03/10/2026
वृंदावन में जो कुछ हुआ है, उसमें प्रेमानंद जी महाराज की प्रत्यक्ष भूमिका क्या है, यह जाने बिना उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं है।
महाराज जी का ज्ञान किसी सीमित विचारधारा, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है। उनका उपदेश सार्वभौमिक (Universal) है, वे सबको उपदेश देते हैं। अब यदि कोई उनके ज्ञान को अपने स्वार्थ के अनुसार Misinterpret करके उसका दुरुपयोग कर रहा है, या उनके कुछ शिष्यों ने उनके नाम और प्रभाव को अपने व्यक्तिगत वर्चस्व और सत्ता का माध्यम बना लिया है, तो उसमें महाराज जी का क्या योगदान?
किसी व्यक्ति के विचारों और उसके अनुयायियों के आचरण में अंतर समझना आवश्यक है। गुरु की शिक्षा और अनुयायियों द्वारा उस शिक्षा का इस्तेमाल—दो अलग-अलग बातें हैं।
बाबा तो अपनी भक्ति और साधना में लीन एक भोले-भाले संत हैं। उनके नाम पर कौन क्या कर रहा है, इसकी जिम्मेदारी बिना प्रमाण सीधे उन पर डाल देना भी न्यायसंगत नहीं है।
व्यक्ति को उसके विचारों से समझिए, और अनुयायियों को उनके