ॐ नम: शिवाय शिव शिव शिव शिव शिव आये

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ॐ नम: शिवाय शिव शिव शिव शिव शिव आये ॐ नम: शिवाय भोले तुम्हारे हाथों में सौपी जीवन की डोर !
आगें मर्ज़ी आप की भोले , ले चल जिस भी और !
ॐ नमः शिवाय ,
बोलो ,ॐ नमः शिवाय !

23/05/2020
28/08/2015

महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी:

मित्रो आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ।

रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी, जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।

वो लिखता है की जब महाराणा
प्रताप पर अकबर ने चढाई की
थी तब उसने दो चीजो को
ही बंदी बनाने की मांग की
थी एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।

आगे अल बदायुनी लिखता है
की वो हाथी इतना समझदार
व ताकतवर था की उसने
हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही
अकबर के 13 हाथियों को मार
गिराया था

वो आगे लिखता है कि
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया तब
कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।

अब सुनिए एक भारतीय
जानवर की स्वामी भक्ति।

उस हाथी को अकबर के समक्ष
पेश किया गया जहा अकबर ने
उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।
पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का न
तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद
हो गया।

तब अकबर ने कहा था कि
जिसके हाथी को मैं अपने सामने
नहीं झुका पाया उस महाराणा
प्रताप को क्या झुका पाउँगा।
ऐसे ऐसे देशभक्त चेतक व रामप्रसाद जैसे तो यहाँ
जानवर थे।

इसलिए मित्रो हमेशा अपने
भारतीय होने पे गर्व करो।
पढ़कर सीना चौड़ा हुआ हो
तो शेयर कर देना।

shri khand mahadev darshan 2015
25/07/2015

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Dev bhoomi Himachal
24/07/2015

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reason of earthquake in Ramayana
14/05/2015

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jai mata mangla kali
06/08/2014

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har har mahadev ....jai shiv shakti jai ardhnarishwer
21/07/2014

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●जानिए भगवान विष्णु से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातेंजो शायद आप नहीं जानते●हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु जगतका प...
20/07/2014

●जानिए भगवान विष्णु से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें
जो शायद आप नहीं जानते●
हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु जगत
का पालन करने वाले देवता है। भगवान विष्णु का स्वरूप
सात्विक यानी शांत, आनंदमयी और कोमल
बताया गया है। वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु के
भयानक और कालस्वरूप शेषनाग पर आनंद मुद्रा में शयन
करते हुए भी दर्शन किए जा सकते हैं।
भगवान विष्णु के इसी स्वरूप के लिए शास्त्रों में
लिखा गया है -
'शान्ताकारं भुजगशयनं'
यानी शांत स्वरूप और भुजंग यानी शेषनाग पर शयन
करने वाले देवता भगवान विष्णु।
भगवान विष्णु के इस अनूठे स्वरूप पर गौर करें तो यह
प्रश्न या तर्क भी जेहन में आता है कि आखिर काल के
साये में रहकर भी क्या कोई बिना किसी बेचैनी के
शयन कर सकता हैं? इसी तरह भगवान विष्णु के इस रूप व
शक्तियों से जुड़ी कई बातों हैं, जिनका संबंध
इंसानी ज़िंदगी से भी जुड़ा है।
क्या है भगवान विष्णु के शेषनाग पर सोने से
जुड़ा रहस्य?
दरअसल, जिंदगी का हर पल कर्तव्य और
जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। इनमें पारिवारिक,
सामाजिक और आर्थिक दायित्व अहम होते हैं। किंतु
इन दायित्वों को पूरा करने के साथ ही अनेक
समस्याओं व
परेशानियों का सिलसिला भी चलता रहता है,
जो कालरूपी नाग की तरह भय, बेचैनी और चिन्ताएं
पैदा करता है। इनसे कईं मौकों पर व्यक्ति टूटकर बिखर
भी जाता है।
भगवान विष्णु का शांत स्वरूप यही कहता है कि ऐसे बुरे
वक्त में संयम, धीरज के साथ मजबूत दिल और
ठंडा दिमाग रखकर जिंदगी की तमाम मुश्किलों पर
काबू पाया जा सकता है। तभी विपरीत समय
भी आपके अनुकूल हो जाएगा।
ऐसा व्यक्ति सही मायनों में पुरूषार्थी कहलाएगा।
इस तरह विपरीत हालातों में भी शांत, स्थिर, निर्भय
व निश्चित मन और मस्तिष्क के साथ अपने धर्म
का पालन
यानी जिम्मेदारियों को पूरा करना ही विष्णु के
भुजंग या शेषनाग पर शयन का प्रतीक है।
क्यों भगवान विष्णु का नाम है 'नारायण' ?
जगतपालक भगवान विष्णु को “नारायण”
भी पुकारा जाता है। सांसारिक जीवन के लिए
तो नारायण नाम की महिमा इतनी ज्यादा बताई गई
है कि इस नाम का केवल स्मरण भी सारे दुःख व कलह
दूर करने वाला बताया गया है। पौराणिक प्रसंगों में
भगवान विष्णु के परम भक्त देवर्षि नारद क नारायण-
नारायण भजना भी इस नाम की महिमा उजागर
करता है। इसी तरह भगवान विष्णु के कई नाम स्वरूप व
शक्तियों के साथ नारायण शब्द जोड़कर ही बोले
जाते हैं। जैसे – सत्यनारायण, अनंतनारायण,
लक्ष्मीनारायण, शेषनारायण, ध्रुवनारायण आदि।
इस तरह नारायण शब्द की महिंमा तो सभी सुनते और
मानते हैं, किंतु कई लोग भगवान विष्णु को नारायण
क्यों पुकारा जाता है, नहीं जानते। यहां बताए
जा रहे हैं भगवान विष्णु के नारायण नाम होने से जुड़े
खास वजहें –
असल में, पौराणिक मान्यता है कि जल, भगवान विष्णु
के चरणों से ही पैदा हुआ। गंगा नदी का नाम
“विष्णुपादोदकी’ यानी भगवान विष्णु के चरणों से
निकली भी इस बात को उजागर करता है।
वहीं पानी को नीर या नार कहा जाता है
तो वहीं जगतपालक के रहने की जगह यानी अयन
क्षीरसागर यानी जल में ही है। इस तरह नार और अयन
शब्द मिलकर नारायण नाम बनता है। यानी जल में रहने
वाले या जल के देवता। जल को देवता मानने के पीछे
यह भी एक वजह है।
पौराणिक प्रसंगों पर गौर भी करें तो भगवान विष्णु
के दशावतारों में पहले तीन अवतारों (मत्स्य, कच्छप व
वराह) का संबंध भी किसी न किसी रूप में जल से
ही रहा।
जानिए क्या है "हरि" नाम का दिलचस्प अर्थ:
सनातन धर्म में भी ईश्वर के गुण, स्वरूप और दिव्य
शक्तियों के आधार पर तीन रूप माने गए हैं। यह तीन रूप
त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश कहलाते हैं।
इनमें भगवान विष्णु को जगत का पालक माना गया है।
श्रीविष्णु को आनंद स्वरूप यानी सुख देने वाले
देवता के रूप में पूजा जाता है।
आपने भगवान विष्णु का 'हरि' नाम भी कई बार
जाने-अनजाने बोला और सुना होगा। किंतु
यहां बताए जा रहे इसी नाम के कुछ रोचक अर्थों से
संभवतः अब तक आप भी अनजान होंगे। ये मतलब
जानकर आप यह नाम बार-बार बोलने का कोई
मौका चूकना नहीं चाहेंगे।
शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु के 'हरि' नाम
का शाब्दिक मतलब हरण करने या चुरा लेने
वाला होता है। कहा गया है कि 'हरि:
हरति पापानि' जिससे यह साफ है कि हरि पाप
या दु:ख हरने वाले देवता है। सरल शब्दों में 'हरि'
अज्ञान और उससे पैदा होने वाले कलह को हरते या दूर
कर देते हैं।
'हरि' नाम को लेकर एक रोचक बात भी बताई गई है,
जिसके मुताबिक हरि को ऐश्वर्य और भोग हरने
वाला भी माना है। चूंकि भौतिक सुख, वैभव और
वासनाएं व्यक्ति को भगवान और भक्ति से दूर
करती है। ऐसे में हरि नाम स्मरण से भक्त इन सुखों से दूर
हो प्रेम, भक्ति और अंत में भगवान से जुड़ जाता है।
यही वजह है कि 'हरि' नाम को धार्मिक और
व्यावहारिक रूप से सुख और शांति का महामंत्र
माना गया है।

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