Raju Bhai Official

Raju Bhai Official “इतिहास से सीख, दर्शन से समझ और धर्म से मूल्य – समाज और राजनीति को समझने की एक कोशिश।”

26/06/2026

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भारत का मीडिया स्वतंत्र होता, तो ये सवाल ज़रूर पूछता।
21/05/2026

भारत का मीडिया स्वतंत्र होता, तो ये सवाल ज़रूर पूछता।

अर्श से फर्श तक आपने सुना होगा, लेकिन ये कहानी है फ़र्श से अर्श तक की.. एक ऐसी काबिल महिला जिसके अंदर इतनी सारी काबिलियत...
19/04/2026

अर्श से फर्श तक आपने सुना होगा, लेकिन ये कहानी है फ़र्श से अर्श तक की.. एक ऐसी काबिल महिला जिसके अंदर इतनी सारी काबिलियत थी मगर परिवार ने इस महिला के साथ कम से कम इंसानी और मानवीय व्यवहार तक करना उचित नहीं समझा.

ये कहानी है एक ऐसी महिला का जो दर्द,तकलीफ़ और इम्तिहानों की क़ैद से बाहर निकल कर IAS तक का सफ़र तय किया, ये कहानी है उस महिला का जिसने मौत को गले लगाने का फैसला ले लिया था, लेकिन अगले ही पल इसे इस बात का समझ आया कि मौत किसी समस्या का समाधान नहीं है, आत्महत्या करने से, जिंदगी खत्म करने से चुनौतियां खत्म नहीं होती हैं बल्कि जुर्म और शोषण करने वाले लोगों के हौसले बुलंद होते हैं और यह प्रवृति एक ऐसी व्यवस्था को, एक ऐसी सामाजिक मान्यता को जन्म देती है जो आने वाले समय में किसी और को अपना शिकार बनाती है।

महज 16 साल की उम्र में इस महिला की शादी हो गई। उनकी शादीशुदा जिंदगी तब बहुत कलीफदेह हो गई जब पति ने इस महिला का साथ देने के बजाय, इस महिला के साथ खड़े होने के बजाय सबके सामने मारना पीटना धमकाना और बेइज्जती करना शुरू कर दिया।

जिस महिला को ससुराल से प्यार मिलना चाहिए था उसे ठीक से खाना मिलना भी मुश्किल हो गया।

जिसे दुनियां बहु समझ रही थी वह उस घर की एक नौकरानी से भी बदतर जिंदगी जीने लगी, घर की साफ सफाई करने के बाद खाना बनाने के लिए कहा जाना कोई ऐसी बुराई नहीं थी लेकिन घर का सारा काम सिर्फ वही करे और एक रोटी खाने के लिए इस तरह की पाबंदी जो उसे अंडरगार्मेंट में रोटी छुपा कर बाथरूम में ले जाकर खाना पड़े, यह वाकया उनके साथ जुर्म और शोषण की एक अलग ही लेवल की कहानी पेश करते हैं।

इस दौर से गुजरते हुए उस महिला को इस बात का अहसास नहीं हो रहा था कि आखिर उनके साथ हो क्या रहा है।

समय के साथ शोषण बढ़ता गया, उन्हें छोटी छोटी बातों पर पीटा जाता था। दिन रात शारीरिक हिंसा का शिकार बनाया जाता था, जब एक दिन उनके पिता उनसे मिलने आए, तो उन्होंने घर ले जाने और इस नर्क से बाहर निकालने की विनती की। पिता ने वापस आने और उसे घर ले जाने का वादा किया लेकिन वे वापस नहीं आए। उस दिन, इस महिला को समझ आया कि इस नरक से बाहर निकालने के लिए, इसे बचाने के लिए कोई भी नहीं आएगा, उसे इस संघर्ष को खुद ही लड़ना होगा।

वह महिला फांसी लगाने ही वाली थी... इस समय तक वह दो बच्चों की मां बन चुकी थीं, फिर भी उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ था।

वे बताती हैं 'मेरा माथा फटा हुआ है, हाथ पर कट के निशान हैं, पीठ जली हुई है। रोज रोज के अत्याचार अब सहन करना मुश्किल हो गया था। पता था कि खुद की जान लेना गलत है लेकिन इसके अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आ रहा था। एक दिन उन्होंने अपनी जान देने का फैसला किया।

उन्होंने बताया, मैंने अपने बेटे को सुला दिया। दूसरे बेटे को फीड कराया। माथा चूमा जैसे कि आखिरी बार सुला रही हूं। एक स्टूल खींचा और पंखें पर साड़ी लटका दी। मैं फांसी लगाने ही वाली थी कि खिड़की से मेरी सास का चेहरा दिखाई दिया। उन्होंने मुझे देखा, लेकिन उन्होंने रोका नहीं, उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। वे वहां से ऐसे चली गईं जैसे उन्होंने कुछ देखा ही नहीं या उनके लिए इस महिला की आत्महत्या कोई मायने नहीं रखता।

यही पल उनके लिए एक निर्णायक पल था। उन्होंने कहा, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं ऐसे लोगों के लिए अपनी जान नहीं दे सकती। हिम्मत जुटाकर वे ससुराल से भाग निकलीं।

ससुराल से भागने के बाद इस महिला ने अपनी चचेरी बहन की भाभी के घर में रहने लगी थीं। पार्लर में काम किया, ट्यूशन पढ़ाया और संघर्ष करते करते आगे की पढ़ाई की। लेकिन अभी सब खत्म नहीं हुआ था। अलग होने के बाद भी पति कभी कभी आता था और मारपीट करता था।

उन्होंने बताया, वह बच्चों के सामने मुझे पीटता था। एक दिन एक बाल्टी में पेशाब किया और मुझ पर फेंक दिया। उस समय मैं एग्जाम देने जा रही थी। मैं फिर से नहाई, कपड़े बदले और अपना पेपर देने चली गई। मेरा दिल वाकई में कठोर हो गया था।

उस महिला का लक्ष्य अच्छी सरकारी नौकरी पाने का था। उन्होंने अकेले बच्चों की परवरिश करते हुए सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी की और बहुत जल्द उनकी मेहनत रंग लाई। कई सालों के संघर्ष और परेशानियों से जूझते हुए इस महिला ने अपने पहले ही प्रयास में मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। वे एक सरकारी अधिकारी बन गईं। एक आदिवासी छात्रा के तौर पर उनकी इस उपलब्धि के लिए, सरकार ने उन्हें 75,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी दी।

इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 का फॉर्म भरा। पहले ही अटेंप्ट में प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू कर लिया था। आज, वह महिला एक IAS अधिकारी हैं। वे अपने पद का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए करती हैं, खासकर गरीब समुदायों की महिलाओं और लड़कियों की। वे उनके शिक्षा के अधिकार और एक निडर जीवन के लिए संघर्ष करती हैं।

उस महिला का नाम है सविता प्रधान जो कि एक आईएएस अधिकारी हैं, मूल कहानी सोशल मीडिया से लिया है।
Sharma Amarendra

Sachin Tendulkar was visibly emotional as he paid his final respects to Asha Bhosle, visiting her residence in Mumbai wi...
14/04/2026

Sachin Tendulkar was visibly emotional as he paid his final respects to Asha Bhosle, visiting her residence in Mumbai with Anjali Tendulkar. The moment reflected a deep personal connection, as he bid farewell to one of India’s most iconic voices.

Asha Bhosle had recently attended the wedding of Sachin’s son, Arjun, making the loss even more poignant. Her passing marks the end of an era, leaving behind a legacy that will continue to inspire generations.

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क्रांतिकारी विचार: डॉ. भीमराव अंबेडकर और राजीव दीक्षित की चेतावनियाँ!​आज हम आपके लिए लाए हैं एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय प...
14/04/2026

क्रांतिकारी विचार: डॉ. भीमराव अंबेडकर और राजीव दीक्षित की चेतावनियाँ!
​आज हम आपके लिए लाए हैं एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा, जो हमारे देश के इतिहास और वर्तमान दोनों को गहराई से प्रभावित करता है। यह विषय है - भारत के संविधान और हमारे भविष्य को लेकर दो महानुभावों, डॉ. भीमराव अंबेडकर और राजीव दीक्षित के विचारों का टकराव।
​डॉ. भीमराव अंबेडकर: संविधान के निर्माता और आलोचक
​डॉ. अंबेडकर ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन वे इसके आलोचक भी थे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि "यह संविधान किसी का भला नहीं कर सकता।" उनका मानना था कि यदि संविधान सही तरह से लागू नहीं किया गया, तो यह विनाशकारी साबित हो सकता है।
​राजीव दीक्षित: एक क्रांतिकारी विचारक
​राजीव दीक्षित ने डॉ. अंबेडकर के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि "अंबेडकर जी ने सही कहा था..." उन्होंने संविधान की कमजोरियों और देश के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
​बहस और विमर्श का समय
​यह समय है कि हम इन महानुभावों के विचारों पर गहराई से विचार करें और संविधान और देश के भविष्य को लेकर बहस करें। क्या डॉ. अंबेडकर और राजीव दीक्षित के विचारों में सच्चाई है? क्या हमें संविधान में बदलाव करने की आवश्यकता है?
​इस फेसबुक पोस्ट के माध्यम से, हम आपको इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं। अपने विचार और राय नीचे कमेंट में साझा करें।


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14/04/2026

"मैं मूर्तियों में नहीं, किताबों में हूँ; मुझे पूजने की नहीं, पढ़ने की ज़रूरत है"
यह कथन किसका है?

हनुमान जन्मोत्सव की आप सभी भाई-बंधुओ को हार्दिक शुभकामनाएं💐💐
02/04/2026

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17/03/2026

राम नाम का जाप-आचार्य प्रशांत

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12/03/2026

ब्रेकिंग न्यूज़ 🚨

ट्रंप के सलाहकार का बड़ा दावा ईरान को 72 घंटों में उत्तर कोरिया से मिल सकता है परमाणु हथियार 😨

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पूर्व एडवरजॉयर जॉन बॉल्टन ने कहा है कि उत्तर कोरिया 72 घंटों में ईरान को परमाणु हथियार भेज सकता है।

उन्होंने कहा कि ईरान व उत्तर कोरिया के रिश्तों को नकारा नहीं जा सकता है।
उन्होंने कहा इस समय जो चीन रूस धुरी बनती दिखाई दे रही है उसमें ईरान और उत्तर कोरिया दो सहयोगी देश हैं।

ईरान ने ट्रंप से बातचीत को किया खारिज..
12/03/2026

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