभु को समर्पित कर दिया। और फिर जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था—बहती हुई उनकी लाठी ठीक उनके हाथों में आकर लगी, जिसके सहारे वे सुरक्षित किनारे तक पहुँच गए। उस दिन के बाद से उन्होंने अपना नाम 'शरणानंद' रखा, जो उस अटूट भरोसे का प्रतीक है। पूज्य महाराज श्री के मुख से इस प्रेरणादायक घटना को सुनिए और जानिए कि जब आप सब कुछ ईश्वर पर छोड़ देते हैं, तो कैसे चमत्कार स्वयं आपका मार्ग प्रशस्त करते हैं।