Pushtimargiya Vaishnav's of Nasik

Pushtimargiya Vaishnav's of Nasik Pushtimarg is spontaneous, selfless and motiveless love for Shri Krishna. It is based on pure love for Shri Krishna. Lofty goal, but we can do it together.

It is expressed only through service of Shri Krishna - "Seva". It is love after realising Shri Krishna's true nature Welcome and Jai Shri Krishna to all devotees and fans. This group is for everyone who is interested in the transcendental manifestation of Lord Krishna known as Shrinathji. The main focus here is ’everything’ Shrinathji. The purpose is to interact with each other, have a dialogue or

two, maybe learn a few things, and celebrate the Blue God by sharing - pictures, videos, stories, discussions, links, articles, personal experiences, or anything else you want to express about Him. The goal is to make this the most comprehensive page about Shrinathji on the web.

21/04/2025
21/04/2025

🌞🌹🌞🌹🌞🌹🌞
*वधाई वधाई वधाई*

*सभी वल्लभीय वैष्णवोंको श्रीमहाप्रभुजीके प्राकट्य उत्सव की वधाई सह सादर भगवत स्मरण।*

*फल्यो जन भाग्य पथ पुष्टि प्राकट करन दुष्ट पाखंड मत खंड खंडन कियो।*

*पुष्टिमार्ग के प्रकाशक, वैष्णवों के प्राणप्यारे अखंड भूमंडलाचार्य जगद्गुरु श्रीमद्वल्लभाचार्यजी का ५४૮ वा प्राकट्य महोत्सव आगामी चैत्र कृष्ण ११ एकादशी तदनुसार दिनांक २४ अप्रैल २०२५ गुरुवार के शुभदिन है।*

*सोमयाजी पष्ठपीठाधीश्वर अखंड भूमंडलाचार्य पू.पा.गो. श्रीवल्लभरायजी महाराजश्री के आशीर्वाद से नासिक के वैष्णव समाज द्वारा इस महोत्सव का आयोजन सुनिश्चित किया गया है।*

👉🏻 *कार्यक्रम* 👈🏻
*चैत्र कृष्ण ११ एकादशी दिनांक २४ अप्रैल २०२५ गुरुवार*

🌞 *श्रीमहाप्रभुजी के तिलक दर्शन* 🌞
*दोपहर 12.00*

🚩 *शोभायात्रा* 🚩
*शाम 5.30 बजे श्री वल्लभाचार्यधाम, केवड़ीवन से प्रारंभ होकर आगे चौकमें डेंटल कॉलेज के पास से तपोवन होकर श्री वल्लभाचार्यधाम आएगी।*
*वहां उत्सव नायक श्रीमहाप्रभुजीके चित्रजी के पूजन बाद श्री सर्वोत्तम स्तोत्र एवं बधाई कीर्तन होंगे*

☀ *संध्या आरती एवं नंदमहोत्सव* ☀

शोभायात्रा के पश्चात *फलाहारी एवं महाप्रसाद वैष्णवजन ग्रहण करेंगे।*

*उपरोक्त कार्यक्रममें आप सभी वैष्णवोंको कृतार्थ होने के लिए हार्दिक निमंत्रण है।*

*सभी वैष्णवों को वधाई सह भगवत स्मरण।*
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🌷 जय श्री कृष्णा 🌷बधाई       बधाई       बधाई*।। विजयेते श्रीबालकृष्ण श्रीश्यामलालप्रभू।*अति हर्ष के साथ सूचित करते हैं क...
02/04/2025

🌷 जय श्री कृष्णा 🌷
बधाई बधाई बधाई

*।। विजयेते श्रीबालकृष्ण श्रीश्यामलालप्रभू।*

अति हर्ष के साथ सूचित करते हैं की नासिक के वल्लभीय वैष्णव समाज द्वारा
*यमुना छठ* एवं *श्री यदुनाथजी को प्राकट्य उत्सव* निमित्त *फूल मंडली, चुनरी मनोरथ एवं कीर्तन* का उत्साह पूर्वक आयोजन सुनिश्चित किया गया है।

दिनांक:- 14/04/2024

कार्यक्रम का नियोजन:-
फूल मंडली दर्शन - राजभोग सुबह 11 बजे से 12 बजे
तिलक - 11.30 बजे

यमुना जी को पाठ - शाम 4 से 5
कीर्तन - शाम 5 से 6
चुनरी मनोरथ - शाम 6 से 6.30
श्री यदुनाथजी को प्राकट्य उत्सव निमित्त नंदउत्सव - 6.30 से 7

*आरती के पश्चात महाप्रसाद की व्यवस्था है।*

स्थान:- श्रीमद वल्लभाचार्य धाम केवड़ीवन, तपोवन, नाशिक - 422003

इस अलौकिक आनंद में सहभागी होने के लिए आप सह परिवार आमंत्रित है।

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12/01/2025

जहां जहां चरण कमल माधो के तहीं तहीं
मन मोर....

प्रयागराज महाकुंभ प्रस्थान

व्रज - भाद्रपद कृष्ण अष्टमीशुक्रवार, 19.8.2022श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को मगलमय बधाई जय श्री कृष्णआज का उत्सव महा-...
19/08/2022

व्रज - भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

शुक्रवार, 19.8.2022

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को मगलमय बधाई

जय श्री कृष्ण

आज का उत्सव महा-महोत्सव कहलाता है. पुष्टिमार्गीय वैष्णवों के लिए यह महोत्सव सबसे अधिक महत्व का होता है.

महा-महोत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.

आज दोहरी देहरी मांडी जाती है. द्वार के कोनों पर हल्दी एवं कुंकुम से कमल, स्वास्तिक, पलना, लताएँ आदि चित्रकारी की जाती है. गेंद, चैगान, दिवाला आदि सब सोने आते हैं. अत्यंत उत्साह एवं उमंग से आज का उत्सव मनाया जाता है.

दिन में सभी समय झारीजी में यमुनाजल भरा जाता है. चारों समय (मंगला, राजभोग, संध्या व शयन) की आरती थाली में की जाती है.

श्रीजी में प्रातः 4 बजे शंखनाद होते हैं और 4.45 मंगला दर्शन खुलते हैं. खुले दर्शनों में ही मंगला आरती के उपरांत टेरा लेकर प्रभु का उपरना बड़ा कर (हटा) दिया जाता है और तिलकायत महाराज कुंकुम से तिलक कर प्रभु को पंचामृत स्नान कराते हैं.

पंचामृत स्नान में प्रभु को क्रमशः दूध, दही, घृत (घी), शहद और बूरा (पकी हुई शक्कर का चूरा) से स्नान कराया जाता है. पंचामृत स्नान के समय प्रभु विभिन्न रंगों में दिखायी पड़ते हैं और तब प्रभु की छटा अलौकिक दिखायी पड़ती है.

पंचामृत के छींटे जो प्रभु स्वरूप से स्पर्श होकर उड़ते हैं और वल्लभ स्वरूपों के चरणों में लगते है, वैष्णव उनके स्पर्श से धन्य धन्य हो जाते हैं.

पंचामृत स्नान के पश्चात् प्रभु को चन्दन, आवंला, उबटना एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) आदि से दोहरा अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है.

आज प्रभु को जन्मदिवस के महात्म्य स्वरूप यशोदोत्संगलालित स्वरूप के आधार रूप परब्रह्म श्रीकृष्ण के रूप में पंचामृत स्नान कराया जाता है.

एक महत्वपूर्ण बात

- आज प्रभु को उनके जन्मदिन के महात्म्य स्वरूप यशोदोत्संगलालित स्वरूप के आधार रूप परब्रह्म श्रीकृष्ण के रूप में पंचामृत स्नान कराया जाता है.
रात्रि को प्रभु जन्म उपरांत तो श्री बालकृष्णलालजी के स्वरुप को पंचामृत होता है.

- पुष्टिमार्ग में चारों जयंतियों (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, श्रीरामनवमी, श्री वामन द्वादशी व श्री नृसिंह जयंती) के दिन फलाहार किया जाता है. इसका भाव यह है कि जब हम प्रभु के सम्मुख जाएँ अथवा प्रभु हमारे घर पधारें तब तन, मन से शुद्ध हों और आयुर्वेद में भी कहा गया है कि उपवास अथवा फलाहार से तन व मन की शुद्धि होती है.

पंचामृत को दर्शन के पश्चात् श्रीजी के पातलघर से सभी वैष्णवों को वितरित किया जाता है जिसे प्रभु प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं.

श्रृंगार काफी देर से लगभग 9:30 बजे खुलते हैं क्योंकि पंचामृत स्नान के पश्चात प्रभु स्वरुप अत्यधिक चिकना हो जाता है. साथ ही आज का श्रृंगार, आभरण आदि भी अत्यधिक भारी में भारी होते हैं

श्रृंगार दर्शन में श्रीजी को तिलक एवं अक्षत किया जाता है, भेंट रखी जाती है. इस दौरान शंख, झालर, धंटा आदि बजाये जाते हैं और वैष्णव मंगलगान गाते हैं.
प्रभु के सम्मुख हल्दी से चैक पुराया जाता है. राई, लोन से प्रभु की नजर उतारी जाती है.

श्रीजी के मुख्य पंड्याजी वर्षपत्र पढ़ते हैं.

राजभोग दर्शन -

कीर्तन - (राग: सारंग)

आज महा मंगल मेहराने ।
पंच शब्द ध्वनि भीर बधाई घर घर बैरख बाने ।।1।।
ग्वाल भरे कांवरि गोरस की वधु सिंगारत वाने ।
गोपी ग्वाल परस्पर छिरकत दधि के माट ढुराने ।।2।।
नाम करन जब कियो गर्गमुनि नंद देत बहु दाने ।
पावन जश गावति ‘कटहरिया’ जाही परमेश्वर माने ।।3।।

साज - श्रीजी में आज लाल दरियाई की सुनहरी जरी की तुईलैस के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया के ऊपर लाल मखमल बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचैकी के ऊपर सफेद मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज केसरी जामदानी के रुपहली जरी की तुईलैस से सुसज्जित चाकदार एवं चोली धरायी जाती है. सूथन सुनहरी रेशमी छापा का होता है. लाल रंग का पीताम्बर चैखटे के ऊपर धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम होते हैं.

श्रृंगार - प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी से भारी श्रृंगार धराया जाता है. उत्सव के तीन जोड़ी के नवरत्नों के आभरण धराये जाते हैं. हांस, त्रवल, दो हालरा, बघनखा आदि धराये जाते हैं. कली, कस्तूरी, वैजयंतीमाला आदि सभी धरायी जाती है.

श्रीमस्तक पर केसरी रंग की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, पांच मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर जमाव का शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. बायीं ओर माणक की चोटी (शिखा) धरायी जाती है.

पीठिका के ऊपर प्राचीन हीरे-मोती के जड़ाव का चैखटा धराया जाता है. प्रभु के मुखारविंद पर केशर से कपोलपत्र किये जाते हैं. पीले एवं श्वेत पुष्पों की विविध रंगों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.

श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते है. पट, गोटी जड़ाऊ व आरसी बड़ी उस्ताजी वाली आती है.

राजभोग अनोसर पश्चात उत्थापन सायंकाल लगभग 7.15 बजे खुलते हैं.

तदुपरांत रात्रि 12 बजे भीतर शंख, झालर, घंटानाद की ध्वनि के मध्य प्रभु का जन्म होता है।

प्रभु जन्म के समय नाथद्वारा नगर के रिसाला चैक में प्रभु को 21 तोपों की सलामी दी जाती है. इस अद्भुत परंपरा के साक्षी बनने के लिये प्रतिवर्ष वहां हजारों की संख्या में नगरवासी व पर्यटक एकत्र होते हैं.

प्रभु सम्मुख विराजित श्री बालकृष्णलालजी पंचामृत स्नान होता है, महाभोग धरा जाता है जिसमें पंजीरी के लड्डू, मनोर (इलायची-जलेबी) के लड्डू, मेवाबाटी, केशरिया घेवर-बाबर, केशरिया चन्द्रकला, दूधघर में सिद्ध मावे के पेड़ा-बर्फी, दूधपूड़ी (मलाई-पूड़ी), केशर युक्त बासोंदी, जीरा युक्त दही, केसरी-सफेद मावे की गुंजिया, श्रीखंड-वड़ी, घी में तला हुआ बीज-चालनी का सूखा मेवा, विविध प्रकार के संदाना (आचार) के बटेरा, विविध प्रकार के फल आदि अरोगाये जाते हैं.

महाभोग की सखड़ी में राजभोग की भांति सखड़ी की सामग्री, पांचभात, मीठी सेव, केसरी पेठा आदि अरोगाये जाते हैं.

वैष्णवों के घर श्री ठाकुरजी को शयन पश्चात पोढ़ा दिया जाता है और जागरण नहीं किया जाता. नवमी के दिन श्री ठाकुरजी को जगाकर, मंगल भोग धर कर, सरा कर श्रृंगार किया जाता है.

राजभोग में अदकी सामग्रियां धर कर पलने में झूला कर नन्दोत्सव मनाया जाता है परन्तु मंदिरों दृ हवेलियों आदि में अष्टमी के रात्रि को महाभोग, नवमी के दिवस प्रातः नन्दोत्सव, इसके पश्चात मंगला, श्रृंगार एवं राजभोग आदि का सेवाक्रम किया जाता है. इस उत्सव में सेवाक्रम मंदिरों में और वैष्णवों के घरों में थोड़ा अलग-अलग होता है.

व्रज - भाद्रपद कृष्ण षष्ठीWednesday, 17 August 2022विशेष – जन्माष्टमी के पूर्व श्रीजी को घर के श्रृंगार धराये जाते हैं. ...
17/08/2022

व्रज - भाद्रपद कृष्ण षष्ठी

Wednesday, 17 August 2022

विशेष – जन्माष्टमी के पूर्व श्रीजी को घर के श्रृंगार धराये जाते हैं. इन्हें ‘आपके श्रृंगार’ भी कहा जाता है.

इस श्रृंखला में आज श्रीजी को हरा सफ़ेद लहरिया और श्रीमस्तक पर पाग और जमाव का कतरा धराया जाता है. आज सभी समय झारीजी में यमुनाजल आता है.

आज श्रीजी में जन्माष्टमी की पानघर की सेवा की जाती हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

सब ग्वाल नाचे गोपी गावे l प्रेम मगन कछु कहत न आवे ll 1 ll
हमारे राय घर ढोटा जायो l सुनि सब लोक बधाये आयो ll 2 ll
दूध दधि घृत कांवरि ढोरी l तंदुल डूब अलंकृत रोरी ll 3 ll
हरद दूध दधि छिरकत अंगा l लसत पीत पट बसन सुरंगा ll 4 ll
ताल पखावज दुंदुभि ढोला l हसत परस्पर करत कलोला ll 5 ll
अजिर पंक गुलफन चढि आये l रपटत फिरत पग न ठहराये ll 6 ll
वारि वारि पटभूषन दीने l लटकत फिरत महारस भीने ll 7 ll
सुधि न परे को काकी नारी l हसि हसि देत परस्पर तारी ll 8 ll
सुर विमान सब कौतिक भूले l मुदित त्रिलोक विमोहित फूले ll 9 ll

साज - श्रीजी में आज हरे-श्वेत रंग के लहरिया की रुपहली ज़री के हांशिया (किनारी) से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया के ऊपर लाल मखमल बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी में आज हरे-श्वेत लहरिया का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक तथा जड़ाव स्वर्ण के सर्वआभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर हरे-सफेद लहरिया की पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, सुनहरी जमाव का कतरा एवं सुनहरी तुर्री तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में मानक के कर्णफूल धराये जाते हैं. श्रीकंठ में हार एवं दुलड़ा धराया जाता हैं. पीले पुष्पों की विविध रंग की थागवाली दो मालाजी धरायी जाती है एवं इसी प्रकार की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है. श्रीहस्त में कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट शतरंज का हरा एवं गोटी स्वर्ण की शतरंज की धराई जाती हैं. आरसी श्रृंगार में सोना की एवं राजभोग में सोना की डांडी की आती है.

14/08/2022
सभी वैष्णवों को रक्षाबंधन पर्व की अनेकानेक बधाईयांव्रज - श्रावण शुक्ल पूर्णिमाशुक्रवार, 12.8.2022रक्षाबंधन तथा नित्यलीला...
12/08/2022

सभी वैष्णवों को रक्षाबंधन पर्व की अनेकानेक बधाईयां

व्रज - श्रावण शुक्ल पूर्णिमा

शुक्रवार, 12.8.2022

रक्षाबंधन तथा नित्यलीलास्थ गौस्वामी श्री दामोदरजी का प्राकट्योत्सव

विशेष - आज प्रभु श्रीनाथजी की नगरी व समस्त पुष्टिमार्गीय मन्दिरों में रक्षाबंधन का पर्व है. बहन अपने भाई की मंगलकामना हेतु राखी बांधती है इस भाव से बहन सुभद्रा राखी बांधती है, गर्गादिक ऋषि भी राखी बांधते हैं, माता यशोदा भी लालन की रक्षा हेतु राखी बांधती है.

इन सभी भावनाओं के कीर्तन अष्टसखाओं ने गाये हैं. यह पर्व व्रज में सर्वत्र मनाया जाता है.

आज श्री गुसांईजी के ज्येष्ठ पुत्र गिरधरजी के पुत्र नित्यलीलास्थ गौस्वामी श्री दामोदरजी का प्राकट्योत्सव भी है. आप का प्राकट्य विक्रम संवत १६३२ में आज के दिन हुआ था. आपने अपने जीवनकाल में श्रीजी के विविध मनोरथ किये थे. आपश्री वेदज्ञ, मन्त्रज्ञ, अत्यंत तेजस्वी एवं सरल स्वाभाव के थे.

एक बार आपश्री से छुपा कर श्रीजी के तत्कालीन अधिकारी ने प्रभु सेवा के तीन लाख रुपये एक वृक्ष के नीचे गाड़ दिए थे तब श्रीजी ने स्वयं आपश्री को यह बात बतायी और आपने तुरंत रुपये मंगाकर श्रीजी को अर्पण कर दिए थे.

आज से श्रीजी में जन्माष्टमी की बड़ी बधाई बैठती भी है जिससे नवमी तक पिछवाई, गादी, तकिया आदि सर्व साज पर आगे की सफेदी नहीं चढ़ाई जाती है, तकिया लाल मखमल के आते हैं. जड़ाव स्वर्ण के पात्र, चैकी, पडघा, शैयाजी आदि आते हैं.

श्रीजी का सेवाक्रम - पर्व रुपी उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.

आज दिनभर झारीजी में यमुनाजल भरा जाता है. चारों समां (मंगला, राजभोग, संध्या व शयन) में आरती थाली में की जाती है. मंगला दर्शन के उपरांत ठाकुरजी को चन्दन, आवंला, एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) से अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है.

श्रीजी प्रभु को नियम से रुपहली पठानी किनारी से सुसज्जित लाल मलमल का पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर चिल्ला वाली पाग के ऊपर सादी मोरपंख की चन्द्रिका का श्रृंगार धराया जाता है.

पवित्रा की ही भांति रक्षा (राखी) भी इस बार शुभमुहूर्त में प्रातः श्रृंगार दर्शन में धरायी जाती है. श्रृंगार दर्शन में 7 बजकर 6 मिनट पर झालर-घंटा, शंखोदक की ध्वनि के मध्य श्रीजी को तिलक, अक्षत कर दोनों श्रीहस्त में एवं दोनों बाजूबंद के स्थान पर रक्षा (राखी) धरायी जाती है. वहां विराजित अन्य स्वरूपों को भी राखी धरायी जाएगी. तदुपरांत भेंट की जाएगी और दर्शन उपरांत उत्सव भोग धरे जाएंगे.

आज नियम से श्रीजी में प्रभु श्री मदनमोहनजी कांच के हिंडोलने में झूलते हैं.

रात्रि के अनोसर में प्रभु के सम्मुख सूखे मेवा, मिश्री के खिलौना व मिठाई को थाल, अत्तरदान, चैपड़ा, चार बीड़ा, आरसी आदि आते हैं.

पुष्टिमार्ग में ऐसा नियम है कि वैष्णवों के गृह सेव्य स्वरूपों को राखी श्रीजी के राखी धराये उपरांत ही धरायी जाती है. जिन वैष्णवों के घर अष्ट प्रहर की सेवा हो वे वैष्णव उत्थापन की सेवा के बाद प्रभु को राखी धरा सकते हैं.

जिन वैष्णवों के घर अष्टप्रहर की सेवा नहीं वे वैष्णव अगले दिन प्रातः राजभोग समय प्रभु को राखी धरायें.

कल भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा के क्षय होने के कारण नाथद्वारा नगर के स्वर्णयुग दाता नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी महाराजश्री का प्राकट्योत्सव आज मनाया जावेगा।

श्रीजी में नियम का सोने का बंगला, सोने का हिंडोलना होगा वहीँ श्रीनवनीतप्रियाजी में प्रातः सोने का पलना, सोने का बंगला और सोने के हिंडोलना के मनोरथ होंगे.

राजभोग दर्शन -

कीर्तन - (राग: सारंग)

हेरि है आज नंदराय के आनंद भयो ।
नाचत गोपी करत कुलाहल मंगल चार ठयो ।।1।।
राती पीरी चोली पहेरे नौतन झुमक सारी ।
चोवा चंदन अंग लगावे सेंदुर मांग संवारी ।।2।।
माखन दूध दह्यो भरिभाजन सकल ग्वाल ले आये ।
बाजत बेनु पखावज महुवरि गावति गीत सुहाये ।।3।।
हरद दूब अक्षत दधि कुंकुम आँगन बाढ़ी कीच ।
हसत परस्पर प्रेम मुदित मन लाग लाग भुज बीच ।।4।।
चहुँ वेद ध्वनि करत महामुनि पंचशब्द ढ़म ढ़ोल ।
‘परमानंद’ बढ्यो गोकुलमे आनंद हृदय कलोल ।।5।।

साज - श्रीजी में आज लाल मलमल पर रुपहली जरी के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी के ऊपर सफेद और तकिया के ऊपर लाल मखमल बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचैकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है. पीठिका और पिछवाई के ऊपर रेशम के रंग-बिरंगे पवित्रा धराये जाते हैं.

वस्त्र - श्रीजी को आज रुपहली पठानी किनारी से सुसज्जित लाल मलमल का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र पीले धराये जाते हैं.

श्रृंगार - प्रभु को आज वनमाला से दो अंगुल ऊंचा (चरणारविन्द तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. उत्सव के मिलवा - हीरे, मोती, माणक, पन्ना, नीलम तथा जड़ाव स्वर्ण के आभरण व दुलड़ा धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लाल चिल्ला वाली पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में हीरा के कुंडल धराये जाते हैं. कली की माला धरायी जाती है. श्वेत पुष्पों की मालाजी एवं विविध प्रकार के रंग-बिरंगे पवित्रा मालाजी के रूप में धराये जाते हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उत्सव का, गोटी जड़ाऊ व आरसी चार झाड़ की आती है.

व्रज - श्रावण शुक्ल द्वादशीमंगलवार, 9.8.2022पवित्रा द्वादशीजय श्री कृष्णआज पवित्रा द्वादशी है. श्रावण शुक्ल एकादशी की मध...
09/08/2022

व्रज - श्रावण शुक्ल द्वादशी

मंगलवार, 9.8.2022

पवित्रा द्वादशी

जय श्री कृष्ण

आज पवित्रा द्वादशी है. श्रावण शुक्ल एकादशी की मध्यरात्रि को स्वयं ठाकुरजी ने प्रकट होकर श्री महाप्रभुजी को दैवीजीवों को ब्रह्म-सम्बन्ध देने की आज्ञा दी.

इस प्रकार श्रावण शुक्ल द्वादशी के दिन श्रीवल्लभ ने सब से प्रथम ब्रह्म-सम्बन्ध वैष्णव दामोदर दास हरसानी को दिया. तब से एकादशी का दिन सभी वैष्णवों में पुष्टिमार्ग की स्थापना दिवस-समर्पण दिवस के रूप में मनाया जाता है.

श्री महाप्रभुजी को स्वयं श्रीजी ने ब्रह्म-सम्बन्ध देने की आज्ञा प्रदान की इस कारण सभी वैष्णवों को वल्लभ कुल के बालकों से ही ब्रह्म-सम्बन्ध लेना चाहिए, किसी अन्य साधु-संत आदि से नहीं लिया जाना चाहिए.

वल्लभ कुल के बालक श्री महाप्रभुजी की ओर से ब्रह्म-सम्बन्ध देते हैं अतः पुष्टिमार्ग के गुरु श्री महाप्रभुजी हैं.

जिस प्रकार हिन्दू धर्म के अन्य सम्प्रदायों में आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) को गुरु का पूजन किया जाता है उसी प्रकार पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय में आज के दिन गुरु का पूजन किया जाता है.

सभी वैष्णव आज के दिन श्री ठाकुरजी को पवित्रा धराये पश्चात अपने ब्रह्म-सम्बन्ध देने वाले गुरु को पवित्रा, यथाशक्ति भेंट आदि धरें एवं दंडवत करें इसके पश्चात वैष्णवों को परस्पर प्रसादी मिश्री देकर ‘जय श्री कृष्ण’ कहें.

यदि गुरु किसी अन्य स्थान पर हों अर्थात उनके साक्षात् चरणस्पर्श दंडवत संभव न हों तो उन्हें पवित्रा व भेंट किसी भी तरह भेजें. भेंट भी भविष्य में साक्षात् होने पर उनके सम्मुख रखें.

यदि गुरु नित्यलीलास्थ हो गए हों तो उनके चित्र पर पवित्रा धराकर कर दंडवत करें, भेंट धरें और उपरांत उनके पुत्र को, उनके परिवार के किन्ही अन्य सदस्य को अथवा किसी अन्य गौस्वामी बालक जिनके आप संपर्क में हों उनको भेंट कर दें.

राजभोग दर्शन -

साज - आज श्रीजी में सफेद रंग की मलमल की धोरेवाली (थोड़े-थोड़े अंतर से रुपहली जरी लगायी हुई) सुनहरी जरी की हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. पिछवाई में सात स्वरूप श्री महाप्रभुजी श्रीजी को पवित्रा धरा रहे हैं एवं श्री गुसाई जी मोरछल की सेवा कर रहे हैं ऐसा सुन्दर चित्रांकन किया गया है.

गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचैकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है. पीठिका के ऊपर व इसी प्रकार से पिछवाई के ऊपर रेशम के रंग-बिरंगे पवित्रा धराये जाते हैं.

वस्त्र - श्रीजी को आज गहरे गुलाबी (पतंगी) मलमल का रुपहली किनारी से सुसज्जित पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार - श्रीजी को आज छोटा (मध्य से दो अंगुल ऊपर) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना एवं सोने के आभरण धराये जाते हैं. एक कली की माला धरायी जाती है. श्रीमस्तक पर पतंगी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोरपंख की पन्ना वाली चमकनी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.

श्रीकर्ण में पन्ना के चार कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थाग वाली दो मालजी एवं विविध प्रकार के रंग-बिरंगे पवित्रा मालाजी के रूप में धराये जाते हैं.

श्रीहस्त में कमलछड़ी, पन्ना के वेणुजी एवं दो वैत्रजी (एक पन्ना व एक सोने के) धराये जाते हैं. पट गुलाबी, गोटी छोटी सोने की व आरसी सोने की डांडी की आती है. श्रृंगार में लाल मलमल की आरसी आती है.

व्रज – श्रावण शुक्ल षष्ठीWednesday, 3-8-2022गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) क...
03/08/2022

व्रज – श्रावण शुक्ल षष्ठी

Wednesday, 3-8-2022

गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) के श्रृंगार

जिन तिथियों के लिए प्रभु की सेवा प्रणालिका में कोई वस्त्र, श्रृंगार निर्धारित नहीं होते उन तिथियों में प्रभु को ऐच्छिक वस्त्र व श्रृंगार धराये जाते हैं.

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को गुलाबी रंग का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) का शृंगार धराया जायेगा.

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी जर्दोज़ी के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

कारे कारे बदरा देस देस ते उलरे श्याम बरन सब रुख भयो l
मनो हो मदन मिल्यो मदन मोहन सों करत ओट महा सघन तिमिर के बासन ननरो ll 1 ll
मोरन की सोर अति पिक को पपैया कुहूकात नुपूर धुन अलसे धूनतयो l
‘धोंधी’ के प्रभु बोली चली तहां जहाँ पातन की सेज करी पातन छयो ll 2 ll

साज – श्रीजी में आज गुलाबी रंग की मलमल पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज गुलाबी मलमल का रूपहरी किनारी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है. हरे मीना के के सर्व आभरण धराये जाते हैं.श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग के ग्वालपाग (पगा) के ऊपर मोती की लड़, सुनहरी चमक (जमाव) की चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं.आज कमल के फूल की माला धरायी जाती हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी व कमल के पुष्प की मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, फ़िरोज़ा के वेणुजी एवं दो (एक सोना का) वेत्रजी धराये जाते हैं.पट राग रंग का व गोटी बाघ बकरी की आती हैं.

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