02/03/2021
इतनी बड़ी आबादी है हिन्दुओं की लेकिन फल, सब्जी, रेडीमेड कपड़े, जूते चप्पल, ड्राई फ्रूट्स आदि व्यापार में हिन्दू दिख ही नहीं रहा. फिल्म टीवी सीरियल कहीं भी देख लो, हर जगह मुसलमान अपने वर्चस्व पर हैं.
अब तो जिस तरह से ओवैसी ने बिहार के बाद गुजरात में भी उपस्थिति दर्ज करवाई है उससे 2014 के बाद ये लोग एक नयी रणनीति के तहत वापिस लौट रहे हैं और जीत रहे हैं. रणनीति यही है कि कांग्रेस, राजद, सपा, तृणमूल के नाम पर बँटना नहीं है बल्कि अब सीधे मुस्लिम नेता को ही खड़ा करके वोटिंग करना है.
दोस्तों स्थिति भयावह है. ये process मध्यम गति से चल रहा है इसलिए आते हुए खतरे को जब तक लोग भांपते हैं तब तक उस क्षेत्र में इनका कब्ज़ा हो चुका होता है.
ऐसा नहीं है कि अचानक कहीं पर बाजार में धावा बोलते हैं और हिन्दू दुकानदार को हटाकर वो बैठ जाते हैं बल्कि एक दूकान खोलते हैं, एक घर बनाते हैं, एक नेता खडा करते हैं और अगले पांच दस साल में उस क्षेत्र से हिन्दू को कम्पीटीशन से ही बाहर कर देते हैं.
उनके पास कश्मीर से मुस्लिम लॉबी के जरिये ड्राई फ्रूट्स बेहद सस्ते भाव में आते हैं. मुस्लिमों के कारखाने से सत्तर और सौ रुपये में शर्ट और टीशर्ट मिल रहे हैं. चमड़े का बेल्ट हो या पर्स हो. जूते हो चप्पल हो, सब मैन्युफैक्चरिंग से लेकर रिटेलर तक जबरदस्त चेन है.
ये लोग आपस में सिर्फ व्यपारी की तरह व्यापार नहीं करते बल्कि एक दुसरे को ऊपर उठाने हेतु भी व्यापार करते हैं. जैसे ज्यादा सस्ते में देना या ज्यादा क्रेडिट पर माल देना सब करते हैं. ज्यादा से ज्यादा सुविधा और मदद,
आज के समय जो कौम व्यपार में जितना ज्यादा कब्ज़ा करेगा वो उतना ही शक्तिशाली होगी. आज खालिस्तानियों की ताकत व्यापार से ही तो बढ़ा हुआ है. घमंड इतना कि बोलते हैं दुनिया के सारे किसान पंजाब के खेतों में ही काम कर रही है. सब करोड़ों में खेलते हैं तो लाल किले पर भी चढ़ कर मुंहजोबरी करते हैं और दर्जनों वकील लगाकर छुड़ाया जाता है. कपिल मिश्र को चंदा करना पड़ता है. जबकि दिलजीत दोसांझ ऐसे ही करोडो रुपये खालिस्तानी आन्दोलनकारियों पर फेंकता है.
दोस्तों ये व्यापारिक वर्चस्व में अब हिन्दुओं का कहीं नामोनिशान नहीं है. हिन्दुओं की सबसे बड़ी कमजोरी है कि व्यापार में एक दुसरे को देखना ही नहीं चाहते. किसी को आगे बढ़ाना तो बिलकुल ही नहीं चाहते. अगर यही हाल रहा तो मैंने पहले भी कहा था आने वाले समय में हिन्दू पंचर की दूकान पर ही बैठने वाला है