04/04/2026
न रूप देखा, न रंग देखा, न देखा धन का अंबार, पार्वती ने तो केवल देखा, शिव का भोला सा प्यार।
हज़ारों वर्ष की तपस्या थी, और अडिग सा विश्वास था, तभी तो योगेश्वर के मन में, प्रेम का हुआ निवास था।
वह अर्धनारीश्वर रूप मनोहर, जग को यह सिखलाता है, बिना शक्ति के शिव शव है, यह नाता गहरा कहलाता है।
विष भी अमृत बन जाता है, जब संग खड़ी हो गौरी माँ, सारे जग का सार यही है, शिव-पार्वती की प्रेम कथा।
शिव-पार्वती जी❤️