Hindu hai hum

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03/02/2022
इस समय कलियुग चल रहा है और कहते हैं कि कलियुग के अंतिम चरण में मनुष्य व्यभिचारी हो जाएंगे, संबधों की मर्यादा को भूल जाएं...
03/09/2021

इस समय कलियुग चल रहा है और कहते हैं कि कलियुग के अंतिम चरण में मनुष्य व्यभिचारी हो जाएंगे, संबधों की मर्यादा को भूल जाएंगे। स्त्रियों में लज्जा समाप्त हो जाएगी। मनुष्य पशुवत व्यवहार करने लगेगा तब भगवान कल्कि अवतार लेकर धर्म को पुनः स्थापित करेंगे। कल्कि अवतार की यह परिकल्पना कहीं और नहीं है।

एक कथा के अनुसार जब देवी सरस्‍वती का प्राकट्य हुआ तो उन्‍होंने वीणा के स्‍वरों से सृष्टि में ध्‍वन‍ि का संचार किया। लेकि...
26/07/2021

एक कथा के अनुसार जब देवी सरस्‍वती का प्राकट्य हुआ तो उन्‍होंने वीणा के स्‍वरों से सृष्टि में ध्‍वन‍ि का संचार किया। लेकिन कहा जाता है कि वह ध्‍वन‍ि सुर और संगीत हीन थी। तब भोलेनाथ ने नृत्‍य किया और 14 बार डमरू बजाया। मान्‍यता है डमरू की उस ध्‍वनि से ही संगीत के धुन और ताल का जन्‍म हुआ। डमरू को ब्रह्मदेव का भी स्‍वरूप माना जाता है।

18/07/2021

भारत का अंग्रेजी में नाम ‘इंडिया’ इं‍डस नदी से बना है, जिसके आस पास की घाटी में आरंभिक सभ्‍यताएं निवास करती थी। आर्य पूजकों में इस इंडस नदी को सिंधु कहा।

ईरान से आए आक्रमणकारियों ने सिंधु को हिंदु की तरह प्रयोग किया। ‘हिंदुस्तान’ नाम सिंधु और हिंदु का संयोजन है, जो कि हिंदुओं की भूमि के संदर्भ में प्रयुक्त होता है।

हिंदुओं के त्रिमूर्ति नाम के तीन मुख्य देवता हैं। ब्रह्मा ब्रह्मांड के निर्माता हैं, विष्णु ब्रह्मांड के संरक्षक हैं, और...
12/07/2021

हिंदुओं के त्रिमूर्ति नाम के तीन मुख्य देवता हैं। ब्रह्मा ब्रह्मांड के निर्माता हैं, विष्णु ब्रह्मांड के संरक्षक हैं, और शिव दुनिया को फिर से बनाने के लिए दुनिया को नष्ट कर देते हैं।

Shiva fact
10/07/2021

Shiva fact

स्त्री-पुरुष समानता का भाव जैसा हिन्दू धर्म में प्रकट होता है वैसा किसी अन्य धर्म में नहीं है। इसका प्रमाण भगवान शिव का ...
08/07/2021

स्त्री-पुरुष समानता का भाव जैसा हिन्दू धर्म में प्रकट होता है वैसा किसी अन्य धर्म में नहीं है। इसका प्रमाण भगवान शिव का यह अर्धनारीश्वर स्वरूप है जिसमें शिव के आधे अंग में देवी अदिशक्ति का वास माना गया है। इसी स्वरूप को आधार मानकर हिन्दू धर्म में जीवनसंगिनी को अर्धांगिनी भी कहा गया है।

07/07/2021

ओम को चेतन मन से पहली ध्वनि माना जाता है, और ब्रह्मांड को जन्म देने वाली ध्वनि।

07/07/2021

हिंदू धर्म” शब्द का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि हिंदू धर्म एक धर्म के रूप में शुरू नहीं हुआ है। यह यूनानियों और अरबों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक बना हुआ शब्द है जो उन लोगों का वर्णन करने के लिए है जो “शिंदू” नदी से हैं। इन लोगों के जीवन के तरीके को हिंदू धर्म कहा जाता है।

गीता में श्रीकृष्ण भगवान के नामों के अर्थअनन्तरूपः जिनके अनन्त रूप हैं वह |अच्युतः जिनका कभी क्षय नहीं होता, कभी अधोगति ...
17/11/2017

गीता में श्रीकृष्ण भगवान के नामों के अर्थ

अनन्तरूपः जिनके अनन्त रूप हैं वह |

अच्युतः जिनका कभी क्षय नहीं होता, कभी अधोगति नहीं होती वह |

अरिसूदनः प्रयत्न के बिना ही शत्रु का नाश करने वाले |

कृष्णः 'कृष्' सत्तावाचक है | 'ण' आनन्दवाचक है | इन दोनों के एकत्व का सूचक परब्रह्म भी कृष्ण कहलाता है |
केशवः क माने ब्रह्म को और ईश – शिव को वश में रखने वाले |
केशिनिषूदनः घोड़े का आकार वाले केशि नामक दैत्य का नाश करने वाले |
कमलपत्राक्षः कमल के पत्ते जैसी सुन्दर विशाल आँखों वाले |
गोविन्दः गो माने वेदान्त वाक्यों के द्वारा जो जाने जा सकते हैं |
जगत्पतिः जगत के पति |
जगन्निवासः जिनमें जगत का निवास है अथवा जो जगत में सर्वत्र बसे हुए है |
जनार्दनः दुष्ट जनों को, भक्तों के शत्रुओं को पीड़ित करने वाले |
देवदेवः देवताओं के पूज्य |
देववरः देवताओं में श्रेष्ठ |
पुरुषोत्तमः क्षर और अक्षर दोनों पुरुषों से उत्तम अथवा शरीररूपी पुरों में रहने वाले पुरुषों यानी जीवों से जो अति उत्तम, परे और विलक्षण हैं वह |
भगवानः ऐश्वर्य, धर्म, यश, लक्ष्मी, वैराग्य और मोक्ष... ये छः पदार्थ देने वाले अथवा सर्व भूतों की उत्पत्ति, प्रलय, जन्म, मरण तथा विद्या और अविद्या को जानने वाले |
भूतभावनः सर्वभूतों को उत्पन्न करने वाले |
भूतेशः भूतों के ईश्वर, पति |
मधुसूदनः मधु नामक दैत्य को मारने वाले |
महाबाहूः निग्रह और अनुग्रह करने में जिनके हाथ समर्थ हैं वह |
माधवः माया के, लक्ष्मी के पति |
यादवः यदुकुल में जन्मे हुए |
योगवित्तमः योग जानने वालों में श्रेष्ठ |
वासुदेवः वासुदेव के पुत्र |
वार्ष्णेयः वृष्णि के ईश, स्वामी |
हरिः संसाररूपी दुःख हरने वाले |

हिन्दू सनातन धर्म मानव की उत्पत्ति के साथ ही बना है और प्राकृतिक है इसीलिए हमारे धर्म में प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापि...
15/06/2017

हिन्दू सनातन धर्म मानव की उत्पत्ति के साथ ही बना है और प्राकृतिक है इसीलिए हमारे धर्म में प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीना बताया गया है और, प्रकृति को भी भगवान की उपाधि दी गयी है ताकि लोग प्रकृति के साथ खिलवाड़ ना करें !

उदहारण –

गंगा को देवी माना जाता है – क्योंकि गंगाजल में सैकड़ों प्रकार की हिमालय की औषधियां घुली होती हैं!

गाय को माता कहा जाता है – क्योंकि गाय का दूध अमृततुल्य और, उनका गोबर एवं गौमूत्र में विभिन्न प्रकार की औषधीय गुण पाए जाते हैं!

तुलसी के पौधे को भगवान इसीलिए माना जाता है कि तुलसी के पौधे के हर भाग में विभिन्न औषधीय गुण हैं!

इसी तरह वट और बरगद के वृक्ष घने होने के कारण ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं और, थके हुए राहगीर को छाया भी प्रदान करते हैं!

यही कारण है कि हमारे हिन्दू धर्म ग्रंथों में प्रकृति पूजा को प्राथमिकता दी गयी है क्योंकि, प्रकृति से ही मनुष्य जाति है ना कि मनुष्य जाति से प्रकृति है!

अतः प्रकृति को धर्म से जोड़ा जाना और उनकी पूजा करना सर्वथा उपर्युक्त है!

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