13/04/2026
अगर प्राचीन भारत में टेक्नोलॉजी काफ़ी विकसित थी, तो क्या उन्हें दूसरी भाषाओं/आधुनिक शब्दों की ज़रूरत पड़ती थी/है? 😛😂
*****महर्षि पाणिनी को जानने के योग नहीं रहे लोग.... *शातिर मनोरोगी महान, बुद्धिमान, मेहनती-स्मार्ट और भोला प्यारा बनने का खेल नशा में.... *जहां 'अ' अक्षर का ही पर्याप्त अर्थ है.....है।
***कम से कम शोधकर्ताओं को निष्पक्ष और खुद से जिज्ञासु होना चाहिए, ताकि वे अलग-अलग सभ्यताओं की विशाल प्राचीन वैज्ञानिक भाषाओं को सीख- समझ सकें....,
भारत और भारतीय उपमहाद्वीप में संस्कृत, तमिल जैसी कई समृद्ध वैज्ञानिक भाषाएँ हैं; यहाँ तक कि शुद्ध हिंदी भी बहुत समृद्ध है क्योंकि इनके माता-पिता संस्कृत हैं....,
**** किसी भाषा को कला, व्यवसाय, विज्ञान, औपचारिक रूप, भावनात्मक-भक्तिपूर्ण उद्देश्य से जानना, बोलना, पढ़ना, लिखना और उसे समझना—ये अलग-अलग बातें हैं....,
***भाषा के उदगम प्रारूप और सूत्र होते हैं...जो दुनिया भर में 10% लोग भी ठीक से नहीं जानते लेकिन जो भी ज्योतिषीय और ऊर्जा सिद्धांत में पढ़ाई करते हैं उन्हें काफी हद तक ज्ञान होने लगता है...,
***उदाहरण के लिए, मुझे हिब्रू भाषा का ज़रा भी ज्ञान नहीं है, लेकिन अपनी 'वन-मैन आर्मी' वाली शोध-यात्रा की वजह से मैं उसे थोड़ा-बहुत समझ लेती हूँ। हूँ... 😛😉
*****स्वर्ग का अर्थ है—बेहद आरामदायक-विलासमय जीवन; इसका संचालन देवताओं द्वारा किया जाता है, ईश्वर द्वारा नहीं।
***जिस सभ्यता के पुराने ग्रंथों को डिकोड करना है तो उसी की मूल भाषा की शब्दकोश इस्तेमाल होगी ना कि किसी और की ?....जैसे हिंदू-सनातन धर्म में "धर्म" का मतलब पश्चिमी और दूसरी सभ्यताओं की भाषा की शब्दकोश "Religions" वाली नहीं है...,
*****सभी वर्णित, सद्गुण तथा संबोधित रूप में पूजित देवी-देवता—ये सभी ऊर्जा के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं....यहाँ तक ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी....
***हिंदू-सनातन धर्म का मूल- "ऊर्जा विज्ञान" है, जिसकी मुख्य और सशक्त शाखाएँ प्राकृतिक विज्ञान—अर्थात् जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित और खगोल विज्ञान, मनोवैज्ञानिक—हैं....,
***शुद्ध ज्योतिष इसका एक संयुक्त परस्पर जुड़ा ज्ञान है जिसको जोंक और जोंक के प्रेमियों ने खूब प्रदूषित किया है...🙄😛😂 शातिर मनोरोगी सब जगह महान, बुद्धिमान मेहनती-स्मार्ट और भोला प्यारा बनने का खेल नशा से प्रदूषण करते रहते हैं।
***जैसे, देव गुरु बृहस्पति: और "सूर्य देव (नारायण स्वरूप)" को भी शास्त्रीय संस्कृत में "नीच" का कहा गया है ब्रह्मांडीय गोचर के विशिष्ट समय अवस्था में....
और बड़े ज्ञानी लोग, शिक्षक, माता-पिता आदि भी कुतर्क/मूर्ख युवा को भी "नीच" कहते थे....
****क्योंकि "नीच" का व्यापक मतलब/वास्तविक परिभाषा है: "मानसिक/शारीरिक या भावनात्मक रूप से अति कमज़ोर" ऐसा परिस्थिति जहाँ एक जीव अपनी इच्छा, क्षमता के अनुसार काम नहीं पा रहा है.....*कई कारणों से।
*और राजनीति में "नीच" का मतलब-उपयोग क्या है लगभग सब जानते हैं....🙃
*****आंतरिक और बाहरी उपनिवेशवाद व्यापार मॉडल, (मनोवैज्ञानिक क्षति विशेषज्ञ /मीठा शोषण शातिर मनोरोगी मंडिली मंडी (अप्रत्यक्ष कू-राजनीति , कू-तर्क, कू-बुद्धि वाले), 50% लेखक, शिक्षक, समाचार रिपोर्टर, दार्शनिक, वैचारिक, तथाकथित वैज्ञानिक बुद्धिजीवी मंडिली मंडी, आदर्श और अनुयायी संयोजन व्यापार - मंडी (आस्तिक-नास्तिक, पारंपरिक और आधुनिक रीति-रिवाजों के नाम पर मनोवैज्ञानिक क्षति का फ़ॉर्मूला तो वही है, बस बोतल नई- नई...), पालनहार और संरक्षणकारी, शुभचिंतक रिश्तेदार भी तो गैसलाइट से (पवित्र जल की तरह? ) वही काम करते हैं;.... महान, बुद्धिमान मेहनती-चतुर और भोला प्यारा बनने का खेल नशा में किसी की ताली से 10 रसगुले ठग कर ( ऊर्जा लूट-चोरी, प्रदूषित करना, रोकना, नष्ट करना...) फिर आधी रोटी वापस दे कर...**इस-इस तरह यह दूसरे के बच्चों को बिगाड़ने नहीं देते....?, ***और खुद के "पसंदीदा"...- गर्भ में पल रहे बच्चे से ले कर 60-100 साल के बूढ़े- बुढ़िया को पूरा बिगाड़ने के लिए पूरा प्रायोजित करते - पूरे आभार, खुशी, कृतज्ञता के साथ.... और गाय-बैल जैसे लोगों को मनोवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग , प्रशिक्षण भी देते हैं इसकी ...😛😂
"सब कुछ ऊर्जा है", ऊर्जा उपनिवेशवाद....।
*****इनकी नज़र से इनके भगवान को देखो....परोक्ष एपस्टीन-फाइल मंडीली मंडी जैसी लगती है.....,
***हर शैतान अपने ही बच्चों को खा जाता है (अप्रत्यक्ष, "बीजारोपण") जिस दिन वो दूसरे के बच्चों को खाता है ...अंतिम (70-100%) 30% का आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक ज्ञान जो लोग लेने से बचते हैं, विशेष रूप से शैतान के वकील और शैतान, जोंक, जोंक के प्रेमी, मनोरोगी महान, बुद्धिमान, मेहनती-स्मार्ट और भोला प्यारा बनने का खेल नशा वाले।