18/04/2026
महादेव-गण-शेर-महाराज पर सवार, दिव्य सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत, संपूर्ण सृष्टि की जगत् जननी माता का, वहाँ प्रकटीकरण हो चुका था. माँ के प्रकट होने के साथ ही, उनके वाहन शेर महाराज ! अंदर जंगल में प्रविष्ट होने की, पदयात्रा आरंभ कर दिये.
माता पार्वती मैया के मुखमण्डल के पूरे परिधि में, गोलाकार दायरा बनाते हुये, प्रस्फुटित हो रहे प्रकाश के, औरे की आभा से……… विस्मित ! प्रभावित ! आकर्षित ! उस अकिंचन युवा भगवाधारी के नंगे पाँव ! उनके पीछे-पीछे स्वतः ही, चलते-चले जा रहे थे.
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तिथि :
शिवशक्ति संवत् ३३०२
05 नवम्बर 2023 ; रविवार
कार्तिक माह, कृष्ण पक्ष, अंधियारी रात.
स्थान :
मध्य भारत का, एक बेहद घना जंगल. अचानक से वार करके मार देने वाले बाघों का घर ! अचानकमार वन्य भूमि, मैकल पर्वत श्रृंखला, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती क्षेत्र, मार्गदर्शिका खंड (भारत).
जबलपुर में जब उस तपस्वी ने, काले सांड की उस भाव-भंगिमा को देखा ! जिसका आशय यह निकल रहा था कि, वह सांड ! तपस्वी को अपनी पीठ पर, सवार होने के लिये कह रहा हो. तभी उस युवा भगवाधारी के मस्तिष्क में, यह विचार कौंधा कि……… ‘हो ना हो ! यह कोई अलौकिक शक्तियों वाला सांड हो.’
इस विचार से वशीभूत ! चाय विक्रेता के ठेले-टपरी-खोमचे पर खड़े तपस्वी ने, तत्काल सांड महाराज का अभिवादन किया. परंतु जब सांड महाराज ने, आशीर्वाद देने जैसा, कोई भाव प्रकट नहीं किया ! तब युवा साधु ने सोचा………..
‘अवश्य ही यह कोई, महादेव-दूतों द्वारा नियुक्त ! पूर्वश्रेणी सातवें चरण की आत्मा है. जो अभी वाहन दायित्व निर्वहन काज के लिए आदेशित है. तथा इसे जो आज्ञा प्राप्त हुई है, उसके पालन हेतु ! अभी यहाँ उपस्थित है. तभी तो, यह मूल श्रेणी के आत्मा प्रतिनिधि द्वारा ! धारण वस्त्र के प्रणाम करने पर, आशीर्वाद देने हेतु ! अपने आप को, सुपात्र नहीं मान रहा है.’
यह विचार आते ही, वह युवा साधु ! तत्काल उस बड़े आकर वाले काले सांड के, पीठ के ऊपर बैठ गया. तथा गर्दन के ऊपरले भाग (हम्प) को, कस कर पकड़ लिया. उसके ऐसा करते ही, सांड महाराज ने, दौड़ना आरंभ कर दिया.
पूर्व श्रेणी के सातवें चरण वाले, उस काले सांड के दौड़ने की गति ! क्षण-प्रति-क्षण बढ़ती जा रही थी. जब गति बहुत अधिक बढ़ गयी, तब वह युवा भगवाधारी ! अपने आप को, गिरने से बचाने के लिए, सांड की पीठ पर, पेट के बल लेट गया. तथा हम्प के अगल-बगल की स्किन को, और भी भींच कर पकड़ लिया.
जब सांड के दौड़ने की, बढ़ती हुयी गति कुछ स्थिर हुयी. तब तपस्वी युवक ने, अपनी सिद्धियों का प्रयोग करके, गति को मापा. रिजल्ट आया ! लगभग आठ सौ किलोमीटर प्रति घंटा. रिजल्ट ने उसको कंप-कंपा दिया. संपूर्ण शरीर में, डर की सिहरन दौड़ गयी.
उस डर पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से, उसने आँखे खोल कर, बाहर देखने का निश्चय किया. उस घनी अंधियारी रात में, स्पष्टता से तो, कुछ भी नहीं दिखा. परंतु इतना समझ आ गया कि, सांड के पाँव ! भूमि पर तो, कम से कम नहीं ही पड़ रहे हैं. वह जमीन से कई मीटर ऊँचें, पेड़ों की सबसे उपरली पत्ती से भी, कुछ फिट ऊपर, हवा में ताबड़तोड़ चल रहे थे.
लगभग बीस मिनट की सीधी यात्रा में, दो-ढाई सौ किलोमीटर की यात्रा के पश्चात् ! जहाँ उस काले सांड ने, उस भगवाधारी युवा को, अपनी पीठ से नीचे उतारा. वहाँ बिल्कुल सन्नाटा ! व घुप्प अंधेरा था. बगल से कोई सड़क गुजर रही थी. जिस पर यदा-कदा ! कुछ-कुछ मिनट पर, कोई ना कोई वाहन आ - जा रहे थे. उनकी रोशनी में, उसे यह समझ आया कि, वह और सांड ! जहाँ खड़े हैं, वह कोई कृषि-भूमि है.
दूर बिजली के बल्बों की रोशनी से, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि, वहाँ कोई छोटा सा शहर या कस्बा है ! यानि मानवी आबादी है. परंतु उन बल्बों के प्रकाश का, कैसा भी असर, उस भूखंड पर नहीं था ! जहाँ अभी वह तपस्वी खड़ा था. वहाँ घनघोर अँधेरा था. परंतु वह अंधेरा ! बहुत अधिक अवधि तक नहीं रहा. क्योंकि कुछ ही समय पश्चात् ! वातावरण धीमे-धीमे प्रकाशमान होने लगा.
………और इसी के साथ ! अलौकिक माध्यम से, वहाँ एक-एक करके, महादेव-दूत परमात्मा माता सेविकाओं का आगमन होने लगा. जो माता के पधारने का संकेत था. युवा भगवाधारी तपस्वी साधु के हाथ ! प्रमुदित होकर करबद्ध मुद्रा को प्राप्त हो गये. कुछ ही समय उपरांत ! वहाँ प्रकाशित प्रकाश में, दिव्यता का स्तर बहुत बढ़ गया.
महादेव-गण-शेर-महाराज पर सवार, दिव्य सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत, महादेव की अर्धांगिनी ! शक्ति स्वरूपा माँ ! संपूर्ण सृष्टि की जगत् जननी माता ! का वहाँ प्रकटीकरण हो चुका था. माँ के प्रकट होने के साथ ही, उनके वाहन शेर महाराज ! बिना किसी देरी के, सड़क के विपरीत दिशा की ओर, पदयात्रा आरंभ कर दिये.
पर्याप्त से भी अधिक रोशनी के कारण……… शेर महाराज व उन पर सवार माँ दुर्गा मैया ! तथा महादेव-दूत माता सेविकाओं के, बढ़ने वाली दिशा में, कुछ दूरी पर, पहाड़ व जंगल जैसा ! कुछ आभास हो रहा था. जिसके अंदर संभवतः प्रविष्ट होने की, पदयात्रा आरंभ हो चुकी थी.
माता पार्वती मैया के, मुखमण्डल के पूरे परिधि में, गोलाकार दायरा बनाते हुये, प्रस्फुटित हो रहे प्रकाश के, औरे की आभा से……… विस्मित ! प्रभावित ! आकर्षित ! उस अकिंचन युवा भगवाधारी के नंगे पाँव ! उनके पीछे-पीछे स्वतः ही, चलते चले जा रहे थे.
पूर्व श्रेणी के सातवें चरण वाले, उस सिद्ध काले सांड का दायित्व ! सम्भवतः समाप्त हो चुका था. तभी तो वह सांड महाशय ! वहीं बैठे रह गये थे. या फिर उस कृषि भूमि पर उपजे हुये, घास का आनंद लेने में, जुट गये थे.
इधर युवा साधु ! अपने चलने की धीमी लौकिक गति के कारण, क्षण-प्रतिक्षण पिछड़ता जा रहा था. तभी उसको ‘अलौकिक संदेश वाहक सांकेतिक प्रणाली’ के माध्यम से, संकेत प्राप्त होने की, सजगता-सतर्कता प्राप्त हुयी.
यह जो संकेत था ! वह उसके एक पूर्वजन्म के बड़े भाई (मूल श्रेणी के प्रथम मूल जन्म में लौकिक बड़े भाई) का था. जो अब अपनी आत्मा-यात्रा को पूर्ण करके, परमात्मा यानि महादेव-दूत बन चुके थे.
उस तपस्वी युवक द्वारा ! संकेत को प्राप्त करने की, इच्छा प्रकटीकरण प्रणाली को, सक्रिय करते ही, उसके कानों में, महादेव-दूत विक्रांत महाराज के, डाँट भरे स्वर सुनायी पड़े :
“श्वेतभानु ! मूर्खों जैसे आचरण क्यों कर रहे हो ? सत्रहवें चरण में पहुँच गये हो ! परंतु ढंग अभी भी पन्द्रहवें चरण का अपनाये हुये हो. शीघ्रतापूर्वक पदयात्रा की गति को, सिद्ध-संचार-साधन हेतु अभ्युत्थान करो ! नहीं तो माता के सानिध्य व मार्गदर्शन से, वंचित रह जाओगे.”
युवा साधु को, तत्काल अपनी त्रुटि का एहसास हुआ. उसने अलौकिक माध्यम से, परमात्मा विक्रांत महाराज का, आभार प्रकट किया. फिर अपनी पदयात्रा की गति को, सिद्ध-संचार-साधन स्तर पर, अपग्रेड कर लिया. तत्काल से ही, सुखद परिणाम प्राप्त हुये. अब उसके डगों द्वारा ! प्रत्येक कदम पर, भूमि मापने की क्षमता, बहुत बढ़ गयी. जिसके फलस्वरूप ! अब उसका पिछड़ना थम गया. अब वह उचित वेग से, अनुसरण कर पाने में, सक्षम हो गया था.
पदयात्रा निरंतर जारी रही. फिर कुछ मिनटों बाद, चलते-चलते पानी का एक स्रोत आया. वह शायद कोई जलाशय या नदी का किनारा था. माता आदि शक्ति माँ के वाहन ! महादेव-गण शेर महाराज ! वहीं एक स्थान पर रुक गये.
तत्काल ही आश्चर्यजनक ढंग से, हवा का एक वेग आया. जिसके परिणामस्वरूप ! वहाँ के कुछ क्षेत्र की भूमि ! बिल्कुल साफ-सुथरी हो गयी. और साथ ही, ना जाने कहाँ से, अलग-अलग प्रजाति के, बीसियों प्राणी ! वहाँ इकट्ठे हो गये.
तत्काल वही गिरे हुये, एक पेड़ की मोटी शाखाओं पर, माता का आसन प्रकट हुआ. माता अपने स्थान पर विराजमान हुयीं. माता द्वारा स्थान ग्रहण करने के पश्चात् ! जैसे ही उन्होंने आशीर्वाद मुद्रा में, अपने हाथ की एक हथेली उठायी.
सभी प्राणी ! जहाँ-जहाँ भी खड़े थे, वहीं बैठ गये. साथ ही बैठ गया ! वह युवा भगवाधारी भी. परंतु महादेव-दूत परमात्मा माता-सेविकाओं ने, बैठने का कोई उपक्रम नहीं किया. वह अपने-अपने सुनिश्चित स्थान पर, माता के पीछे व आस-पास खड़ी हो गयीं.
माँ के मुख से दिव्य वाणी निकली :
“अब आगे की क्या योजना है पुत्र ?”
माता का बालक ! युवा भगवाधारी बोला :
“जैसी आपकी आज्ञा माँ !”
माँ पार्वती मैया ने कहा :
“१११११११११ में से, अब तक तुम ३३३३ द्वार से अधिक जा चुके हो. अब अगले आदेश तक के लिये, भिक्षाटन स्थगित कर दो. तथा कुछ चयनित शिवांशों की, गुप्त-परीक्षा आरम्भ करो.”
“……………एवं परीक्षार्थी शिवांशों के, उत्तीर्ण होने की अवस्था बनती देख कर, तुम यह मान सकते हो कि, महादेव के आज्ञा वाले, 4ॐ वर्ग के, प्रथम स्थान पर, निर्माण-काज को, आरंभ करने का, मुहर्त आ गया है.”
युवा बालक बोला :
“परंतु माँ ! स्थान तो अभी तय ही नहीं है. ना ही स्थान का, कोई स्पष्ट संकेत प्राप्त हुआ है. हे माँ ! आप कृपा करके स्थान बता दें. तथा मुझे आशीर्वाद व आज्ञा दें. मैं अभी प्रस्थान करता हूँ.”
माँ की आशीर्वादमयी वाणी :
“महादेव के आज्ञा व संकेत से, जिन स्थानों को तुमने, अभी तक देख रखा है. उन्हीं स्थानों में से, किसी एक स्थान का, अगले कुछ दिवस या मास में, तुम्हें स्पष्ट संकेत प्राप्त होंगे. तुम उन सभी स्थानों की दिशा में, यात्रा आरंभ करो. तुम्हें शीघ्र ही संकेत प्राप्त होंगे. उन संकेतों का अनुसरण करते हुये, तुम एक-एक करके, वर्तमान के चयनित अठारह स्थानों तक पहुँचोगे.”
“मेरे नाथ भोलेनाथ महादेव के कार्य हेतु ! तुम समर्पित शिवांशों का दल तैयार करोगे. उस दल के आपसी समन्वय से, तुम उन अठारह स्थानों में से, अभी निर्माण कार्य आरंभ करने हेतु ! किसी एक स्थान का चयन करोगे. एवं शीघ्रातिशीघ्र उस समर्पित-समूह-दल के कर्म-समर्पण से, उस एक स्थान को, तुम्हें उस स्तर तक पहुँचाना होगा. जिस स्तर पर, वैसे स्थान को, दिव्यता प्रदान करने का प्रावधान है.”
“यदि उन अठारह स्थानों में से, किसी एक स्थान हेतु भी, समर्पित शिवांश दल का, समन्वय नहीं बन पाता है. तब उस अवस्था में, तुम्हारे पास तीन और अतिरिक्त विकल्प होंगे. प्रथम विकल्प ! कनखल से प्रयागराज के मध्य का एक भूखंड है. जिसके लिये एक विधवा वृद्ध स्त्री को, निमित्त बनाने की योजना है. उस भूखंड पर कार्य का क्रियान्वयन होना ! उस स्त्री के कर्म पर निर्भर होगा.”
“यदि वह विधवा वृद्ध स्त्री ! अपने कुत्सित विचारों के प्रभाव में आकर, इस दिव्य अवसर को गवाँ देती है. तब तुम्हें ! मरुभूमि क्षेत्र के, एक समर्पित दंपत्ति को, यह अवसर प्रदान करना है. उसमें से जो स्त्री है ! वह पहले से ही, अपने इस वर्तमान जन्म में, अच्छी गति से सदकर्म बटोर रही है. यदि उसका पति भी, तुमसे प्रश्नोत्तरी के माध्यम से, व देशाटन सानिध्य के माध्यम से, अपनी शंकाओं का निवारण करके…….. अपने भटकाव प्रवृति पर अंकुश लगा कर, महादेव-काज में जुट जाये. तब कदाचित् वहीं दोनों, तुम्हारे ९९९९ वाले वरदान के, आरंभिक प्रथम व द्वितीय लाभार्थी शिवांश बन जाएँगे.”
“यदि वह दंपत्ति भी, इस पुण्यमयी अवसर को चूक जाते हैं. तब भी तुम्हारे पास, अतिरिक्त तीन विकल्पों में का, एक अंतिम विकल्प शेष बचा रहेगा. परंतु वह उस मरु क्षेत्र से, पांच सौ कोस दूर होगा. परंतु अभी जहाँ तुम बैठे हो, इससे केवल पंद्रह कोस दूर होगा. वह वहीं स्थान है ! जहाँ तुम्हारा आज रात्रि का वाहन, अभी विश्राम कर रहा है.”
“यदि, वह दंपत्ति भी, इस पुण्यमयी अवसर को चूक जाते हैं. तब तुम कोई भी प्रयास करने के स्थान पर, धौलागिरि आ जाना. वहाँ ! माँ के सानिध्य में बैठ कर, अवसर गँवाने वाले शिवांशों के ऊपर, पिता के क्रोध का प्रकोप देखना. वैसे इसकी संभावना अत्यंत कम है ! क्योंकि मुझे ऐसा विश्वास है कि, तुम इन इक्कीस स्थानों में से, किसी एक स्थान हेतु ! सफलता अवश्य प्राप्त कर लोगे.”
“मैं तुम्हें एक-एक करके, वह सभी इक्कीस स्थान दिखा दूँगी. जैसे आज स्थान क्रमांक इक्कीस ! अभी कुछ समय पूर्व दिखा चुकी हूँ. वैसे ही आगामी कुछ दिवस-रात्रि में, शेष बीस स्थान भी दिखा दूँगी.”
भाग 02
क्रमशः
✍️ लेखक :
श्रद्धेय साहिल सिंह सूर्यवंशी गुरुजी
संलग्न तस्वीर क्रेडिट :
शिवशक्तियन श्री विकास गिरी जी
प्रस्तुतकर्त्री : ज्योति नीलमेल्लाउरवार (परम् आदरणीय श्रद्धेय स्वामी सत्यानंद जी महाराज गुरुजी की कृपापात्र ! तथा SDP दायित्वधारी शिष्य-मंडली में से, सोशल मीडिया हैंडलर दल की, एक समर्पित शिवांश) सम्पर्क हेतु ! शिवशक्तिशिवालय धर्मपुनर्स्थापनकाज पुण्यप्रकल्प (SDP) का व्हॉटसअप नंबर है +91 9313 246 190
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