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शिवोऽहम् शिवोऽहम् – मोक्ष का अद्वैत मंत्र“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद...
23/05/2025

शिवोऽहम् शिवोऽहम् – मोक्ष का अद्वैत मंत्र

“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद्वैत वेदांत गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत गूढ़ और आध्यात्मिक ग्रंथ है। इस रचना में आत्मा और ब्रह्म के अद्वैत स्वरूप का वर्णन किया गया है। यह केवल छह श्लोकों की छोटी-सी कविता है, लेकिन इसकी गहराई में सम्पूर्ण वेदांत समाया हुआ है।

“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद्वैत वेदांत गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक ...

५१ शक्तिपीठ: माँ शक्ति की दिव्य स्थलों की अद्भुत यात्राभारत की धार्मिक चेतना में शक्ति की उपासना का विशेष स्थान है। देवी...
12/04/2025

५१ शक्तिपीठ: माँ शक्ति की दिव्य स्थलों की अद्भुत यात्रा

भारत की धार्मिक चेतना में शक्ति की उपासना का विशेष स्थान है। देवी माँ की पूजा न केवल ऊर्जा के रूप में, बल्कि सृष्टि की आधारशिला के रूप में भी की जाती है। ऐसी मान्यता है कि माँ सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई। ये शक्तिपीठ न केवल तीर्थ स्थल हैं, बल्कि साधना और श्रद्धा के परम केंद्र हैं, जहाँ भक्तों को माँ के साक्षात् दर्शन का अनुभव होता है।

यहाँ हम आपको लेकर चल रहे हैं एक आध्यात्मिक यात्रा पर – ५१ शक्तिपीठों की यात्रा, जिनकी कथा, महत्व और दिव्यता आज भी भक्तों के हृदय में गूँजती है।

भारत की धार्मिक चेतना में शक्ति की उपासना का विशेष स्थान है। देवी माँ की पूजा न केवल ऊर्जा के रूप में, बल्कि सृष्टि .....

बालकृष्ण और शिव मिलन – जब भोलेनाथ ने लाला के दर्शन किएजब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस समय भगवान शिव समाधि में लीन थे। जैसे ...
06/04/2025

बालकृष्ण और शिव मिलन – जब भोलेनाथ ने लाला के दर्शन किए

जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस समय भगवान शिव समाधि में लीन थे। जैसे ही उन्हें ज्ञात हुआ कि स्वयं श्रीहरि ब्रज में बालक रूप में अवतरित हुए हैं, उनका हृदय दर्शन की लालसा से भर उठा। शिवजी ने योगी का वेश धारण किया और अपने दो गण — श्रृंगी और भृंगी को साथ लेकर गोकुल की ओर प्रस्थान किया।

जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस समय भगवान शिव समाधि में लीन थे। जैसे ही उन्हें ज्ञात हुआ कि स्वयं श्रीहरि ब्रज में बालक...

मृत्यु पर विजय पाने वाले अमर ऋषि — महर्षि मार्कंडेयक्या आप ऋषि मार्कंडेय के बारे में जानते हैं?ऋषि मार्कंडेय — एक ऐसे शि...
04/04/2025

मृत्यु पर विजय पाने वाले अमर ऋषि — महर्षि मार्कंडेय

क्या आप ऋषि मार्कंडेय के बारे में जानते हैं?

ऋषि मार्कंडेय — एक ऐसे शिव भक्त, जिन्होंने अपनी तपस्या और श्रद्धा से मृत्यु को भी पराजित कर दिया। उनकी कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति से कुछ भी संभव है।

ईश्वरीय आशीर्वाद से जुड़ी यह दिव्य कथा उस बाल ऋषि की है, जिसने भक्ति और संकल्प के बल पर मृत्यु को भी जीत लिया। यह कहानी दर्शाती है कि जब आस्था अटूट हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

ऋषि मार्कंडेय — एक ऐसे शिव भक्त, जिन्होंने अपनी तपस्या और श्रद्धा से मृत्यु को भी पराजित कर दिया। उनकी कथा हमें सिख....

मूर्ति, प्रतिमा या विग्रह? जानिए देवी-देवताओं से जुड़ी मंदिर वास्तु और विज्ञान की गहराईहमारे मंदिरों में जो दिव्य स्वरूप...
02/04/2025

मूर्ति, प्रतिमा या विग्रह? जानिए देवी-देवताओं से जुड़ी मंदिर वास्तु और विज्ञान की गहराई
हमारे मंदिरों में जो दिव्य स्वरूप विराजमान हैं — उन्हें कभी मूर्ति, कभी प्रतिमा, तो कभी विग्रह कहा जाता है। लेकिन क्या ये तीनों शब्द एक ही चीज़ के लिए हैं?

उत्तर है — नहीं।

इनके पीछे गहरे दार्शनिक, धार्मिक और वैज्ञानिक अर्थ छिपे हैं, जिन्हें समझना भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की यात्रा जैसा है।

हमारे मंदिरों में जो दिव्य स्वरूप विराजमान हैं — उन्हें कभी मूर्ति, कभी प्रतिमा, तो कभी विग्रह कहा जाता है। लेकिन क....

जगन्नाथ जी की आँखें बड़ी क्यों हैं? एक दिव्य प्रेमगाथाभगवान श्रीजगन्नाथ जी की आँखें सामान्य नहीं हैं — वे बड़ी, गोल और व...
31/03/2025

जगन्नाथ जी की आँखें बड़ी क्यों हैं? एक दिव्य प्रेमगाथा

भगवान श्रीजगन्नाथ जी की आँखें सामान्य नहीं हैं — वे बड़ी, गोल और विस्फारित हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन बड़ी आँखों के पीछे क्या रहस्य है?

यह केवल एक मूर्ति की विशेषता नहीं, बल्कि एक अद्भुत प्रेम कथा है जो भगवान श्रीकृष्ण, गोपियों और निष्काम भक्ति की चरम अवस्था से जुड़ी है।

भगवान श्रीजगन्नाथ जी की आँखें सामान्य नहीं हैं — वे बड़ी, गोल और विस्फारित हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन .....

सुंदरकांड के 25वें दोहे में तुलसीदास जी ने जो रहस्य छिपाया है, वह न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से गहरा है, बल्कि वैज्ञानि...
30/03/2025

सुंदरकांड के 25वें दोहे में तुलसीदास जी ने जो रहस्य छिपाया है, वह न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से गहरा है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी चौंकाने वाला है।

जब हनुमान जी ने लंका को जलाया, तब तुलसीदास जी लिखते हैं:

“हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।
अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास॥”

इस दोहे का अर्थ है — जब प्रभु श्रीराम की प्रेरणा से हनुमान जी ने लंका को जलाया, तभी 49 प्रकार की वायु (मरुत) एक साथ सक्रिय हो गईं। हनुमान जी अट्टहास करते हुए आकाश में उड़ चले।

अब प्रश्न यह है — “ये उनचास मरुत कौन हैं?”

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड के 25वें दोहे में एक गूढ़ रहस्य छिपा है, जिसे जानकर न सिर्फ ....

लाल देह लाली लसे अरुधर लाल लंगूर।बज्र देव दांव दलन जय जय जय कपिसूर।।अर्थ- लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, देह जिनकी लाल हैं...
18/02/2025

लाल देह लाली लसे अरुधर लाल लंगूर।
बज्र देव दांव दलन जय जय जय कपिसूर।।

अर्थ- लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, देह जिनकी लाल हैं और लंबी सी पूंछ हैं।
वज्र के समान बलवान शरीर हैं जो राक्षसों का संहार करते हैं।
ऐसे श्री कपि को बार-बार प्रणाम।

लाल देह लाली लसे अरुधर लाल लंगूर। बज्र देव दांव दलन जय जय जय कपिसूर।। अर्थ- लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, देह जिनकी ला....

04/01/2025

हृदय रूपी मंदिर में बैठे हुए ईश्वर को देखने के लिए मन रूपी द्वार का बंद होना अति आवश्यक है, क्योंकि मन रूपी द्वार सं.....

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