31/08/2026
घर-परिवार की 100% सुरक्षा की गारंटी: काल भैरव का शक्तिशाली शाबर मंत्र विधान (सरल व सटीक नियम)
काल भैरव आत्मरक्षा एवं सर्व-परिवार रक्षा शाबर मंत्र :
"ॐ गुरुजी काला भैरुं कपिला केश, काना कुंडल भगवा भेष।
तीर चलावे काल भैरुं, बाण करे चकचूर।
मेरे और मेरे परिवार की काया की रक्षा करे,
भूत-प्रेत, डाकिनी, शाकिनी, नजर-टोना दूर भगावे।
मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।"
(नोट: जब स्वयं के लिए सुरक्षा चक्र बनाना हो, तो जल या भभूत हाथ में लेकर 7 बार मंत्र पढ़कर चारों तरफ छिड़कें।)
अनुष्ठान की सटीक विधि-विधान
शुभ मुहूर्त: किसी भी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (कालाष्टमी), रविवार, मंगलवार या भैरव जयंती से रात्रि 10:00 बजे के बाद शुरू करें।
दिशा: दक्षिण (South) या पश्चिम (West) दिशा की ओर मुख करके बैठें।
आसन: लाल या काले रंग का ऊनी कंबल/आसन।
दीपक: चौमुखा दीपक (मिट्टी या तांबे का पात्र) लें और उसमें सरसों या तिल का तेल डालकर चार बत्तियां जलाएं।
माला: रुद्राक्ष माला (108 दानों की) या काले हकीक की माला।
भोग सामग्री: गुड़ की रेवड़ी, भुने हुए चने, उड़द के पकोड़े या इमरती। साथ में 1 पान का पत्ता, 2 लौंग और 1 बताशा रखें।
दैनिक जप संख्या: प्रतिदिन 11 माला (1188 बार मंत्र जप)।
अनुष्ठान अवधि: यह अनुष्ठान लगातार 11 दिन या 21 दिन तक पूर्ण ब्रह्मचर्य के साथ करना होता है।
दैनिक पूजन क्रम:
लकड़ी की चौकी पर लाल या काला कपड़ा बिछाएं और भगवान शिव तथा काल भैरव का चित्र/यंत्र स्थापित करें।
सबसे पहले गुरु मंत्र (या ॐ नमः शिवाय) की 1 माला जपें।
भैरव जी को सिंदूर, अक्षत, काले तिल और सरसों का तेल अर्पित करें।
संकल्प लें कि आप आत्मरक्षा और परिवार की सुरक्षा हेतु यह जप कर रहे हैं।
11 माला का शांत व एकाग्र मन से जप करें। जप समाप्ति पर भोग अर्पित करें और रक्षा हेतु प्रार्थना करें।
अंतिम दिन अनुष्ठान पूर्ण होने पर थोड़े से काले उड़द और तिल से 108 आहुतियां दें (अग्नि में) तथा प्रसाद किसी काले श्वान (कुत्ते) को खिलाएं।
अनिवार्य नियम एवं परहेज
पूर्ण ब्रह्मचर्य: अनुष्ठान के सभी दिनों में शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का अनिवार्य पालन करें।
आहार संयम: प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और बाहर के तामसिक भोजन से पूर्णतः दूर रहें।
भूमि शयन: बिस्तर के बजाय जमीन पर कंबल या चटाई बिछाकर सोएं।
मौन व क्रोध नियंत्रण: अनावश्यक बातचीत, झूठ, क्रोध और किसी की निंदा करने से बचें।
अनुष्ठान की गोपनीयता: मंत्र साधना की चर्चा किसी बाहरी व्यक्ति से न करें।
**raSadhana