29/05/2026
पंचायत चुनाव एक राजनीतिक प्रक्रिया है, कोई पारिवारिक बंटवारा नहीं।
पंचायत चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है, कोई युद्ध नहीं।
जो जीत रहा है, वह भी हमारा अपना है और जो हार रहा है, वह भी हमारा अपना ही है। चुनाव के दौरान किसी को अपना दुश्मन या विरोधी समझने की भूल न करें।
चुनाव आते ही हम अक्सर रिश्तेदारियों, दोस्तियों और वर्षों पुराने भाईचारे को भूल जाते हैं। किसी एक उम्मीदवार के समर्थन या विरोध में हम कभी-कभी अपने ही लोगों से दूर हो जाते हैं, कटुता पैदा कर लेते हैं और ऐसे शब्द बोल देते हैं जो चुनाव के बाद भी दिलों में रह जाते हैं।
ज़रा शांत मन से सोचिए…
अगर आपकी जीत अपने ही लोगों को हराकर, उनसे रिश्ते बिगाड़कर और मनों में दूरी पैदा करके मिलती है, तो क्या वह जीत वास्तव में सुकून दे पाएगी?
आज चुनाव है, कल परिणाम आ जाएगा। लेकिन उसके अगले दिन फिर वही गांव होगा, वही चौपाल होगी, वही रिश्तेदार होंगे, वही सुख-दुख होंगे। जब घर में शादी होगी, जब कोई मुश्किल आएगी, जब किसी को सहारे की ज़रूरत होगी, तब कोई चुनाव चिन्ह नहीं, बल्कि अपने लोग ही काम आएंगे।
याद रखिए, आज जिस व्यक्ति को आप अपना विरोधी समझ रहे हैं, हो सकता है वह सिर्फ समाज की सेवा करने की भावना से चुनाव मैदान में उतरा हो। उसकी सोच अलग हो सकती है, लेकिन वह आपका दुश्मन नहीं है।
और एक बात हमेशा याद रखिए—
आज की जीत या हार स्थायी नहीं है।
पाँच साल बाद फिर चुनाव आएंगे, फिर नए उम्मीदवार होंगे, फिर नई चर्चाएँ होंगी। लेकिन अगर इस बीच रिश्ते टूट गए, भाईचारा खत्म हो गया और दिलों में कड़वाहट भर गई, तो उसकी भरपाई कोई चुनाव नहीं कर सकता।
वोट जरूर दीजिए, खुलकर दीजिए, अपनी बुद्धि और विवेक से दीजिए।
लेकिन इतना ध्यान रखिए कि चुनाव के बाद जब आप अपने गांव की गलियों से गुजरें, तो हर व्यक्ति से नज़र मिलाकर मुस्कुरा सकें।
क्योंकि चुनाव पाँच साल में एक बार आता है, लेकिन रिश्ते और भाईचारा पीढ़ियों तक चलते हैं।
🙏 जीत किसी उम्मीदवार की हो सकती है, लेकिन हार गांव के भाईचारे की नहीं होनी चाहिए। 🙏
“राजनीति कुछ दिनों की है, अपने लोग जीवन भर के हैं।”
हम नारे लगा रहे हैं, पोस्ट डाल रहे हैं, और कभी-कभी यह भी कह रहे हैं कि फलाँ व्यक्ति ने हमारे साथ दगा किया है या हमें वोट नहीं दिया।
लेकिन ज़रा सोचिए, चुनाव के दौरान के ये 15–20 दिन नहीं, बल्कि आम दिनों में आपका व्यवहार लोगों के मन में आपकी पहचान बनाता है। लोग आपको आपके स्वभाव, आपके कार्यों, आपके सहयोग और समाज के प्रति आपकी सोच के आधार पर याद रखते हैं।
इसलिए यदि किसी ने आपको वोट नहीं दिया, तो सबसे पहले उसे कोसने या सुनाने से पहले स्वयं से एक प्रश्न पूछिए—
“लोग मुझे वोट क्यों दें?”
“क्या मेरे अंदर ऐसी योग्यताएँ, ऐसा व्यवहार और ऐसा जनसेवा का भाव है कि लोग स्वेच्छा से मुझ पर विश्वास करें?”
सम्मान मांगने से नहीं, कमाने से मिलता है।
विश्वास दबाव से नहीं, अच्छे आचरण से बनता है।
यदि लोग आपको चुनते हैं, तो वह आपका सम्मान है। और यदि नहीं चुनते, तो वह आत्ममंथन का अवसर है, न कि लोगों से नाराज़ होने का कारण।
चुनाव परिणाम बता सकता है कि कौन जीता और कौन हारा, लेकिन व्यक्ति की असली पहचान उसके व्यवहार, संस्कार और लोगों के दिलों में उसके स्थान से होती है। 🙏🏻🌹