07/03/2026
"नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय" शिव पंचाक्षर स्तोत्र का प्रारंभिक श्लोक है। यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है और पाँच अक्षरों — न, म, शि, व, य — से बने मंत्र "ॐ नमः शिवाय" की शक्ति को प्रकट करता है।
श्लोक
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै ‘न’ काराय नमः शिवाय॥
भावार्थ
- नागेन्द्रहाराय — जो नागराज (शेषनाग) को हार के रूप में धारण करते हैं।
- त्रिलोचनाय — जिनके तीन नेत्र हैं (सूर्य, चंद्र और अग्नि का प्रतीक)।
- भस्माङ्गरागाय — जो अपने शरीर पर भस्म का लेप करते हैं।
- महेश्वराय — परमेश्वर, देवों के देव।
- नित्याय शुद्धाय — जो सदा शुद्ध और सनातन हैं।
- दिगम्बराय — जो आकाश को ही वस्त्र मानते हैं।
यह श्लोक भगवान शिव की तपस्वी, सनातन और दिव्य स्वरूप की स्तुति करता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक में "ॐ नमः शिवाय" के पाँच अक्षरों (न, म, शि, व, य) को महिमा दी गई है।