Sirangsar dham

Sirangsar dham धार्मिक कार्यक्रम

24/06/2025

*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*

2️⃣4️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! हीरों का हार !!*
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पुराने समय में किसी शहर में एक जौहरी रहता था, उसकी असमय मृत्यु हो गई। उसके परिवार में पत्नी और उसका एक बेटा था। जौहरी की मृत्यु के बाद उनके परिवार में पैसों की कमी आ गई। एक दिन मां ने अपने बेटे को हीरों का हार दिया और कहा कि “इसे अपने चाचा की दुकान पर बेच दो, इससे जो पैसा मिलेगा, वह हमारे काम आएगा।”

लड़का हार लेकर अपने चाचा की दुकान पर पहुंच गया। चाचा ने हार देखा और कहा, “बेटा अभी बाजार मंदा चल रहा है, इस हार को बाद में बेचना। तुम्हें पैसों की जरूरत है तो अभी मुझसे ले लो। तुम चाहो तो मेरी दुकान पर काम भी कर सकते हो।”

लड़के ने चाचा की बात मान ली और अगले दिन से लड़का अपने चाचा की दुकान पर काम करने लगा। समय के साथ वह लड़का भी हीरों की अच्छी परख करने लगा था। वह असली और नकली हीरे को तुरंत ही पहचान लेता था।

एक दिन उसके चाचा ने कहा, “अभी बाजार बहुत अच्छा चल रहा है, तुम अपना हीरों का हार बेच सकते हो।”
लड़का अपनी मां से वह हार लेकर दुकान आ गया और चाचा को दे दिया। लड़के से उसके चाचा ने कहा, “अब तो तुम खुद भी हीरों की परख कर लेते हो, इस हार को देखकर इसकी कीमत का अंदाजा लगा सकते हो। इसीलिए तुम खुद इस हार की परख करो।” लड़के ने हार को ध्यान से देखा तो उसे मालूम हुआ कि हार में नकली हीरे लगे हैं और इसकी कोई कीमत नहीं है।

लड़के ने पूरी बात बताई तो चाचा ने कहा “मैं तो शुरू से जानता हूं कि ये हीरे नकली हैं, लेकिन अगर मैं उस दिन तुम्हें ये बात कहता तो तुम मुझे ही गलत समझते। तुम्हें यही लगता कि मैं ये हार हड़पना चाहता हूं, इसीलिए इसे नकली बता रहा हूं। तुम्हें उस समय हीरों का कोई ज्ञान नहीं था। बुरे समय में अज्ञान की वजह से हम अक्सर दूसरों को ही गलत समझते हैं।”

*शिक्षा:-*
विपरीत समय में हमारे ऊपर निगेटिविटी हावी हो जाती है और सोचने-समझने की शक्ति कमजोर होने लगती है। ऐसी स्थिति में की गई जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है, रिश्ते खराब भी हो सकते हैं। इसीलिए बुरे समय में धैर्य से काम लेना चाहिए।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*

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*24 JUNE 2025*

*🦋 आज की प्रेरणा 🦋*

एक सुखी और सफल रिश्ता दो माफ करने वालों से बनता है।

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👉 *आज से हम* उन अपनों को माफ करें जिन्होंने हाल ही में आपसे झगड़ा किया है।

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

🚩🔱📿🌹🌺🔱🚩

22/06/2025

# #*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*

2️⃣2️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! अंत का साथी !!*
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एक व्यक्ति के तीन साथी थे। उन्होंने जीवन भर उसका साथ निभाया। जब वह मरने लगा तो अपने मित्रों को पास बुलाकर बोला, “अब मेरा अंतिम समय आ गया है। तुम लोगों ने आजीवन मेरा साथ दिया है। मृत्यु के बाद भी क्या तुम लोग मेरा साथ दोगे?” पहला मित्र बोला, “मैंने जीवन भर तुम्हारा साथ निभाया। लेकिन अब मैं बेबस हूँ। अब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता।” दूसरा मित्र बोला, मैं मृत्यु को नहीं रोक सकता।

मैंने आजीवन तुम्हारा हर स्थिति में साथ दिया है। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि मृत्यु के बाद तुम्हारा अंतिम संस्कार सही से हो। तीसरा मित्र बोला, “मित्र! तुम चिंता मत करो। में मृत्यु के बाद भी तुम्हारा साथ दूंगा। तुम जहां भी जाओगे, मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।” मनुष्य के ये तीन मित्र हैं- माल (धन), इयाल (परिवार) और आमाल (कर्म)। तीनों में से मनुष्य के कर्म ही मृत्यु के बाद भी उसका साथ निभाते हैं।

*शिक्षा:-*
हमें अच्छे कर्म करने चाहिए। यही वो दौलत हैं जो मरने के बाद भी इंसान के साथ जाती हैं। अतः अच्छे कार्यों में इस अनमोल जीवन को बिताना चाहिए।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*

🍃🌾🌾

*22 JUNE 2025*

🦋 *आज की प्रेरणा* 🦋

ज्ञान का उपयोग केवल पढ़ने, सुनने और अच्छा महसूस करने के लिए नहीं किया जाता है, बल्कि दैनिक जीवन में प्रयोग और कार्यान्वित करने के लिए किया जाता है।

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*आज से हम* परमात्म ज्ञान को अपने जीवन में उतारें...

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

🚩🔱📿🌹🌺🔱🚩

भजन गायक ओमसा पल्ली मित्र मंडल जोधपुर शिव महा पुराण कथा श्री राम जन्मभूमि, अयोध्या - Shri Ram Janmabhoomi, Ayodhya राधे राधे Sirangsar dham Singer Kajal Namdev Bundelkhand Radhe Radhe Santosh Surendra Ahlawat Santosh Patel DSP सत्संग संतों के संग राधे राधे प्रेमानंद महाराज बृंदाबन अनिरुद्ध आचार्य जी भजन मार्ग Devkinandan Thakur Ji Aniruddhachary Ji Maharaj Premanand Ji Maharaj Vrindavan dham स्वामी प्रेमानंद जी महाराज शिव पुराण पंडित प्रदीप जी मिश्रा अचूक उपाय इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज पुज्या जया किशोरी जी Jaya Kishori Devi chitralekha ji fans of gou seva dham hospital Kanhaiya Mittal Fans Club श्री बांके बिहारी मंदिर दर्शन वृंदावन श्री बालाजी मंदिर सालासर धाम महाकुंभ Shri Dham Vrindavan - Brijwasi Rasik Khatu Shyam ji Shyam Baba Jai Mata Vaishno Devi Today mata vaishno devi pindi Darshan Bhajan Marg Bhajanlal Sharma Yogi Adityanath Narendra Modi

21/06/2025

🌹राधे राधे 🌹
🚩 योगिनी एकादशी व्रत कथा 🚩
व्रत करने से कितना पुण्य मिलता है जानिए कथा के माध्यम से
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🌹राधे राधे 🌹

20/06/2025

*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*

2️⃣0️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! जैसा बोओगे वैसा काटोगे !!*
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एक गांव में तीन चोर रहते थे। एक रात उन्होंने एक धनी आदमी के यहां चोरी की। उन्होंने सारा धन एक थैले में भरा और उसे लेकर जंगल की ओर भाग निकले। जंगल में पहुंचने पर उन्हें जोर की भूख लगी। वहां खाने को तो कुछ था नहीं, इसलिए उनमें से एक चोर पास के एक गांव से खाना लेने गया। बाकी के दोनों चोर जंगल में चोरी के माल की रखवाली कर रहे थे।

जो चोर खाना लेने गया था, उसकी नीयत खराब थी। पहले उसने होटल में खुद भोजन किया। फिर उसने अपने साथियों के लिए खाना खरीद कर उसमें तेज जहर मिला दिया। उसने सोचा कि जहरीला खाना खाकर उसके दोनों साथी मर जाएंगे तो सारा धन उसका हो जाएगा।

जंगल में दोनों चोरों ने खाना लेने गए अपने साथी चोर की हत्या करने की योजना बना ली थी। वे उसे अपने रास्ते से हटाकर सारा धन आपस में बांट लेना चाहते थे।

तीनों चोरों ने अपनी-अपनी योजनाओं के अनुसार कार्य किया। पहला चोर जैसे ही जहरीला भोजन लेकर जंगल में पहुंचा। उसके दोनों साथी उस पर टूट पड़े। उन्होंने उसका काम तमाम कर दिया फिर वे निश्चिंत होकर भोजन करने बैठ गए। मगर जहरीला भोजन खाते ही वे दोनों भी तड़प-तड़प कर मर गए। इस प्रकार तीनों का अंत भी बुरा ही हुआ।

*शिक्षा:-*
बुराई का अंत बुरा ही होता है।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*

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*20 JUNE 2025*

*🦋 आज की प्रेरणा 🦋*

हरेक का सुनो और हरेक से सीखो क्योंकि हर कोई सब कुछ नहीं जानता लेकिन हर एक कुछ न कुछ ज़रूर जानता है।

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👉 *आज से हम* सबसे कुछ न कुछ सीखें...

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

🚩🔱📿🌹🌺🔱🚩

19/06/2025

*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*
1️⃣9️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! आशा !!*
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एक राजा ने दो लोगों को मौत की सजा सुनाई। उसमें से एक यह जानता था कि राजा को अपने घोड़े से बहुत ज्यादा प्यार है।

उसने राजा से कहा कि यदि मेरी जान बख्श दी जाए तो मैं एक साल में उसके घोड़े को उड़ना सीखा दूँगा। यह सुनकर राजा खुश हो गया कि वह दुनिया के इकलौते उड़ने वाले घोड़े की सवारी कर सकता है।

दूसरे कैदी ने अपने मित्र की ओर अविश्वास की नजर से देखा और बोला, तुम जानते हो कि कोई भी घोड़ा उड़ नहीं सकता! तुमने इस तरह पागलपन की बात सोची भी कैसे? तुम तो अपनी मौत को एक साल के लिए टाल रहे हो।

पहला कैदी बोला, ऐसी बात नहीं है। मैंने दरअसल खुद को स्वतंत्रता के चार मौके दिए हैं...

१. पहली बात राजा एक साल के भीतर मर सकता है!
२. दूसरी बात मैं मर सकता हूं !
३. तीसरी बात घोड़ा मर सकता है !
४. और चौथी बात… हो सकता है, मैं घोड़े को उड़ना सीखा दूं !!

*शिक्षा:-*
बुरी से बुरी परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*
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*19 JUNE 2025*

*🦋 आज की प्रेरणा 🦋*

यदि आप लोगों से प्यार से बर्ताव नहीं कर सकते हैं तो लोग आपसे कैसा बर्ताव करते हैं उसकी शिकायत भी कभी न करें।

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👉 *आज से हम* बिना किसी भेदभाव के सभी से प्यार से बर्ताव करें।

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

🚩🔱📿🌹🌺🔱🚩

17/06/2025

*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*

1️⃣7️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! अष्टावक्र का ज्ञान !!*
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ऋषि को अपने शिष्य कहोड़ की प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पुत्री सुजाता का विवाह कहोड़ से कर दिया। सुजाता के गर्भ ठहरने के बाद ऋषि कहोड़ सुजाता को वेदपाठ सुनाते थे। तभी सुजाता के गर्भ से बालक बोला - ‘पिताजी! आप गलत पाठ कर रहे हैं। इस पर कहोड़ को क्रोध आ गया और शाप दिया तू आठ स्थानों से वक्र (टेढ़ा) होकर पैदा होगा। कुछ दिन बाद कहोड़, राजा जनक के दरबार में एक महान विद्वान बंदी से शास्त्रार्थ में हार गए और नियम अनुसार, कहोड़ को जल समाधि लेनी पड़ी। कुछ दिनों बाद अष्टावक्र का जन्म हुआ।

एक दिन माँ से पिता की सच्चाई पता चली, तो अष्टावक्र दुखी हुआ और बारह साल का अष्टावक्र बंदी से शास्त्रार्थ करने के लिए राजा जनक के दरबार में पहुंचा। सभा में आते ही बंदी को शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दी, लेकिन अष्टावक्र को देखकर सभी पंडित और सभासद हंसने लगे, क्योंकि वो आठ जगह से टेढ़े थे, उनकी चाल से ही लोग हंसने लगते थे। सभी अष्टावक्र पर हंस रहे थे और अष्टावक्र सब लोगों पर। जनक ने पूछा- ‘हे बालक! सभी लोगों की हंसी समझ आती है, लेकिन तुम क्यों हंस रहे हो?

अष्टावक्र बोले - महाराज आपकी सभा चमारों की सभा है, जो मेरी चमड़ी की विकृति पर हंस रहे हैं, इनमें कोई विद्वान नहीं! ये चमड़े के पारखी हैं। मंदिर के टेढ़े होने से आकाश टेढ़ा नहीं होता है और घड़े के फूटे होने से आकाश नहीं फूटता है। इसके बाद शास्त्रार्थ में बंदी की हार हुई। अष्टावक्र ने बंदी को जल में डुबोने का आग्रह किया। बंदी बोला मैं वरुण-पुत्र हूं और सब हारे ब्राह्मणों को पिता से पास भेज देता हूं। मैं उनको वापस बुला लेता हूं। सभी हारे हुए ब्राह्मण वापस आ गए, उनमें अष्टावक्र के पिता कहोड़ भी थे। इसके बाद राजा जनक ने अष्टावक्र को अपना गुरु बना लिया और उनके आत्मज्ञान प्राप्त किया। राजा जनक और अष्टावक्र के इस संवाद को अष्टावक्र गीता के नाम से जाना जाता है।

*शिक्षा :-*
जैसे आभूषण के पुराने या कम सुंदर होने से सोने की कीमत कम नहीं हो जाती, वैसे शरीर की कुरूपता से आत्म तत्व कम नहीं होता। कभी किसी व्यक्ति के शरीर की सुंदरता को देखकर प्रभावित या किसी की कुरूपता को देखता घृणा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि शरीर तो हाड़-मांस से बना है। देखना है तो उसका ज्ञान, प्रेम और दिव्यता देखो, क्योंकि आत्मा सबका समान है।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है, उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*

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*17 JUNE 2025*

*🦋 आज की प्रेरणा 🦋*

चरण उनके ही पूजे जाते हैं जिनके आचरण पूजने योग्य होते हैं।

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*आज से हम* अपने आचरण को पूजने योग्य श्रेष्ठ बनाएँ...

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

🚩🔱📿🌹🌺🔱🚩

15/06/2025

*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*

1️⃣5️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! दो पत्तों की कहानी !!*
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एक समय की बात है। गंगा नदी के किनारे पीपल का एक पेड़ था। पहाड़ों से उतरती गंगा पूरे वेग से बह रही थी कि अचानक पेड़ से दो पत्ते नदी में आ गिरे।

एक पत्ता आड़ा गिरा और एक सीधा। जो आड़ा गिरा वह अड़ गया; कहने लगा, “आज चाहे जो हो जाए मैं इस नदी को रोक कर ही रहूँगा... चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाये मैं इसे आगे नहीं बढ़ने दूंगा।”

वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा – रुक जा गंगा… अब तू और आगे नहीं बढ़ सकती... मैं तुझे यहीं रोक दूंगा!

पर नदी तो बढ़ती ही जा रही थी… उसे तो पता भी नहीं था कि कोई पत्ता उसे रोकने की कोशिश कर रहा है।

पर पत्ते की तो जान पर बन आई थी। वो लगातार संघर्ष कर रहा था। नहीं जानता था कि बिना लड़े भी वहीं पहुंचेगा, जहाँ लड़कर.. थककर.. हारकर पहुंचेगा! पर अब और तब के बीच का समय उसकी पीड़ा का... उसके संताप का काल बन जायेगा।

वहीं दूसरा पत्ता जो सीधा गिरा था, वह तो नदी के प्रवाह के साथ ही बड़े मजे से बहता चला जा रहा था।

यह कहता हुआ कि “चल गंगा, आज मैं तुझे तेरे गंतव्य तक पहुँचा के ही दम लूँगा… चाहे जो हो जाये मैं तेरे मार्ग में कोई अवरोध नहीं आने दूँगा... तुझे सागर तक पहुँचा ही दूँगा।”

नदी को इस पत्ते का भी कुछ पता नहीं… वह तो अपनी ही धुन में सागर की ओर बढ़ती जा रही थी। पर पत्ता तो आनंदित है, वह तो यही समझ रहा है कि वही नदी को अपने साथ बहाये ले जा रहा है।

आड़े पत्ते की तरह सीधा पत्ता भी नहीं जानता था कि चाहे वो नदी का साथ दे या नहीं, नदी तो वहीं पहुंचेगी जहाँ उसे पहुँचना है! पर अब और तब के बीच का समय उसके सुख का… उसके आनंद का काल बन जायेगा।

जो पत्ता नदी से लड़ रहा है… उसे रोक रहा है, उसकी जीत का कोई उपाय संभव नहीं है और जो पत्ता नदी को बहाये जा रहा है उसकी हार को कोई उपाय संभव नहीं है।

हमारा जीवन भी उस नदी के समान है जिसमें सुख और दुःख की तेज धारायें बहती रहती हैं।

और जो कोई जीवन की इस धारा को आड़े पत्ते की तरह रोकने का प्रयास भी करता है, तो वह मुर्ख है, क्यों कि ना तो कभी जीवन किसी के लिये रुका है और ना ही रुक सकता है।

वह अज्ञान में है जो आड़े पत्ते की तरह जीवन की इस बहती नदी में सुख की धारा को ठहराने या दुःख की धारा को जल्दी बहाने की मूर्खता पूर्ण कोशिश करता है।

क्योंकि सुख की धारा जितने दिन बहनी है.. उतने दिन तक ही बहेगी। आप उसे बढ़ा नहीं सकते और अगर आपके जीवन में दुःख का बहाव जितने समय तक के लिये आना है वो आ कर ही रहेगा, फिर क्यों आड़े पत्ते की तरह इसे रोकने की व्यर्थ मेहनत करें।

बल्कि जीवन में आने वाली हर अच्छी बुरी परिस्थितियों में खुश हो कर जीवन की बहती धारा के साथ उस सीधे पत्ते की तरह ऐसे चलते जाओ... जैसे जीवन आपको नहीं बल्कि आप जीवन को चला रहे हो। सीधे पत्ते की तरह सुख और दुःख में समता और आनन्दित होकर जीवन की धारा में मौज से बहते जायें।

और जब जीवन में ऐसी सहजता से चलना सीख गए तो फिर सुख क्या? और दुःख क्या?

*शिक्षा:-*
जीवन के बहाव में ऐसे ना बहें कि थक कर हार भी जायें और अंत तक जीवन आपके लिए एक पहेली बन जाये। बल्कि जीवन के बहाव को हँस कर ऐसे बहाते जायें कि अंत तक आप जीवन के लिये पहेली बन जायें।

सुख हमारी स्वयं की सम्पत्ति है.. इसे बाहर नहीं अपने भीतर ही ढूंढें। इससे आप सदैव सुखी रहेंगे..!!

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है, उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*

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*15 JUNE 2025*

*🦋 आज की प्रेरणा 🦋*

यदि आप कुछ ऐसा पाना चाहते हैं जो आपके पास कभी नहीं था तो उसके लिए आपको वो करने के लिए तैयार रहना होगा जो आपने कभी नहीं किया।

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*आज से हम* नयी चीज़ें आज़माने से संकोच न करें।

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

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