अरुण जी Arun ji

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सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश , स्वयं पूर्णतः नैतिक आदर्शमय साधनामय जीवन में रहकर ,रामकथा के माध्यम से नैतिकता का प्रचार प्रसार कर सुखमय समाज स्थापित करने का प्रयास है। सुमिरन, सेवा ,सत्संग साधना के माध्यम जीवन के परम लक्ष्य प्राप्ति का अल्प प्रयास है।

30/10/2025

असम्भव को भी संभव बनाने का विजय मंत्र..........

"श्री राम जय राम जय जय राम" ......

आदरणीय
सादर जय सियाराम 🙏 🙏

हनुमान जी का प्रिय "श्री राम जय राम जय जय राम" यह विजय मंत्र भगवान राम की भक्ति और शक्ति को प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति, साहस और विजय के साथ जीवन के हर क्षेत्र में सर्वांगीण सफलता प्राप्त होती है।
सन्त जन कहते हैं कि कोई भी कार्य प्रारम्भ करने के पहले प्रभु श्रीराम जी का 11 बार इस विजय मंत्र का उद्घोष या जप करने से सफलता प्राप्त होती हैं ।

सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏

30/08/2025

पवन तनय संकट हरन ; मंगल मूरती रूप।

राम लखन सीता सहित। हृदय बसहु सुर भूप।।

हे पवनपुत्र ! आप सभी संकटो का हरण करने वाले हैं , आप मंगल मूरत वाले हैं। मेरी प्रार्थना है की आप श्रीराम , श्री जानकी एवं लक्ष्मणजी सहित सदा मेरे हृदय में निवास करें।
कुबेर तालाब रीवा स्थित हनुमान जी मंदिर में आज शनिवार दिनांक 30.08.25 को हनुमान चालीस के साथ हाजिरी
सादर जय सियाराम 🙏🙏

https://youtube.com/shorts/Oo60Gi-o9zg?si=HWi-VJGD7B_s6JvD सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती। करहिं सदा सेवक पर प्रीति। (हनुमान...
05/05/2025

https://youtube.com/shorts/Oo60Gi-o9zg?si=HWi-VJGD7B_s6JvD

सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती।
करहिं सदा सेवक पर प्रीति।
(हनुमान जी ने कहा-) हे विभीषण जी! सुनिए, प्रभु की यही रीति है कि वे सेवक पर सदा ही प्रेम किया करते हैं॥
सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏💐

21/04/2025

आदरणीय
सादर जय सियाराम

कलियुग में भयानक संसार रूपी समुद्र से पार उतरने के लिये श्रीरामनाम ही अपनी नाव-विनय पत्रिका भाव ----------
गोस्वामी जी हम संसारी बद्ध जीव को अपनी पीड़ा में पागल कह कर विनय पत्रिका में संबोधित कर हमारे उद्धार हेतु कहते है।

राम जपु, राम जपु, राम जपु, बावरे ।
घोर भव-नीर- निधि नाम निज नाव रे ॥
राम-नाम छाँड़ि जो भरोसो करें और रे ।
तुलसी परोसो त्यागि माँगे क्रूर कौर रे ॥

अरे पागल मानव ! राम जप, राम जप, राम जप । इस भयानक संसार रूपी समुद्र से पार उतरने के लिये श्रीरामनाम ही अपनी नाव है । अर्थात् इस रामनामरुपी नाव में बैठकर मनुष्य जब चाहे तभी पार उतर सकता है, क्योंकि यह मनुष्य के अधिकार में हैं ॥
जो रामनाम को छोड़कर दूसरे का भरोसा करता है, हे तुलसीदास ! वह उस मूर्ख के समान है, जो सामने परोसे हुए भोजन को छोड़कर एक – एक कौर टुकड़े के लिये कुत्ते की तरह घर – घर माँगता फिरता है ॥

सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏💐

https://youtu.be/em7ZQZNiHCc?si=WMjIPdc7VYXKgT-Gआदरणीय सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏💐
14/04/2025

https://youtu.be/em7ZQZNiHCc?si=WMjIPdc7VYXKgT-G
आदरणीय
सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏💐

Motivational story भगवान बुद्ध रामकथा रामचरित मानस कौशल्या माता राम लक्ष्मण भरत रामबन सतना कथा

https://youtu.be/Pr3QgzcTrZM?si=ZQu3YYWBbhAH4gPHकवन सो काज कठिन जग माहीं ।जो नहीं होत तात तुम पाहीं ।।हनुमान जयंती विशेष...
13/04/2025

https://youtu.be/Pr3QgzcTrZM?si=ZQu3YYWBbhAH4gPH
कवन सो काज कठिन जग माहीं ।
जो नहीं होत तात तुम पाहीं ।।

हनुमान जयंती विशेष

आदरणीय
🙏🙏
सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏💐

https://youtube.com/shorts/Wn-8kU8BV5E?si=FVAlqvQQZqlpS-Gvशक्ति अर्जन पर्व चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏सादर ज...
05/04/2025

https://youtube.com/shorts/Wn-8kU8BV5E?si=FVAlqvQQZqlpS-Gv
शक्ति अर्जन पर्व चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏
सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏

जीवन में सफलता के लिए धैर्य एवं अनुशासन भी आवश्यक----केंद्रीय जेल रीवा सत्संग शनिवार दिनांक 1.03.25-----आदरणीय जय सियारा...
01/03/2025

जीवन में सफलता के लिए धैर्य एवं अनुशासन भी आवश्यक----
केंद्रीय जेल रीवा सत्संग शनिवार दिनांक 1.03.25-----
आदरणीय
जय सियाराम 🙏 🙏
हनुमान जी के अनेक दिव्य गुणों के साथ उनके जीवन में अनुशासन एवं धैर्य भी अत्यंत महत्व पूर्ण गुण है जो किसी भी व्यक्ति को सफलता के शिखर पर पहुंचता है।हनुमान जी प्रभु श्री राम जी से सभी बंदर भालुओं से सबसे पहले किष्किंधा कांड में मिलते है,लेकिन जब जगजननी सीता जी की खोज के लिए जाते समय वह प्रभु से सभी बंदर भालुओं के बाद सबसे बाद में मिलते है,हमारे प्रभु उन्हीं को मुद्रिका देकर खोजने का दायित्व देते हैं।

पाछें पवन तनय सिरु नावा। जानि काज प्रभु निकट बोलावा॥
परसा सीस सरोरुह पानी। करमुद्रिका दीन्हि जन जानी॥

सबके पीछे पवनसुत श्री हनुमान जी ने सिर नवाया। कार्य का विचार करके प्रभु ने उन्हें अपने पास बुलाया। उन्होंने अपने करकमल से उनके सिर का स्पर्श किया तथा अपना सेवक जानकर उन्हें अपने हाथ की अँगूठी उतारकर दी॥
हनुमान जी धैर्य और अनुशासन संपाती जी के प्रसंग,से लेकर मैनाक,सुरसा हर प्रसंग में दिखाई देता है। हनुमान जी की धैर्य की पराकाष्ठा तो तब होती है कि वह जगदम्बा सीता जी को दुखी देखते है और पेड़ पत्तो में छिप कर सोचते है कि क्या करूं,उसी समय रावण आकर धमकाता है हनुमान जी देखते है कि सीता की सबसे बड़ी दुश्मन जिसे होना चाहिए वहीं मंदोदरी जिसे रावण सीता जी का दासी बनाने को कहता है वहीं सीता जी को रावण से बचाती है।
त्रिजटा प्रसंग के बाद हनुमान जी सीता जी को मुद्रिका देकर रामजी की कथा सुनाकर दुख दूर करते हैं।पूरे सुन्दरकाण्ड एवं मानस में हनुमान जी के धैर्य और अनुशासन के अनेक प्रसंग है जो हमें शिक्षा देते है कि यह गुण होने पर जीवन में महानता आ सकती है।

केंद्रीय जेल रीवा में दिनांक 1.03.25 शनिवार को हनुमान जी के अनुशासन, विभीषण जी का समर्पण और मां सीता जी के प्रेम की व्याख्या सुन्दरकाण्ड पाठ के साथ किया।जेल अधीक्षक श्री सतीश उपाध्याय जी , संगीत आचार्य श्री राजेश शुक्ला जी
सहित सभी संबंधित को आभार के साथ प्रभु स्मरण हेतु सादर प्रेषित
सभी को सादर जय रामराजा सरकार 🙏🙏💐

01/03/2025

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