04/10/2022
*प्रद्युम्नविमल सूरीश्वरजी म.सा. का जीवन परिचय*
*- नाम - आचार्य श्री प्रद्युम्नविमल सूरीश्वर जी म.सा.*
*- जन्म स्थान - जैतु जिला जालौर*
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*- जन्म दिनांक - 09 दिसम्बर 1964*
*-जन्म नाम - प्रभुलाल*
*- गौत्र - रुदिया ( राजपुरोहित )*
*- पिताजी - श्री उकचंदजी*
*- माताजी - श्रीमती वादली बाई*
*- दीक्षा - वि.सं. 2032, मगसर सुद 4*
*- दीक्षा स्थान - श्री शत्रुंजय महातीर्थ*
*- बड़ी दीक्षा - वि.सं. 2032, वैशाख सुद 6*
*- दीक्षा गुरू - आचार्य श्री शांतिविमल सूरीश्वरजी म.सा.*
*- दीक्षा उपरांत नाम - श्री प्रद्युम्नविमल जी म.सा.*
*- उपनाम - भाई महाराज*
*- गच्छाधिपति पदवी - दिनांक 25.05.1983, वैशाख सुद 12*
*- आचार्य पदवी - दिनांक 20.02.1996, महा सुद 13 मुम्बई*
*- तपाराधना - दो वर्षीतप*
*- ज्ञानाराधना - हिन्दी, गुजराती, मारवाड़ी, संस्कृत, प्राकृत, आदि*
*ज्योतिष शास्त्र में माहिति*
*- आपश्री को मंत्र साधना और ज्योतिष शास्त्र का विशेष ज्ञान अपने गुरूदेव श्री शांतिविमल सूरीश्वरजी म.सा. से प्राप्त हूआ है ।*
*- जैन धर्म के सिद्धान्तों एवं आगमों का का ज्ञान आपश्री को विद्वान मुनि प्रवर श्री जंबुविजय जी म.सा. के सानिध्य में श्री शंखेश्वर तीर्थ, आदरणीया, पाटण, दसाणा, मांड़ण आदि तीर्थो में अर्जित किया है ।*
*- शासन प्रभावना - आपश्री के वरद हस्त से अब तक 22 साधु - साध्वी म.सा. की दीक्षा हो चूकी है ।*
*- प्रतिष्ठा - आपके वरदहस्त से अब तक 125 से अधिक जिनमंदिरों एवं गुरू मंदिरों की प्रतिष्ठा सम्पन्न हो चूकी है ।*
*- विहार में विचरण - आप श्री ने अब तक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड़, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि राज्यों में लगभग 75 हजार से अधिक किलोमीटर की पदयात्रा कर चूके है ।*
*जिनके पग - पग में प्रगटे नवनीत पुण्य निधान......*
*ऐसे गुरूवर की निश्रा मिली महान......*
*वंदना - वंदना - वंदना रे*
*गुरूराज को सदा मोरी वंदना रे.....*
CN - Anil Ji Jain