12/03/2022
*पुस्तक का नाम—वर्मी कम्पोस्टिंग-मैनुवल*
*प्रेरणा स्त्रोत - पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य*
*_"केंचुआ लम्बे समय से किसान के अभिन्न मित्र के हलवाह (plough man) के रूप में जाना जाता है। वर्मी कम्पोस्टिंग कृषि को टिकाऊ आधार प्रदान करने के लिए, कम खर्चीली बनाया जा सकता है। भारतीय कृषि का कायाकल्प करने के लिए यह क्रन्तिकारी तकनीकी है।"_*
_सोशल मीडिया पुस्तक तिथि- 11 मार्च 2022_
*पुस्तक लिंक*
https://cutt.ly/qAH3nHj
https://cutt.ly/lAH3E3a
*पुस्तक ऑडियोबुक*
https://cutt.ly/3AJGjvc
https://cutt.ly/bAJGnr2
*पुस्तक स्वाध्याय*
40 मिनिट नित्य स्वाध्याय, प्रारंभ तिथि 12 मार्च 07.15 PM Zoom मीटिंग लिंक- https://cutt.ly/FOzoqUg
*पुस्तक परिचय लेख*
https://cutt.ly/QAH8AWs
*फेसबुक लिंक*
https://bit.ly/3J5w5AS
*पुस्तक परिचय-*
हरित क्रान्ति के लिए अपनायी गयी अधिकाधिक, रसायनों (ऊर्वरक, कीटनाशक एवं खरपतवार नाशकों) एवं सिंचाई के उपयोग पर आधारित प्रौद्योगिकी से जहाँ खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है, वहीं आधुनिक भारतीय कृषि कई गम्भीर समस्याओं से जूझ रही है। निरंतर, अनौचित्यपूर्ण रासायनिक ऊर्वरकों के प्रयोग से जहाँ भूमि में आर्गेनिक मेटर के लगातार घटते जा रहे स्तर से भूमि का स्वास्थ्य जर्जर होता जा रहा है तथा इससे हरित क्रान्ति के मुख्य क्षेत्र रहे पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्यों सहित अनेक क्षेत्रों की भूमि की उत्पादकता कम हो चुकी है। वहीं कीटनाशकों की विषाक्तता उत्पादित अन्न, सब्जी, फल एवं दुग्ध के माध्यम से मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है।
बढ़ती जनसंख्या के फलस्वरूप प्रति व्यक्ति घटती जा रही जोत एवं रसायनों के प्रयोग से खेती महँगी होती जा रही है। इसका समाधान अब प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग एवं पोषण पर आधारित आर्गेनिक फार्मिंग से ही सम्भव होगा, इस पर कृषि वैज्ञानिक एवं नीति - निर्धारक सभी सहमत व अपने - अपने ढंग से प्रयत्नशील हैं; परन्तु प्रमुख समस्या यह है कि इतनी अधिक मात्रा में ऑर्गेनिक मेन्योर की पूर्ति कैसे और कहाँ से की जाय, जो ऊर्वरकों का पूर्णतया प्रतिस्थापन कर सकें?
पुस्तक से कुछ प्रश्न-
🤔 वर्मी कंपोस्ट क्या है?
🤔 क्या वर्मी कंपोस्ट यूरिया अथवा D.A.P. का प्रतिस्थापक (सब्स्टीट्यूट)है?
🤔 क्या वर्मी कंपोस्ट तकनीक ऑर्गेनिक वेस्ट को कम से कम समय में कम्पोस्ट खाद में बदल सकती है?
🤔 वर्मी कंपोस्ट साधारण खाद से किस प्रकार बेहतर है?
इन सभी प्रश्नों का उत्तर लेकर आपके समक्ष प्रस्तुत है एक लघु पुस्तक जिसमें वर्मी कम्पोस्टिंग के सन्दर्भ में हर एक बात पर सविस्तार चर्चा की गयी है।
*पुस्तक के कुछ अंश-*
♦️"मिट्टी की निरंतर जुताई व मिक्सिंग के कारण सरंध्रता ( पोरोसिटी ) , कास्ट के स्टेबिल एग्रीगेट्स से मृदा संरचना में सुधार के फलस्वरूप वायु संचार बढ़ जाता है, जो सूक्ष्म जीवों की क्रियाशीलता, हिमीफिकेशन एवं नाइट्रोजन फिक्सेसन के लिए आवश्यक है।"
♦️"मृदा संरचना में सुधार के फलस्वरूप भूमि की जल रिसाव , धारण एवं आपूर्ति क्षमता (परकोलेशन , रिटेन्सन एण्ड सप्लाइंग केपेसिटी) बढ़ जाती है। इससे भूमिगत जलस्तर वृद्धि (रिचार्ज ऑफ ग्राउण्ड वाटर) तथा जल निकासी में भी मदद मिलती है।"
♦️"पाचित एवं विघटित ऑर्गेनिक मेटर का बहुत थोड़ा अंश ( ५ से १० प्रतिशत ) केंचुए द्वारा अवशोषित किया जाता है और अधिकांश भाग जो कि अपेक्षाकृत स्टेबिल ह्यूमस के रूप में होता है, छोटी - छोटी गोलियों अथवा दानेदार विष्टा के रूप में बाहर निकाल दिया जाता है जिसे प्रायः: 'वर्मी कास्टिंग' के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार ऑर्गेनिक वेस्ट के केंचुए की आहार नली से गुजर जाने का परिणाम होता है। पोषक तत्त्वों की अधिक उपलब्धता, माइक्रोव्स की बढ़ी संख्या तथा बहुत सारे बायोएक्टिव कम्पाउण्ड्स की अधिकता।"
♦️"वर्मी कम्पोस्टिंग के लाभों का अहसास तथा ऑर्गेनिक फाॅरमिंग एवं व्यावसायिक हार्टीकल्चर में इसके बढ़ते हुए उपयोग को देखते हुए वर्मी कम्पोस्टिंग को पूरे भारत में स्माल स्केल एवं कॉटेज इंडस्ट्री के रूप में विकसित करने की असीम संभावनाएँ हैं।
♦️"कैंचुओं का प्रजनन तथा पालन ( संवर्धन ) वर्मी कल्चर कहलाता है। केंचुओं से विसर्जित पदार्थ को वर्मी कास्ट कहते हैं। अपघटनशील व्यर्थ कार्बनिक पदार्थों ( बायोलॉजिकल डिग्रेडेबिल ऑर्गेनिक वेस्ट) जैसे पुआल, भूसा, सूखी घास, सब्जियों के छिलके आदि को खिलाकर केंचुओं से प्राप्त विसर्जित पदार्थ को वर्मी कम्पोस्ट कहते हैं तथा केंचुओं की सहायता से अपघटनशील जीवांश पदार्थ से खाद बनाना वर्मी