24/09/2026
पूज्य महाराज श्री के पावन सानिध्य एवं अमृतमयी छत्रछाया में, प्रदोष महापर्व की पावन वेला पर भगवान श्री जंगमेश्वर महादेव का सहस्र कमल पुष्पों एवं पावन बिल्वपत्रों द्वारा विधि-विधान से दिव्य सहस्रार्चन एवं महाभिषेक
कमले कमलोत्पन्नः कमले रमते हरः।
कमलापति पूज्येशः तस्मै शम्भो नमो नमः॥
परम पावन प्रदोष व्रत की शुभ तिथि पर देवाधिदेव महादेव के जाग्रत स्वरूप भगवान श्री जंगमेश्वर महादेव के पावन विग्रह पर एक सहस्र (1008) कमल पुष्पों एवं त्रिदल पावन बिल्वपत्रों द्वारा विधि-विधान से सहस्रार्चन एवं महाभिषेक संपन्न हुआ।
शिव महापुराण एवं आगम ग्रंथों के अनुसार, कमल पुष्प केवल एक फूल नहीं, अपितु सृष्टि के मूल चैतन्य और अनाहत चक्र का प्रतीक है:
वैष्णव व शैव एकात्मता: जब भगवान श्रीहरि विष्णु ने शिवजी की घोर तपस्या की थी, तब उन्होंने अपने नेत्र-कमल (कमलनयन) शिव चरणों में अर्पित कर दिए थे। अत: शिव पर कमल चढ़ाना साक्षात श्रीहरि की परम शरणागति और 'हरि-हर' की एकात्मता का फल देता है।
: कमल जल और कीचड़ में रहकर भी पूर्णतः निर्लिप्त रहता है। भगवान शंकर को कमल अर्पित करने का अर्थ है—भवसागर के बंधनों, कर्म-बंधनों और सांसारिक विकारों से मुक्त होकर आत्म-ज्ञान की ओर अग्रसर होना। सूक्ष्म दृष्टि से यह साधक के सहस्रार चक्र को जाग्रत कर दिव्य शांति प्रदान करता है।
लक्ष्मी की स्थिरता: कमल महालक्ष्मी का प्रिय आसन है। जब यह शिव के भाल और लिंग स्वरूप पर चढ़ता है, तो जीवन से दारिद्र्य का पूर्ण नाश होता है और साधक को 'स्थिर लक्ष्मी' तथा आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
बिल्वपत्र का मर्म: त्रिगुण (सत्व, रज, तम) और तीनों लोकों के प्रतीक त्रिदल बिल्वपत्र के साथ जब कमल की युति बनती है, तो जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षण मात्र में शमन हो जाता है।
प्रदोष काल के इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन मात्र से सभी के कष्टों, व्याधियों और संतापों का नाश हो। भगवान जंगमेश्वर महादेव की असीम अनुकंपा समस्त समाज, जनमानस और राष्ट्र पर बनी रहे। घर-घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास हो।
हर हर महादेव! जय जंगमेश्वर महादेव! 🌿🌸✨