06/11/2024
छठ पूजा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव और उनकी पत्नी उषा को समर्पित होता है, जिसमें उनकी आराधना और आभार व्यक्त करने के लिए चार दिनों का कठिन उपवास और पूजा-पाठ किया जाता है।
छठ पूजा की मुख्य विशेषताएं:
1. पहला दिन (नहाय-खाय): इस दिन व्रती (व्रत रखने वाले) गंगा या किसी पवित्र नदी या जल स्रोत में स्नान करके शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। घर की सफाई की जाती है और सादा शुद्ध भोजन (सात्विक आहार) खाया जाता है।
2. दूसरा दिन (लोहंडा और खरना): इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल ग्रहण करते हैं। इसे “खरना” कहते हैं।
3. तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य): इस दिन सूर्यास्त के समय व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह पूजा नदी, तालाब, या अन्य जल स्रोत के किनारे की जाती है। परिवार के लोग और अन्य भक्तजन भी इस पूजा में सम्मिलित होते हैं।
4. चौथा दिन (उषा अर्घ्य): इस दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस पूजा के बाद ही व्रती अपने उपवास को समाप्त करते हैं और प्रसाद का वितरण किया जाता है।
छठ पूजा में विशेषकर ठेकुआ, खजूर, और अन्य शुद्ध भोजन का प्रसाद बनता है, जिसे मिट्टी के बर्तन या बाँस की टोकरी में सजाया जाता है। छठ पर्व की मान्यता है कि सूर्य देव और छठी मैया की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि, संतान और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
इस पर्व में भक्त कठिन नियमों का पालन करते हैं, जैसे बिना बिस्तर पर सोना, जमीन पर सोना, और दिन-रात का उपवास रखना।