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माता सीता के स्वयंवर का वह दृश्य अद्भुत था जब प्रभु श्रीराम ने उस 'पिनाक' धनुष को सहज ही उठा लिया, जिसे वहां उपस्थित महा...
17/06/2026

माता सीता के स्वयंवर का वह दृश्य अद्भुत था जब प्रभु श्रीराम ने उस 'पिनाक' धनुष को सहज ही उठा लिया, जिसे वहां उपस्थित महाबली राजा हिला भी न सके थे।
लेकिन अक्सर यह प्रश्न उठता है कि स्वयंवर की शर्त तो केवल धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की थी, फिर श्रीराम ने उसे भंग क्यों कर दिया? क्या यह महादेव का अपमान नहीं था?
इसके पीछे के कारण अत्यंत गहरे और पौराणिक हैं:
१. रामायण का मत (अनायास घटना):
वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस दोनों के अनुसार, प्रभु श्रीराम ने धनुष को जानबूझकर नहीं तोड़ा था। उन्होंने तो बस गुरु की आज्ञा से उसे उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा (डोरी) चढ़ाने का प्रयास किया, वह पुराना दिव्य धनुष 'अनायास' ही भयंकर ध्वनि के साथ टूट गया। श्रीराम ने परशुराम जी से भी यही कहा था कि यह अनजाने में हुआ।
२. पुराणों का रहस्य (महादेव की इच्छा):
विष्णु पुराण और शिव पुराण एक गहरा रहस्य खोलते हैं। यह धनुष (पिनाक) और विष्णु जी का धनुष (शांरग), दोनों ब्रह्मा जी ने बनाए थे। एक बार दोनों में श्रेष्ठता का युद्ध हुआ। शिवजी एक क्षण के लिए विष्णु जी का अद्भुत कौशल देखने रुके, जिस कारण ब्रह्मा जी ने शांरग को श्रेष्ठ घोषित किया।
इससे रुष्ट होकर महादेव ने पिनाक का त्याग कर दिया और स्वयं भगवान विष्णु से कहा कि समय आने पर वे ही इस धनुष का नाश करें।
निष्कर्ष:
यह धनुष देवताओं से होता हुआ राजा जनक के पूर्वजों तक पहुँचा था। जब बालपन में माता सीता ने इसे सहजता से उठा लिया, तब जनक ने स्वयंवर का प्रण लिया।
अतः स्वयंवर में श्रीराम रूपी नारायण ने धनुष तोड़कर वास्तव में महादेव की उस पुरानी इच्छा को ही पूरा किया था। स्वयंवर तो केवल एक निमित्त मात्र था। यह घटना यह भी सिखाती है कि संसार में कोई भी वस्तु अनश्वर नहीं है, समय पूरा होने पर सबका अंत निश्चित है।
जय सिया राम!

16/06/2026

श्रीमानो के घर में जन्म लेने के बाद जब वो परमात्मा की तरफ खिंचता है तो उसकी क्या दशा होती है
जब कोई व्यक्ति श्रीमंत परिवार में जन्म लेता है तो उसके पास भौतिक सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होती। लेकिन कई बार जीवन के बीच में उसके अंदर एक गहरी आध्यात्मिक पुकार उठती है और उसका मन परमात्मा की ओर खिंचने लगता है।

इस वीडियो में Rajan Chaudhary समझाते हैं कि जब कोई व्यक्ति सांसारिक ऐश्वर्य के बीच रहते हुए भी परमात्मा की ओर आकर्षित होता है, तो उसके मन, बुद्धि और जीवन में कैसी अवस्था उत्पन्न होती है।

यह चर्चा केवल आध्यात्मिकता ही नहीं बल्कि जीवन के गहरे सत्य को भी प्रकट करती है—कि असली शांति और आनंद केवल परमात्मा से जुड़ने में ही है।

अगर आप भी कभी महसूस करते हैं कि भौतिक सुख होने के बाद भी जीवन में कुछ अधूरा है, तो यह वीडियो आपके लिए है।

वीडियो को अंत तक देखें, लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।

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Kya paramatma ki aur khinchav jeevan ka turning point ban sakta hai

Disclaimer ☛ The Video you're about to watch is inspired by Hindu Mythology and Folk legends. These Stories are based on religious scriptures believed to be thousands of years old. Please note our objective is not to hurt sentiments of any particular person, sect or religion. These are mythological stories meant only for educational purposes and we hope they'd be taken likewise.

16/06/2026

Vrindavan Mein Adhyatmik Charcha | Shri Hit Sukrit Goswami Ji × Rajan Chaudhary

Vrindavan ki pavitra bhoomi par Shri Hit Sukrit Goswami Ji ke saath ek gahri adhyatmik baatcheet 🙏
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Agar aap spirituality aur self-growth mein interest rakhte hain, toh yeh episode zaroor dekhein ❤️

Guest: Shri Hit Sukrit Goswami
Host: Rajan Chaudhary

RadhaRani KrishnaBhakti SanatanDharma PodcastIndia Spirituality HareKrishna Motivation InnerPeace SpiritualTalk IndianPodcast Krishna BhagavadGita Devotional Premanand RadheRadhe

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16/06/2026

कहानी शुरू होती है एक सन्यासी से—जो सालों हिमालय में तप करके चारों वेदों का ज्ञान अर्जित करता है। गुरु आशीर्वाद देते हैं, ज्ञान बाँटने का आदेश देते हैं और एक चेतावनी भी…
“बेटा, कभी भी त्रिया-चरित्र के फेर में मत पड़ना। जिसको देव भी न समझ पाए, उस पर मत उलझना।”
सन्यासी गाँव आता है। उसकी कुटिया, उसकी पूजा, उसका ज्ञान—सब पर लोगों की श्रद्धा बरसने लगती है। गाँव की महिलाएँ सेवा करतीं, सम्मान देतीं, और गुरुजी के मन में एक सवाल उठने लगता है—
“ये सब तो इतनी सीधी-सादी हैं, फिर गुरु ने चेतावनी क्यों दी थी?”
एक दिन जिज्ञासा हद से गुजर जाती है। वो रोज भोजन लाने वाली एक सरल लड़की से पूछ बैठते हैं—
“बिटिया, त्रिया चरित्र क्या होता है?”
लड़की हर बार चुप। लेकिन गुरुजी हर दिन वही सवाल दोहराते रहते हैं।
और फिर एक शाम…
लड़की अचानक खाना पटककर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगती है!
लोग भागते हैं, भीड़ आती है, और अगले ही पल गुरुजी पर बरस पड़ती है।
उनका सम्मान, उनकी कुटिया—सब पल भर में टूटने लगता है।
तभी लड़की चिल्लाती है—
“रुकिए! मैं तो बस डर गई थी। गुरुजी के पास एक काला नाग देखा था! आप लोग समझ न पाए और उल्टा गुरुजी को मारने लगे।”
भीड़ शर्मिंदा। वही हाथ जो मार रहे थे, अब चरण छूने लगते हैं।
कुटिया फिर से सज जाती है।
थरथराते गुरुजी अभी भी समझ नहीं पाए—आख़िर हुआ क्या?
लड़की हल्दी वाला दूध रख जाती है और शांत स्वर में कहती है—
“महाराज, आपने ही बार-बार त्रियाचरित्र पूछा था।
इसे समझाया नहीं जा सकता—केवल दिखाया जा सकता है।”
गुरुजी रातों-रात कुटिया छोड़ते हैं… और हिमालय लौट जाते हैं—
क्योंकि आज उन्हें एहसास हुआ कि ज्ञान अभी भी अधूरा है।
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15/06/2026

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15/06/2026

आज का spiritual quote महादेव को समर्पित 🙏
उनकी कृपा से हर मुश्किल आसान हो जाती है।
अगर आप भी महादेव पर विश्वास रखते हैं, तो कमेंट में लिखें — हर हर महादेव 🔱
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14/06/2026

श्रीमद्भागवत महापुराण - प्रथम स्कंध - दूसरा अध्याय - भागवत कथा और भगवद्भक्ति का महात्म्य - Shrimad Bhagwad Mahapuran - Pratham Skandh - Doosra Adhyaye - Bhagwat Katha aur Bhagwadbhakti ka Mahatmaye

Extracts of Bhagwat Geeta presented to you in curated manner.

We also have such moments in our life and these teaching will surely guide us through | Radhey Radhey !

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इस संसार में हर किसी के जीवन का लक्ष्य (Goal of life) अलग-अलग है परंतु लक्ष्य क्या है? यह उस व्यक्ति पर निर्भर करता है, ...
14/06/2026

इस संसार में हर किसी के जीवन का लक्ष्य (Goal of life) अलग-अलग है परंतु लक्ष्य क्या है? यह उस व्यक्ति पर निर्भर करता है, जिस व्यक्ति ने अपना लक्ष्य चुन रखा हो।
कई लोग अपने जीवन में एक निश्चित लक्ष्य नहीं बना पाते है, वे अपनी जिंदगी को उसके हाल पर छोड़ देते हैं अतः जिंदगी का रुख जिस तरफ मुड़ता है वे उसी ओर चल देते हैं।
हालांकि एक अच्छा जीवन जीने की इच्छा शक्ति उनके अंदर भी होती है। क्योंकि जीवन में छणिक भी विश्वास नहीं किया जा सकता कि कब हमारे साथ कौन सी घटना व्यतीत हो सकती है। न जाने हमें कौन सी घटना से क्या समस्याएं मिल सकती हैं इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ ना कुछ लक्ष्य तो बना ही लेता है।
परंतु वह इस बात की जिम्मेदारी नहीं ले सकता कि मैं उस लक्ष्य तक पहुंच ही जाऊंगा, वह लक्ष्य निश्चित ही प्राप्त करूंगा या नहीं।
अपने जीवन में हर व्यक्ति सिर्फ अपने लक्ष्य की कल्पना कर सकता है और कल्पना में ही वह अपने उस लक्ष्य में जाता हुआ खुद को महसूस कर पाता है।
बेहद कम लोग अपने जीवन में सफलता के शिखर पर चढ़ पाते है।
अपने लक्ष्य तक पहुंचने में लोगों को ऐसी बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिन्हें सहन करते करते कई लोग अपने जीवन में हिम्मत ही खो देते हैं।
उन्हें इस बात से डर लगने लगता है कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना भी उचित नहीं है क्योंकि इस जीवन में हर एक लक्ष्य पाना नामुमकिन है अब सवाल आता है कि आखिर
जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए?
वैसे तो अपनी इच्छाओं और आवश्यकता के अनुरूप मानव अपने जीवन में कोई भी लक्ष्य निर्धारित कर सकता है।
परंतु हमारी राय में व्यक्ति का सर्वप्रथम लक्ष्य जीवन में शांति प्राप्त करना होना चाहिए। क्योंकि इस मार्ग पर चलकर ही चलकर मनुष्य उन्नति कर सकता है।
मनुष्य को चाहिए कि वह इस संसार में मौजूद सभी प्राणियों को समान भावना से देखें। एक मनुष्य की भांति ही अन्य जीव-जंतुओं के दुख दर्द उनकी भावनाओं को समझें।
अपने स्वार्थ के लिए क्रूरता के साथ मासूम जानवरों एवं जीवो की हत्या करना उन्हें चोट पहुंचाना की इजाजत ईश्वर द्वारा मनुष्य को नहीं दी गई है।
हमें संसार में भगवान ने समान रूप से बनाया है, अतः किसी भी दूसरे प्राणी को ठेस पहुंचाना और उसका नुकसान कर हम इस मानव जीवन का दुरुपयोग कर रहे है।
एक मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप लक्ष्य बना सकता है। जैसे ढेर सारा धन कमाना हो, पद- सम्मान प्राप्त करना हो, या दुनिया घूमना हो।
परंतु सुख शान्ति का अनुभव पाने के लिए कुछ नैतिक मूल्य हैं जिन्हें पहले उसे अपने लक्ष्य में जरूर शामिल करना चाहिए।
वह कभी भी अन्य लोगों के जीवन के लिए परेशानी ना बने और ना ही उसके कार्यों से अन्य लोगों के जीवन में परेशानियां हो सके।
मुझे लगता है यह एक सामान्य परंतु उपयोगी लक्ष्य हर किसी के जीवन का होना चाहिए।
जीवन में लोगों के लक्ष्य ?
इस संसार में हर एक इंसान का लक्ष्य अलग-अलग है कोई व्यक्ति मोक्ष प्राप्त करना चाहता है तो कोई धन-दौलत परंतु वास्तविक लक्ष्य क्या होना चाहिए इसका किसी को भी ज्ञान नहीं है,क्योंकि जिन्हें इस संसार में जिस चीज की जरूरत होती है वह उसी चीज को प्राप्त करने का लक्ष्य बना जाते है।
परंतु जब उसे वह चीज हासिल हो जाती है तो वह फिर उसके बाद कोई दूसरी वस्तु या अन्य आवश्यक चीज को अपना लक्ष्य समझ बैठता हैं ।
कोई अपनी पसंदीदा वस्तु को पाना ही अपना अंतिम लक्ष्य समझता है तो वहीं कुछ लोग सिर्फ अपना जीवन यापन करने यानी दो वक्त की रोटी खाकर अपना पेट भरने को ही अपना लक्ष्य समझ बैठते हैं।
परंतु सिर्फ जिंदा रहने के लिए अपना पेट भरना ही लक्ष्य होना उचित नहीं हो सकता। यह हमारे जीवन का लक्ष्य है ही नहीं, क्योंकि यह हमारी जरूरत है और मनुष्य यदि कर्म करेगा तो उसकी जरूरत अवश्य पूरी होगी।
अतः हमें अपने जीवन का लक्ष्य अपने अंदर के ज्ञान को जानना तथा उस ज्ञान की बदौलत अपनी कमियों को दूर करना व उस ज्ञान को लोगों के साथ बांटना होना चाहिए l
क्योंकि हम इंसान संवाद के जरिए अपने विचारों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा सकते और अपने जीवन में निराश लोगों का सही मार्गदर्शन कर उनके जीवन में फैले अंधकार को मिटाने का काम कर सकते है।
परंतु वर्तमान समय में हर कोई इंसान सिर्फ धन दौलत कमाना ही अपना लक्ष्य समझ बैठते हैं। जिससे अंततः मनुष्य की हानि होती है, वह अपने पास मौजूद धन का सही प्रयोग नहीं कर पाता और अपना जीवन दुख में व्यतीत करता है।
लोगों के लक्ष्य अलग-अलग क्यों होते हैं?
जीवन में हर किसी के लक्ष्य अलग-अलग होते हैं। इसका कारण उन्हें वास्तविक ज्ञान का बोध न हो पाना है। जब लोगों को वास्तविक जीवन का ज्ञान नहीं होता तो वे लोग अपने जीवन का लक्ष्य उन्हीं चीजों को समझते हैं जिनसे उनका जीवन आसानी से गुजर सके।
जैसे एक छोटा सा बालक अपना लक्ष्य एक डॉक्टर बनना बना लेता है परंतु वह कभी भी यह नहीं सोचता कि वह डॉक्टर बनके लोगों को स्वस्थ बनाने की कोशिश करेगा।
उसका लक्ष्य सिर्फ यह होता है कि वह डॉक्टर बनेगा और ज्यादा से ज्यादा पैसे कमा कर अपनी जिंदगी पूर्ण सुख सुविधाओं के साथ व्यतीत करेगा।
इस प्रकार इस संसार में जो भी व्यक्ति जिस क्षेत्र में पैसे देखता है उसी क्षेत्र में कुछ बनना उसका लक्ष्य हो जाता है और उसके जीवन का उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना रह जाता है
इस संसार में पैसों से भले ही हम अपनी आवश्यकताओं की चीजों को खरीद सकते हैं परंतु लोगों के सुख-दुख वह अपने अंदर के अच्छे गुणों को कभी भी नहीं पहचान पाते और ना ही खुद के अंदर अच्छे गुण ला पाते हैं।
ऐसे ही लोग ज्ञान के अभाव के चलते अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं परंतु इन्हें वास्तविक लक्ष्य का बोध हो ही नहीं पाता।

सफल लोगों के जीवन के क्या लक्ष्य होता है?
जो लोग अपने जीवन में सफल हैं वह आज अन्य व्यक्ति की नजरों में भी सफल व्यक्ति बन चुके हैं। सफल लोगों में यह खासियत होती है कि वह लोग कभी भी अपने लक्ष्य का घमंड किसी को महसूस नहीं करवाते।
वो अपनी जिंदगी में एक लक्ष्य निर्धारित करते हैं और उस रास्ते पर चल कर वह मुकाम हासिल करते है
और प्रयास करते हैं कि वे अधिक से अधिक लोगों को खुशी दे सकें, लोगों की सहायता कर सकें यही उनकी खूबी व सफलता का राज होता हैं।
वह प्रत्येक व्यक्ति आज सफल बन चुका है जिसने सबके हित के बारे में सोच कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश की, उसने अपने लक्ष्य के सफर में किसी भी अनजान व्यक्ति को कभी दुख नहीं पहुंचाया और सबको साथ लेकर वह व्यक्ति आगे बढ़ा, वह अक्सर आखिर में अपनी मंजिल में पहुंच गया।
प्रत्येक सफल व्यक्ति के जीवन का लक्ष्य सिर्फ यही राज है कि भले ही उसे उसकी मंजिल मिले या ना मिले परंतु वो कभी भी किसी व्यक्ति का दिल नहीं दुखाएगा और ना ही उसे दुखी होने का कोई कारण देगा।
उदाहरण के तौर पर आज हम बिजनेस में सफल में लोगों का जीवन देखें तो आप पायेंगे उन लोगों ने अपने बिजनेस की शुरुआत लोगों की किसी मुख्य समस्या को हल करने के साथ की थी।
अतः दूसरों की मदद करने का यह फार्मूला हमें जिंदगी में मान सम्मान पैसा धन-दौलत और सुख शांति देता है।
जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए~लोगों के विचार?
जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए बहुत सारे लोग अपने अलग-अलग विचार रखते हैं एक छोटे से बालक का विचार यह होता है कि वह अपने जीवन में वह प्रत्येक खुशी हासिल कर सके जिसके कारण उसे समस्याओं का सामना करने का मौका ही ना मिले उसका मानना होता है।
उसे जीवन में प्रत्येक छोटी से बड़ी खुशी मिल सके, वह हमेशा अपने कामों में व्यस्त रह सके और साथ ही वह अपने प्रत्येक शौक पूरे कर सके।
परंतु एक व्यक्ति के विचार जो 25 से 30 वर्ष के बीच में जॉब करता है। उसका मानना होता है कि जीवन का लक्ष्य इतनी धन दौलत कमा सके जिससे वह अपने परिवार को एक अच्छे जीवन का गुजारा करा सके।
वहीं एक वो व्यक्ति है जो 60 साल की उम्र पार कर चुका हो उसका मानना है कि जीवन का लक्ष्य सिर्फ मोक्ष प्राप्त करना होना चाहिए। वह व्यक्ति बोलता है कि हमें कभी भी अन्य लोगों को दुखी नहीं करना चाहिए ना ही उनके दुखों का कारण बनना चाहिए जितना भी हो सके हमें लोगों को सांत्वना देने की कोशिश करनी चाहिए और उन्हें यह समझाना चाहिए कि इस जीवन में कोई भी वस्तु हमारे लिए मायने नहीं रखती।
क्योंकि हमें जीवन में जिस वस्तु की जरूरत नहीं है, यदि उस वस्तु की लालसा रखते है, तो हम बाद में उसे आवश्यक समझकर उसे अपनाने का प्रयत्न करते हैं।
अतः संक्षेप में कहा जाए तो उम्र के अनुसार व्यक्ति के लक्ष्य बदलते रहते हैं। लेकिन यह बात कदापि सत्य है कि जीवन का लक्ष्य सिर्फ अधिक से अधिक सुख सुविधाओं का भोग करना नहीं हो सकता। बल्कि जीवन सच्चाई इन सबसे परे है और बिना जीवन की वास्तविकता को जाने वह अपने जीवन को नहीं समझ सकता।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य आत्म-साक्षात्कार करना होना चाहिए। मनुष्य की आत्मा परम सत्य (ईश्वर) को जानने के बाद जीवन मुक्ति की अधिकारी हो जाती है और मनुष्य इस संसार भवसागर से पूर्णतया मुक्त होकर पुनः संसार चक्र में नहीं फँसता।

13/06/2026

श्रीमद्भागवत महापुराण - प्रथम स्कंध - तीसरा अध्याय - भगवान के अवतारों का वर्णन - Shrimad Bhagwad Mahapuran - Pratham Skandh - Teesra Adhyaye - Bhagwan ke avtaro ka varnan
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आखिर क्यों महादेव ने अपने ही वाहन को सामने बैठने से रोक दिया? इस अद्भुत रहस्य को जानने के लिए पूरी पोस्ट पढ़ें!  पोस्ट प...
13/06/2026

आखिर क्यों महादेव ने अपने ही वाहन को सामने बैठने से रोक दिया? इस अद्भुत रहस्य को जानने के लिए पूरी पोस्ट पढ़ें! पोस्ट पसंद आए तो 'ॐ नमः शिवाय' जरूर लिखें।
शिव के बिना नंदी अधूरे... लेकिन क्या आप उस इकलौते शिव मंदिर को जानते हैं जहाँ नंदी नहीं हैं?
महादेव के मंदिर में प्रवेश करते ही हमारी नज़र सबसे पहले शिव के परम भक्त और उनके वाहन 'नंदी' पर पड़ती है। लेकिन नंदी महादेव की सवारी कैसे बने? और वो कौन सा रहस्यमयी मंदिर है जहाँ शिव के सामने नंदी नहीं विराजते? आइए जानते हैं यह अद्भुत कथा:
नंदी का जन्म और अमरता का वरदान
शिलाद मुनि ने योग और तप का मार्ग चुना, लेकिन पितरों की चिंता दूर करने के लिए उन्होंने इंद्र देव और फिर भगवान शिव की घोर तपस्या की। प्रसन्न होकर शिवजी ने स्वयं उनके पुत्र रूप में प्रकट होने का वरदान दिया। भूमि जोतते समय शिलाद मुनि को एक बालक मिला, जिसका नाम रखा गया 'नंदी'।
जब नंदी को अपनी अल्पायु का पता चला, तो उन्होंने महादेव की कठोर आराधना की। शिवजी उनके तप से इतने प्रसन्न हुए कि नंदी को अजर-अमर कर दिया और संपूर्ण गणों का अधिपति (नंदीश्वर) बनाकर अपने वाहन के रूप में स्वीकार किया। शिवजी ने वरदान दिया कि जहाँ शिव होंगे, वहाँ नंदी अवश्य होंगे!
कपालेश्वर महादेव: जहाँ नंदी शिव के सामने नहीं हैं!
नासिक (पंचवटी) में गोदावरी तट पर स्थित 'कपालेश्वर महादेव मंदिर' दुनिया का इकलौता ऐसा शिव मंदिर है, जहाँ शिव प्रतिमा के सामने नंदी नहीं हैं।
कथा के अनुसार, जब शिवजी ने ब्रह्मदेव के निंदा करने वाले पांचवें मुख को काट दिया, तो उन्हें ब्रह्महत्या का पाप लग गया। शिवजी इस पाप से मुक्ति के लिए ब्रह्मांड में भटक रहे थे। तब सोमेश्वर में एक बछड़े (स्वयं नंदी) ने उन्हें गोदावरी के रामकुंड में स्नान कर पाप मुक्त होने का मार्ग दिखाया। नंदी ने शिवजी को पाप से मुक्ति दिलाई थी, इसलिए शिवजी ने उन्हें अपना 'गुरु' माना और सम्मान देते हुए अपने सामने बैठने से मना कर दिया।
नंदी हमें क्या सिखाते हैं?
नंदी के नेत्र सदैव अपने इष्ट को स्मरण रखने का प्रतीक हैं। उनका हर क्षण शिव को समर्पित है। वे हमें सिखाते हैं कि यदि हम अपना हर पल परमात्मा को अर्पित कर दें, तो हमारा ध्यान स्वयं भगवान रखेंगे।
ऐसी ही अद्भुत पौराणिक कथाओं को जानने के लिए इस पोस्ट को अपने मित्रों के साथ शेयर (Share) करें और हमारे पेज से जुड़े रहें!
।। ॐ नमः शिवाय ।।
।। हर हर महादेव ।।

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