अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच

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 #कायस्थों_का_ननिहाल_है_नागवंश_अतः_धूमधाम_से_मनाई_जाती_है_नागपंचमीश्री चित्रगुप्त भगवान के बारह पुत्रों का विवाह नागराज ...
17/08/2026

#कायस्थों_का_ननिहाल_है_नागवंश_अतः_धूमधाम_से_मनाई_जाती_है_नागपंचमी

श्री चित्रगुप्त भगवान के बारह पुत्रों का विवाह नागराज वासुकी की बारह कन्याओं से हुआ। इसी कारण कायस्थों का ननिहाल नागवंश मानी जाती है और नागपंचमी के दिन नाग पूजा की जाती है।
जय जय श्री चित्रगुप्त।
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🇮🇳 जय हिंद, वंदे मातरम 🇮🇳आपको व आपके सभी परिवारजनों को हमारे व हमारे विशाल परिवार अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच ( पंजी. ...
15/08/2026

🇮🇳 जय हिंद, वंदे मातरम 🇮🇳
आपको व आपके सभी परिवारजनों को हमारे व हमारे विशाल परिवार अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच ( पंजी. ) की ओर से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
🇮🇳जय हिंद, वंदे मातरम 🇮🇳

विजय कुमार लाल श्रीवास्तव
मुख्य राष्ट्रीय संरक्षक
सचिन श्रीवास्तव #सच
संस्थापक / राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच ( पंजीकृत )
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💥💥  ्री_चित्रगुप्त_हर_घर_श्री_चित्रगुप्त 💥💥       🚩🚩  ्री_चित्रगुप्त 🚩🚩             🙏🙏  #शुभप्रभात 🙏🙏✊✊   #अखिल_भारतीय_क...
18/07/2026

💥💥 ्री_चित्रगुप्त_हर_घर_श्री_चित्रगुप्त 💥💥
🚩🚩 ्री_चित्रगुप्त 🚩🚩
🙏🙏 #शुभप्रभात 🙏🙏
✊✊ #अखिल_भारतीय_कायस्थ_जागृति_मंच ✊✊

🏡🏡 घर घर श्री चित्रगुप्त-हर घर श्री चित्रगुप्त🏡🏡         🙏🙏 जय जय श्री चित्रगुप्त 🙏🙏हिंदू धर्म की मान्यता है कि कायस्थ ध...
26/06/2026

🏡🏡 घर घर श्री चित्रगुप्त-हर घर श्री चित्रगुप्त🏡🏡
🙏🙏 जय जय श्री चित्रगुप्त 🙏🙏
हिंदू धर्म की मान्यता है कि कायस्थ धर्मराज श्री चित्रगुप्त जी की संतान हैं तथा देवता कुल में जन्म लेने के कारण इन्हें ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों वर्णों को धारण करने का अधिकार प्राप्त है।

वेदों के अनुसार कायस्थ का उद्गम ब्रह्मा जी ही हैं। उन्हें ब्रह्मा जी ने अपनी काया की सम्पूर्ण अस्थियों से बनाया था, तभी इनका नाम काया+अस्थि = कायस्थ हुआ।

#यम #संहिता

धर्मराज ने जिन्हें पापियों को दण्ड देने का अधिकार मिला है, श्री ब्रह्राा जी की सेवा में जाकर निवेदन किया है कि ऐसा भारी काम मुझसे नहीं चल सकता। ब्रह्राा जी ने कहा- ‘अच्छा, मैं तुम्हारी सहायता करुगा’ धर्मराज को विदा करके ब्रह्राा जी ध्यान में लग गये। देवताओं के हजार वर्ष तक तप करने पर उन्होंने आख खोली, तो देखा कि पुरुष श्यामवर्ण, कमल नयन, सुराहीदार गर्दन वाला , हाथ में कलम दवात और पाटी लिये आगे खड़े हैं। ब्रह्राा जी ने उनसे कहा कि ‘तुम मेरी काया से उत्पन्न हुए और काया में स्थित थे, इसी से तुम्हारा नाम कायस्थ रखा गया और यह चित्र वाक से हमने गुप्त रखा था, इसलिये पंडित तुम्हें चित्रगुप्त कहेंगे।

फिर चित्रगुप्त कोटिनगर में जाकर देवी की आराधना में लगे और परमेश्वरी का उन्होंने व्रत किया और स्तुति की। उन्होंने प्रसन्न होकर तीन वर दिये कि परोपकार हो और अपने अधिकार पर स्थिर रहो और चिरायु हो।
”एक समय द्विजों में श्रेष्ठ देवशर्मा ने सन्तान के लिए श्री ब्रह्राा जी की आराधना की। ब्रह्राा के प्रसन्न होने पर उनके यहाँ इरावती नाम की कन्या उत्पन्न हुर्इ। देवशर्मा ने उस का चित्रगुप्त जी के साथ विवाह कर दिया, और चित्रगुप्त जी से उससे आठ पुत्र हुए चारु सुचारु चित्र मतिमान हिमवान चित्रचारू अरुण जितेनिद्रय दूसरी मनु की कन्या दक्षिणा, जो चित्रगुप्त के साथ ब्याही गर्इ, उससे यह चार पुत्र हुए। भानु विभानु विश्वभानु और वीर्यवान।

वर्तमान में कायस्थ मुख्य रूप से श्रीवास्तव, सक्सेना, निगम, माथुर, भटनागर, लाभ, लाल, कुलश्रेष्ठ, अस्थाना, कर्ण, वर्मा, खरे, राय, सुरजध्वज, विश्वास, सरकार, बोस, दत्त, चक्रवर्ती, श्रेष्ठ, प्रभु, ठाकरे, आडवाणी, नाग, गुप्त, रक्षित, बक्शी, मुंशी, दत्ता, देशमुख, पटनायक, नायडू, सोम, पाल, राव, रेड्डी, मेहता आदि उपनामों से जाने जाते हैं। वर्तमान में कायस्थों ने राजनीति और कला के साथ विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में सफलतापूर्वक विद्यमान हैं।

हिन्दुओं के प्राचीनतम ग्रन्थ ‘ऋग्वेद’ के अनुसार कायस्थों के पूर्व पुरुष श्री चित्रगुप्त एक शकितशाली क्षत्रिय थे। वह राजा कहलाते हैं। ‘कृष्ण यजुर्वेद’ की ‘मैत्रायनी संहिता’ में उनको एक आश्चर्य जनक शासक के रुप में दर्शाया गया है।

वह ब्रह्राा के पुत्र थे तथा इन्द्र से भी अधिक शकितशाली थे। समय के साथ इन्द्र परिवर्तित होते रहे हैं जबकि चित्रगुप्त स्थायी हैं।
ऋग्वेद के अस्वालयन गृह सूत्र में मंत्र का उल्लेख जिसका उच्चारण बलि देते समय चित्रगुप्त के आवहान हेतु किया जाता है -

‘मैं श्री चित्रगुप्त का आव्हान करता हू जो सरस्वती नदी के उत्तर-पशिचम (यहां अल्तार्इ पर्वत से संकेत है जहा यम की राजधानी थी) में रहने वाले लोगों की वेशभूषा धारण करते हैं, जो देखने में सुन्दर, कागज कलम धारी दो हाथों वाले हैं, जिनकी विरोधी देवी केतु है।’

“प्राचीन काल में क्षत्रिय जाति में कायस्थ इस जगत में हुये उनके पूर्वज चित्रगुप्त स्वर्ग में निवास करते हैं तथा उनके पुत्र चित्र इस भूमण्डल में स्थित है उसका पुत्र चैत्रस्थ अत्यन्त यशस्वी और कुलदीपक है जो ऋषि-वंश के महान ऋषि गौतम का शिष्य है वह अत्यन्त महाज्ञानी परम प्रतापी चित्रकूट का राजा है।”

आदि शंकराचार्य के भाष्य में “चित्ररथ” सम्बन्धी श्लोक की व्याख्या संस्कृत भाषा में इस प्रकार की है।

“कपि गोत्र में उत्पन्न महर्षिगण कापेय कहलाते हैं- इन कापेय महर्षि ने दो रात्रियों के विधान का चित्ररथ नामक राजा को यज्ञ कराया जिससे चित्रवंश में उत्पन्न प्रथम पुत्र अत्यन्त शौर्यवान क्षत्रपति राजा हुआ और अन्य उसके अनुचर कहलाये। राजा चित्ररथ द्वारा अनुष्ठान किय जाने के कारण से ही द्विरात्री यज्ञ का कार्य चैत्ररथ अभिप्राय से विख्यात हुआ।”

अर्थवेद 06-106-32-33-35 में भी ‘चित्र’ को जीवनदाता महान देव समान तेजस्वी विजयी मित्र वरुण सूर्य और आत्मा आदि विशषज्ञों से वर्णित किया गया है।

ऋग्वेद मंडल 8 अनुवाक 3 सूत्र 21 के मंत्र में राजा चित्र के दान की प्रशंसा सायणाचार्य के द्वारा निम्न प्रकार की गर्इ है-

“चित्र नामक राजा ने सरस्वती नदी के तट पर इन्द्र के लिये यज्ञ किया उस यज्ञ में अत्यधिक धन और दान मिलने पर मंत्रदृष्टा ऋषि विकल्प करता है कि क्या इतना धन इन्द्र ने दिया या सरस्वती ने अथवा हे राजन! चित्र आपने हमें इतना धन और द्रव्य प्रदान किया है। अन्य मंत्र में ऋषि निशिचत करते हैं कि यह अनन्त धन राशि सहस्त्र की संख्या में राजाओं के राजा ‘चित्र ने हमें प्रदान किया है क्योंकि सरस्वती तट पर सिथत अन्य जो छोटे छोटे राजा है उन सभी को भी तो राजा चित्र ने ही धन धान्य से परिपूर्ण किया। उसकी तुलना मंत्र में इस प्रकार की गर्इ है कि जिस प्रका मेघ की वर्षा से पृथ्वी सिंचित होकर सभी प्राणियों के लिए जीवनदायी होती है, उसी प्रकार राजा चित्र का धन भी सभी प्राणियों के लिए जीवन दायक होता है।”

पù पुराण, सुषिट खण्ड:
”सृषिट के आदि में भले-बुरे कामों का निर्णय करने के लिए ब्रह्राा ने क्षण भर घ्यान किया। उनकी सर्व काया में से एक दिव्य पुरुष उत्पन्न हुआ। उनका नाम चित्रगुप्त हुआ। वह धर्मराज के पास भले बुरे कामों के लिखने पर नियुक्त हुआ और बड़ा ज्ञानी, देवताओं का अग्रगण्य और यज्ञ में भोजन पाने वाला हुआ। इस कारण द्विज उसे भोजन की आहुति देते हैं। ब्रह्राा की काया से उसकी उत्पत्ति हुर्इ उससे जाति कायस्थ कहलार्इ उसकी सन्तान में अनेक गोत्र के कायस्थ पृथ्वी पर हैं।

#भविष्य_पुराण:

श्री ब्रह्राा जी बोले की ”तुम हमारी काया से उत्पन्न हुए इसलिए तुम्हारा नाम ‘कायस्थ हुआ। पृथ्वी पर चित्रगुप्त के नाम से प्रसिद्ध हो। भले बुरे की पहचान के लिए, हे पुत्र, तुम हमारी आज्ञा से सदा धर्मराज के पुर में सिथत रहो। क्षत्रिय वर्ण के लिए जो उचित है, उसे पालन करते हुए पृथ्वी पर सन्तान उत्पन्न करो।

#गरुण_पुराण

श्री कृष्ण जी बोले कि ”हे गरुड़, सुनो, मैं कहता हूं। धर्मराज का नगर अति सुन्दर है। वहां नारद आदि जा सकते हैं और वह बड़े पुण्य से मिलता है। यमकोण और नैऋत्य कोण के बीच में जो वैवस्वत का नगर है, उसी में चित्रगुप्त का एक सुन्दर घर बना हुआ है, और पचीस योजन उसका विस्तार है। वह घर बहुत ही सुन्दर है। उसकी दीवारें लोहे की हैं और उनमें सौ द्वार हैं ध्वज पताका लगी हुर्इ है। और वहां कायस्थ पाप-पुण्य देखते है।
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💐🎂    💐🎂हमारी बड़ी दीदी, #राष्ट्रीय_महिला_अध्यक्षा अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच   #श्रीमती_विजयलक्ष्मी_श्रीवास्तव जी ( क...
04/05/2026

💐🎂 💐🎂
हमारी बड़ी दीदी, #राष्ट्रीय_महिला_अध्यक्षा अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच #श्रीमती_विजयलक्ष्मी_श्रीवास्तव जी ( कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर-वाणिज्यकर विभाग ) को #जन्मदिवस के शुभावसर पर हमारे व पूरे #अखिल_भारतीय_कायस्थ_जागृति_मंच परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई। 💐💐🎂🎂
श्री चित्रगुप्त भगवान की असीम कृपादृष्टि आप पर सदा बनी रहे।
आपका:-
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  अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच  इस प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर हम उन सभी मीडिया कर्मियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं जो लग...
03/05/2026


अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच इस प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर हम उन सभी मीडिया कर्मियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं जो लगातार इस वैश्विक महामारी में भी दुनिया भर की घटनाओं एवं समाचारों से हमें अवगत कराते रहते हैं। मीडिया लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है और पत्रकारिता का एक गौरवशाली इतिहास रहा है।

अखिल भारतीय कायस्थ जागृति मंच
पंजीकरण संख्या:- S/RS/SW-NG/168/2020

 #चित्रगुप्त_जी_की_वास्तविकता1. हम जिस इच्छा से, जिस भावना से जो काम करते हैं- उस इच्छा या भावना से ही हमारे पाप-पुण्य क...
30/04/2026

#चित्रगुप्त_जी_की_वास्तविकता

1. हम जिस इच्छा से, जिस भावना से जो काम करते हैं- उस इच्छा या भावना से ही हमारे पाप-पुण्य का नाप होता है। जीव जितना ही ईश्वरीय नियमों पर चलता है अथवा उन्हें तोड़ता है, उतनी ही तोल के अनुसार उसे अच्छा या बुरा कर्मफल मिलता है। इसलिए ईश्वर में और उसके न्याय में विश्वास रखना मनुष्य और समाज के लिए परम कल्याणकारी है।

2. गरूड़ पुराण में वर्णित अलंकारिक विवरण 'यमलोक में चित्रगुप्त नामक देवता' प्रत्येक प्राणी के भले-बुरे कर्मों का विवरण प्रत्येक समय लिखते रहते हैं। मृत्यु के बाद प्राणी को इसी के आधार पर शुभ कर्मों के लिए स्वर्ग और दुष्कर्मों के लिए नर्क प्रदान किया जाता है।

3. उक्त वर्णन वास्तविक स्थिति का एक सांकेतिक सारांश मात्र है। जिसे जन - सामान्य सरलता से समझ कर तदनुसार दुष्कर्मों से दूर रहने का प्रयास कर सकें।

4. अब यह सर्वविदित वैज्ञानिक तथ्य है कि जो भी भले-बुरे कार्य ज्ञान वान प्राणियों द्वारा किए जाते हैं- उनका सूक्ष्म चित्रण अन्तःचेतना में होता रहता है। भले-बुरे कर्मों का "ग्रे मैटर" के परमाणुओं पर यह चित्रण पौराणिक चित्रगुप्त की वास्तविकता को सिद्ध कर देता है।

5. गुप्त चित्र, गुप्त मन, अन्तःचेतना, सूक्ष्म मन आदि शब्दों के भावार्थ को ही चित्रगुप्त शब्द प्रकट करता हुआ जान पड़ता है।

6. यह चित्रगुप्त निःसन्देह हर प्राणी के हर कार्य को हर समय विना विश्राम किए अपनी बही में लिखता रहता है। सबका अलग-अलग चित्रगुप्त होता है। जितने प्राणी हैं- उतने ही चित्रगुप्त हैं।

7. स्थूल शरीर के कार्यों की सुव्यवस्थित जानकारी सूक्ष्म चेतना में अंकित होती रहे तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

8. जैसे बगीचे की वायु, गन्दे नाले की वायु आदि स्थान भेद के कारण अनेक नाम वाली होते हुए भी मूलतः विश्व व्यापक वायु तत्व एक ही है- वैसे ही अलग-अलग शरीरों में रहकर भी अलग-अलग काम करने वाला चित्रगुप्त देवता भी एक ही तत्व है।

9. हमारे पाप-पुण्य का निर्णय काम के बाहरी रूप से नहीं वरन् कर्ता की इच्छा और भावना के अनुरूप होता है। हम जिस इच्छा से, जिस भावना से जो काम करते हैं- उस इच्छा या भावना से ही हमारे पाप-पुण्य का नाप होता है।

10. यह इच्छा जितनी तीव्र होगी उतना ही पाप-पुण्य भी अधिक एवं बलवान होगा। हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग कानून व्यवस्था होती है।

11. अशिक्षित, अज्ञानी, असभ्य व्यक्तियों को कम पाप लगता है। ज्ञान वृद्धि के साथ-साथ भला-बुरा समझने की योग्यता बढ़ती जाती है, विवेक प्रबल हो जाता है। ज्ञान वान, विचार वान और भावना शील ह्रदय वाले व्यक्ति जब दुष्कर्म करते हैं - तो उनका चित्रगुप्त उस करतूत को 'बहुत भारी पाप' की श्रेणी में दर्ज कर देता है।

्री_चित्रगुप्त

हार्दिक बधाई तनय, आपकी इस उपलब्धि पर हम सभी चित्रांश बंधु गौरवान्वित है ।
16/04/2026

हार्दिक बधाई तनय, आपकी इस उपलब्धि पर हम सभी चित्रांश बंधु गौरवान्वित है ।

💥 ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः 💥🏘घर घर श्री चित्रगुप्त-हर घर श्री चित्रगुप्त🏘      🚩🚩जय जय श्री चित्रगुप्त🚩🚩🕉🕉  #शुभ_श्री_चित...
16/04/2026

💥 ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः 💥
🏘घर घर श्री चित्रगुप्त-हर घर श्री चित्रगुप्त🏘
🚩🚩जय जय श्री चित्रगुप्त🚩🚩
🕉🕉 #शुभ_श्री_चित्रगुप्तवार 🕉🕉

#ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न हुये भगवान #श्री_चित्रगुप्त जी आदिदेव है। श्री चित्रगुप्त भगवान की पूजा, अर्चना व आरती प्रतिदिन करने से सुख, शांति, वैभव की प्राप्ति होती है।
श्री चित्रगुप्त पूजन दिवस #चित्रगुप्तवार ( व्हस्पतिवार ) को श्री चित्रगुप्त भगवान की पूजा-अर्चना, व्रत आदि सहित सामूहिक पूजन करने से सभी मनोकामना पूरी होती है, घर-परिवार मे सभी दुखों से मुक्ति मिल परम सुख, शन्ति, समृद्धि आती है। बुद्धि, विवेक, पराक्रम के साथ साथ रोजगार एवं व्यवसाय मे वृद्धि के लिये लगातार ग्यारह (11) चित्रगुप्तवार ( व्हस्पतिवार ) अपने घर या कार्यस्थल पर श्री चित्रगुप्त पूजन, विधि विधान पूर्वक करना चाहिये।
्री_चित्रगुप्त_हर_घर_श्री_चित्रगुप्त_एक_धार्मिक_अभियान_______
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 #कायस्थ_पतन_से_होंगे_मुक्त्त, िलकर_बोलेंगे_जय_श्री_चित्रगुप्त ्री_चित्रगुप्त_हर_घर_श्री_चित्रगुप्त ्री_चित्रगुप्त #अखिल...
09/04/2026

#कायस्थ_पतन_से_होंगे_मुक्त्त,
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