Pandit Anurag Shastri

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नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ॥--------------------...
30/07/2024

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ॥
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अर्थात्- जो शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, तथा भस्म की राख को सारे शरीर में लगाये हुए हैं, इस प्रकार महान् ऐश्वर्य सम्पन्न वे शिव नित्य–अविनाशी तथा शुभ हैं। दिशायें जिनके लिए वस्त्रों का कार्य करती हैं, अर्थात् वस्त्र आदि उपाधि से भी जो रहित हैं; ऐसे निरवच्छिन्न उस नकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।
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Shiva who is wearing a necklace of Nagraj Vasuki, has three eyes and has ashes smeared all over his body, thus endowed with great opulence, that Shiva is eternal, indestructible and auspicious. For whom the directions act as clothes, i.e. who is devoid of the title of clothes etc.; I salute Shiva who is free from all forms of negation and is free from all forms of clothes.
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Source- शिव पंचाक्षर स्तोत्र (१)

23/07/2024

*Rudrabhishekam Puja introduction*

Rudrabhishekam is performed to get the blessings of Lord Shiva in the form of rudra. The history behind the puja is that, Lord Rama performed it at Rameshwaram before he crossed the sea to reach Lanka to retrieve Sita and defeat Ravana.

*How it works*

Lord Shiva controls all the Nine Planets & Time.
This includes the prime villains amongst planets ie. Saturn, Rahu, Ketu and Mars.
He also controls the Moon, i.e. the significator of the Mind. Hence by pleasing Lord Shiva, you get a clearer mind, and the troublemaker planets do not bother you anymore.
Rudrabhishekam Puja Benefits
Gain Health, Wealth and Prosperity
Gain Overall Peace of Mind
Make Progress Faster by removing obstacles
Get protection from incurable diseases
Lessen the influence of bad planetary combinations
Overcome fear and phobias

Do rudrabhishekam in shravan month and get blessings of lord Shiva.

29/10/2023

*सत्य -सत्यमेवेश्वरो लोके सत्ये धर्मः सदाश्रितः ।*
*सत्यमूलनि सर्वाणि सत्यान्नास्ति परं पदम् ॥*

*अर्थात्*- सत्य ही संसार में ईश्वर है; धर्म भी सत्य के ही आश्रित है; सत्य ही समस्त भव-विभव का मूल है; सत्य से बढ़़कर और कुछ नहीं है।

04/10/2023

परस्य पीडया लब्धं धर्मस्योल्लंघनेन च। आत्मावमानसंप्राप्तं न धनं तत् सुखाय वै।।

✍️ दूसरों को दु:ख देकर, धर्म का उल्लंघन करके या खुद का अपमान सहकर मिले हुए धन से कभी सुख नहीं प्राप्त होता।

27/09/2023
05/09/2023

"वंशी विभूषित करा नवनीर दाभात् ,
पीताम्बरा दरुण बिंब फला धरोष्ठात् |
पूर्णेन्दु सुन्दर मुखादर बिंदु नेत्रात् ,
कृष्णात परम किमपि तत्व अहं न जानि ||

जिनके करकमलों में बंसी शोभायमान है, जिनके सुंदर शरीर की आभा नये बादलों जैसी घनश्याम है, जिनका सुंदर मुख पूर्ण चन्द्र जैसा है, जिनके नेत्र, कमल की भांति बहुत सुंदर है, जिन्होंने पीताम्बर धारण किया हुआ है, जिनके अधरोष्ठ अरुणोदय जैसे, मानो उदित होते हुए सूर्य के लाल फल के रंग जैसा है, ऐसे श्रीकृष्ण भगवान के सिवा और कोई परम तत्व है, यह मैं नहीं जानता...

प्राचीन समय भारत मे कभी छुआछुत रहा ही नहीं, और ना ही कभी जातियाँ भेदभाव का कारण होती थी। चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़...
08/04/2023

प्राचीन समय भारत मे कभी छुआछुत रहा ही नहीं, और ना ही कभी जातियाँ भेदभाव का कारण होती थी। चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।

सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की।

सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा?

महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो।

विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है।

भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया।

श्री कृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,

उनके भाई बलराम खेती करते थे, हमेशा हल साथ रखते थे।

यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्री कृष्ण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया।

राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे।

उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे

तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार।

वर्ण सिर्फ काम के आधार पर थे वो बदले जा सकते थे, जिसको आज इकोनॉमिक्स में डिवीज़न ऑफ़ लेबर कहते हैं वो ही।

प्राचीन भारत की बात करें, तो भारत के सबसे बड़े जनपद मगध पर जिस नन्द वंश का राज रहा वो जाति से नाई थे ।

नन्द वंश की शुरुवात महापद्मनंद ने की थी जो की राजा नाई थे। बाद में वो राजा बन गए फिर उनके बेटे भी, बाद में सभी क्षत्रिय ही कहलाये।

उसके बाद मौर्य वंश का पूरे देश पर राज हुआ, जिसकी शुरुआत चन्द्रगुप्त से हुई,जो कि एक मोर पालने वाले परिवार से थे और एक ब्राह्मण चाणक्य ने उन्हें पूरे देश का सम्राट बनाया । 506 साल देश पर मौर्यों का राज रहा।

फिर गुप्त वंश का राज हुआ, जो कि घोड़े का अस्तबल चलाते थे और घोड़ों का व्यापार करते थे।140 साल देश पर गुप्ताओं का राज रहा।

केवल पुष्यमित्र शुंग के 36 साल के राज को छोड़ कर 92% समय प्राचीन काल में देश में शासन उन्ही का रहा, जिन्हें आज दलित पिछड़ा कहते हैं तो शोषण कहां से हो गया? यहां भी कोई शोषण वाली बात नहीं है।

फिर शुरू होता है मध्यकालीन भारत का समय जो सन 1100- 1750 तक है, इस दौरान अधिकतर समय, अधिकतर जगह मुस्लिम आक्रमणकारियो का समय रहा और कुछ स्थानों पर उनका शासन भी चला।

अंत में मराठों का उदय हुआ, बाजी राव पेशवा जो कि ब्राह्मण थे, ने गाय चराने वाले गायकवाड़ को गुजरात का राजा बनाया, चरवाहा जाति के होलकर को मालवा का राजा बनाया।

अहिल्या बाई होलकर खुद बहुत बड़ी शिवभक्त थी। ढेरों मंदिर गुरुकुल उन्होंने बनवाये।

मीरा बाई जो कि राजपूत थी, उनके गुरु एक चर्मकार रविदास थे और रविदास के गुरु ब्राह्मण रामानंद थे|।

यहां भी शोषण वाली बात कहीं नहीं है।

मुग़ल काल से देश में गंदगी शुरू हो गई और यहां से पर्दा प्रथा, गुलाम प्रथा, बाल विवाह जैसी चीजें शुरू होती हैं।

1800 -1947 तक अंग्रेजो के शासन रहा और यहीं से जातिवाद शुरू हुआ । जो उन्होंने फूट डालो और राज करो की नीति के तहत किया।

अंग्रेज अधिकारी निकोलस डार्क की किताब "कास्ट ऑफ़ माइंड" में मिल जाएगा कि कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद, छुआछूत को बढ़ाया और कैसे स्वार्थी भारतीय नेताओं ने अपने स्वार्थ में इसका राजनीतिकरण किया।

इन हजारों सालों के इतिहास में देश में कई विदेशी आये जिन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति पर किताबें लिखी हैं, जैसे कि मेगास्थनीज ने इंडिका लिखी, फाहियान, ह्यू सांग और अलबरूनी जैसे कई। किसी ने भी नहीं लिखा की यहां किसी का शोषण होता था ।

01/04/2023

मेरा सभी से, हाथ जोड कर विशेष अनुरोध है कि 6 अप्रैल को हनुमान *जन्मोत्सव* आ रहा है (जयंती नही)।

इसे हम सभी लोग *हनुमान जयंती* ना कहते हुए *हनुमान जन्मोत्सव* कहें व सभी को *हनुमान जन्मोत्सव* कहने के लिए प्रेरित करें।

क्योंकि जयंती उनकी मनाई जाती है *जो इस संसार में नहीं है* ।

और कलियुग में केवल श्री राम भक्त हनुमान जी ही *चिरंजीवी* है, आज भी विद्यमान है ।

अतः यह परिवर्तन हमें जरुर लाना है तथा यह मैसेज *हनुमान जन्मोत्सव* से पहले पहले सभी तक पहुंचना चाहिए, ऐसा मेरा आपसे विनम्र निवेदन है ।।

*।।जय श्री राम।।*

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्।ते ह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः ॥
29/03/2023

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्।
ते ह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः ॥

21/10/2022

पूर्वं तु द्वारमासाद्य नीलो हरिचमूपतिः ।
अतिष्ठत्सह मैन्देन द्विविदेन च वीर्यवान् ।।

23/03/2022
विप्र प्रसादात् धरती धरोहम्।।
22/03/2022

विप्र प्रसादात् धरती धरोहम्।।

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