शिवरामेश्वर मंदिर

शिवरामेश्वर मंदिर शिवरामेश्वर मंदिर उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के बेलौली गांव मे है। यह मंदिर सन 1904 में अधियरा बाबा ने बनवाया था।

12/05/2026
12/05/2026

ज्येष्ठ माह के दूसरे बड़े मंगल की हार्दिक शुभकामनाएं।
Hanuman ji

05/04/2026

Mahadev 🕉️ Har

हनुमान जन्मोत्सव की मंगल शुभकामनाएं।
02/04/2026

हनुमान जन्मोत्सव की मंगल शुभकामनाएं।

01/04/2026

हनुमान जयंती की ढेर सारी शुभकामनाएं।



सानन्दमानन्दवने वसन्त-मानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।वाराणसीनाथमनाथनाथंश्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये॥ॐ नमः शिवाय
26/02/2025

सानन्दमानन्दवने वसन्त-
मानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।
वाराणसीनाथमनाथनाथं
श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये॥

ॐ नमः शिवाय

मंदिर के घंटे का महत्व :
22/07/2024

मंदिर के घंटे का महत्व :

swasth kaise raheMandir mein ghanta kyon hota haiमंदिर वाले घंटे...

आप सभी को "श्री हनुमान जन्मोत्सव" की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई....
23/04/2024

आप सभी को "श्री हनुमान जन्मोत्सव" की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई....

21/04/2024

*गणेश जी की कृपा*

काफ़ी समय पहले की बात है एक गांव में एक अंधी बुढ़िया रहती थी।

वह गणेश जी की परम भक्त थी।

आंखों से भले ही दिखाई नहीं देता था, परंतु वह सुबह शाम गणेश जी की बंदगी में मग्न रहती।

नित्य गणेश जी की प्रतिमा के आगे बैठकर उनकी स्तुति करती।

भजन गाती व समाधि में लीन रहती।

गणेश जी बुढ़िया की भक्ति से बड़े प्रसन्न हुए।

उन्होंने सोचा यह बुढ़िया नित्य हमारा स्मरण करती है, परंतु बदले में कभी कुछ नहीं मांगती।

भक्ति का फल तो उसे मिलना ही चाहिए।

ऐसा सोचकर गणेश जी एक दिन बुढ़िया के सम्मुख प्रकट हुए तथा बोले

माई, तुम हमारी सच्ची भक्त हो।

जिस श्रद्धा व विश्वास से हमारा स्मरण करती हो, हम उससे प्रसन्न हैं।

अत: तुम जो वरदान चाहो, हमसे मांग सकती हो।

बुढ़िया बोली - प्रभो ! मैं तो आपकी भक्ति प्रेम भाव से करती हूं।

मांगने का तो मैंने कभी सोचा ही नहीं।

अत: मुझे कुछ नहीं चाहिए।

गणेश जी पुन: बोले - हम वरदान देने के लिए आए हैं। .
बुढ़िया बोली - हे सर्वेश्वर, मुझे मांगना तो नहीं आता।

अगर आप कहें, तो मैं कल मांग लूंगी।

तब तक मैं अपने बेटे व बहू से भी सलाह मशविरा कर लूंगी।

गणेश जी कल आने का वादा करके वापस लौट गए।

बुढ़िया का एक पुत्र व बहू थे।

बुढ़िया ने सारी बात उन्हें बताकर सलाह मांगी।

बेटा बोला - मां, तुम गणेश जी से ढेर सारा पैसा मांग लो। हमारी ग़रीबी दूर हो जाएगी। सब सुख चैन से रहेंगे।

बुढ़िया की बहू बोली - नहीं आप एक सुंदर पोते का वरदान मांगें।

वंश को आगे बढ़ाने वाला भी, तो चाहिए।

बुढ़िया बेटे और बहू की बातें सुनकर असमंजस में पड़ गई।

उसने सोचा - यह दोनों तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं।

बुढ़िया ने पड़ोसियों से सलाह लेने का मन बनाया।

पड़ोसन भी नेक दिल थी। उसने बुढ़िया को समझाया कि तुम्हारी सारी ज़िंदगी दुखों में कटी है।

अब जो थोड़ा जीवन बचा है, वह तो सुख से व्यतीत हो जाए।

धन अथवा पोते का तुम क्या करोंगी !

अगर तुम्हारी आंखें ही नहीं हैं, तो यह संसारिक वस्तुएं तुम्हारे लिए व्यर्थ हैं।

अत: तुम अपने लिए दोनों आंखें मांग लो।

बुढ़िया घर लौट आई। बुढ़िया और भी सोच में पड़ गई।

उसने सोचा - कुछ ऐसा मांग लूं, जिससे मेरा, बहू व बेटे- सबका भला हो।

लेकिन ऐसा क्या हो सकता है ? इसी उधेड़तुन में सारा दिन व्यतीत हो गया।

बुढ़िया कभी कुछ मांगने का मन बनाती, तो कभी कुछ, परंतु कुछ भी निर्धारित न कर सकी।

दूसरे दिन गणेश जी पुन: प्रकट हुए तथा बोले - आप जो भी मांगेंगे, वह हमारी कृपा से हो जाएगा।

यह हमारा वचन है।

गणेश जी के पावन वचन सुनकर बुढ़िया बोली - हे गणराज, यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं, तो कृप्या मुझे मन इच्छित वरदान दीजिए।

मैं अपने पोते को सोने के गिलास में दूध पीते देखना चाहती हूं।

बुढ़िया की बातें सुनकर गणेश जी उसकी सादगी व सरलता पर मुस्कुरा दिए।

बोले - तुमने तो मुझे ठग ही लिया है।

मैंने तुम्हें एक वरदान मांगने के लिए बोला था, परंतु तुमने तो एक वरदान में ही सब कुछ मांग लिया।

तुमने अपने लिए लंबी उम्र तथा दोनों आंखे मांग ली हैं।

बेटे के लिए धन व बहू के लिए पोता भी मांग लिया।

पोता होगा, ढेर सारा पैसा होगा, तभी तो वह सोने के गिलास में दूध पीएगा।

पोते को देखने के लिए तुम जिंदा रहोगी, तभी तो देख पाओगी।

अब देखने के लिए दो आंखें भी देनी ही पड़ेंगी।

फिर भी वह बोले - जो तुमने मांगा, वे सब सत्य होगा।

इतना कहकर गणेश जी अंर्तध्यान हो गए।

कुछ समय पाकर गणेश जी की कृपा से बुढ़िया के घर पोता हुआ।

बेटे का कारोबार चल निकला तथा बुढ़िया की आंखों की रौशनी वापस लौट आई।

बुढ़िया अपने परिवार सहित सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगी।

हर हर महादेव 🙏

15/04/2024

*श्रीरुद्राष्टकम् (हिंदी अनुवाद) के साथ*

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहं

हे ईशान! मैं मुक्तिस्वरूप, समर्थ, सर्वव्यापक, ब्रह्म, वेदस्वरुप, निजस्व रूप में स्थित, निर्गुण, निर्विकल्प, निरीह,अनन्त ज्ञानमय और आकाश के समान प्रभु को प्रणाम करता हूँ।

निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशं
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार संसारपारं नतोहं

जिनका कोई आकार नहीं हेै, जो निराकार है, ॐकाररुप आदि कारण है, तुरीय हैं, वाणी, बुद्धि और इन्द्रियों के पथ से परे हैं, कैलासनाथ हैं, पापियों के लिये कराल और भक्तों के लिये दयालु हैं, जो महाकाल के भी काल हैं, गुणों के आगार और संसार से तारने वाले हैं, मैं भगवान के उन श्रीचरणों में साष्टांग नमस्कार करता हूँ।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुज़ंगा

जो हिमालय के समान श्वेतवर्ण, गम्भीर और करोड़ों कामदेव के समान कान्तिवान शरीर वाले हैं, जिनके मस्तक पर मनोहर श्रीगंगा जी लहरा रही हैं, भालदेश में बाल चन्द्रमा सुशोभित होते हैं और गले में सर्पों की माला शोभा देती हैं।

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं, जिनकी नेत्र एवं भृकुटी सुन्दर एवं विशाल हैं,जिनका मुख प्रसन्न और कण्ठ नील है, जो बड़े ही दयालु हैं, जो बाघ की खाल का वस्त्र और मुड़ों की माला पहनते हैं, ऐसे प्रिय शंकर जो पुरे संसार के नाथ हैं मैं उनका भजन करता हूँ।

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं
त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यं

जो प्रचण्ड, सर्वश्रेष्ठ, प्रगल्भ, परमेश्वर,पूर्ण, अजन्मा, कोटि सूर्य के समान प्रकाशमान, त्रिभुवन के शूलनाशक और हाथ में त्रिशुल धारण करने वाले हैं, उन भावगम्य भवानी पति का मैं भजन करता हूँ।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी
चिदानन्द संदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी

हे प्रभो! आप कलारहित, कल्याणकारी और कल्प का अन्त करने वाले हैं। आप सर्वदा सत्पुरुषों को आनन्द देते हैं, आपने त्रिपुरासुर का नाश किया था आप मोहनाशक और आप ही ज्ञानानन्दघन परमेश्वर भी हैं, आप कामदेव के शत्रु हैं, आप मुझ फ्ऱ प्रसन्न हों प्रसन्न हों।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणां
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं

मनुष्य जब तक उमाकान्त महादेव जी के चरणार विन्दों का भजन नहीं करते, उन्हें इहलोक या परलोक में कभी सुख और शान्ति की प्राप्ति नही होती और न उनका सन्ताप ही दूर होता है।
हे समस्त भूतों के निवास स्थान भगवान शिव आप मुझ पर प्रसन्न हों।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो

हे प्रभो! हे शम्भो! हे ईश! मैं योग, जप और पूजा कुछ भी नहीं जानता हे शम्भो! मैं सदा-सर्वदा आपको नमस्कार करता हूँ। जरा जन्म और दु:ख समूह से सन्तप्त होते हुये मुझ दु:खी की भी समस्त दु:खों से आप रक्षा कीजिये।

देवाधिदेव महादेव की कृपा से आप तथा आपका परिवार सदा सुखी, स्वस्थ, समृद्ध एवं निरोगी एवं दीर्घायु हों और आप सभी की समस्त मनोकामनाए भी शीघ्र पूर्ण हों, श्रीचरणों से नित्यप्रति यही कामना व प्रार्थना करते हैं।

श्री शिवाय नमस्तुभयं 🙏🙏🙏

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